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ड्रेसिंग रूम में मोदी ने ऐसा क्या कह दिया कि मुस्कुराने लगे रोहित शर्मा और विराट कोहली: प्रधानमंत्री ने दिया न्योता, वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में जाकर मिले और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी द्वारा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने का वीडियो अब सामने आया है, जिसमें वो खिलाड़ियों की हौसला-अफजाई करते हुए कहते हैं कि पूरा देश आपके साथ खड़ा है। उन्होंने भारतीय टीम के खिलाड़ियों से एक-एक कर मुलाकात की और सभी का हौसला बढ़ाया। इस दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड से भी वो गले मिले और उनसे हौसला बनाए रखने को कहा।

मोदी का टीम इंडिया के खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में मुलाकात का वीडियो सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी टीम के सभी खिलाड़ियों से मुलाकात कर रहे हैं। वह सबसे पहले कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली से मिलते हैं। वो रोहित शर्मा ने बोलते हैं, “आप लोग 10 मैच जीतकर यहाँ तक आए हैं। ये तो होता रहता है। मुस्कुराइए भाई, देश आप लोगों को देख रहा है।” वीडियों में पीएम मोदी रोहित और विराट के कंधे को थपथपाते हुए भी दिख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को दिल्ली आने का भी न्यौता दिया है और उनसे संपर्क करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि मैं यहाँ बस हौसला बढ़ाने आ गया था, आप लोग दिल्ली आइए, तो जरूर मिलिए। आपसे मुलाकात के लिए समय निकालेंगे।

पीएम मोदी टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ से कहते हैं, “आप लोगों ने बहुत मेहनत की है।” इस दौरान पीएम मोदी ने रविंद्र जडेजा से गुजराती में बातचीत की, तो जसप्रीत बुमराह से भी पूछा कि क्या वो गुजराती में बात करते हैं, इसके जवाब में बुमराह कहते हैं “थोड़ो-थोड़ो (थोड़ा-थोड़ा)।” फिर वो श्रेयस अय्यर, सूर्य कुमार यादव, कुलदीप यादव से भी मिलते हैं।

पीएम मोदी ने मोहम्मद शमी को गले से लगा लिया और कहा कि आपने इस बार बहुत अच्छा किया है। वहीं, KL राहुल का नाम लेकर उनका हौसला भी पीएम मोदी बढ़ाते दिखे। समाचार एजेंसी ANI ने पीएमओ के हवाले से ये वीडियो जारी किया है और लिखा है, “19 नवंबर को गुजरात के अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईसीसी विश्व कप फाइनल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम इंडिया से उनके ड्रेसिंग रूम में मुलाकात की। पीएम ने खिलाड़ियों से बात की और पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन के लिए उनका हौसला बढ़ाया।”

भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से 6 विकेट से हार गई। पिछले 10 सालों में भारतीय टीम एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाया है। इस हार के बाद सभी खिलाड़ियों के चेहरे मायूसी से भरे नजर आए थे। खुद पीएम मोदी इस मौके पर स्टेडियम में मौजूद थे और उन्होंने विजेता कप्तान पैट कंमिस को ट्रॉफी भी सौंपी और इसके बाद रात में भारतीय ड्रेसिंग रूप में जाकर उन्होंने फाइनल मुकाबला हारने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात की।


मोदी के पहुँचते बदल गया ड्रेसिंग रूम का माहौल, वर्ल्ड कप की हार के बाद बोले खिलाड़ी – आपने हौसला बढ़ाया

 

                     ड्रेसिंग रूम में रविंद्र जडेजा और मोहम्मद शमी से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 के लीग चरण में लगातार 9 मैच जीती और सेमीफइनल में भी जीत दर्ज किया। हालाँकि, लगातार 10 मैच जीतने के बाद फाइनल में ही टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस तरह भारतीय टीम ODI वर्ल्ड कप के ख़िताब से लगातार तीसरी बार दूर रह गई। कप्तान रोहित शर्मा की भावुक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें उनकी आँखों में आँसू देखे जा सकते हैं। इसी तरह ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ विराट कोहली भी टोपी से अपना चेहरा ढँक कर ड्रेसिंग रूम में लौटते दिखे।

मोहम्मद सिराज को तो रविवार (19 नवंबर, 2023) को हुए इस मैच के बाद रोते हुए भी देखा गया। उनके साथी तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने उन्हें ढाँढस बँधाया। अब मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने बताया है कि 6 विकेट से मिली इस हार के बाद ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों की स्थिति क्या थी। उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा हताश थे, उसी तरह टीम के अन्य खिलाड़ी भी हताश थे। उन्होंने बताया कि ड्रेसिंग रूम में उस समय काफी भावुक माहौल था।

राहुल द्रविड़ ने कहा कि एक कोच के रूप में उनके लिए ये सब देखना बहुत कठिन था, क्योंकि उन्हें पता है कि इन खिलाड़ियों ने कितनी अधिक मेहनत की थी, उन्होंने अपना क्या-क्या लगाया था और क्या-क्या त्याग किए थे। राहुल द्रविड़ खुद 2003 की उस भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप के फाइनल में हराया था। उन्होंने कहा कि एक कोच के रूप में उन्हें पता है कि इन खिलाड़ियों ने ये देखना कठिन है क्योंकि मैं इन सबको व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ, मैंने देखा है कि उन्होंने कितने प्रयास किए हैं, पिछले एक महीने में कितना क्रिकेट खेला है, अंतिम महीने में उन्होंने कितनी मेहनत की है।

