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हिन्दू विरोधी दंगों की सामने आती सच्चाई : ‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 

जैसे-जैसे दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की जाँच आगे बढ़ रही है, एक के बाद एक नए षड़यंत्र का खुलासा हो रहा है। जब दिल्ली में चले रहे थे, तब "गंगा-जमुनी तहजीब" और "हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई" के पाखंडी नारों का असली रूप शीर्षक "सेकुलरिज्म तब तक, जब तक भारत इस्लामिक नहीं बन जाता" में जो लिखा था कि हिन्दुओं की उपस्थिति में इन हिन्दू विरोधियों के बोल कुछ और होते थे और हिन्दुओं की गैर-हाजिरी में भारत को इस्लामिक बनाने पर चर्चा होती थी। जो अब पकडे गए आरोपी अपने-अपने बयानों में व्यक्त कर रहे हैं। अब इसे दोगलापन न कहा जाए तो और क्या नाम दिया जाए? "भाईचारे की बात करेंगे, सड़कों पर खून बहाएंगे" - गजब के शांतिप्रिय लोग ये हैं गरीब, मजलूम और बिकाऊ। सरकार और कोर्ट को ऐसे बहशी लोगों पर सख्ती से पेश आना चाहिए। ये लोग दया के पात्र नहीं हो सकते, जो समस्त मुस्लिम समाज को कलंकित कर रहे हैं। 

जब पैसे के लालच में महिलाएं अपने दूध पीते बच्चों को लेकर कड़कती ठंठ में बैठ रही थी, आम नागरिक के मन में केंद्र सरकार के प्रति ग्लानि होनी प्रारम्भ होने लगी थी, कि इस पाखंडी जमावड़े का जब फ्री में नाश्ता, कोरमा, बिरयानी और साथ में रूपए की बात सामने पर लोग झूठ समझते थे। अब वह सच्चाई भी सामने आ गयी।   
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में एक हैरान करने वाले ख़बर सामने आई है। दिल्ली दंगों के संबंध में कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिनमें बेहद साफ़ तौर पर कहा जा रहा है – “सड़कों पर उतरेंगे।” यानी एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में दंगे और हिंसा भड़काई गई।

इन दंगों को अंजाम देने के लिए मीटिंग भी हुई थी और उस मीटिंग में शामिल हुए एक चश्मदीद ने कई हैरान कर देने वाली बातें कही हैं। चश्मदीद की बात इस ओर इशारा करते हैं कि दिल्ली दंगे पूरी तरह सुनियोजित थे। 

दिल्ली दंगों के मामले में एक चश्मदीद ने मजिस्ट्रेट के सामने गवाही दी है। उसने गवाही में कहा, “वो कहते थे कि हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा और खून बहाना पड़ेगा, प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा। पूरे प्रदर्शन के दौरान भाईचारे, सहिष्णुता और मुसलमानों पर होने वाले अत्याचार की बात करते हुए वो इसकी आड़ में जनजीवन ठप्प करना चाहते थे। हर योजना की तैयारी कर ली गई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। ऐसी भीड़ जो पूरी तरह तैयार थी, और उनके पास हिंसा भड़काने के लिए हथियार तक मौजूद थे।”

मतलब लिबरल मीडिया ने दिल्ली दंगों को जो स्वतःस्फूर्त बताया, वो एक छलावा मात्र था। इस हिंसा की योजना बहुत पहले ही तैयार कर ली गई थी। हर एक दिन, हर एक कदम की प्लानिंग की गई थी। किसे मारना है, यह तक तय था। पुलिस वालों की हत्या तक करनी है, यह भी तय था और इसे अंजाम भी दिया गया।

सड़क जाम करना है। सरकार को झुकाना है। प्रशासन को उसकी औकात बतानी है। – यह सब ऊपरी बातें थीं, जहाँ भीड़ होती थी, वहाँ की बातें थीं, जहाँ मीडिया या वीडियो लिए जाते थे, वहाँ की बातें थीं। असली बात तो इनकी कोर मीटिंग में होती थी – काफिरों को मारने वाली बात। दिल्ली पुलिस को यह बात भी उस गवाह ने ही बताई है।

