आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने साफ कहा है कि जिस महिला कर्मचारी पर आरोप लगाए जा रहे हैं वह HR (मानव संसाधन) मैनेजर नहीं है और न ही नासिक का ऑफिस बंद हुआ है। TCS ने यह जानकारी शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में दी गई अपनी रिपोर्ट में दी।
कंपनी के मुताबिक, आरोपित निदा खान को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में HR मैनेजर या विभाग की प्रमुख बताया जा रहा है जबकि वह HR विभाग से जुड़ी ही नहीं हैं। वह सिर्फ एक प्रोसेस एसोसिएट (साधारण कर्मचारी) थीं और उनके पास कोई बड़ी जिम्मेदारी या नेतृत्व की भूमिका नहीं थी।
TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन ने कहा, “मीडिया में गलत तरीके से निदा खान को HR मैनेजर बताया जा रहा है। वह न तो HR मैनेजर हैं और न ही हायरिंग का काम संभालती थी। वह सिर्फ एक कर्मचारी थी और उसके पास कोई नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं थी।”
अब सवाल यह है कि जिस CEO को यह नहीं मालूम कि उसकी कंपनी में किस तरह का षड़यंत्र चल रहा है फिर इस पद पर क्यों? क्या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन अपने आपको बचाने इस तरह के बयान दे रहा है? कोई गहरा राज है जिसका भांडा फूटना चाहिए। पुलिस कृतिवासन से भी पूछताछ करे। जब निदा खान HR नहीं थी, क्या CEO को नहीं मालूम कि कोई कर्मचारी किस तरह दुष्प्रचार कर रहा/रही है?
कंपनी ने यह भी साफ किया कि नासिक का ऑफिस पूरी तरह चालू है। बयान में कहा गया, “नासिक में हमारा ऑफिस बंद नहीं हुआ है। वहाँ काम पहले की तरह चल रहा है और ग्राहकों को सर्विसेज दी जा रही हैं। ऑफिस बंद होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं।”
TCS ने यह भी कहा कि उसे नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई भी शिकायत नहीं मिली है। कंपनी के मुताबिक, नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है। ये शिकायतें कंपनी के एथिक्स (नैतिकता) या POSH चैनलों में भी दर्ज नहीं हैं। बयान में कहा गया, “विस्तृत जाँच अभी जारी है लेकिन नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच से यह पता चलता है कि हमें एथिक्स या POSH चैनलों के जरिए ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है।”
Public statement by Mr. K. Krithivasan, Chief Executive Officer and Managing Director, related to the recent matter in Nashik. All details here: https://t.co/sOEGI7jmtV pic.twitter.com/iTfu1yeCuz
— Tata Consultancy Services (@TCS) April 17, 2026
कंपनी ने बताया कि उसने जाँच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है। डेलॉइट और लॉ फर्म ट्राइलीगल की टीमों को स्वतंत्र सलाहकार के तौर पर जोड़ा गया है। यह जाँच टीसीएस की प्रेसिडेंट और COO आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में हो रही है। साथ ही, टाटा समूह की इस कंपनी ने एक निगरानी समिति (ओवरसाइट कमेटी) भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता केकी मिस्त्री कर रहे हैं। कंपनी ने कहा, “आंतरिक जाँच के नतीजे इस समिति के सामने रखे जाएँगे ताकि उनकी समीक्षा हो सके और जो भी सुझाव हों, उन्हें लागू किया जा सके।”
कंपनी ने फिर दोहराया कि वह किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करती। साथ ही, उसने यह भी कहा कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।
बयान में कंपनी ने कहा, “हम हर कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। हम अपने कर्मचारियों का समर्थन करने और हर जगह सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “हम कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखे हुए हैं जिससे इस मामले की पूरी, पारदर्शी तरीके से जाँच हो सके और सही निष्कर्ष तक पहुँचा जा सके।”
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