राहुल द्रविड़ ने कहा कि ये खेल है और उस दिन जो बेहतर टीम थी उसने जीत दर्ज की। उन्होंने कहा, “मुझे पता है अगली सुबह फिर सूर्योदय होगी। बाकियों की तरह हम भी इससे सीखेंगे, इस पर काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे। एक खिलाड़ी के रूप में आप यही करते हैं। आप बहुत अच्छे क्षण देखते हैं, आप नीचे गिरते हैं। आप आगे बढ़ते रहते हैं, रुकते नहीं। अगर आप उठते-गिरते नहीं हैं तो आप सीख नहीं सकते।” राहुल द्रविड़ ने हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की।

उधर भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने ड्रेसिंग रूम में पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर शेयर की। इसमें शुभमन गिल और मोहम्मद शमी भी पीएम मोदी की बातों को सुनते हुए नज़र आ रहे हैं। जडेजा ने लिखा, “ये टूर्नामेंट हमारे लिए बहुत अच्छा रहा, लेकिन कल हम थोड़ा पीछे रह गए। दिल टूट गया है, लेकिन हमारे लोगों का समर्थन हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहता है। ड्रेसिंग रूम में पीएम मोदी का आना ख़ास और प्रेरक था।”

उधर मोहम्मद शमी को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले लगाया। शमी ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, “दुर्भाग्य से कल हमारा दिन नहीं था। मैं टीम के समर्थन के लिए सभी भारतीयों को धन्यवाद कहना चाहूँगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कृतज्ञ हूँ, जिन्होंने खास तौर पर ड्रेसिंग रूम में आकर हमारा हौसला बढ़ाया। हम वापसी करेंगे।”

ऑस्ट्रेलिया : ब्रिस्बेन में पस्त हुआ खालिस्तानी प्रोपेगेंडा

खालिस्तानियों का प्रोपेगेंडा फेल (तस्वीर साभार: द ऑस्ट्रेलिया टुडे)
भारत में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की गिरफ्तारी के लिए जारी धड़-पकड़ के बीच ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में आज 19 मार्च को ‘रेफरेंडम-2020’ (सिखों का अलग देश बनाने के लिए वोटिंग) की तारीख सुनिश्चित हुई थी। इसका सोशल मीडिया पर जोरो-शोरों से प्रचार भी हुआ था। हालाँकि जब वोट का दिन आया तो हाल कुछ और दिखे। सामने आई तस्वीरों में सेंटर के बाहर नजर आ रहे चंद सिखों के साथ ये खालिस्तानी प्रोपेगेंडा पूरी तरह फेल होता नजर आया।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में देख सकते हैं कि जहाँ रेफरेंडम का स्थान निर्धारित किया गया था। वहाँ चंद लोग खालिस्तान का झंडा लेकर खड़े नजर आए। रिपोर्टर के अनुसार, वहाँ 100 लोग भी मुश्किल से इकट्ठा हुए हैं। बाहर खालिस्तान रेफरेंडम ऑस्ट्रेलिया का पोस्टर लगा हुआ है और कुछ लोग खालिस्तानी झंडा लेकर खड़े हैं। इसके अलावा आसपास कुछ नहीं है।

ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में भी दिख रहा है कि कैसे जिस खालिस्तान रेफरेंडम का इतना हल्ला किया गया था वो चंद लोगों के साथ सिमट गया है।

ऐसी तस्वीरें देखने के बाद नेटीजन्स में संतुष्टि दिखाई दे रही है। वो कमेंट कर करके उन सिखों को धन्यवाद दे रहे हैं जिनके कारण ये खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फेल हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि मेलबर्न में 10000 के करीब सिख थे, लेकिन इस रेफरेंडम में चंद लोग हैं।

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये कह रहे हैं कि इस रेफरेंडम में शामिल लोगों का भारतीय पासपोर्ट सरकार को रद्द कर देना चाहिए और उन्हें वापस दोबारा भारत में नहीं आना देना चाहिए।

खालिस्तानी प्रोपेगेंडा

खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने एक अलग देश खालिस्तान के लिए दुनिया के तमाम सिखों में रेफरेंडम 2020 नाम से वोटिंग शुरू करवाई थी। इससे पहले 29 जनवरी 2023 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी वोटिंग हुई थी। तब कई खालिस्तानी समर्थकों ने बल्ले और धारदार हथियारों से वार किया था। इतना ही नहीं ब्रिस्बेन में भी पिछले कुछ समय से हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जाता है। कई भारत विरोधी नारे और मोदी विरोधी नारे दीवारों पर लिखे जाने की घटना सामने आती रहती है।

मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया हिंदू मंदिरों पर हमले का मसला, कम से कम 5 मंदिरों को खालिस्तानी बना चुके हैं निशाना

एंथनी अल्बनीज और पीएम मोदी (साभार: ANI)
पिछले कुछ समय से विदेशों में हिंदुओं की आस्था के केंद्र मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है। इसी तरह के हमले ऑस्ट्रेलिया में भी अंजाम दिए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) इस समय भारत दौरे पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अल्बनीज के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा, “मैंने ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें देखी हैं। मैंने पीएम अल्बनीज को इस बात से अवगत करा दिया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई उनके लिए प्राथमिकता है।”

पिछले दो महीने में ऑस्ट्रेलिया में कम-से-कम 5 बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों द्वारा जिन हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है, वे निम्नलिखित हैं।

