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TCS के बाद अब पुणे के Wipro में इस्लामीकरण कांड, हिंदू महिला बोली- विरोध करने पर मुझे कंपनी से निकाला; ‘इस्लाम अपनाओ, मुस्लिम लड़के से संबंध बनाओ’

           पुणे की Wipro कंपनी में हिंदू महिला कर्मचारी पर जबरन धर्मांतरण का आरोप ( साभार : Bhaskar)
TCS नासिक कांड के बाद अब पुणे की दिग्गज IT कंपनी ‘विप्रो’ (Wipro) से भी ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। 
Wipro की एक पूर्व हिंदू महिला कर्मचारी ने कंपनी के ही एक सहकर्मी पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।

देश में मुस्लिम कट्टरपंथी हर क्षेत्र में घुसकर माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं। हिन्दू महिलाओं को नौकरी पर रखो और लव जिहाद की आड़ में इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाओ। क्या सरकार ऐसे कर्मचारियों, अधिकारियों और कंपनी के विरुद्ध सख्त कार्रवाही करेगी? क्या हिन्दू महिलाओं को अपने जाल में फंसा इस्लाम कबूल करवाकर फिदायीन बनाने का घिनौना खेल चल रहा है? पकडे जाने पर बदनाम होंगे हिन्दू।    

इस मामले में पुणे के हिंजवड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही हिंदू पीड़ित के वकील ने Wipro कंपनी को एक लीगल नोटिस भी भेजा है। हिंदू जनजागृति समिति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंदू पीड़िता ने अपनी आपबीती बताई।

पीड़िता का आरोप है कि उसका एक साथी कर्मचारी उसे बार-बार इस्लाम अपनाने और एक मुस्लिम युवक से संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था। विरोध करने पर कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने महिला की मदद करने के बजाय उल्टा उसी पर दबाव बनाया।

पीड़िता का आरोप है कि अगस्त 2025 में एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान उससे जबरन इस्तीफा ले लिया गया। पीड़िता के वकील विवेक भोसले ने बताया कि Wipro कंपनी को नोटिस भेजकर महिला को वापस नौकरी पर रखने और मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 लाख रुपए का मुआवजा देने की माँग की गई है।

नोटिस में कहा गया है कि अगर 15 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कोर्ट जाएँगे। फिलहाल Wipro कंपनी की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सच उगलने तक कस्टडी में रखो’: TCS नासिक कांड में निदा खान को नहीं मिली बेल, प्रेग्नेंसी के नाम पर माँग रही थी राहत

                                      निदा खान की जमानत याचिका खारिज (साभार : Dall-E)
नासिक की एक अदालत ने 2 मई को TCS धर्मांतरण मामले की आरोपित निदा एजाज खान को अग्रिम 
जमानत देने से मना कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि अब तक की जाँच से साफ है कि निदा एक सोची-समझी साजिश में शामिल थी, जिसका मकसद पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसका धर्म बदलवाना था।

जज केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए निदा को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करना बहुत जरूरी है। निदा के खिलाफ देवलाली पुलिस स्टेशन में अलग-अलग धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट में निदा खान की सफाई: क्या थीं बचाव पक्ष की दलीलें?

निदा खान के वकील ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि निदा और पीड़िता बस साथ में काम करने वाले सहकर्मी थे और एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने निदा पर लगे सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर फँसाया गया है, जबकि मुख्य आरोप तो दानिश और तौसीफ पर हैं। वकील का यह भी कहना था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि निदा ने सबके सामने जाति को लेकर पीड़िता का अपमान किया हो।

आगे दलील दी गई कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने को लेकर कोई अलग कानून नहीं है और जिस धारा (BNS 299) का जिक्र हो रहा है, वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए है, न कि धर्म परिवर्तन के लिए। वकील के मुताबिक, धर्म पर सामान्य चर्चा करना कोई अपराध नहीं है और इसमें केवल जमानत मिलने वाली धाराएँ ही लगनी चाहिए। साथ ही, निदा के गर्भवती होने का हवाला देते हुए कहा गया कि इस हालत में गिरफ्तारी उनके होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

