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ऑस्ट्रेलिया : ब्रिस्बेन में पस्त हुआ खालिस्तानी प्रोपेगेंडा

खालिस्तानियों का प्रोपेगेंडा फेल (तस्वीर साभार: द ऑस्ट्रेलिया टुडे)
भारत में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की गिरफ्तारी के लिए जारी धड़-पकड़ के बीच ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में आज 19 मार्च को ‘रेफरेंडम-2020’ (सिखों का अलग देश बनाने के लिए वोटिंग) की तारीख सुनिश्चित हुई थी। इसका सोशल मीडिया पर जोरो-शोरों से प्रचार भी हुआ था। हालाँकि जब वोट का दिन आया तो हाल कुछ और दिखे। सामने आई तस्वीरों में सेंटर के बाहर नजर आ रहे चंद सिखों के साथ ये खालिस्तानी प्रोपेगेंडा पूरी तरह फेल होता नजर आया।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में देख सकते हैं कि जहाँ रेफरेंडम का स्थान निर्धारित किया गया था। वहाँ चंद लोग खालिस्तान का झंडा लेकर खड़े नजर आए। रिपोर्टर के अनुसार, वहाँ 100 लोग भी मुश्किल से इकट्ठा हुए हैं। बाहर खालिस्तान रेफरेंडम ऑस्ट्रेलिया का पोस्टर लगा हुआ है और कुछ लोग खालिस्तानी झंडा लेकर खड़े हैं। इसके अलावा आसपास कुछ नहीं है।

ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में भी दिख रहा है कि कैसे जिस खालिस्तान रेफरेंडम का इतना हल्ला किया गया था वो चंद लोगों के साथ सिमट गया है।

ऐसी तस्वीरें देखने के बाद नेटीजन्स में संतुष्टि दिखाई दे रही है। वो कमेंट कर करके उन सिखों को धन्यवाद दे रहे हैं जिनके कारण ये खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फेल हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि मेलबर्न में 10000 के करीब सिख थे, लेकिन इस रेफरेंडम में चंद लोग हैं।

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये कह रहे हैं कि इस रेफरेंडम में शामिल लोगों का भारतीय पासपोर्ट सरकार को रद्द कर देना चाहिए और उन्हें वापस दोबारा भारत में नहीं आना देना चाहिए।

खालिस्तानी प्रोपेगेंडा

खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने एक अलग देश खालिस्तान के लिए दुनिया के तमाम सिखों में रेफरेंडम 2020 नाम से वोटिंग शुरू करवाई थी। इससे पहले 29 जनवरी 2023 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी वोटिंग हुई थी। तब कई खालिस्तानी समर्थकों ने बल्ले और धारदार हथियारों से वार किया था। इतना ही नहीं ब्रिस्बेन में भी पिछले कुछ समय से हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जाता है। कई भारत विरोधी नारे और मोदी विरोधी नारे दीवारों पर लिखे जाने की घटना सामने आती रहती है।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं : कुमार विश्वास