इसके अलावा चश्मदीद ने कहा, “दंगे भड़काने की योजना बनाने के दौरान यहाँ तक बात हुई कि हथियार जमा करने होंगे। सिर्फ बैठे रहने से और इंतज़ार करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इस क़ानून (सीएए और एनआरसी) को रोकने के लिए सड़कों पर खून भी बहाना पड़ा, तो वह भी करेंगे।”

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दिल्ली दंगा और CAA विरोधी उपद्रव : ताहिर और इशरत जहाँ सहित 5 के खाते में हुई थी 1.61 करोड़ रुपए की फंडिंग

दिल्ली दंगों की साजिश के पीछे जिनका हाथ था, वो हिंसा का आरोप भी किसी और पर मढ़ने का प्लान बना चुके थे। गवाह ने मीटिंग में हुई बात को बताया, “अब बहुत ज़रूरी हो गया है कि हम इस हिंसा का आरोप किसी और पर डाल दें। सबसे अच्छा यह होगा कि हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। जब तक हम चुप होकर बैठे रहेंगे, तब तक हमें कुछ नहीं मिलने वाला है, हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।” 

सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी, चैनल में घुसने की कोशिश

सुदर्शन न्यूज पर हमला
हाल ही में अपने शो ‘बिंदास बोल’ पर ‘जिहाद ब्यूरोक्रेसी’ दिखाने का ऐलान करने के कारण चर्चा में आए सुदर्शन न्यूज चैनल के ऊपर आज (सितंबर 11, 2020) हमला हुआ है। इस हमले की जानकारी मीडिया संस्थान के प्रमुख संपादक सुरेश चव्हाणके ने स्वयं दी है।
उन्होंने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी। स्टूडियो में घुसने से रोकने पर सुरक्षा रक्षकों पर किया हमला। सेक्टर 58 थाने के प्रमुख “नावेद ख़ान” को कई बार निवेदन देने के बावजूद नोएडा पुलिस ने यहाँ एक भी पुलिसवाला नहीं लगाया है। ट्वीट लिखते समय हंगामा जारी है।”
सुरेश चव्हाणके के इस ट्वीट के बाद सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले पर यूपी के डीजी को फौरन एक्शन लेने की बात कही है।
सुदर्शन न्यूज के ट्विटर अकॉउंट पर भी एक वीडियो साझा की गई है। इस वीडियों में दूसरे समुदाय के लोगों का जमावड़ा मुख्यालय के बाहर देखा जा सकता है। साथ ही उनमें से एक व्यक्ति संस्थान के लोगों से कहता दिख रहा है, “इस शो को बंद होना चाहिए। ये हिंदू-मुसलमान के सिवा कोई बात ही नहीं करते। देश में रोजगार भी है, शिक्षा भी है, स्वास्थ्य भी है। उस पर शो चलाइए। बेवजह हर वक्त हिंदू-मुस्लिम करते रहते हो।”

वहीं न्यूज चैनल के ट्वीट में लिखा है, “सुदर्शन मुख्यालय के बाहर मुस्लिमों का जमावड़ा। जबरन चैनल में घुसने की कोशिश। अंदर फेंके पत्थर। सुरेश जी को बाहर निकालने के नारे।”

ट्विटर पर कट्टरपंथियों के विरुद्ध छिड़ती जंग:
नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में
हिन्दुत्व के विरुद्ध ये बकवास करने वाले
कौन-कौन बिकाऊ लोग थे? चिंगारी छोड़ो,
फिर
पलटवार होने पर बेगैरत होकर चिल्लाते हो
"हमारे पर जुल्म हो रहा है।"  
आखिर सच्चाई उजागर होने से कट्टरपंथियों को क्यों परेशानी हो रही है? जहाँ तक ये लोग हिन्दू-मुसलमान होने की बात कर रहे हैं, ये लोग जवाब दें, नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हिन्दू-मुसलमान कौन कर रहा था? हिन्दुत्व के खिलाफ होती नारेबाजी के बावजूद बेशर्म हिन्दू चाहे वह किसी भी पार्टी से हों, इनका साथ दे रहे थे। आज वास्तव में दो चैनल कट्टरपंथियों, छद्दम सेक्युलरिस्ट्स और वामपंथियों के निशाने पर हैं। रिपब्लिक भारत और सुदर्शन दोनों ही देश की ज्वलन्त समस्याओं को उजागर करने में प्रयत्नशील है, जिसका हर चैनल को साथ देना चाहिए। मजे की बात यह है कि जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून का विरोध करने के लिए रूपए बांट कर भीड़ जमा की गयी थी, उसी तर्ज पर सुदर्शन चैनल पर जमा किया गया, जिसे वीडियो में सुना जा सकता है कि "उसकी दहाडी तो दो।"  