ब्रिस्बेन में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर: 4 मार्च 2023 को ब्रिस्बेन के बरबैंक उपनगर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तस्वीरें बना दी गई थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ को खालिस्तानी समर्थक समर्थकों ने अंजाम दिया थ। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास दीवारों पर हिंदू विरोधी, भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे थे।

ब्रिस्बेन के प्रसिद्ध गायत्री: 17 फरवरी 2023 को ब्रिस्बेन को गायत्री माता मंदिर के पुजारी को महाशिवरात्रि ना मनाने की चेतावनी दी गई थी। चेतावनी देने वाले शख्स ने खुद को खालिस्तानी बताया था और कहा था कि वह पाकिस्तान के लाहौर से फोन कर रहा है। फोन करने वाले ने कहा था, “यदि तुम 19 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि मनाने की योजना बना रहे हो तो पुजारी से खालिस्तान का समर्थन करने के लिए कहो। तुमको अपने कार्यक्रम के दौरान पाँच बार ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाना है।”

मेलबर्न काली माता मंदिर: 16 फरवरी 2023 को मेलबर्न के काली माता मंदिर में भजन कार्यक्रम आयोजित करने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के उत्तरी उपनगर में स्थित काली माता मंदिर की एक महिला पुजारी को भारतीय गायक कन्हैया मित्तल का भजन कार्यक्रम आयोजित करने पर धमकी दी गई थी। कहा जाता है कि ये धमकी खालिस्तानी आतंकवादियों ने दी थी।

हरे कृष्ण मंदिर: 23 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों द्वारा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर के अल्बर्ट पार्क स्थित हरे कृष्ण मंदिर में इसी तरह की घटना को अंजाम दिया गया था। मंदिर मेलबर्न में भक्ति योग आंदोलन के केंद्र के रूप में कार्य करता था और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) द्वारा चलाया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की दीवारों को ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ नारे लिखे गए थे। इतना ही नहीं, बदमाशों ने मारे गए खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को शहीद भी बताया था।

मेलबर्न में शिव विष्णु मंदिर: 17 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने मेलबर्न के कैरम डाउन्स स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर में तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास की दीवारों पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखे। ‘टारगेट मोदी’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिरों की दीवारों पर लिखे गए थे।

मेलबोर्न में BAPS स्वामीनारायण मंदिर: 12 जनवरी 2023 को मेलबोर्न में रहने वाले हिंदू समुदाय के हिंदू मंदिर पर हमला किया गया था। मेलबोर्न के उत्तरी उपनगर मील पार्क में स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तानी हमलावरों ने तोड़फोड़ की थी। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी और नरेंद्र मोदी विरोधी नारे लिख दिए थे।

पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ऑस्ट्रेलिया में चरमपंथी खालिस्तानी समूहों द्वारा भारतीय समुदाय पर किए गए हमले की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों से मामले की जांच शुरू करने और अपराधियों को दंडित करने का आग्रह किया था। खालिस्तानी स्वतंत्र खालिस्तान के लिए ऑस्ट्रेलिया में तथाकथित जनमत संग्रह भी करवा रहे हैं।


ऑस्ट्रेलिया : 4 दिन के अंदर 2 हिंदू मंदिरों पर हमला; ‘Target Modi, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’; शिव विष्णु मंदिर पर लिखे भारत विरोधी नारे

              मेलबर्न में ऐतिहासिक शिव विष्णु मंदिर पर खालिस्तानी समर्थकों ने किया हमला (फोटो क्रेडिट-फर्स्ट पोस्ट)
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खालिस्तानी समर्थकों ने एक और हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की। बदमाशों ने कैरम डाउन्स में ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया और तोड़फोड़ के दौरान मंदिर के पास की दीवारों पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखे।

खालिस्तानियों द्वारा हिन्दू मंदिरों पर हमला और मोदी विरोधी नारों को सिख समुदाय को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। इस षड़यंत्र को समझना होगा। मोदी, हिन्दू और हिन्दुस्तान विरोध में खालिस्तानियों और मुस्लिम कट्टरपंथियों की भाषा में कोई अंतर नहीं। संभव हो, खालिस्तानियों को मोहरा बनाकर 1984 दोहराने का षड़यंत्र हो। और कट्टरपंथी अपने मकसद में कामयाब हो जाएं। सिख समाज को इस षड़यंत्र को गंभीरता से लेकर खालिस्तानियों से बात करनी चाहिए। खालिस्तानियों का जिस पार्टी से विवाद था, वह आज सत्ता से बाहर है और शायद वापस आने की कोई सम्भावना नहीं दिखती।   

बदमाशों ने तोड़-फोड़ के दौरान ‘टारगेट मोदी (मोदी को निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिख दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला 16 जनवरी 2023 को हुआ। खालिस्तान समर्थकों ने इससे पहले मेलबर्न के उत्तरी उपनगर मिल पार्क (Melbourne’s northern suburb of Mill Park) में BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर कथित तौर पर हमला किया था।

घटना तब हुई, जब श्रद्धालु ‘दर्शन’ के लिए और तीन दिवसीय ‘थाई पोंगल’ त्योहार मनाने के लिए मंदिर पहुँचे थे। ‘थाई पोंगल’ त्यौहार हिंदू आबादी द्वारा मनाया जाता है। हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया चैप्टर के अध्यक्ष मकरंद भागवत ने इस घटना की निंदा की और कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता कि खालिस्तान प्रोपेगेंडा के लिए एक दूसरे हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ से हम कितना परेशान हैं। हम निश्चित रूप से इस मामले को विक्टोरियन बहुसांस्कृतिक आयोग और विक्टोरिया के बहुसांस्कृतिक मंत्री के सामने उठाएँगे। हिंदुओं को मौत की धमकी एक बहुत ही गंभीर मामला है। यहाँ समुदाय इन खालिस्तान समर्थकों से डरता है।”

