महिला आरक्षण बिल गिरा कर विपक्ष ने कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया

सुभाष चन्द्र

जब हम स्कूल में पढ़ते थे एक शिक्षाप्रद अध्याय जरूर होता था, संस्कृत में ईश्वरः यत करोति शोभनम एव करोति, हिन्दी में भगवान जो करता है भलाई के ही लिए करता है और अंग्रेजी में It's All For The Best तीनों का भावार्थ एक ही है कोई अन्तर नहीं, अन्तर सिर्फ भाषा का है। इस चित्रण में एक राजा और उसके मंत्री की मंत्रा के माध्यम से शिक्षा दी गयी है।

भारत विरोधियों की भीख पर चलने वाला मोदी विरोधी गैंग यानि INDI गठबंधन मोदी के जाल में फंस गया। अगर मोदी विरोधी गैंग अपनी बुद्धि से काम लेता तो बिल को समर्थन देता। अगर चुनावों में महिलाओं ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर वोट दिया मोदी विरोधी गैंग चारों खाने चित होगा। खैर विनाश काल विपरीत बुद्धि, सनातन को अपमानित करने वालों को क्या मालूम भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने क्या लिखा है।  

याद रखना मेरे देश वासियों ओर मेरे देश की माता बहनों इन चारों महिलाओं को
इनकी वजह से ही 27 साल से अटके महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया,
इनकी महिला होकर महिला विरोधी मानसिकता से परिपूर्ण सोच को समझिए,
इन्हें सिर्फ अपनी कुर्सी अपने परिवार और अपने राजनीतिक फायदे की चिंता हे,
बाकी हमारे देश की महिला किस दौर से गुजर रही,किस संकट से गुजर रही इन्हें कोई परवाह नहीं,
एक कहती थी "लड़की हूं लड़ सकती हूं" आज उसी लड़की से लड़ने के लिए आमने सामने हो गई,
यह आरक्षण बिल सिर्फ महिलाओं को चुनाव में सीट के लिए बल्कि महिला आत्मसम्मान महिला सशक्तिकरण के लिए भी नींव का पत्थर साबित होता,
लेकिन इन सोने के चम्मच से खाने वाले लोग आपका हक खा गए,
क्यों कि ये परिवारवादी महिलाओं को कोई फर्क नहीं पड़ता महिला के आत्मसम्मान से इन्हें सिर्फ चुनाव के समय महिला याद आती है महिला दुखी नजर आती है, अगले चुनाव मैं इन्हें इस बात का एहसास जरूर करवाना की महिला क्या कर सकती है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
महिला आरक्षण बिल गिरा कर विपक्ष बहुत गर्व कर रहा है और ख़ुशी से पागल है कि हमने बिल को रोक दिया उन्हें नहीं पता कि उन्होंने अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारी बल्कि कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया है

महिला आरक्षण 2023 के कानून के अनुसार 2029 से लागू होना है सरकार चाहती थी कि परिसीमन के बाद इसे 2029 से लागू किया जाए लेकिन विपक्ष को पता नहीं उसने यह बिल गिरा कर अपना क्या नुकसान कर लिया

अब महिला आरक्षण 543 सीटों में 33% लागू होगा वह भी 2029 से यानी 543 में से 180 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी जो चुनाव आयोग तय करेगा विपक्ष के कौन से नेता की सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाए पता नहीं वह चाहे राहुल गांधी हो या अखिलेश यादव या कोई अन्य नेता और वह फिर जब किसी और सीट से लड़ेगा तो भाजपा महिलाओं में प्रचार करेगी कि इन्होने आपको जो 283 सीट मिल सकती थी 850 में वो नहीं मिलने दी तब ये महिलाओं को सफाई देते फिरेंगे और जीतना मुश्किल हो जाएगा

दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं की सीट भी महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती है लेकिन वो तो अपना प्रचार का आधार महिलाओं को ही बनाएंगे और जीत सुनिश्चित करेंगे

मोदी जी को पता था यह बिल पास नहीं होगा और इसलिए विपक्ष को बेहाल करने के लिए ये खेल खेला था अब इसका असर बंगाल में जमकर देखने को मिलेगा हो सकता है जब विपक्ष को अपनी गलती का एहसास हो तो वह खुद आरक्षण बिल ले कर आए 

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