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके बाद से ही चैनल समुदाय विशेष के निशाने पर था। दरअसल इस वीडियो में उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?
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सुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम ‘बिंदास बोल’ को सितंबर 10, 2020 को ब्रॉडक्रॉस्ट करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से...
इस वीडियो के वायरल होने के बाद जामिया के छात्रों ने इस शो को रुकवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शो पर रोक लगा दी। हालाँकि कल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश दिए कि चैनल अपना शो चला सकता है।

बेंगलुरु दंगा : सिर्फ घर ही नहीं जलाया, 3 करोड़ रुपए के सोने-चाँदी भी लूटे

बेंगलुरु दंगा कॉन्ग्रेस MLA
कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति अपने जले
और लूट लिए गए घर को दिखाते हुए
बेंगलुरु में हुई दंगों की घटनाओं मे हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं।अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक़ 11 अगस्त 2020 के दिन हुए दंगों में पुलिस की गाड़ियाँ जलाई गई थीं। कांग्रेस विधायक के घर तोड़-फोड़ हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने कुछ और बड़े खुलासे किए हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ उस दिन भीड़ ने लगभग 3 करोड़ के सामान भी लूटे। चर्चा है कि पहले FIR दर्ज करने से मना करने वाले कांग्रेस के दलित विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने अब क्यों FIR करवाई? क्या पहले हाई कमांड से इजाजत नहीं मिली थी? या फिर इनका मीम भाईचारा रोक रहा था? मूर्ति द्वारा सीबीआई जाँच की मांग सिद्ध करती है कि ये FIR और CBI के लिए जरूर ऊपर से दबाव है।  कमाल है कि जय मीम ने जय भीम को ही लूट लिया।    
बेंगलुरु पुलिस की जाँच में एक और हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। दंगों के संबंध में 12 अगस्त को सैयद नदीम नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। कुछ समय बाद नदीम ने सीने और पेट में दर्द की बात कही। जिसके बाद उसे बोरिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस पर ट्विटर पर लोगों की आती प्रतिक्रियाओं में यह भी बात हो रही है कि एक दलित के पास 3 करोड़ (नकद, सोना अथवा चांदी) घर पर था, फिर बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं में कितना होगा, वाकई जाँच का विषय है। इसकी जाँच सीबीआई ही नहीं आयकर विभाग को भी करनी चाहिए।   
इस दौरान नदीम पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। शनिवार(अगस्त 15) के दिन नदीम की मृत्यु हो गई। कुछ ही समय बाद उसकी कोरोना जाँच की रिपोर्ट भी सामने आई। जिसमें यह पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव था। क्षेत्र के अतिरिक्त मंडलायुक्त हेमंत निम्बलकर ने भी इस घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सैयद नदीम को कई तरह की परेशानियाँ थी, जब उसकी हालत पर संदेह हुआ, तब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। 
घटना के संबंध में कांग्रेस विधायक ने भी प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें दंगों से जुड़ी कई अहम बातें आई हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर में लगभग 3 हज़ार लोगों ने तोड़-फोड़ मचाई और गाड़ियों को आग के हवाले किया। इतना ही नहीं घर में मौजूद सोना, चाँदी और नकदी मिला कर लगभग 3 करोड़ का सामान भी लूटा गया। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है और अभी तक कुल 206 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।  
इसके पहले कांग्रेस विधायक इस घटना पर अपना पक्ष रख चुके हैं। कांग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने पत्रकारों से बात करते हुए दुखी मन से कहा था, “मैं मुसलमानों को अपना भाई मानता था। कम से कम 25 साल से हम मिल-जुलकर रह रहे थे। फिर भी आज मैंने अपना 50 साल पुराना घर खो दिया।”
दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनके घर पर 2000-3000 मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ पहुँची, पथराव किया, पेट्रोल डाला, टायर जलाए और घर में आग लगा दी। उन्होंने बताया कि उग्र दंगाइयों ने तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी से हमला किया और उनके आवास पर पेट्रोल बम भी फेंके। इसके अलावा कांग्रेस MLA ने कहा, “सवाल यह उठता है कि अगर कानून बनाने वाले को यह भुगतना पड़े तो मैं आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकता हूँ?”
उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपने परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। साथ ही मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी ​​को सौंपने की अपील की है। उन्होंने कहा, “एक विधायक होने और कर्नाटक में सबसे बड़े मार्जिन से जीतने के बावजूद आज मेरी यह हालत है। अन्य विधायकों की क्या स्थिति हो सकती है?”
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नवीन की 'प्रोफाइल' के साथ, इंडिया टुडे बेंगलुरु को जलाने वाली कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ का हिस्सा बन गया आर.बी.एल.निगम, ....
बेंगलुरु के जीडे हल्ली इलाके में अगस्त 11 की रात करीब 9.30 बजे उपद्रवियों ने कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाया था। इस दौरान विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद मुस्लिमों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फ़ूँक दी गई। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

