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TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

हिन्दुओं victim card खेलने वालों के खिलाफ एकजुट हों ; ये प्रेग्नेंट है से लेकर उसकी बीवी तो सुंदर है तक… नासिक TCS कांड में जिहादी गैंग के कुकर्मों को धो-पोंछने के लिए क्या तर्क दे रही ‘जमात’, अम्मी-बहन-मौलाना सबको किया एक्टिव

             नासिक TCS कांड में मुस्लिम गैंग को बचाने के लिए नई 'जमात' एक्टिव (साभार : ChatGPT)
हिन्दुओं और समस्त हिन्दू संगठनों को भी कट्टरपंथियों की तरह एकजुट होकर work jehadi के विरुद्ध सिर्फ खड़ा होना होगा बल्कि जनता को जिहाद का समर्थन कर रही पार्टियों का धूल चटवाने के लिए खड़ा करना होगा। जब तक जेहादियों को कालनेमि हिन्दुओं द्वारा समर्थन दिया जाता रहेगा हिन्दू अपमानित होता रहेगा। दंगा होता है तो बाहरी आकर करते हैं लेकिन पुलिस के हत्ते चढ़ते स्थानीय। जनता, हिन्दू स्वयंसेवी संगठन और अदालतों को ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। इनके victim card को कूड़ेदान में फेंक सख्ती से पेश आना होगा।   

नासिक TCS कांड को लेकर पिछले दिनों पूरे देश में हल्ला मचा, लेकिन वामपंथियों की कान में जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने पहले इस मामले में लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी और फिर जब बोले तो सीधा मुस्लिम आरोपितों के बचाव पर उतर आए। अब स्थिति ये है कि इस मामले को दबाने के लिए एक नई जमात को एक्टिव किया गया है जो इस खबर में नए-नए एंगल लाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। कैसे आइए बताते हैं?

अभी तक मीडिया में आप हिंदू पीड़ितों के साथ हुए अत्याचार की खबरों को पढ़ रहे थे। मगर अब इस केस को ऐसा बनाया जा रहा है कि आपके मन में या तो मुस्लिमों आरोपितों की पीड़ित वाली छवि बने या फिर आपको ये लगे कि कहीं हिंदू ही इस मामले को बेवजगह तूल देकर किसी बेचारे को फँसा तो नहीं रहे है।

प्रेग्नेंसी और संवेदना का पुराना खेल: निदा खान और सफूरा जरगर का ‘विक्टिम’ कनेक्शन

नासिक कांड में कथित तौर पर निदा खान को HR हेड कहा जा रहा है, जिसकी भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि निदा खान न केवल इस पूरे गिरोह की जानकारी रखती थी, बल्कि जब पीड़ित हिंदू महिलाओं ने उसके पास शिकायतें भेजीं, तो उसने कोई एक्शन लेने के बजाय उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि ‘ऑफिसों में यह सब चलता है।’ अब जब पुलिस का शिकंजा कसा, तो निदा खान फरार हो गई और अचानक कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए ‘प्रेग्नेंसी’ का तर्क सामने रख दिया। सोशल मीडिया पर एक विशेष जमात ने तुरंत यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि एक ‘गर्भवती महिला’ को पुलिस और मीडिया परेशान कर रहा है।

यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जैसा 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय देखा गया था। उस वक्त मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल सफूरा जरगर ने भी जेल से बचने के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था। तब भी लिबरल गिरोह ने छाती पीटते हुए सफूरा को ‘बेचारी छात्रा’ और ‘स्कॉलर’ बताया था, जबकि उस पर UAPA जैसी गंभीर धाराओं के तहत सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप था। निदा खान हो या सफूरा, ये लोग जानते हैं कि भारतीय समाज में प्रेग्नेंसी एक संवेदनशील विषय है, इसलिए वे अपने अपराधों की गंभीरता को कम करने के लिए इसे ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।