कृषि कानूनों के विरोध में हुए मोदी विरोधियों द्वारा समर्थित तथाकथित किसान आंदोलन में भी खालिस्तान नज़र आया। 26 जनवरी को लाल किला पहुँच उपद्रव करने पर भी मोदी विरोधी पार्टियां इस आंदोलन को अपना समर्थन देती रहीं। यानि भारत में राजनीति नहीं सियासत इतने निचले स्तर पर पहुंची हुई, जहाँ कुर्सी के भूखे नेताओं और इनकी पार्टियों की नज़र सिर्फ सत्ता पर है देश पर नहीं। जिस खालिस्तान ने देश की प्रधानमंत्री की जान ले ली, उसके बावजूद विपक्ष द्वारा सरकार के साथ नहीं खड़ा होना इनका छद्दम देशप्रेम दर्शा रहा है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से इस सरहदी राज्य में खालिस्तानी शक्तियां फिर से सिर उठा रही हैं। विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकियों से स्थानीय लोगों के ‘गठजोड़’ की कहानियां कई बार सामने आने के बावजूद मान सरकार बंद आंख से तमाशा देखने में मशगूल है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक और आस्ट्रेलिया से लेकर कनाडा और अन्य देशों तक खालिस्तानी समर्थक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हैं। 
पंजाब में AAP की मान सरकार आने के बाद फिर KHALISTAN बनाने की मांग तेज
पंजाब में तो सरकार की नाक के नीचे खालिस्तानी समर्थकों ने खुलेआम जुलूस निकाला था। इसे रोकना तो दूर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने इसे बकायदा पुलिस प्रोटेक्शन दिया। आप सरकार के ऐसे ही सहयोगात्मक रवैये का ही दुष्परिणाम हाल ही में दिल्ली और ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों की सक्रियता को लेकर सामने आया है। एक ओर केंद्र की पीएम मोदी सरकार की आतंक, आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर प्रहार करने के लिए जीरो टोलरेंस नीति लगातार जारी है। दूसरी ओर आप की दिल्ली और पंजाब की सरकार राष्ट्र विरोधी खालिस्तानी समर्थकों के लिए पलक-पांवड़े बिछा रही है।

मोदी सरकार की आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति
मोदी सरकार ने जीरो टोलरेंस नीति आतंकवादी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) सहित कुछ संगठनों को आतंकवादी घोषित कर उनपर प्रतिबंध लगाया था। टीआरएफ पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा समूह है। अब आईएसआई समर्थित खालिस्तान टाइगर फोर्स के सहयोगी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला के खिलाफ गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन देने और जबरन वसूली में शामिल रहे कनाडा में रहने वाले अर्शदीप सिंह गिल को आतंकवादी घोषित कर दिया है। पंजाब में जन्मा और अभी कनाडा में बसा गिल उर्फ अर्श डल्ला बड़े स्तर पर मादक पदार्थों तथा हथियारों की सीमापार तस्करी में शामिल है। वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) के साथ जुड़ा है और घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की तरफ से आतंकी मॉड्यूल का संचालन करता है। गिल ऐसे अनेक मामलों में आरोपी है, जिन्हें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दर्ज किया है और जिनमें एजेंसी जांच कर रही है।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं- विश्वास
आप और खालिस्तानी समर्थकों का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से चार दिन पहले भी पूर्व आप नेता कुमार विश्वास ने सनसनीखेज खुलासा किया था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को खालिस्तानी अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास का आरोप था कि केजरीवाल पंजाब में चुनाव जीतने और आप की सरकार बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्योंकि अरविंद केजरीवाल पंजाब में अलगाववादियों के समर्थक हैं। कुमार विश्वास ने कहा कि एक बार केजरीवाल ने उनसे कहा था कि वे या तो पंजाब के मुख्यमंत्री बनेंगे या स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनकर अपना पीएम बनने का सपना साकार करेंगे। इसीलिए केजरीवाल को अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास ने कहा कि एक ऐसा आदमी जिसे एक समय मैंने ये तक कहा था कि अलगाववादियों का साथ नहीं लीजिए। तो उन्होंने कहा था कि नहीं-नहीं हो जाएगा।

मान के राज में बठिंडा में खालिस्तान के समर्थन में नारे और होशियारपुर में निकाली रैली
कवि कुमार विश्वास की बातों में दम इसलिए नजर आने लगा है, क्योंकि पंजाब में मान सरकार बनने के बाद खालिस्तान समर्थक एक बार फिर सक्रिय नज़र आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के बठिंडा में वन विभाग के दफ्तर की दीवार पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे पाए गए हैं, तो वहीं होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली निकाली गई। और तो और इसमें भारत विरोधी और पंजाब बनेगा खलिस्तान जैसे नारे लगाए गए। इन नारों के पीछे प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ की भूमिका सामने आई। ये दावा खुद इस आतंकी संगठन के चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किया है। हैरानी की बात यह है कि होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली राज्य पुलिस की मौजूदगी में ही निकाली गई। अब इस पर फिल्ममेकर अशोक पंडित ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को घेरा था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह अरविंद केजरीवाल का खालिस्तानियों के लिए उधार चुकाने का समय है, क्योंकि खालिस्तान वालों ने ही चुनाव के समय केजरीवाल जी का समर्थन किया था।