अभियोजन पक्ष का कड़ा रुख: ‘निदा खान सिर्फ मूकदर्शक नहीं, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता’

अभियोजन पक्ष ने निदा खान की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई 2023 से 2026 के बीच निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। सरकारी वकील ने दलील दी कि निदा ने न केवल पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई, बल्कि FIR में भी उसके नाम और भूमिका का स्पष्ट जिक्र है। जाँच से यह संकेत मिले हैं कि सभी आरोपितों ने आपस में संपर्क कर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है।

कोर्ट को सूचित किया गया कि निदा खान इस मामले में कोई मामूली भूमिका में नहीं थी। वह ऑफिस में ब्रेक के दौरान पीड़िता से बात करती थी और इस्लाम कबूलने के लिए उसका ब्रेनवॉश करती थी। आरोप है कि उसने पीड़िता को खास मजहबी प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर करने में अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में पीड़िता, उसकी माँ और भाई के बयानों को आधार बनाया।

जाँच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि निदा खान ने ही पीड़िता को बुर्का और इस्लाम से जुड़ी किताबें मुहैया कराई थीं। पीड़िता के फोन में एक ऐसा ऐप भी मिला, जिसे धर्मांतरण के इरादे से इंस्टॉल करवाया गया था। इसके अलावा, निदा उसे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के ऐसे लिंक भेजती थी जिनमें मजहबी उपदेश होते थे। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों के सोर्स (Source) और निदा के बाहरी संपर्कों की गहराई से जाँच करना जरूरी है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि निदा खान पीड़िता के घर भी जाती थी। वहाँ उसने पीड़िता को नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग दी और उसे हिजाब व बुर्का पहनने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने की योजना थी। यही नहीं, उसे मलेशिया भेजने की भी तैयारी थी और इसके लिए ‘मालेगाँव पार्टी’ की मदद से दस्तावेज बनवाए जाने थे। इन तमाम विदेशी कड़ियों और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कोर्ट से आरोपित की कस्टडी (हिरासत) की माँग की गई।

पीड़िता के वकील का दावा: पद का फायदा उठाकर बनाया धर्मांतरण का दबाव

सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील ने विस्तार से बताया कि कैसे निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता का ब्रेनवॉश किया। वकील ने आरोप लगाया कि निदा और बाकी आरोपितों ने कंपनी में अपने ऊँचे पदों का गलत इस्तेमाल किया ताकि पीड़िता पर दबाव बनाया जा सके। उन्हें न केवल इस्लाम का पालन करने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें मांसाहारी (Non-veg) खाना खाने के लिए भी विवश किया गया। इसके अलावा, कोर्ट को बताया गया कि आरोपित हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियाँ करते थे और ऑफिस में पीड़िता को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया जाता था।

पीड़िता के पक्ष ने एक और गंभीर बात कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने कहा कि निदा खान सिर्फ पीड़िता तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने उसके परिवार को भी धर्मांतरण के लिए मजबूर करने की कोशिश की। इसके लिए बाकायदा धमकी भरे और डराने वाले तरीके अपनाए गए ताकि पूरे परिवार पर दबाव बनाया जा सके। इन दलीलों के जरिए कोर्ट को यह समझाने की कोशिश की गई कि यह मामला केवल आपसी बातचीत का नहीं, बल्कि एक गहरी और डरावनी साजिश का हिस्सा है।

कोर्ट का फैसला: ‘पहली नजर में आरोपित की भूमिका साफ दिखती है’

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने सह-आरोपितों और निदा खान की भूमिकाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। जज ने गौर किया कि जहाँ अन्य दो आरोपित पहली नजर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 75 के तहत अपराधों में शामिल थे, वहीं निदा खान की भूमिका धारा 299 और SC/ST एक्ट के प्रावधानों के तहत दिखाई दे रही है।

जज ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि FIR में न केवल निदा खान का नाम शामिल है, बल्कि उसकी भूमिका का भी साफ जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि आरोपितों ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ‘आपत्तिजनक कहानियाँ’ सुनाईं और पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज किया गया है कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का दिया था। इसके अलावा, आरोपितों ने उसे पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित एक किताब दी और निदा खान खुद पीड़िता के घर जाकर उसे मजहबी ट्रेनिंग देती थी।