‘मेरी बहू सुंदर है तो बेटा क्यों भटकेगा?’: आरोपित की अम्मी का इमोशनल ड्रामा

नासिक TCS कांड के मुख्य आरोपित दानिश शेख की गिरफ्तारी के बाद उसकी अम्मी का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए अपने बेटे को ‘बेगुनाह’ साबित करने पर तूली है। आरोपित की अम्मी ने तर्क दिया कि उनका बेटा बहुत अच्छा इंसान है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सबसे अजीबोगरीब दलील जो उन्होंने दी, वो यह थी कि ‘मेरी बहू इतनी सुंदर है, मेरा बेटा किसी और के पीछे क्यों जाएगा?’ यह तर्क देकर उन्होंने उन सभी महिलाओं के आरोपों को सिरे से खारिज करने की कोशिश की जिन्होंने दानिश पर गंभीर यौन शोषण और रेप के आरोप लगाए हैं।

आरोपित दानिश की अम्मी का कहना है कि उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनकी बहू डिप्रेशन में है। वह धर्मांतरण के आरोपों पर कहती हैं कि ‘धर्मांतरण ऐसे नहीं होता, ये काम तो सिर्फ मौलवी करते हैं।’ लेकिन पुलिस की जाँच और दर्ज की गई 9 FIR कुछ और ही कहानी बयाँ करती हैं। जाँच में सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क था जहाँ हिंदू लड़कियों पर मानसिक दबाव बनाया गया, उन्हें बीफ खाने को मजबूर किया गया और धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं। अम्मी के आँसू अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन वे उन पीड़ित लड़कियों के आँसुओं का जवाब नहीं हैं जिनका शोषण ऑफिस की आड़ में किया गया।

मौलाना और ‘स्क्रिप्टेड’ साजिश: जब कुछ न मिले तो बजरंग दल को कोस दो

इस मामले में एक और एंगल आरोपितों के रिश्तेदारों और मौलानाओं की तरफ से सामने आया। आरोपित रजा मेमन के चाचा रजाक काजी का दावा है कि यह सब कुछ एक ‘साजिश’ है और इसमें बजरंग दल शामिल है। उनका कहना है कि लड़कियों के परिवारों ने बजरंग दल को बुलाया और उनके दबाव में आकर पुलिस ने यह पूरा ‘स्क्रिप्ट’ तैयार किया।

यह एक जाना-पहचाना पैंतरा है, जब भी कोई मुस्लिम आरोपित पकड़ा जाता है, तो उसे ‘मुस्लिम होने की सजा’ या ‘दक्षिणपंथी संगठनों की साजिश’ करार देकर असल अपराध से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है। काजी का कहना है कि पुलिस ने पहले एक व्यक्ति को छोड़ा और फिर दोबारा गिरफ्तार कर लिया, जिससे साबित होता है कि सबकुछ पहले से तय था।

लेकिन वे इस बात का जवाब नहीं देते कि अगर सबकुछ स्क्रिप्टेड था, तो मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए उन बयानों का क्या, जिनमें महिलाओं ने आपबीती सुनाई है? नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के अनुसार, यह मामला एक संगठित नेटवर्क जैसा है जिसमें 18 से 25 साल की लड़कियों को निशाना बनाया गया। मौलानाओं और आरोपितों के रिश्तेदारों द्वारा बजरंग दल का नाम लेना केवल मामले को सांप्रदायिक मोड़ देने की कोशिश है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘मुस्लिम उत्पीड़न’ का रोना रोया जा सके।

आरोपित की बीवी का हिंदू पीड़िता पर वार

TCS के गिरफ्तार कर्मचारियों में से एक की बीवी ने अब मीडिया के सामने आकर नया दावा किया है। उनका कहना है कि दानिश शेख और शिकायतकर्ता महिला के बीच पहले से ‘रिलेशनशिप’ था और सब कुछ आपसी सहमति से हो रहा था। आरोपित की बीवी के अनुसार, “ऑफिस में हर कोई जानता था कि वह महिला दानिश की दीवानी थी और वह घंटों उसके काम खत्म होने का इंतजार करती थी।”
आरोपित की बीवी का कहना है कि उस महिला ने दानिश के लिए रोजा रखना और उसकी पसंद के कपड़े पहनना भी शुरू कर दिया था। अब जब उनके रिश्ते में कड़वाहट आई, तो उसने रेप और धर्मांतरण का आरोप लगा दिया। इस तर्क के जरिए आरोपित की बीवी न केवल दानिश को बचाने की कोशिश कर रही है, बल्कि अन्य 7 गिरफ्तार पुरुषों को भी निर्दोष बता रही है।
आरोपित की बीवी का कहना है कि पुलिस ने अलग-अलग मामलों को जानबूझकर एक साथ जोड़ दिया है। बीवी यह भी सवाल उठाती है कि ‘अगर उसका शौहर घर से शाकाहारी खाना ले जाता था, तो वह किसी को मांसाहार के लिए कैसे मजबूर कर सकता है?’ लेकिन यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस ने केवल एक नहीं, बल्कि कई महिलाओं के बयानों के आधार पर केस दर्ज किया है।
एक महिला के साथ ‘रिलेशनशिप’ का तर्क देकर उन अन्य पीड़ितों के यौन शोषण और धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों को नहीं झुठलाया जा सकता जिन्होंने इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाई है।