राजधानी में बड़ी वारदात की साजिश रच रहे दो खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार
आप नेताओं की शह पर खालिस्तान समर्थकों की सक्रियता बनी हुई है। देश की राजधानी से दिल्ली पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। दोनों खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सदस्य हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के कई इलाकों में दीवारों पर खालिस्तानी संदेश लिखे थे। वहीं देश की खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी समर्थकों के एक्टिव होने की सूचना जारी करते हुए बड़ा हमला होने की चेतावनी दी है। इसके बाद से पूरी दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है और चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। दोनों आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं। ये विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू के इशारे पर दिल्ली में खालिस्तानी स्लीपर सेल के साथ कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक दोनों को देश-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग की गई थी।

दिल्ली में कई जगह पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 के लगाए पोस्टर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार दोनों आरोपी विक्रम सिंह व बलराम सिंह विदेश में बैठे गुरपंत सिंह पन्नू के इशारों पर काम कर रहे थे। वो खलिस्तानी टेरर नेटवर्क के स्लीपर सेल की मदद से किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। 12 जनवरी को दिल्ली के जनकपुरी, तिलक नगर, पश्चिम विहार समेत तकरीबन 12 जगहों पर खालिस्तान के समर्थन में लगे पोस्टर एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। इतना ही नहीं रेफरेंडम 2020 लिखकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने इन पोस्टरों को हटाकर दिवारों पर पेंट किया। इससे पहले खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने भी वीडियो जारी करके दिल्ली में हमले की धमकी दी थी। लाल किले पर झंडा फहराने वाले को 5 मिलियन डॉलर का इनाम देने की बात भी कही थी। पुलिस सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन पोस्टरों को लगाने वालों की पहचान करने में जुटी है। इन समर्थकों ने अंग्रेजी व गुरमुखी में खालिस्तान जिंदाबाद, एसएफजे, 1984, पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 वोट फॉर खालिस्तान जैसे राष्ट्रविरोधी नारे लिखे गए थे।

ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों ने तिरंगा लिए भारतीयों पर किया हमला
राजधानी दिल्ली ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में भी खालिस्तानी समर्थक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपने हाथों में लेकर खड़े भारतीयों पर हमला किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए जिनको अस्पताल में भर्ती किया गया है। ऑस्ट्रेलिया टुडे ने ट्वीट कर बताया कि मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में खालिस्तान समर्थकों के हमलों में पांच लोग घायल हो गए। वीडियो वायरल होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थक द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है।

ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर दो स्क्वायर से दो खालिस्तानी पकड़े
भाजपा नेता सिरसा ने कहा कि असामाजिक तत्व जो इन गतिविधियों से देश की शांति और सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ छात्र तिरंगा झंडा लिए हुए खड़े हैं तभी वहां खालिस्तानी समर्थक अचानक आते हैं और तिरंगा झंडा लिए स्टूडेंट और कुछ लोगों को खदेड़ देते हैं और उन पर हमला कर रहे हैं वहीं खालिस्तान समर्थक अपना खुद का झंडा हाथ में लिए हैं। हिंदू ह्यूमन राइट्स ऑस्ट्रेलेशिया की निदेशक सारा एल गेट्स ने खालिस्तान समर्थकों के एक समूह द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ले जा रहे एक भारतीय युवक को खदेड़ते हुए ट्विटर पर वीडियो साझा किया। 