नवीन की हत्या के लिए जेहादियों को उकसाने वाली डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट पर लिबरल मीडिया की चुप्पी, क्यों?

बेंगलुरु हिंसा पर डेक्कन हेराल्ड की शर्मनाक कोशिश
बेंगलुरु में एक फेसबुक पोस्ट में पैगंबर मुहम्मद के ख़िलाफ़ टिप्पणी पढ़कर आहत हुई मुस्लिम भीड़ ने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच पथराव और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। उन्होंने इस हिंसा में कॉन्ग्रेस विधायक के घर को जलाया और 60 से अधिक पुलिस वालों को घायल भी किया।
अब ऐसी स्थिति में कोई भी यही समझेगा कि इस घटना के बाद मीडिया जाहिर तौर पर इस्लामिक भीड़ के ख़िलाफ़ सख्त रुख अख्तियार करेगी और इस बात का विश्लेषण करेगी कि कैसे मुस्लिम समुदाय के लोग जरा सी बात पर दंगों के लिए तैयार हो जाते हैं। खासतौर पर ईशनिंदा के आरोपित कमलेश तिवारी की हत्या के बाद से तो यह उम्मीद मीडिया से की ही जा रही थी कि वह निष्पक्ष होकर सच्चाई बोले।
साभार Sunnah.com
हालाँकि, मीडिया ने इस बार भी ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट करने वाले कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन को अपना निशाना बना लिया। डेक्कन हेराल्ड ने नवीन के ख़िलाफ़ एक ऐसी रिपोर्ट लिखी जिसमें उसे serial offender बताया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया कि नवीन की यह आदत है कि वह पैगंबर मुहम्मद का अपमान करता है और उन्हें लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग भी करता है।
डेक्कन हेराल्ड ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कि विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति का भतीजा नवीन का ऐसा इतिहास है जिसमें वह लगातार आपत्तिजनक कंटेंट डालकर नफरत फैलाने की कोशिश करता है। उन्होंने 5 अगस्त को पदराणयपुर की घटना के बारे में अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी।
पदरायणपुर हिंसा के बारे में याद दिला दें कि ये हिंसा 19 अप्रैल को भड़की थी, जब कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले अन्य लोगों ने क्वारंटाइन होने से मना कर दिया था और हंगामा भी किया था। इस पूरी हिंसा में पुलिस ने 119 लोगों को गिरफ्तार किया था।
दिलचस्प बात ये हैं कि डेक्कन हेराल्ड कहता है कि इन दोनों घटनाओं में नवीन ने भावनाओं को आहत किया। जबकि वास्तविकता ये है कि चाहे पदरायणपुर की हिंसा हो या नवीन के पोस्ट के बाद भड़की हिंसा, हर जगह मुस्लिम समुदाय के लोग उसमें शामिल रहे। लेकिन, तब भी मीडिया संस्थान ने हिंसा का विरोध नहीं किया, बल्कि नवीन को लगातार अपराध दोहराने वाला बताया।
गौर करने वाली है कि एक ओर जहाँ हजारों लोगों की भीड़ ने एक मात्र फेसबुक पोस्ट पर इतनी हिंसा भड़का दी और डेक्कन हेराल्ड तब भी नवीन को जिम्मेदार बताता रहा। तो आखिर पाठक कैसे इस बात को समझेगा कि मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी कैसे काम करते हैं और कैसे एक-दूसरे को समर्थन के नाम पर बढ़ावा देते हैं। मीडिया संस्थान की यह कोशिशें बिलकुल ऐसी हैं, जैसे वह जिहादियों को उनके उद्देश्य को पूरा करने के निर्देश दे रहे हो।