वामपंथी-लिबरल इकोसिस्टम की निर्लज्जता: अपराधियों के लिए आँसू, पीड़ितों के लिए खामोशी

नासिक के इस कांड ने एक बार फिर ‘लिबरल और वामपंथी’ गिरोह के दोहरे चरित्र को नंगा कर दिया है। जब तक पीड़ित हिंदू महिलाएँ अपनी गरिमा के लिए लड़ रही थीं, तब तक इन लोगों को ‘साँप सूँघ’ गया था। लेकिन जैसे ही मुस्लिम आरोपितों की गिरफ्तारी हुई, राजदीप सरदेसाई से लेकर अरफा खानम शेरवानी तक, पूरा इकोसिस्टम सक्रिय हो गया। इनके लिए यह ‘यौन शोषण’ नहीं बल्कि ‘रिलेशनशिप में कड़वाहट’ है। इनके लिए यह ‘धर्मांतरण’ नहीं बल्कि ‘मुस्लिम युवाओं को टारगेट’ करने की साजिश है। अरफा खानम ने तो यहाँ तक कह दिया कि मुस्लिमों को जो गिने-चुने रोजगार मिले हैं, उन्हें भी छीना जा रहा है।
नसरीन खान जैसे लोग तो इसे ‘स्मार्ट मुस्लिम लड़कों से हिंदुओं की जलन’ का मामला बता रहे हैं। ये वही लोग हैं जो आतंकियों के मानवाधिकारों के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाते हैं, लेकिन जब हिंदू लड़कियों को ऑफिस के भीतर नमाज पढ़ने या बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इनके मुँह से एक शब्द नहीं निकलता। यह गिरोह जानता है कि कब कहाँ रोना है, कब विक्टिम कार्ड खेलना है और कब पीड़ित महिला का ही चरित्र हनन करना है। इनकी यह ‘चुनिंदा संवेदनशीलता’ ही भारत के सामाजिक ताने-बाने के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

प्राइवेट पार्ट पर बात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे करते थे हिंदू महिलाओं को परेशान, 9 FIR की सारी डिटेल्स


नासिक के अशोका मार्ग पर स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, शारीरिक दुर्व्यवहार और धर्म के आधार पर भेदभाव का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया। महज 48 घंटों के भीतर, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में एक ही विभाग के पाँच मुस्लिम पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं। ऑपइंडिया (OpIndia) के पास मौजूद इन FIR की कॉपियों से पता चला है कि इस BPO में काम करने वाली हिंदू महिलाएँ पिछले कई सालों से यौन शोषण और धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं।

इन मामलों में आरोपित शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख सभी ओडीसी-02 (ODC-02) यूनिट से जुड़े हैं, जो कॉलिंग के जरिए एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड कलेक्शन का काम संभालते हैं। दर्ज की गई शिकायतों में तीन हिंदू महिला कर्मचारियों (जिनमें दो 23 साल की सहयोगी और एक 36 साल की टीम लीडर) ने दफ्तर के बेहद खराब माहौल का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वहाँ लगातार यौन उत्पीड़न, निजी जिंदगी को लेकर बेतुके सवाल, गलत तरीके से छूने की कोशिश और हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की जाती थीं।

(FIR नंबर: 156/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर अश्लील टिप्पणी और यौन शोषण

नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाली एक 23 वर्षीय हिंदू छात्रा ने सहकर्मी दानिश शेख, तौसीफ अख्तर और निदा खान के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धार्मिक प्रताड़ना पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, आरोपित दानिश शेख ने अपने निकाह और दो बच्चों की बात छिपाकर युवती को प्रेम जाल में फँसाया और शादी का झांसा देकर जुलाई 2022 से फरवरी 2026 तक अलग-अलग होटलों में उसका शारीरिक शोषण किया। इस दौरान आरोपित तौसीफ और निदा खान ने पीड़िता को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया और शिवलिंग व भगवान कृष्ण सहित हिंदू देवी-देवताओं पर बेहद अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

हद तो तब हो गई जब तौसीफ अख्तर ने पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए ऑफिस की पेंट्री और लॉबी में यौन उत्पीड़न किया और धमकी दी कि यदि उसने उसकी शारीरिक माँगें पूरी नहीं कीं, तो वह उसके घर वालों को सब बता देगा। इस पूरे मामले में आरोपितों ने न केवल पीड़िता का विश्वास तोड़ा, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी धार्मिक भावनाओं और गरिमा को छलनी किया।

(FIR नंबर: 163/2026) रजा मेमन और शाहरुख पर गंभीर आरोप, हेड अश्विनी पर भी कार्रवाई

नासिक की TCS कंपनी (BPO यूनिट) में काम करने वाली एक 25 वर्षीय शादीशुदा महिला कर्मचारी ने टीम लीडर रजा मेमन और सहकर्मी शाहरुख कुरैशी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई। FIR के अनुसार, रजा मेमन मई 2023 से ही पीड़िता को अकेले पाकर गंदी नीयत से छूने, अश्लील पहेलियाँ बुझाने और घूरने जैसी हरकतें कर रहा था। पीड़िता की शादी होने के बाद आरोपित ने उसकी पर्सनल लाइफ पर भद्दे और ‘सेक्सुअली सजेस्टिव’ कमेंट्स किए, जैसे- ‘रात में क्या करती हो कि दिन में नींद आती है?’ और गोवा ट्रिप के नाम पर ‘हनीमून और शराब’ जैसे शर्मनाक सवाल पूछे।

                                                      ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

शिकायत में यह भी आरोप है कि जब पीड़िता ने विरोध किया, तो टीम लीडर रजा ने उसका नाम ऑफिस बॉय से जोड़कर चरित्र हनन किया और दानिश-तौसीफ के साथ मिलकर उस पर काम का बोझ बढ़वा दिया। हद तो तब हो गई जब गुड़ी पड़वा पर साड़ी पहनकर आने पर शाहरुख ने उसे गंदी नजरों से देखा और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का सबसे गंभीर आरोप कंपनी की ऑपरेशनल हेड अश्विनी चौनानी पर है, जिन्होंने बार-बार शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि आरोपितों का साथ देकर पीड़िता की आवाज दबाने की कोशिश की।

(FIR नंबर: 164/2026) हिंदू महिलाओं के अंगों को घूरते थे मुस्लिम कर्मचारी, मिसकैरेज होने पर जबरन ‘अजमेर के मौलवी’ के पास भेजने का दबाव

नासिक की TCS कंपनी में एक 36 वर्षीय हिंदू महिला टीम लीडर ने मुस्लिम सहकर्मियों के एक खास गुट पर धार्मिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का सनसनीखेज आरोप लगाया। FIR के अनुसार, शफी शेख, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी जैसे मुस्लिम कर्मचारी दफ्तर में एकजुट होकर गैर-मजहबी लड़कियों और लड़कों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं। पीड़िता ने बताया कि आरोपित शफी शेख मीटिंग के दौरान सार्वजनिक रूप से उसके प्राइवेट पार्ट्स (छाती) को गंदी नजरों से घूरता था और विरोध करने पर गंदी मुस्कान देता था, जिसकी शिकायत के बावजूद उसे सिर्फ दूसरे विभाग में भेज दिया गया जहाँ से वह लगातार पीड़िता का पीछा करता रहा।

                                               ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

हद तो तब पार हो गई जब फरवरी 2026 में पीड़िता का मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ, तो तौसीफ अत्तर ने उसकी व्यक्तिगत पीड़ा का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘अजमेर के मौलवी’ का नंबर दिया और जबरन वहाँ जाने का दबाव बनाया। आरोपितों पर आरोप है कि वे दफ्तर में हिंदू लड़कियों पर अश्लील कमेंट करते हैं, उन्हें सिर से पैर तक गंदी नजरों से घूरते हैं और उनकी निजी जिंदगी में दखल देकर उन्हें मजहबी आधार पर प्रताड़ित और शर्मिंदा करते हैं।