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ऑस्ट्रेलिया टुडे ने पहले बताया कि भारतीयों ने विक्टोरिया पुलिस को सूचित किया था कि उन्होंने देश में बढ़ती खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर एक विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। इस बीच हमले की निंदा करते हुए विक्टोरिया पुलिस ने बताया कि हिंसक हमले के बाद अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए दो लोगों की उम्र 30 साल के आसपास है और उन्हें दंगाई व्यवहार के लिए पेनल्टी नोटिस जारी किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया : 4 दिन के अंदर 2 हिंदू मंदिरों पर हमला; ‘Target Modi, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’; शिव विष्णु मंदिर पर लिखे भारत विरोधी नारे

              मेलबर्न में ऐतिहासिक शिव विष्णु मंदिर पर खालिस्तानी समर्थकों ने किया हमला (फोटो क्रेडिट-फर्स्ट पोस्ट)
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खालिस्तानी समर्थकों ने एक और हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की। बदमाशों ने कैरम डाउन्स में ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया और तोड़फोड़ के दौरान मंदिर के पास की दीवारों पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखे।

खालिस्तानियों द्वारा हिन्दू मंदिरों पर हमला और मोदी विरोधी नारों को सिख समुदाय को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। इस षड़यंत्र को समझना होगा। मोदी, हिन्दू और हिन्दुस्तान विरोध में खालिस्तानियों और मुस्लिम कट्टरपंथियों की भाषा में कोई अंतर नहीं। संभव हो, खालिस्तानियों को मोहरा बनाकर 1984 दोहराने का षड़यंत्र हो। और कट्टरपंथी अपने मकसद में कामयाब हो जाएं। सिख समाज को इस षड़यंत्र को गंभीरता से लेकर खालिस्तानियों से बात करनी चाहिए। खालिस्तानियों का जिस पार्टी से विवाद था, वह आज सत्ता से बाहर है और शायद वापस आने की कोई सम्भावना नहीं दिखती।   

बदमाशों ने तोड़-फोड़ के दौरान ‘टारगेट मोदी (मोदी को निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिख दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला 16 जनवरी 2023 को हुआ। खालिस्तान समर्थकों ने इससे पहले मेलबर्न के उत्तरी उपनगर मिल पार्क (Melbourne’s northern suburb of Mill Park) में BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर कथित तौर पर हमला किया था।

घटना तब हुई, जब श्रद्धालु ‘दर्शन’ के लिए और तीन दिवसीय ‘थाई पोंगल’ त्योहार मनाने के लिए मंदिर पहुँचे थे। ‘थाई पोंगल’ त्यौहार हिंदू आबादी द्वारा मनाया जाता है। हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया चैप्टर के अध्यक्ष मकरंद भागवत ने इस घटना की निंदा की और कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता कि खालिस्तान प्रोपेगेंडा के लिए एक दूसरे हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ से हम कितना परेशान हैं। हम निश्चित रूप से इस मामले को विक्टोरियन बहुसांस्कृतिक आयोग और विक्टोरिया के बहुसांस्कृतिक मंत्री के सामने उठाएँगे। हिंदुओं को मौत की धमकी एक बहुत ही गंभीर मामला है। यहाँ समुदाय इन खालिस्तान समर्थकों से डरता है।”

इस बीच, मेलबर्न हिंदू समुदाय के सदस्य सचिन महते ने कहा, ”अगर इन खालिस्तान समर्थकों में हिम्मत है तो उन्हें शांतिपूर्ण हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के बजाय विक्टोरियन संसद भवन पर कुछ लिखना चाहिए।”

                                    खालिस्तान समर्थकों द्वारा आयोजित एक रैली (इमेज सोर्स- ऑस्ट्रेलिया टुडे)