इस बीच, मेलबर्न हिंदू समुदाय के सदस्य सचिन महते ने कहा, ”अगर इन खालिस्तान समर्थकों में हिम्मत है तो उन्हें शांतिपूर्ण हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के बजाय विक्टोरियन संसद भवन पर कुछ लिखना चाहिए।”

                                    खालिस्तान समर्थकों द्वारा आयोजित एक रैली (इमेज सोर्स- ऑस्ट्रेलिया टुडे)

इससे पहले 15 जनवरी 2023 शाम को मेलबर्न में खालिस्तानी समर्थकों ने एक वाहन रैली निकली थी और जनमत संग्रह के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास किया था। हालाँकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि मेलबर्न में लगभग 60,000 सिखों की आबादी में से 200 से कम व्यक्तियों ने ही इसमें भाग लिया।

विक्टोरिया की यहूदी समुदाय परिषद (Jewish Community Council of Victoria), गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार (Gurdwara Siri Guru Nanak Darbar), चर्चों की विक्टोरियन परिषद (Victorian Council of Churches) और विक्टोरिया की बौद्ध परिषद (Buddhist Council of Victoria) ने हिंदू मंदिरों पर हमले की निंदा की है। परिषदों के अनुसार, हिंदुओं के खिलाफ मौत की धमकी एक चिंता का विषय है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अब खालिस्तान समर्थकों के आतंक में जी रहा है।

                              भारतीय बौद्ध परिषद द्वारा जारी बयान (स्रोत- ऑस्ट्रेलिया टुडे)

                                  जेसीसीवी द्वारा जारी एक बयान (स्रोत- ऑस्ट्रेलिया टुडे)
इससे पहले 12 जनवरी 2023 को ऑस्ट्रेलिया में एक हिंदू मंदिर BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तान समर्थकों ने कथित तौर पर तोड़-फोड़ की थी और उस पर भारत विरोधी नारे लिखे थे। रिपोर्टों के अनुसार,  मेलबर्न के प्रतिष्ठित स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारों लिखे गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाने की आड़ में पाकिस्तानी मूल की सीनेटर फारुखी ने हिन्दुओं के प्रति उगला जहर

जैसे-जैसे विश्व में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी के कारण हिन्दुत्व की पताका फहरा रही है, हिन्दू विरोधी अपने-अपने बिलों से बाहर आ रहे हैं, जो हिन्दुओं के लिए शुभ संकेत है कि वह अपनी आंखें खोलकर देखें कि सेकुलरिज्म के नाम पर उनको किस तरह पागल बनाया जा रहा है। 
पाकिस्तानी मूल की ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन्स सीनेटर मेहरीन फारूकी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के बहाने संघीय सीनेट में सभी सीमाओं को पार करते हुए घृणा के स्तर तक उतर आईं।

पाकिस्तान में पैदा हुई सीनेटर फारूकी ने पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रधानमंत्री मॉरिसन के सौहार्दपूर्ण कामकाजी संबंधों की तारीफ की और फिर जब बात भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की आई तो दक्षिण पंथी नेता बताते हुए इधर-उधर की सुनी-सुनाई बातों का हवाला देकर लोकतान्त्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को ऑथॉरिटारियन सरकार अर्थात सत्तावादी प्रशासन बता डाला।

मोदी को यूँ खुलेआम सीनेट में बुरा बताने वाली इस सीनेटर की बात करें तो मेहरीन फारुकी का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था, वही पाकिस्तान जो हाल ही में धार्मिक अल्पसंख्यकों हिन्दुओं और ईसाईयों पर अत्याचार के लिए चर्चा में था। पाकिस्तान में लगातार हिंदू मंदिरों को नष्ट करने और नाबालिग सिख, ईसाई और हिंदू लड़कियों के अपहरण की घटनाएँ नियमित तौर पर खबरों में होती हैं। हालाँकि, सीनेटर फारूकी ने पाकिस्तान में हो रहे इन अत्याचारों का कोई उल्लेख नहीं किया।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू समुदाय को बुरी तरह से निशाना बनाने वाली पहली ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन पार्टी की नेता नहीं हैं। इस साल की शुरुआत में, एनएसडब्ल्यू के ग्रीन एमएलसी डेविड शूब्रिज ने भी हिंदूफोबिया को ग्रीन्स पार्टी का ट्रेडमार्क बना दिया था। जिस पर उन्हें ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय से माफी माँगने के लिए भी कहा था।

वहीं अब सीनेटर फारूकी ने ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय हिंदू प्रवासियों पर हमला करते हुए इसे भारतीय राष्ट्रवाद पर हमले का नाम दे दिया। उन्होंने आगे हिन्दुओं के प्रति अपनी घृणा, हिंदूफोबिया को भारतीय पीएम मोदी की महज आलोचना में कहे शब्द बताकर खुद को पाक-साफ बताना चाहा। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के हिन्दू समुदाय ने फारुखी को आड़े हाथों लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिडनी में एक हिंदू एक्टिविस्ट रवि सिंह धनखड़ ने फारुखी के बयान पर टिप्पणी करते हुए द ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया, “मेहरीन फारुकी उस विस्तृत ग्रीन्स योजना का हिस्सा हैं जो हिंदुओं और यहूदियों पर उनके ऐतिहासिक उत्पीड़न का विरोध करने से रोकने के लिए हमला करती है।”