(FIR नंबर: 165/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर भद्दी टिप्पणी और महिला कर्मचारी को प्राइवेट पार्ट दिखाकर किया यौन उत्पीड़न

नासिक की TCS कंपनी में कार्यरत 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी ने बिजनेस प्रोसेस लीडर तौसीफ अत्तर के खिलाफ यौन प्रताड़ना और हिंदू धर्म के अपमान की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, आरोपित तौसीफ दफ्तर में हिंदू लड़कियों को सिर से पैर तक घूरता और उनके अंगों को देखकर आँखें मारता था। पीड़िता ने बताया कि तौसीफ आने-जाने वाली लड़कियों के फिजिकल साइज पर भी बात करता था। हद तो तब पार हो गई जब दिसंबर 2025 में पीड़िता को छाछ पीते देख आरोपित ने अपने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा करते हुए बेहद अश्लील टिप्पणी की और कहा- ‘मेरे पास भी छाछ है, तुझे चाहिए क्या?’

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 यही नहीं, आरोपित ने दफ्तर में हिंदू धर्म और आस्था पर भी जहरीला हमला बोला। पीड़िता की टेबल पर रखी महादेव की मूर्ति को देखकर मुझसे पूछा कि क्या महादेव सच में भगवान हैं? अगर पार्वती ने गणपति को बनाया, तो महादेव को इसके बारे में क्यों नहीं पता? गणेश सच में महादेव के बेटे है? यह कहते हुए तौसीफ ने देवी पार्वती के चरित्र पर कीचड़ उछाला। इसके अलावा, उसने भगवान ब्रह्मा के लिए भी टिप्पणी कर कहा कि ब्रह्मा अपनी ही बेटी का रेपिस्ट है। और प्रभु श्री राम व माता सीता के बारे में अपमानजनक बातें कहीं कि उन्होंने वनवास में मांस खाया होगा, वे कंद खाकर नहीं रह सकते। तौसीफ ने जहर उगलते हुए हिंदू देवताओं को ‘झूठा’ और ‘दिखावे वाला’ बताया और इस्लाम को श्रेष्ठ साबित करने के लिए हिंदू भावनाओं को बुरी तरह कुचला।

(FIR नंबर: 166/2026) हिंदू कर्मचारी को जबरन खिलाया नॉन-वेज, पत्नी के लिए बोली बेहद शर्मनाक बात

नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाले एक वरिष्ठ विश्लेषक ने सहकर्मी तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, शाहरुख शेख और रजा मेमन के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, ये आरोपित दफ्तर में एक संगठित गिरोह की तरह काम करते थे और हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनका धर्मांतरण कराने का दबाव डालते थे। पीड़ित, जो रुद्राक्ष की माला पहनते हैं और धार्मिक मार्ग पर चलते हैं, उन्हें आरोपितों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोपितों ने छत्रपति संभाजी महाराज को ‘इस्लाम का गुलाम’ बताकर अपमानित किया। हद तो तब हो गई जब आरोपितों ने पीड़ित के शाकाहारी होने के बावजूद उन्हें देर रात जबरन नॉन-वेज खिलाया और मना करने पर जान से मारने की धमकी दी।

                                                  ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

इस गिरोह की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। जब आरोपितों को पता चला कि पीड़ित की संतान नहीं हो रही है, तो तौसीफ और दानिश ने सारी मर्यादाएँ लाँघते हुए घटिया टिप्पणी की। आरोपितों ने पीड़ित से कहा, “दवा से बच्चे नहीं हो रहे, तो अपनी पत्नी को हमारे पास भेज दो।” इसके अलावा, पीड़ित को धोखे से घर ले जाकर जबरन टोपी पहनाई गई, कलमा पढ़वाया गया और उसकी तस्वीरें वायरल कर दी गईं। FIR में यह भी आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर की महिलाओं को देखकर गंदे कमेंट्स करते थे और कहते थे कि ‘तुम जो भी पसंद करोगी, उसे खुश करना होगा।’ जब पीड़ित ने इस धर्मांतरण और उत्पीड़न का विरोध किया, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई और काम के बहाने प्रताड़ित किया गया।