इससे पहले 15 जनवरी 2023 शाम को मेलबर्न में खालिस्तानी समर्थकों ने एक वाहन रैली निकली थी और जनमत संग्रह के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास किया था। हालाँकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि मेलबर्न में लगभग 60,000 सिखों की आबादी में से 200 से कम व्यक्तियों ने ही इसमें भाग लिया।

विक्टोरिया की यहूदी समुदाय परिषद (Jewish Community Council of Victoria), गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार (Gurdwara Siri Guru Nanak Darbar), चर्चों की विक्टोरियन परिषद (Victorian Council of Churches) और विक्टोरिया की बौद्ध परिषद (Buddhist Council of Victoria) ने हिंदू मंदिरों पर हमले की निंदा की है। परिषदों के अनुसार, हिंदुओं के खिलाफ मौत की धमकी एक चिंता का विषय है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अब खालिस्तान समर्थकों के आतंक में जी रहा है।

                              भारतीय बौद्ध परिषद द्वारा जारी बयान (स्रोत- ऑस्ट्रेलिया टुडे)

                                  जेसीसीवी द्वारा जारी एक बयान (स्रोत- ऑस्ट्रेलिया टुडे)
इससे पहले 12 जनवरी 2023 को ऑस्ट्रेलिया में एक हिंदू मंदिर BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तान समर्थकों ने कथित तौर पर तोड़-फोड़ की थी और उस पर भारत विरोधी नारे लिखे थे। रिपोर्टों के अनुसार,  मेलबर्न के प्रतिष्ठित स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारों लिखे गए थे।

मेलबर्न : ISIS बांग्लादेशी छात्रा को हुई 42 साल की जेल, जज के सामने लगाए ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे

मेलबर्न : ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय में पढने वाली एक बांग्लादेशी छात्रा को 42 साल जेल की सजा सुनाई गई। उसने आईएसआईएस (ISIS) के नाम पर अपने मकान मालिक की चाकू से वार कर हत्या करने की कोशिश की थी।
मोमेना शोमा (26) ने आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने और सोते हुए मकान मालिक के गले पर चाकू से वार करने की बात कबूल की। मोमेना शोमा बांग्लादेशी छात्रा है। घटना से महज आठ दिन पहले वह ऑस्ट्रेलिया आई थी।
विक्टोरिया प्रांत के उच्चतम न्यायालय में सजा सुनाए जाने के दौरान शोमा ने नकाब पहन रखा था और उसकी सिर्फ आंखें नजर आ रही थीं। फैसला सुनाए जाने के दौरान उसने ‘‘अल्लाह हू अकबर” का नारा लगाया। पीडित मकान मालिक रोजर सिंगारावेलू हमले में जीवित बच गये थे और सजा सुनाये जाने के दौरान वह भी न्यायालय में उपस्थित थे।

न्यायाधीश लेसली टेलर ने शोमा को 42 साल जेल की सजा सुनाते हुए कहा, ‘‘तुम जिस मंशा के साथ आयी हो और तुम्हारे काम तथा बयान डर पैदा करने वाले हैं।” सजा के दौरान उसे 31 वर्ष छह महीने तक परोल नहीं मिलेगी।
इतनी कठोर सजा होने पर न ही बांग्लादेश सरकार ने और बांग्लादेश के किसी वकील अथवा नेता ने किसी भी प्रकार से विरोध नहीं किया। जबकि सीरिया में अमेरिका द्वारा आईएसआईएस में शामिल कश्मीरी को गिरफ्तार करने पर भारत सरकार से माँ-बाप द्वारा भारत लाने की गुहार लगाई है। क्योकि उसके माँ-बाप को मालूम है कि उसकी रिहाई के मुकदमा लड़ने वाले वकीलों और नेताओं की कोई कमी नहीं। आधी रात को कोर्ट खुलवा सकते हैं।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उस कश्मीरी व्यक्ति का आवेदन केंद्र को भेज दिया है, जिसमें उसने अपने बेटे को वापस भारत लाने का ...