ओवैसी के खिलाफ वकील हरी शंकर जैन ने शिकायत की है (चित्र साभार : Asaduddin Owaisi - The Imperator/FB & NBT)
भारत का मुसलमान कट्टरपंथियों और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स के मकड़जाल से कब निकलेगा? इन लोगों की वजह से भारत ही नहीं, बल्कि मुस्लिम देशों में भी भारतीय मुसलमानों की कितनी बेइज्जती हो रही है, जिसे मुसलमान नहीं समझ रहा। जब मुसलमान कहता है कि 'हम अल्लाह के अलावा किसी से डरते', अगर उनकी इस बात में दम है तो इन लोगों से पूछो कि 'जब कोई मुस्लिम देश फिलिस्तीनों और रोहिंग्यों को अपने मुल्क में आबाद करने को तैयार नहीं, फिर तुम क्यों इन्हे भारत में आबाद करने हमें भड़काते हो?' जिस दिन मुसलमान इस सच्चाई को जान जाएगा, इनकी दुकानें ही बंद हो जाएंगी। कोई दंगा-फसाद नहीं होगा। देश में शांति ही नहीं मुस्लिम देशों तक में इज्जत होगी। मालूम हो, कुछ वर्ष पहले फिलिस्तीन और इजराइल के बीच हो रही लड़ाई में पाकिस्तान ने लगभग 33,000 फिलिस्तीनो को तत्कालीन राष्ट्रपति जिया-उल-हक़ ने पनाह दे दी थी, लेकिन युद्ध ख़त्म होने के बाद वापस नहीं जाने पर जिया ने फिलिस्तीनियों पर गोली चलवा दी थी।
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के लोकसभा में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की गई है। दूसरे राष्ट्र के प्रति आस्था दिखाने के कारण उनकी संसद की सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है। उनके जय फिलिस्तीन बोलने को भी लोकसभा की कार्रवाई के रिकॉर्ड से बाहर कर दिया गया है। जय फिलिस्तीन को लोक सभा कार्यवाही से बाहर निकालना ही नहीं, सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।
वकील हरी शंकर जैन ने असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ इस मामले में राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत शिकायत की है। उनके बेटे विष्णु शंकर जैन ने यह जानकारी एक्स (ट्विटर) के जरिए दी है। उन्होंने बताया है कि हरी शंकर जैन ने ओवैसी की सदस्यता संसद सदस्य के रूप में खत्म करने की माँग की है। ऐसी ही एक शिकायत एक और वकील विभोर आनंद ने भी लोकसभा सचिवालय से की है।
क्या कहता है अनुच्छेद 102 और 103
संविधान के अनुच्छेद 102 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है। इसके अलावा उसे इस आधार पर भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि वह दूसरे राष्ट्र के प्रति श्रृद्धा रखता है। अनुच्छेद 102, जिसके तहत संसद सदस्य अयोग्य घोषित हो सकते हैं वहीं संविधान का अनुच्छेद 103, अनुच्छेद 102 के तहत किसी संसद सदस्य को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर फैसला सम्बन्धी शक्तियाँ देश के राष्ट्रपति को देता है। इसमें कहा गया है कि यदि अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का मामला उठता है इस मामले में इसे राष्ट्रपति को भेजा जाना चाहिए और उसका ही निर्णय अंतिम होगा। इसी अनुच्छेद में कहा गया है कि अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह लेगा और उसी के अनुसार निर्णय लेगा। संसद सदस्यों के संबंध में राष्ट्रपति की शक्तियाँ ओवैसी ने ‘जय फिलिस्तीन’ के लगाए थे नारे
हैदराबाद से सांसद चुने गए असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (26 जून, 2024) को लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन के नारे लगाए। उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ली। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे।
जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी।
जहाँ तक महात्मा गाँधी के विचार की बात है तो महात्मा गाँधी 'जय सीता राम' बोलते थे, क्यों नहीं बोलते। दूसरे, जो कहता है कि 'मेरी गर्दन पर छुरी भी रख दोगे तो 'भारत माता की जय' नहीं बोलूंगा। फिर किसके दबाव में ‘जय फिलिस्तीन’ बोला?
असद्द्दीन ओवैसी के शपथ के बाद जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के मामले में संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, “हमारी फिलिस्तीन या अन्य किसी राष्ट्र के साथ कोई दुश्मनी नहीं है। संसद सदस्यों का शपथ लेने के बाद दूसरे देश के समर्थन में नारे लगाना सही है या नहीं, हमें इसके लिए नियमों को देखना होगा।” विरोध के बाद के ओवैसी के जय फिलिस्तीन बोलने को लोकसभा की कार्रवाई के रिकॉर्ड से निकाल दिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ ओवैसी के खिलाफ शिकायत करने वाले और उनका विरोध करने वालों ने तर्क दिया है कि उन्होंने जय फिलिस्तीन का नारा लगाया है जो कि उनकी दूसरे देश के प्रति श्रृद्धा दिखाता है, ऐसे में उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।