कोर्ट की टिप्पणी: ‘यह कोई साधारण बातचीत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश’

कोर्ट ने अपनी बातों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़िता और निदा खान के बीच धर्म पर हुई बातचीत कोई इत्तेफाक या साधारण चर्चा नहीं थी। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत साफ दिखाते हैं कि पीड़िता को फँसाने के लिए बहुत ही सलीके से और योजना बनाकर काम किया गया था। जज ने इस बात को गंभीरता से रखा कि यह अपराध कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरी परतें और एक बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है।

अदालत ने उन सबूतों पर भी कड़ी चिंता जताई, जिनसे पता चला कि आरोपित पीड़िता का नाम बदलना चाहते थे और उसे मलेशिया भेजने की तैयारी में थे। जज ने साफ कहा कि हमारा संविधान हर किसी को अपनी पसंद का धर्म और नाम चुनने की आजादी देता है, लेकिन किसी का ब्रेनवॉश करके या साजिश रचकर उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। कोर्ट ने माना कि व्यक्ति के अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन किसी को धोखे का शिकार बनाकर उसका धर्म बदलवाना कानूनी रूप से अपराध है।

कोर्ट का फैसला: ‘सच उगलवाने के लिए पुलिस कस्टडी है जरूरी’

कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपित को पुलिस की गिरफ्त में रखना जरूरी है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला काफी पेचीदा है, क्योंकि जाँच में ‘मालेगाँव पार्टी’ के साथ-साथ कई अन्य शहरों और विदेशों के नाम भी जुड़े मिले हैं। खासकर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ जैसे लोगों और इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद आवश्यक है, ताकि इस पूरी साजिश की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।

अवलोकन करें:-

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट
TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट
 

प्रेग्नेंसी की दलील भी नहीं आई काम, कोर्ट ने ठुकराई राहत

निदा खान के वकील ने दलील दी कि वह गर्भवती है और गिरफ्तारी का उसके होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में सिर्फ प्रेग्नेंसी के आधार पर कानून में कोई अलग छूट नहीं मिलती। कोर्त ने इस बात को सही माना और कहा कि अग्रिम जमानत जैसी बड़ी राहत केवल बहुत ही खास और मजबूरी वाले हालात में दी जाती है, जो इस केस में कहीं नहीं दिखते। इन्हीं वजहों से जज ने निदा खान की याचिका में कोई दम न पाते हुए उसकी जमानत की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया।

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

हिन्दुओं victim card खेलने वालों के खिलाफ एकजुट हों ; ये प्रेग्नेंट है से लेकर उसकी बीवी तो सुंदर है तक… नासिक TCS कांड में जिहादी गैंग के कुकर्मों को धो-पोंछने के लिए क्या तर्क दे रही ‘जमात’, अम्मी-बहन-मौलाना सबको किया एक्टिव

             नासिक TCS कांड में मुस्लिम गैंग को बचाने के लिए नई 'जमात' एक्टिव (साभार : ChatGPT)
हिन्दुओं और समस्त हिन्दू संगठनों को भी कट्टरपंथियों की तरह एकजुट होकर work jehadi के विरुद्ध सिर्फ खड़ा होना होगा बल्कि जनता को जिहाद का समर्थन कर रही पार्टियों का धूल चटवाने के लिए खड़ा करना होगा। जब तक जेहादियों को कालनेमि हिन्दुओं द्वारा समर्थन दिया जाता रहेगा हिन्दू अपमानित होता रहेगा। दंगा होता है तो बाहरी आकर करते हैं लेकिन पुलिस के हत्ते चढ़ते स्थानीय। जनता, हिन्दू स्वयंसेवी संगठन और अदालतों को ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। इनके victim card को कूड़ेदान में फेंक सख्ती से पेश आना होगा।   

नासिक TCS कांड को लेकर पिछले दिनों पूरे देश में हल्ला मचा, लेकिन वामपंथियों की कान में जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने पहले इस मामले में लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी और फिर जब बोले तो सीधा मुस्लिम आरोपितों के बचाव पर उतर आए। अब स्थिति ये है कि इस मामले को दबाने के लिए एक नई जमात को एक्टिव किया गया है जो इस खबर में नए-नए एंगल लाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। कैसे आइए बताते हैं?