(FIR नंबर: 167/2026) हिंदू महिला के अंगों को हाथ से छुआ, भगवान कृष्ण को बताया ‘औरतबाज’

नासिक की TCS कंपनी में 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी (जो एक पावरलिफ्टर भी हैं) ने आसिफ अंसारी, शफी शेख और तौसीफ अत्तर के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के मुताबिक, आरोपित आसिफ अंसारी ने पीड़िता की छाती को सरेआम घूरते हुए अश्लील सवाल पूछा, “तुम्हारी पसंद छोटी है या बड़ी?” पीड़िता के वजन और शरीर की बनावट का मजाक उड़ाते हुए आरोपित तौसीफ और आसिफ उस पर गंदे कमेंट्स करते थे। दिसंबर 2024 में आरोपित शफी शेख ने पीड़िता के पास बैठकर पैर से पैर रगड़ा और काम सिखाने के बहाने उसके सीने और प्राइवेट पार्ट्स को हाथ से छुआ। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो आरोपित गंदी मुस्कान देकर वहाँ से चला गया।

                                                 ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

यही नहीं, आरोपितों ने दफ्तर के माहौल को मजहबी जहर से भर दिया था। आरोपित तौसीफ अत्तर ने हिंदू आस्था को चोट पहुँचाने के लिए भगवान कृष्ण को ‘औरतबाज’ कहा और भगवान शिव व माता पार्वती के रिश्ते पर निहायत ही गंदी और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर में एकजुट होकर हिंदू लड़कियों को उनके शरीर और धर्म के आधार पर शर्मिंदा करते थे।

(FIR नंबर: 168/2026) नई नवेली हिंदू दुल्हन से ‘हनीमून’ पर अश्लील सवाल, भगवान ‘नंगे’ रहने पर टिप्पणी

नासिक की TCS कंपनी से एक 23 वर्षीय विवाहित हिंदू महिला कर्मचारी ने शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख के खिलाफ सामूहिक उत्पीड़न की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, पीड़िता की शादी के महज एक महीने बाद ही टीम लीडर रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने उसे दफ्तर में घेर लिया और उसके हनीमून को लेकर गंदे और अश्लील सवाल पूछे लगे, जैसे- ‘हनीमून पर क्या किया? क्या तुम्हारे पति ने तुम्हें गाजर दी?’ आरोपितों ने पीड़िता का नाम ‘प्लेयर’ रख दिया था और उसे अपने पति को छोड़कर दूसरा बॉयफ्रेंड बनाने के लिए मजबूर किया।

                                            ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। आरोपित आसिफ अंसारी दफ्तर में पीड़िता को जबरन गले लगा लेता था, उसकी कमर, पेट और जाँघों को गंदी नीयत से छूता था और उसके अंदर के कपड़ों (innerwear) के साइज के बारे में भद्दी बातें पूछता था। आरोपित तौसीफ अत्तर भी काम सिखाने के बहाने पीड़िता के अंगों पर हाथ फेरता था और ‘संतरे छोटे हैं या बड़े’ जैसी अश्लील टिप्पणियाँ करता था। आरोपितों ने हिंदू धर्म पर भी जहर उगला। आसिफ अंसारी ने कहा कि ‘तुम्हारे भगवान नंगे घूमते हैं और तुम लोग नकाब नहीं पहनती, इसीलिए तुम हिंदुओं का रेप होता है।’ गुड़ी पड़वा के दिन आरोपितों ने पीड़िता की साड़ी का पल्लू तक खींच लिया। इन दरिंदों ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे वह दफ्तर जाने से भी डरने लगी थी।

(FIR नंबर: 169/2026) महिला कर्मचारी की बीमारी का मजाक उड़ाया, प्राइवेट पार्ट और ‘फिजिकल रिलेशन’ पर पूछते अश्लील सवाल