फारूकी ने सीनेट में दिए अपने स्पीच में सिडनी में पिछले साल के अंत और इस साल की शुरुआत में घटी घटनाओं का भी जिक्र किया। जिसमें ऑस्ट्रेलिया में हिन्दू समुदाय को आतंकी संगठन बब्बर खालसा ने निशाना बनाया था। हालाँकि, फारुकी इसके लिए भी मोदी और हिन्दुओं को ही दोषी ठहराने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, “इस साल, जब भारत में मोदी के कृषि कानूनों को लेकर जब विरोध तेज था, तब सिडनी के हैरिस पार्क में चार युवा सिख पुरुषों पर हमले सहित यहाँ समूहों के बीच हिंसा और तकरार की कई सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई घटनाएँ सामने आई हैं।” जबकि पूरा विश्व जानता है यह आधा सच है। जहाँ तीन खालिस्तानियों और एक हिन्दू के बीच हुई इस झड़प का मामला कोर्ट पहुँचा और एक्शन भी हुआ। वहीं फारुखी बड़ी चालाकी से इसका ठिकरा ऑस्ट्रेलियाई हिन्दू समुदाय पर फोड़कर खालिस्तानियों का बचाव कर रही थी।

जिस पर वहीं की एक एकेडमिशियन सारा गेट्स ने आड़े हाथों लेते हुए द ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया, “सिडनी में जो हुआ उसका ऑस्ट्रेलियाई समाज में कोई स्थान नहीं है, लेकिन सीनेटर मेहरीन फारुकी ने जानबूझकर आधा सच बताना चुना। उन्होंने कहा, तीन सिख युवकों और एक हिंदू युवक को सड़क पर लड़ाई के लिए अदालत का सामना करना पड़ा, हालाँकि, फारूकी उस घटना के लिए पूरे हिंदू समुदाय को बदनाम कर रही हैं।”

ग्रीन सीनेटर मेहरीन फारुकी की घृणित राजनीति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, गेट्स ने कहा कि सड़कों पर हिंदू प्रवासियों पर हमले और उनके व्यवसायों को निशाना बनाना ग्रीन्स की विभाजनकारी और घृणित राजनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।

सारा ने कहा, “ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार से उन संगठनों को ट्रैक करने का आग्रह किया जो हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाने के लिए विदेशों में स्थित प्रतिष्ठानों से प्रेरणा, वित्त पोषण और मार्गदर्शन लेते हैं। साथ ही सारा ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा, “मैं राज्य और संघीय सरकारों और प्रधानमंत्री सहित लेबर और लिबरल पार्टी के सदस्यों से ग्रीन्स पार्टी के विभाजनकारी और घृणा से भरे एजेंडे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का आह्वान करती हूँ।”

‘अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हमें दे दो’: क्रैग केली, ऑस्ट्रेलियाई सांसद

                                        ऑस्ट्रेलिया के सांसद क्रैग केली ने सीएम योगी के काम की तारीफ़ की 
उत्तर प्रदेश में अब कोरोना वायरस संक्रमण के मात्र 1608 सक्रिय मामले बचे हैं। तुलना के लिए बता दें कि ये आँकड़ा केरल में 1.15 लाख और महाराष्ट्र में 1.14 लाख है। लेकिन भारत की पक्षपाती मीडिया को ये सब नहीं दिख रहा है। उसके लिए अब भी उद्धव ठाकरे ‘बेस्ट सीएम’ और ‘केरल मॉडल’ सबसे अच्छा है। पर यहाँ से 7800 किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया के सांसद क्रैग केली को मुख्यमंत्री योगी का कुशल प्रबंधन दिख रहा है। जो भारतीय विपक्ष और पक्षपाती मीडिया के लिए बहुत ही लज्जा की बात है। विपक्ष द्वारा आलोचना करना तो समझ आता है, लेकिन पक्षपाती मीडिया किस आधार पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशंसनीय कार्यों को नज़रअंदाज़ कर रही है, जो इस बात को प्रमाणित करता है कि विपक्ष ने मीडिया को किसी न किसी रूप कितना प्रभावित कर रखा है। 

भारतीय मीडिया को क्या शर्म आ रही है?

ज्ञात हो, ऑस्ट्रलियाई सांसद क्रैग केली से पूर्व WHO भी कोरोना प्रबंधन को लेकर योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा कर चूका है। 

क्रैग केली ने कई महीनों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर नजर रखी हुई है और जिस तरह से अपने कुशल प्रबंधन से उन्होंने राज्य में कोरोना को मात दी है, इससे ऑस्ट्रेलियाई सांसद प्रभावित हैं। हाल ही में उन्होंने लिखा कि भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के लिए ताली बजनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के ह्यूजेस से सांसद क्रैग केली ने कहा कि काश ऐसा कोई विकल्प होता कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हम कुछ दिनों के लिए ले सकते।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में आइवरमेक्टिन दवा की कमी और नेतृत्व की अक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ही इन चीजों को ठीक कर सकते हैं। उन्होंने एक डेटा एनालिस्ट के ट्वीट को कोट करते हुए ये बातें लिखीं। उन्होंने अपने आँकड़े में बताया था कि भारत के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य में पिछले 1 महीने में कोरोना के मात्र 1% मामले सामने आए हैं और 2.5% मौतें हुई हैं।