मुख्यधारा का मीडिया भी वैसे तो हमेशा सच्चाई बताने की बातें करता है। लेकिन जब भी ऐसे कोई भी मौके आते हैं तो वह इनसे खुद को अलग कर लेता है। वास्तविकता में ये सब इसलिए नहीं होता कि वह इंसान के दुश्मनों की छवि निर्माण चाहते हैं। बल्कि इसलिए होता है क्योंकि संस्थान खुद को इस तरह ढाल लेते हैं कि वह अपनी निष्ठाओं को ही धोखा देने लगते हैं।
ये भी ध्यान रखने की बात है कि मुस्लिम समुदाय के सबसे घटिया तत्वों के लिए मुख्यधारा का मीडिया प्रचार तंत्र में बदल गया है। उनकी रिपोर्टें में इस बात का खास तौर पर ध्यान दिया जाता है कि वह मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों के मनमुताबिक हो और इसके लिए वह पूर्ण रूप से अपनी सारी कोशिश करते हैं।
इस संबंध में हमें याद रखना चाहिए कि आलोचकों की हत्यााओं का सिलसिला खुद पैगंबर मुहम्मद के समय से चला आ रहा है। ट्रिब्यूट, स्पॉइल्स एंड रुलरशिप (किताब अल-खराज, वाल-फे ‘वाल-इमराह में) में इस्लाम के पैगंबर के समय के दौरान एक दिलचस्प घटना का उल्लेख किया गया है।
इसमें बताया गया है कि काब बिन अल अशरफ एक ऐसा व्यक्ति था जो पैगंबर मोहम्मद पर व्यंग्य करता था और पैगंबर और उनके अनुयायियों को आहत करता था। जब उसने नबी के अपमान को न करने की बात पर इनकार किया तो मोहम्मद ने उसकी हत्या का आदेश दिया।
व्यंग्यकार को मारने के लिए मुहम्मद बिन मसमल्लाह को भेजा गया। इस घटना के बाद से यहूदियों और बहुदेववादियों को डर लग गया और वह नबी से मिलने आए। फिर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए कि गैर मुस्लिम कभी भी पैगंबर का अपमान नहीं करेंगे।
इस्लामिक उलेमाओं काब बिन अल अशरफ को भी सीरियल ऑफेंडर के तौर में पेश करते हैं। वे इस कहानी को ऐसे समझाते हैं कि कैसे अल्लाह ने मुहम्मद के अपमान पर शुरू में उन्हें धैर्य रखने व क्षमा करने का आदेश दिया। लेकिन जब उस समय भी उसने इस बात को नहीं माना तो उन्होंने उसे मार दिया।अब बेंगलुरु पर डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट भी बिलकुल इसी तरह है।
21वीं सदी में आने के बाद भी पैगंबर के अपमान पर भयानक हिंसा की प्रथा आज भी चालू है। ऐसे में कोई मुख्यधारा मीडिया से उम्मीद की जा सकती है कि वह हिंसा की संस्कृति को खत्म करने की बात करें, जो एक समुदाय में बढ़ती ही जा रही है। लेकिन नहीं, वह तो अब भी उन लोगों की छवि निर्माण करते हैं जिन्होंनें हिंसा को जन्म दिया।
जब डेक्कन हेराल्ड ने नवीन को serial offender बताया तो यह सर्वविदित है कि आगे क्या परिणाम होंगे। कमलेश तिवारी के साथ जो हुआ इसके बाद कोई इनसे इनकार नहीं कर सकता। लेकिन तब भी ये ऐसा करने को आगे आए और ऐसा किया भी। जब बात आगे बढ़ जाएगी तो कोई भी मीडिया संस्थान के इन निष्कर्षों को दोष नहीं दे पाएगा कि ये लोग मानते थे कि पैगंबर पर बोलने के लिए नवीन को मौत की सजा हो।
एक ओर जहाँ इस पूरे मामले पर मेनस्ट्रीम मीडिया बोलने से बचती रही। वहीं डेक्कन हेराल्ड ने सभी सीमाओं को लांघ दिया है। उन्होंने नवीन को serial offender कहकर हिंसा को वाजिब ठहराया है। जिसके कारण आगे कई अनहोनी हो सकती हैं और तब मीडिया ऐसी घटनाओं पर पछतावा करने को आगे आएगा।