अभी तक मीडिया में आप हिंदू पीड़ितों के साथ हुए अत्याचार की खबरों को पढ़ रहे थे। मगर अब इस केस को ऐसा बनाया जा रहा है कि आपके मन में या तो मुस्लिमों आरोपितों की पीड़ित वाली छवि बने या फिर आपको ये लगे कि कहीं हिंदू ही इस मामले को बेवजगह तूल देकर किसी बेचारे को फँसा तो नहीं रहे है।

प्रेग्नेंसी और संवेदना का पुराना खेल: निदा खान और सफूरा जरगर का ‘विक्टिम’ कनेक्शन

नासिक कांड में कथित तौर पर निदा खान को HR हेड कहा जा रहा है, जिसकी भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि निदा खान न केवल इस पूरे गिरोह की जानकारी रखती थी, बल्कि जब पीड़ित हिंदू महिलाओं ने उसके पास शिकायतें भेजीं, तो उसने कोई एक्शन लेने के बजाय उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि ‘ऑफिसों में यह सब चलता है।’ अब जब पुलिस का शिकंजा कसा, तो निदा खान फरार हो गई और अचानक कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए ‘प्रेग्नेंसी’ का तर्क सामने रख दिया। सोशल मीडिया पर एक विशेष जमात ने तुरंत यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि एक ‘गर्भवती महिला’ को पुलिस और मीडिया परेशान कर रहा है।

यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जैसा 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय देखा गया था। उस वक्त मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल सफूरा जरगर ने भी जेल से बचने के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था। तब भी लिबरल गिरोह ने छाती पीटते हुए सफूरा को ‘बेचारी छात्रा’ और ‘स्कॉलर’ बताया था, जबकि उस पर UAPA जैसी गंभीर धाराओं के तहत सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप था। निदा खान हो या सफूरा, ये लोग जानते हैं कि भारतीय समाज में प्रेग्नेंसी एक संवेदनशील विषय है, इसलिए वे अपने अपराधों की गंभीरता को कम करने के लिए इसे ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।

‘मेरी बहू सुंदर है तो बेटा क्यों भटकेगा?’: आरोपित की अम्मी का इमोशनल ड्रामा

नासिक TCS कांड के मुख्य आरोपित दानिश शेख की गिरफ्तारी के बाद उसकी अम्मी का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए अपने बेटे को ‘बेगुनाह’ साबित करने पर तूली है। आरोपित की अम्मी ने तर्क दिया कि उनका बेटा बहुत अच्छा इंसान है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सबसे अजीबोगरीब दलील जो उन्होंने दी, वो यह थी कि ‘मेरी बहू इतनी सुंदर है, मेरा बेटा किसी और के पीछे क्यों जाएगा?’ यह तर्क देकर उन्होंने उन सभी महिलाओं के आरोपों को सिरे से खारिज करने की कोशिश की जिन्होंने दानिश पर गंभीर यौन शोषण और रेप के आरोप लगाए हैं।

आरोपित दानिश की अम्मी का कहना है कि उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनकी बहू डिप्रेशन में है। वह धर्मांतरण के आरोपों पर कहती हैं कि ‘धर्मांतरण ऐसे नहीं होता, ये काम तो सिर्फ मौलवी करते हैं।’ लेकिन पुलिस की जाँच और दर्ज की गई 9 FIR कुछ और ही कहानी बयाँ करती हैं। जाँच में सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क था जहाँ हिंदू लड़कियों पर मानसिक दबाव बनाया गया, उन्हें बीफ खाने को मजबूर किया गया और धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं। अम्मी के आँसू अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन वे उन पीड़ित लड़कियों के आँसुओं का जवाब नहीं हैं जिनका शोषण ऑफिस की आड़ में किया गया।