नासिक की TCS कंपनी से एक 23 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी ने शफी शेख, रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, ट्रेनिंग के बहाने आरोपित शफी शेख पीड़िता को घेर लेता था और काम की जगह उसकी निजी जिंदगी पर गंदे सवाल पूछता था। शफी पीड़िता से पूछता था कि ‘क्या तुम्हारे अपने बॉयफ्रेंड के साथ फिजिकल रिलेशन (शारीरिक संबंध) रहे हैं?’ और ‘क्या तुम रात को सोई या नहीं?’। हद तो तब हो गई जब अगस्त 2025 में आरोपित ने कैंटीन में पीड़िता को अकेला पाकर जबरन ‘गर्लफ्रेंड’ बनने का दबाव बनाया, जिससे डरकर पीड़िता रोने लगी।
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शिकायत के मुताबिक, जब पीड़िता ने इसकी शिकायत अपने टीम लीडर रज़ा मेमन से की, तो उसने आरोपित शफी के खिलाफ एक्शन लेने के बजाय उसे शह दी और खुद भी पीड़िता का शोषण शुरू कर दिया। रजा मेमन ने पीड़िता की बीमारी (PCOD) का मजाक उड़ाते हुए उसके शरीर पर भद्दी टिप्पणियाँ कीं और उसे जिम जाने व फेशियल कराने की सलाह देते हुए गंदी नीयत से छूने की कोशिश की। आरोपित शाहरुख कुरैशी ने भी पीड़िता को व्यवस्थित ट्रेनिंग न देकर उसे शफी के हवाले कर दिया ताकि वे मिलकर उसे प्रताड़ित कर सकें। पीड़िता ने बताया कि आरोपित उस पर नजर रखते थे और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाते थे, जिससे वह दफ्तर में असुरक्षित महसूस करने लगी थी।

(FIR नंबर: 171/2026) हिंदू युवती के शरीर पर भद्दे कमेंट्स, गुड़ी पड़वा पर ड्रेस को लेकर उड़ाया मजाक और डाली गंदी नजर

नासिक की TCS कंपनी से 23 वर्षीय हिंदू पीड़िता ने रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, शाहरुख कुरैशी पीड़िता को अकेले पाकर जबरन उसकी पर्सनल लाइफ, बॉयफ्रेंड और ‘एक्स’ के बारे में अश्लील सवाल पूछता था और माता-पिता की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उसे अपने साथ घूमने चलने के लिए दबाव डालता था। आरोपित रजा मेमन ने पीड़िता के शरीर पर भद्दे कमेंट्स करते हुए उसे ‘शेप में आने’ और जिम जाने जैसी शर्मनाक बातें कहीं।
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प्रताड़ना की हद तब पार हो गई जब 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर पीड़िता नई ड्रेस पहनकर ऑफिस आई। आरोपित रजा मेमन ने उसे सबके सामने बुलाकर सिर से पैर तक गंदी नजर से घूरा और हिंदू त्योहारों का अपमान करते हुए ताना मारा कि ‘क्या तुम पूजा नहीं करती, बस तैयार होकर ऑफिस आ जाती हो?’ आरोपितों ने दफ्तर में ऐसा खौफ पैदा कर रखा था कि पीड़िता शिकायत करने से भी डरती थी। पीड़िता का आरोप है कि ये लोग उस पर लगातार नजर रखते थे और गंदे इशारे कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाते थे।

नासिक TCS कंपनी से सामने आई यह रिपोर्ट न केवल यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा है, बल्कि एक इस्लामिक संगठित गिरोह द्वारा हिंदू आस्था और मानवाधिकारों पर किया गया गहरा प्रहार भी है। दफ्तर जैसे पेशेवर माहौल को मजहबी कट्टरता, लव जिहाद और धर्मांतरण की साजिशों का अड्डा बनाना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह बेहद शर्मनाक है कि जहाँ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वहाँ उनकी धार्मिक पहचान को हथियार बनाकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से छलनी किया गया।(साभार) 

भगवान राम पर की अपमानजनक टिप्पणी, हिंदू लड़के ने दिया जवाब तो भड़क गए कट्टरपंथी: नासिक में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए भीड़ ने किया उपद्रव

                        नासिक में मुस्लिम भीड़ की हिंसा (ऑपइंडिया द्वारा हासिल की गईं तस्वीरें)
महाराष्ट्र में नासिक शहर के जय भवानी इलाके में गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को हजारों मुस्लिमों की भीड़ ने सर तन से जुदा के नारे लगाए और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचा। मुस्लिमों ने सिटी लिंक बसों और हिंदुओं के निजी वाहनों पर भी हमले किए। भीड़ ने संकेत सौदागर नाम के एक लड़के पर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा पर अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगाया है।