क्या EGI अध्यक्ष शेखर गुप्ता झूठी खबर फ़ैलाने में विशेषज्ञ हैं?

शेखर गुप्ता - विकिपीडिया
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पत्रकारिता जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, को एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष पद पर बैठे शेखर गुप्ता ही कलंकित कर रहे हैं। इतने प्रतिष्ठित पद पर आसीन ही भ्रामक समाचार प्रसारित करेंगे, दूसरों को क्या कहें? अगर इनसे किसी पत्रकार के विरुद्ध भ्रामक यानि फेक न्यूज़ के विरुद्ध शिकायत करने पर क्या किसी कार्यवाही की अपेक्षा की जा सकती है? पत्रकार होते हुए, शेखर को इस बात का भी ज्ञान होना चाहिए कि भ्रामक ख़बरों से देश का माहौल ख़राब होता है। दूसरे, कांग्रेस और वामपंथियों द्वारा तुष्टिकरण के चलते भारत के वास्तविक इतिहास धूमिल करने से देश का कितना अपमान हुआ है, देशवासी को अपने असली इतिहास से अज्ञान होने के कारण किस तरह साम्प्रदायिक आग में कितने लोगों की जानें स्वाह हो चुकी हैं। विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ वास्तविक इतिहास की बात करने वालों को हिन्दुवादी, साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त, देश में शांति का दुश्मन और पता नहीं कितने नामों से बदनाम किया जा रहा है। 
वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट शेखर गुप्ता फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात हैं। एक बार फिर उन्होंने गलत खबर फैला कर कर्नाटक सरकार और बेंगलुरु पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन Asianet News ने शेखर गुप्ता की पोल खोल दी।
दरअसल, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट के नाते शेखर गुप्ता ने एक पत्र जारी किया जिसमें लिखा गया है कि 11 अगस्त को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में खबर करने गए कारवां के पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई और उसी दिन बेंगलुरु में खबर कवर कर रहे इंडिया टुडे, द न्यूज मिनट और सुवर्ण न्यूज 24X7 के पत्रकारों पर सिटी पुलिस द्वारा हमला किया गया। ये सभी पत्रकार उस समय ड्यूटी पर थे। ये दोनों घटनाएं निंदनीय है। 
आखिर किसके इशारे पर शेखर ने इस फेक न्यूज़ को फैलाया और क्यों? क्या शेखर ने पत्रकारिता नियमों का उल्लंघन नहीं किया? 80 के दशक तक फिल्म पत्रकारिता "येलो जर्नलिज्म" कहलाती थी, लेकिन शेखर गुप्ता जैसे पत्रकारों ने सारी पत्रकारिता को "येलो जर्नलिज्म" बना दिया। अगर शेखर जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते देश के वास्तविक इतिहास को प्रकाश में लाने का प्रयास किया होता, देश में साम्प्रदायिक दंगों में बेगुनाहों को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।
 
दूसरे, यह कि जब किसी गैर-मुस्लिम के इष्ट देवी-देवताओं पर व्यंग किया जाता है, क्यों ये ही पत्रकार खामोश रहते हैं? यही देश में फिरकापरस्ती का माहौल फैलाते हैं, जब व्यंग बर्दाश्त नहीं होता, फिर दूसरों पर भी नहीं करना चाहिए। जब पेंटर एम.एफ.हुसैन हिन्दू देवी-देवताओं के नग्न चित्र बना रहा था, देश के कितने पत्रकारों ने उसका विरोध किया था? और चर्चित होने पर जब उसी हुसैन पेंटर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा था, तब भी सब चुप्पी साधे रहे, क्यों? क्या इसी का नाम पत्रकारिता है, कि सरकारी प्रलोभन के लिए सरकारी तुष्टिकरण का पालन करते रहो? 