मौलाना और ‘स्क्रिप्टेड’ साजिश: जब कुछ न मिले तो बजरंग दल को कोस दो

इस मामले में एक और एंगल आरोपितों के रिश्तेदारों और मौलानाओं की तरफ से सामने आया। आरोपित रजा मेमन के चाचा रजाक काजी का दावा है कि यह सब कुछ एक ‘साजिश’ है और इसमें बजरंग दल शामिल है। उनका कहना है कि लड़कियों के परिवारों ने बजरंग दल को बुलाया और उनके दबाव में आकर पुलिस ने यह पूरा ‘स्क्रिप्ट’ तैयार किया।

यह एक जाना-पहचाना पैंतरा है, जब भी कोई मुस्लिम आरोपित पकड़ा जाता है, तो उसे ‘मुस्लिम होने की सजा’ या ‘दक्षिणपंथी संगठनों की साजिश’ करार देकर असल अपराध से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है। काजी का कहना है कि पुलिस ने पहले एक व्यक्ति को छोड़ा और फिर दोबारा गिरफ्तार कर लिया, जिससे साबित होता है कि सबकुछ पहले से तय था।

लेकिन वे इस बात का जवाब नहीं देते कि अगर सबकुछ स्क्रिप्टेड था, तो मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए उन बयानों का क्या, जिनमें महिलाओं ने आपबीती सुनाई है? नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के अनुसार, यह मामला एक संगठित नेटवर्क जैसा है जिसमें 18 से 25 साल की लड़कियों को निशाना बनाया गया। मौलानाओं और आरोपितों के रिश्तेदारों द्वारा बजरंग दल का नाम लेना केवल मामले को सांप्रदायिक मोड़ देने की कोशिश है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘मुस्लिम उत्पीड़न’ का रोना रोया जा सके।

आरोपित की बीवी का हिंदू पीड़िता पर वार

TCS के गिरफ्तार कर्मचारियों में से एक की बीवी ने अब मीडिया के सामने आकर नया दावा किया है। उनका कहना है कि दानिश शेख और शिकायतकर्ता महिला के बीच पहले से ‘रिलेशनशिप’ था और सब कुछ आपसी सहमति से हो रहा था। आरोपित की बीवी के अनुसार, “ऑफिस में हर कोई जानता था कि वह महिला दानिश की दीवानी थी और वह घंटों उसके काम खत्म होने का इंतजार करती थी।”
आरोपित की बीवी का कहना है कि उस महिला ने दानिश के लिए रोजा रखना और उसकी पसंद के कपड़े पहनना भी शुरू कर दिया था। अब जब उनके रिश्ते में कड़वाहट आई, तो उसने रेप और धर्मांतरण का आरोप लगा दिया। इस तर्क के जरिए आरोपित की बीवी न केवल दानिश को बचाने की कोशिश कर रही है, बल्कि अन्य 7 गिरफ्तार पुरुषों को भी निर्दोष बता रही है।
आरोपित की बीवी का कहना है कि पुलिस ने अलग-अलग मामलों को जानबूझकर एक साथ जोड़ दिया है। बीवी यह भी सवाल उठाती है कि ‘अगर उसका शौहर घर से शाकाहारी खाना ले जाता था, तो वह किसी को मांसाहार के लिए कैसे मजबूर कर सकता है?’ लेकिन यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस ने केवल एक नहीं, बल्कि कई महिलाओं के बयानों के आधार पर केस दर्ज किया है।
एक महिला के साथ ‘रिलेशनशिप’ का तर्क देकर उन अन्य पीड़ितों के यौन शोषण और धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों को नहीं झुठलाया जा सकता जिन्होंने इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाई है।

वामपंथी-लिबरल इकोसिस्टम की निर्लज्जता: अपराधियों के लिए आँसू, पीड़ितों के लिए खामोशी