जबकि उत्तर प्रदेश में भारत की 17% जनसंख्या रहती है। उक्त डेटा एनालिस्ट जे चमी ने उदाहरण के लिए महाराष्ट्र के आँकड़े गिनाए, जहाँ देश की 9% जनसंख्या रहती है। उन्होंने बताया कि इस राज्य में कोरोना के देश के कुल 18% मामले हैं और आधी से अधिक मौतें तो यहीं हो रही हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ महाराष्ट्र भारत का फार्मा हब है, लेकिन आइवरमेक्टिन के प्रयोग में उत्तर प्रदेश ने सफलता हासिल की है।

ऐसा नहीं है कि क्रैग केली ने पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ की हो। जून 2021 के अंत में भी बताया था कि कैसे 23 करोड़ की जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश ने कोरोना के ‘डेल्टा वैरिएंट’ पर विजय हासिल की है। उन्होंने 30 जून को ये ट्वीट करते हुए बताया था कि जहाँ उस दिन उत्तर प्रदेश में कोरोना के 182 नए मामले सामने आए, वहीं यूके में ये आँकड़ा 20,479 रहा। उन्होंने इवरमेक्टिन दवा के सही उपयोग को लेकर भी सीएम योगी की प्रशंसा की।

मई में ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ ने भी इसकी तारीफ़ की थी कि किस तरह उत्तर प्रदेश में घर-घर जाकर कोविड टेस्टिंग की जा रही है। गाँवों तक में स्वास्थ्यकर्मी जाकर कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों के आइसोलेशन की व्यवस्था करते हैं। WHO ने बताया था कि किस तरह 97,941 गाँवों में ये चल रहा है। तब भी क्रैग केली ने कहा था कि उत्तर प्रदेश कोरोना को मात दे रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और WHO ये किसी को नहीं बता रहा कि ये सब कैसे संभव हो रहा है।

कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए यूपी सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की सलाह के बाद प्रदेश में आइवरमेक्टिन को कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयोग किया। इसके साथ ही डॉक्‍सीसाइक्लिन को भी कोरोना मरीजों के लिए प्रयोग में लाया गया। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्‍य था, जिसने बड़े पैमाने पर रोगनिरोधी और मेडिकल उपयोग में आइवरमेक्टिन का प्रयोग किया।

ऑस्ट्रेलिया : आतंकी हरकतों में लिप्त मौलाना की नागरिकता छीनी

                            आतंकी मौलाना को 2009 में 15 साल की सजाए सुनाई गई थी 

ऑस्ट्रेलिया ने मौलाना अब्दुल नसीर बेनब्रीका की नागरिकता छीन ली है। अल्जीरियन मूल के मौलाना पर 2005 में कई आतंकी घटनाओं की साजिश रचते हुए दबोचा गया था। इस्लामी मौलवी अब्दुल नसीर बेनब्रीका को 2009 में 15 सालों की सजा सुनाई गई थी और वो अगले महीने जेल से निकल सकता है। लेकिन, गृह मंत्री पीटर बटन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के लोगों को बचाने के लिए मौलाना की नागरिकता छीनना एक उचित कदम है।

एक और जानने वाली बात ये है कि आज तक ऑस्ट्रेलिया में इससे पहले किसी व्यक्ति के देश में रहते हुए नागरिकता नहीं छीनी गई, मौलाना ऐसी कार्रवाई का सामना करने वाला पहला व्यक्ति होगा। उसके वकीलों ने इस कार्रवाई पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। गृह मंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश के खिलाफ बड़ा आतंकी खतरा पैदा करता है तो उसके खिलाफ क़ानून के तहत हरसंभव कार्रवाई की जाएगी, जिससे ऑस्ट्रेलिया की रक्षा हो सके, चाहे वो कोई भी हो। 

ऑस्ट्रेलिया में नियम है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तभी छीनी जा सकती है, जब वो दो देशों की नागरिकता रखता हो। इससे ये निश्चित किया जाता है कि ऐसा न हो कि नागरिकता छीने जाने के बाद उक्त व्यक्ति किसी भी देश का न रहे। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि इससे देश की सुरक्षा पर अचानक से और अनअपेक्षिक प्रभाव पड़ सकता है।

यदि यही कार्यवाही भारत में की जाए या की गयी होती, जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष, गंगा-जमुनी तहजीब का राग रागने वाला गैंग, संविधान की दुहाई देने वाला गैंग आदि और जितने भी अराजक तत्व हैं, सब छातियों के पीटने की आवाज़ से आसमान को सिर पर उठा लेते। ये लोग ऐसा केवल भारत में ही कर सकते हैं, भारत से बाहर भीगी बिल्ली से भी ज्यादा डर के रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुआ, सभी सरकार के निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। क्योंकि इस्लामिक आतंकवाद से सभी दुखी हैं। जबकि भारत में आतंकवादी समर्थक आतंकवाद पर प्रहार करने को मुस्लिम-विरोधी एवं मुस्लिमों पर अत्याचार का नाम देते हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल एवं एयर स्ट्राइक करने पर यहाँ का बेशर्म विपक्ष सबूत मांगता है। 
ट्विटर पर लोगों की प्रक्रियाएं :-

मौलाना अब्दुल नसीर बेनब्रीका को 2005 में गिरफ्तार किया गया था और पाया गया था कि वो एक आतंकी संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व करते हुए आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। वो 1989 से ही ऑस्ट्रेलिया में रहता आ रहा था। उसके साथ 16 अन्य भी गिरफ्तार हुए थे, जिन्होंने कई आतंकी हमलों की साजिश रची थी। मेलबर्न में होने वाले वार्षिक फुटबॉल रूल्स फाइनल मैच को दहलाने की साजिश थी, जिसमें 1 लाख दर्शक आते हैं।