रमज़ान के महीने में शहर के मुस्लिम इकट्ठा होकर इस हिंदू व्यक्ति के लिए मौत की सज़ा की माँग की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा करके कहा गया कि सौदागर ने फातिमा अल-ज़हरा के खिलाफ टिप्पणी करके गंभीर अपराध किया है और वह ‘सर तन से जुदा’ सजा का हकदार है। पोस्ट की तस्वीरें और वीडियो ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त किए गए हैं।

झगड़े की शुरुआत मुस्लिम समुदाय द्वारा बताई जा रही है। ऑपइंडिया को एक्सक्लूसिव तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक, घटना पिछले हफ्ते की है। नासिक में हिंदू समुदाय आगामी रामनवमी उत्सव (17 अप्रैल) की तैयारी कर रहा है। इस दौरान सौदागर समेत हिंदू समुदाय के लोगों ने तैयारियों के बारे में इंस्टाग्राम पर पोस्ट करना शुरू कर दिया, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक स्थानीय हिंदू ने ऑपइंडिया को बताया कि मुस्लिमों हिंदुओं द्वारा पोस्ट की गई तैयारियों वाले पोस्ट पर भगवान राम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी शुरू कर दी। इनमें ‘ख्वाजा’ नाम का एक लड़का भी शामिल था। उन्होंने अन्य मुस्लिमों के साथ मिलकर आगामी हिंदू त्योहार रामनवमी की तैयारियों का अपमान किया करना शुरू कर दिया।

                                                       संकेत सौदागर के खिलाफ प्रदर्शन

विपिन (बदला हुआ नाम) ने बताया, “शुरुआती लड़ाई केवल दो व्यक्तियों के बीच थी। सौदागर भगवान राम का अपमान सहन नहीं कर सके। फिर उन्होंने मुस्लिमों को उन्हीं के शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की बेटी फातिमा अल-ज़हरा के बारे में कुछ टिप्पणी की। मुस्लिम यही चाहते थे।”

विपिन ने आगे कहा, “उन्होंने (मुस्लिमों ने) भगवान राम के बारे में गलत टिप्पणी करके लड़ाई शुरू कर दी और हिंदू लड़के को यह अनुचित कदम उठाने के लिए मजबूर किया। इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट को मुस्लिमों ने अपने समूहों में साझा किया, जिसके कारण वे सौदागर की मौत की माँग करने के लिए इकट्ठा हो गए।”

                                                      मुस्लिम भीड़ द्वारा बस में तोड़फोड़

उन्होंने कहा कि हिंसा भड़कने के बाद मुस्लिमों ने भगवान राम के खिलाफ की गई सभी टिप्पणियों को हटा दिया। इसके साथ ही सौदागर द्वारा उन्हें और उनके समुदाय को निशाना बनाने के लिए उनके पोस्ट के स्क्रीनशॉट ले लिए। उत्पाद के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया।

विश्व हिंदू परिषद ने इस घटना का संज्ञान लिया और शहर के पुलिस को पत्र लिखकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। अपने पत्र में विश्व हिंदू परिषद ने लिखा, “कुछ व्यक्तियों ने सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट कीं। उसके बाद उन्होंने कामान को नष्ट कर दिया जो देवी तुलजाभवानी मंदिर समारोह के लिए स्थापित किया गया था।”

                                         विश्व हिंदू परिषद का पुलिस को लिखा गया पत्र

अपने पत्र में विश्व हिंदू परिषद ने आगे लिखा, “उन्होंने (मुस्लिमों ने) मंदिर के कमान पर पथराव किया और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया। इसके अलावा, उन्होंने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, वाहनों और सार्वजनिक बसों में तोड़फोड़ की। नासिक शहर का मौजूदा माहौल चिंताजनक है। हम उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।”

नवीनतम अपडेट के अनुसार, पुलिस ने किसी के धर्म के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर सौदागर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, भगवान राम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाला मुस्लिम शख्स फरार बताया जा रहा है।

(सिद्धि सोमानी की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। विस्तार से पढ़ने से इस लिंक पर क्लिक करें।)