नासिक के इस कांड ने एक बार फिर ‘लिबरल और वामपंथी’ गिरोह के दोहरे चरित्र को नंगा कर दिया है। जब तक पीड़ित हिंदू महिलाएँ अपनी गरिमा के लिए लड़ रही थीं, तब तक इन लोगों को ‘साँप सूँघ’ गया था। लेकिन जैसे ही मुस्लिम आरोपितों की गिरफ्तारी हुई, राजदीप सरदेसाई से लेकर अरफा खानम शेरवानी तक, पूरा इकोसिस्टम सक्रिय हो गया। इनके लिए यह ‘यौन शोषण’ नहीं बल्कि ‘रिलेशनशिप में कड़वाहट’ है। इनके लिए यह ‘धर्मांतरण’ नहीं बल्कि ‘मुस्लिम युवाओं को टारगेट’ करने की साजिश है। अरफा खानम ने तो यहाँ तक कह दिया कि मुस्लिमों को जो गिने-चुने रोजगार मिले हैं, उन्हें भी छीना जा रहा है।
नसरीन खान जैसे लोग तो इसे ‘स्मार्ट मुस्लिम लड़कों से हिंदुओं की जलन’ का मामला बता रहे हैं। ये वही लोग हैं जो आतंकियों के मानवाधिकारों के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाते हैं, लेकिन जब हिंदू लड़कियों को ऑफिस के भीतर नमाज पढ़ने या बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इनके मुँह से एक शब्द नहीं निकलता। यह गिरोह जानता है कि कब कहाँ रोना है, कब विक्टिम कार्ड खेलना है और कब पीड़ित महिला का ही चरित्र हनन करना है। इनकी यह ‘चुनिंदा संवेदनशीलता’ ही भारत के सामाजिक ताने-बाने के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

‘HR मैनेजर नहीं थी निदा खान’: TCS ने नासिक कांड पर जारी किया बयान, कहा- POSH की कोई शिकायत भी नहीं मिली; पुलिस कृतिवासन से भी पूछताछ करे


आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने साफ कहा है कि जिस महिला कर्मचारी पर आरोप लगाए जा रहे हैं वह HR (मानव संसाधन) मैनेजर नहीं है और न ही नासिक का ऑफिस बंद हुआ है। TCS ने यह जानकारी शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में दी गई अपनी रिपोर्ट में दी।

कंपनी के मुताबिक, आरोपित निदा खान को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में HR मैनेजर या विभाग की प्रमुख बताया जा रहा है जबकि वह HR विभाग से जुड़ी ही नहीं हैं। वह सिर्फ एक प्रोसेस एसोसिएट (साधारण कर्मचारी) थीं और उनके पास कोई बड़ी जिम्मेदारी या नेतृत्व की भूमिका नहीं थी।

TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन ने कहा, “मीडिया में गलत तरीके से निदा खान को HR मैनेजर बताया जा रहा है। वह न तो HR मैनेजर हैं और न ही हायरिंग का काम संभालती थी। वह सिर्फ एक कर्मचारी थी और उसके पास कोई नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं थी।”

अब सवाल यह है कि जिस CEO को यह नहीं मालूम कि उसकी कंपनी में किस तरह का षड़यंत्र चल रहा है फिर इस पद पर क्यों? क्या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन अपने आपको बचाने इस तरह के बयान दे रहा है? कोई गहरा राज है जिसका भांडा फूटना चाहिए। पुलिस कृतिवासन से भी पूछताछ करे। जब निदा खान HR नहीं थी, क्या CEO को नहीं मालूम कि कोई कर्मचारी किस तरह दुष्प्रचार कर रहा/रही है?     

     

कंपनी ने यह भी साफ किया कि नासिक का ऑफिस पूरी तरह चालू है। बयान में कहा गया, “नासिक में हमारा ऑफिस बंद नहीं हुआ है। वहाँ काम पहले की तरह चल रहा है और ग्राहकों को सर्विसेज दी जा रही हैं। ऑफिस बंद होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं।”

TCS ने यह भी कहा कि उसे नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई भी शिकायत नहीं मिली है। कंपनी के मुताबिक, नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है। ये शिकायतें कंपनी के एथिक्स (नैतिकता) या POSH चैनलों में भी दर्ज नहीं हैं। बयान में कहा गया, “विस्तृत जाँच अभी जारी है लेकिन नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच से यह पता चलता है कि हमें एथिक्स या POSH चैनलों के जरिए ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है।”