मौलाना अब्दुल नसीर बेनब्रीका को दी गई सज़ा में 12 साल की नॉन-पैरोल अवधि भी शामिल है, जो नवंबर 5, 2020 को एक्सपायर हो रही है। विक्टोरिया स्टेट के सुप्रीम कोर्ट में ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने अर्जी दी है कि उसकी सज़ा बढ़ा दी जाए, ताकि वो जेल में ही बना रहे। एक नियम के तहत आतंकियों को सज़ा पूरी होने के बाद भी 3 साल अतिरिक्त जेल में रखा जा सकता है। अब तक 2 बार कोर्ट ने 28-28 दिन के लिए उसकी सज़ा बढ़ाई है।

हाल ही में पूर्वी अफ्रीका में स्थित मलावी की पुलिस ने एक करोड़पति ईसाई ‘पैगम्बर’ को गिरफ्तार किया, जो चमत्कार के द्वारा काफी कुछ करने का दावा करता रहा है। अपने अनुयायियों के पीच ‘पैगम्बर’ कहे जाने वाले ईसाई उपदेशक पर धोखाधड़ी से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के मामले दर्ज हैं। उसे बुधवार (नवंबर 18, 2020) को गिरफ्तार किया गया। ईसाई उपदेशक शेफर्ड बुशिरी खुद को भी Prophet कहता है। 

दोहा एयरपोर्ट पर महिला यात्रियों के प्राइवेट पार्ट्स छूकर जाँच करने के आदेश

                                                                                                                                प्रतीकात्मक 
कतर के दोहा एयरपोर्ट पर सिडनी जाने वाली महिला यात्रियों से पैंट उतारकर उनके प्राइवेट पार्ट्स की जाँच का आदेश दिया गया। इस घटना को लेकर काफी विवाद पैदा हो गया। महिला यात्रियों को फ्लाइट से उतारकर उन्हें जबरन एंबुलेंस में बैठाया गया और कपड़े उतारने का आदेश दिया गया। यात्रियों से महिला नर्सों ने कहा कि विमान पर वापस जाने से पहले उनकी योनि की जाँच करने की आवश्यकता है।

विवाद इस बात को लेकर और भी तब बढ़ गया जब इस जाँच के दौरान उनके प्राइवेट पार्ट्स को छूकर जाँच करने की बात कही गई। दरअसल, टर्मिनल के बाथरूम में एक प्रीमेच्योर बेबी के मिलने पर इस तरह के आदेश दिए गए थे। एयरपोर्ट ने अपील की थी कि बच्‍चे की माँ आगे आए और उसे ले जाए।

ऑस्‍ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद कतर ने बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को माफी माँग ली। ऑस्‍ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने कहा कि 10 यात्री विमानों की महिला यात्रियों की जबरन जाँच की गई।

दरअसल, कतर एयरपोर्ट के बाथरूम से एक लावारिस नवजात बच्‍चा म‍िला था, इसके बाद दोहा एयरपोर्ट के अधिकारियों ने महिलाओं को प्राइवेट पार्ट की जाँच करवाने के लिए मजबूर किया। ऑस्‍ट्रेलिया की विदेश मंत्री मरिसे पायने ने सीनेट में सुनवाई के दौरान कहा था कि कुल 10 एयरक्राफ्ट की महिला यात्रियों को तलाशी का शिकार होना पड़ा जो पूरी तरह से परेशान करने वाला है।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने बताया था कि फ्लाइट संख्या 908 के कतर की राजधानी से गुजरने के दौरान जिन महिलाओं की जाँच की गई, उनमें से एक महिला ऑस्ट्रेलियाई नर्स थी, जिसने इस पर नाराजगी जताई।

महिलाओं में से एक ने ऑस्ट्रेलिया में संवाददाताओं से कहा था, “कोई भी अंग्रेजी नहीं बोलता और न ही हमें बताता है कि क्या हो रहा था। यह भयानक था। हम 13 थे और हम सभी को वहाँ से निकलना पड़ा। एक माँ ने अपने सोते हुए बच्चों को विमान पर छोड़ दिया था।”

एक यात्री ने बताया था, “जब मैं एम्बुलेंस में गई, तो एक महिला थी, जहाँ पर एक महिला मास्क पहने हुई थी और फिर अधिकारियों ने मेरे पीछे एम्बुलेंस को बंद कर दिया। मैंने कहा मैं ऐसा नहीं करुँगी और उसने मुझे कुछ भी नहीं समझाया। वह सिर्फ कहती रही, “हमें इसे देखने की जरूरत है, हमें इसे देखने की जरूरत है।” महिला ने कहा कि उसने एम्बुलेंस से निकलने की कोशिश की और दूसरी तरफ के अधिकारियों ने दरवाजा खोल दिया। वो बाहर कूद गई और निकल गई।

ऑ‍स्‍ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने कहा कि दो अक्‍टूबर को सिडनी जाने वाली 18 महिलाएँ (13 ऑस्ट्रेलिया की थीं) और फ्रांसीसी समेत अन्‍य विदेशी महिला यात्री इस जाँच का शिकार हुईं। उन्‍होंने यह नहीं बताया कि अन्‍य महिला यात्री कहाँ जा रही थीं। इस घटना के बाद अब ऑस्‍ट्रेलिया और कतर के बीच में राजनयिक विवाद पैदा हो गया है। ऑस्‍ट्रेलिया ने इस घटना पर विरोध दर्ज कराया था।