कंपनी ने बताया कि उसने जाँच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है। डेलॉइट और लॉ फर्म ट्राइलीगल की टीमों को स्वतंत्र सलाहकार के तौर पर जोड़ा गया है। यह जाँच टीसीएस की प्रेसिडेंट और COO आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में हो रही है। साथ ही, टाटा समूह की इस कंपनी ने एक निगरानी समिति (ओवरसाइट कमेटी) भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता केकी मिस्त्री कर रहे हैं। कंपनी ने कहा, “आंतरिक जाँच के नतीजे इस समिति के सामने रखे जाएँगे ताकि उनकी समीक्षा हो सके और जो भी सुझाव हों, उन्हें लागू किया जा सके।”

कंपनी ने फिर दोहराया कि वह किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करती। साथ ही, उसने यह भी कहा कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।

बयान में कंपनी ने कहा, “हम हर कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। हम अपने कर्मचारियों का समर्थन करने और हर जगह सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “हम कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखे हुए हैं जिससे इस मामले की पूरी, पारदर्शी तरीके से जाँच हो सके और सही निष्कर्ष तक पहुँचा जा सके।”

शरीयत लाने वाले क्यों छिपकर संविधान की शरण में आ रहे हैं? नासिक TCS कांड में फरार निदा खान ने कोर्ट में दायर की जमानत याचिका: हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी, तौसीफ का हिंदू कर्मी को मजहबी टोपी पहनाने का Video आया सामने

आरोपित और फरार HR मैनेजर निदा खान, हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहनाता तौसीफ (साभार: जनसत्ता, एक्स @IndiaToday)
नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ सामने आया। इस मामले की मुख्य आरोपित और फरार निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नासिक की कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। कई खबरों में निदा खान को कंपनी की HR मैनेजर भी बताया जा रहा था।

भारत में शरीयत लाकर गज़वा-ए-हिन्द बनाने वाले भांडा फूटने पर उस भारतीय संविधान से न्याय की गुहार क्यों लगाने छिपे-छिपे फिर रहे हैं? जब ये लोग अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते फिर किस से डर कर छिप रहे हो? हर मुसलमान को ऐसे भड़काऊ लोगों से इस सवाल का जवाब मांग इनके भड़काऊ मंसूबों को बेनकाब करना होगा। इन्ही भड़काऊ लोगों ने इस्लाम को बदनाम जहर फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। फिर अपने-आपको गरीब, मजलूम आदि बताकर victim card खेल जनता और कानून की आँखों में धूल झोंकते हैं।           

मामले के सामने आने के बाद से ही फरार चल रही खान ने अब अपने वकीलों से दोबारा संपर्क किया, जबकि SIT लगातार उसकी तलाश में कर रही है। इस पूरे मामले में अब तक 9 हिंदू पीड़ितों की FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अब तक सात पुरुषों और एक महिला समेत कुल 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि निदा खान अब भी फरार है।

निदा खान आंतरिक POSH कमेटी का हिस्सा थी और आरोप है कि उसने शिकायतों को दबाया और पीड़िताओं को कार्रवाई से हतोत्साहित किया। निदा खान दफ्तर की हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी। SIT की जाँच में यह भी सामने आया है कि HR विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 70 से अधिक शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

डिजिटल साक्ष्य खंगालने में जुटी एजेंसियाँ, बढ़ सकती है जाँच का दायरा

पीड़िताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और निदा खान ने उन्हें शिकायतें वापस लेने के लिए दबाव डाला। अब जाँच एजेंसियाँ ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच कर रही हैं, ताकि आरोपितों के बीच समन्वय और संभावित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।

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इस मामले में आरोपित तौसीफ का वो Video मिला, जिसमें वह हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहना रहा है। पीड़ित का कहना है कि 2023 में ईद के मौके पर उसे जबरदस्ती तौसीफ के घर ले जाया गया, जहाँ जबरन उसे मजहबी टोपी पहनाई गई, नमाज और कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS और NIA जैसी एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है, जिससे जाँच का दायरा और बढ़ सकता है।