ऑस्‍ट्रेलिया के अधिकारी अन्‍य देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जहाँ महिलाएँ इस दुर्व्‍यवहार का शिकार हुई थी। इससे पहले दोहा के हमद एयरपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की थी कि यह घटना हुई है। हालाँकि उसने विस्‍तृत विवरण देने से मना कर दिया।

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार विभाग के प्रमुख फ्रांसिस एडम्सन ने कहा था कि ऐसी गहन पूछताछ कैसी हो सकती है। यह बहुत ही गंभीर और परेशान करने वाला मामला है। अधिकारियों ने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया भी अन्य देशों के साथ दोहा के समक्ष इस मामले को गंभीरता से उठाने की तरफ आगे बढ़ रहा है।

अधिकारियों ने एक बयान में कहा था, “आस्ट्रेलियाई सरकार दोहा हवाई अड्डे पर हाल ही में कतर एयरवेज की उड़ान में कुछ महिला यात्रियों के साथ हुए व्यवहार से चिंतित है।” सरकार ने यात्रियों के साथ हुई घटना को आक्रामक, घोर अनुचित और परिस्थितियों से परे बताया। मामले को ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस को भेजा गया है, जिसने कहा कि वे इस मामले से अवगत थे।

कश्मीर ना पाकिस्तान का था और ना कभी होगा : मुस्लिम विद्वान इमाम मोहम्मद ताहिदी

शांति के इमामएक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक स्कॉलर ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। इराकी मूल के ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम विद्वान इमाम मोहम्मद ताहिदी ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर भारत के हक में ऐसी-ऐसी बातें कहीं, जिसे सुनकर पाकिस्तानियों और पाकिस्तान परस्त दूसरे लोगों के भी कान खड़े हो जाएंगे। ताहिदी ने साफ कह दिया है कि पाकिस्तान को इस मसले में पड़ना ही नहीं चाहिए, क्योंकि कश्मीर न तो कभी पाकिस्तान का था और न कभी हो ही पाएगा।
शांति के इमाम 

जाने-माने मुस्लिम विद्वान इमाम मोहम्मद ताहिदी खुद को 'इमाम ऑफ पीस' बताते हैं। उनके मुताबिक वे शांति दूत हैं और सुधारवादी इमाम हैं। अपने ट्विटर हैंडल पर उन्होंने खुद को 'नेशनल बेस्टसेलिंग ऑथर' बताया है, जो उग्रवाद के साथ-साथ अति-वामपंथ और अति-दक्षिणपंथ का भी विरोधी है। वह हमेशा से कश्मीर को 'हिंदुओं की धरती' बताते रहे हैं और जब भारत यात्रा पर आए थे, तब भी कहा था कि कश्मीर कभी भी पाकिस्तान का हो ही नहीं सकता। वही बात इस बार उन्होंने ज्यादा विस्तार से और खुलकर बताई है।
भारत तो इस्लाम से भी पुराना है 
इमाम मोहम्मद ताहिदी ने पाकिस्तान से कहा है कि वह कश्मीर की परिस्थितियों पर ईमानदारी से विचार करे। उन्होंने पाकिस्तान से दो टूक कह दिया है कि कश्मीर न तो कभी पाकिस्तान था और न ही कभी होने वाला है। उनके शब्दों में,"कश्मीर कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था। कश्मीर कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा। पाकिस्तान और कश्मीर दोनों भारत के अंग हैं। मुसलमान हिंदू धर्म से इस्लाम में परिवर्तित हो रहे हैं.....इससे ये सच्चाई नहीं बदल जाती कि यह पूरा क्षेत्र हिंदुओं का है। पाकिस्तान को तो छोड़िए, भारत तो इस्लाम से भी पुराना है.....ईमानदारी से स्वीकार कीजिए....."

ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं ताहिदी 

इस इमाम के खिलाफ भी जारी हो चुका है फतवाईरान में जन्मे इराकी मूल के मोहम्मद ताहिदी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। वे ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर में इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रवचन कई मुस्लिम धर्मगुरुओं को रास नहीं आते। इसके चलते वह कई बार वे आलोचनाओं के भी शिकार हो चुके हैं। बता दें कि उनपर एक बार मेलबर्न में हमला भी हो चुका है। तब दो मुस्लिम युवकों ने उनकी कार पर हमला किया था। ताहिदी मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने की भी आलोचना करते हैं। उन्होंने कई मौकों पर शरिया कानून अपनाने वाले मुस्लिम देशों की भी आलोचना की है। वे दुनियाभर में हुए आतंकी हमलों की आलोचना कर चुके हैं और कहते हैं इस्लाम में कट्टरपंथ कैंसर की तरह फैल रहा है। ताहिदी का ये भी कहना है कि आतंकी संगठन आईएस का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है। वे हिंदुत्व को ईश्वर के सबसे ज्यादा करीब और दुनिया का सबसे पवित्र धर्म और हिंदू को खूबसूरत बता चुके हैं।
इस इमाम के खिलाफ भी जारी हो चुका है फतवा 

इस्लाम के खिलाफ कड़े बयानों को लेकर उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया जा चुका है। मुस्लिमों का एक तबका उन्हें फर्जी इमाम भी बताता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इमाम काउंसिल भी बयान देकर उन्हें फर्जी शेख बता चुका है। हालांकि एक भारतीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 'भारत के मुसलमान बहुत अच्छे हैं। लेकिन मेरी दिक्कत इस्लाम के पाकिस्तानी वर्जन से है। जो आतंकियों से काफी प्रभावित है।'

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