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट शेखर गुप्ता के इस पत्र का Asianet News (सुवर्ण न्यूज) ने गलत बताया है। Asianet News Network Private Limited ने लेटर जारी कर कहा है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उनके पत्रकारों पर हमला बेंगलुरु सिटी पुलिस द्वारा नहीं बल्कि उन्मादी भीड़ द्वारा किया गया और उनके पत्रकारों को पिटा गया। उसके तीन रिपोर्ट्स घायल हैं और इस संबंध में बेंगलुरु में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
शेखर गुप्ता की इस फेक न्यूज़ के कारण ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं :

 

शेखर गुप्ता फेक न्यूज फैलाने में माहिर हैं और अब नया मामला उनके एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट के नाते सामने आया है। सवाल यह है कि हकीकत जाने बगैर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और शेखर गुप्ता ने आखिर बेंगलुरु पुलिस को बदनाम करने की कोशिश क्यों की?
फिर शेखर जैसे किसी भी पत्रकार ने नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हो रहे धरनों और प्रदर्शनों में मुखरित हो रहे हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध लग रहे नारों का विरोध नहीं किया। अगर यही नारे इस्लाम के विरुद्ध लग रहे होते, तब इनकी नींद खुलती और "हिन्दू आतंकवाद", "भगवा आतंकवाद" और "हिन्दू साम्प्रदायिक" आदि नामों से इस्लाम के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए आसमान सिर पर उठाए आधी रात को अदालतें खुलवा देते। 

बेंगलुरु दंगा : सामने आया कांग्रेस पार्षद के शौहर कलीम पाशा का नाम

कलीम पाशा (लाल घेरे में) साभार टाइम्स नाउ
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जन्माष्टमी के पर्व पर बंगलुरू के हिन्दू युवा श्रीकृष्ण के फोटो डालकर बधाई दे रहे है,,,
 तभी एक मुस्लिम युवक ने कमेंट किया,,, कृष्ण की कितनी बीबियाँ थी ,
उस पर कांग्रेस विधायक के भतीजे ने पूछ लिया, पैगम्बर ने कितनी शादियां की थीं ? 
बस,,,,,, 
ये बात मुस्लिमों को बुरी लग गई ।
व्हाट्सएप ग्रुप में msg आने लगे, पैगम्बर का अपमान हुआ है,  इकट्ठा हो जाओ,,,
हज़ारों लोगों की भीड़ कांग्रेस के दलित विधायक के घर पे हमला करती है,,
 पेट्रोल बम, पत्थर, ईंटें, हथियार सब चलते हैं, 
विधायक का परिवार घर के पीछे से कूद कर जान बचाकर भागता है,,, 
फिर वो उग्र भीड़ घर, ऑफिस में आग लगा देती है,,, उस मोहल्ले में रखी 300 से ज्यादा हिंदुओं की गाड़ियां जला देती है । 
पुलिस आती है, तो पुलिस पर हमला होता है, 60 पुलिस कर्मी घायल हो जाते हैं ।
पूरे मोहल्ले के लोग छतों से कूद कर भाग जाते हैं, किसी के पास अपनी सुरक्षा का कोई साधन नहीं था ।
अब बात करते हैं, राजनीति की,,

जिनके घर पर इतना बड़ा हमला हुआ, वो कांग्रेस के विधायक हैं, अनुसूचित जाति के हैं,,,,, उनका घर , गाड़ियां सब जल गईं,,,,, मगर हैरान करने वाली बात है,,,कांग्रेस के किसी बड़े नेता का बयान नहीं आया,,, वाड्रा मैडम का ट्वीट नहीं आया,,,, किसी ने इस हमले की निंदा नहीं की,,, ऐसा क्यों ?
लेकिन जैसे-जैसे 11 अगस्त 2020 की रात बेंगलुरु में हुई हिंसा की जाँच आगे बढ़ रही है, बड़ी ख़बर सामने आ रही है। बेंगलुरु में हुए दंगों के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें जिन लोगों को आरोपित बनाया गया है उसमें 7वां नाम कांग्रेस पार्षद इरशाद बेगम के शौहर कलीम पाशा का है। पुलिस के मुताबिक़ दंगों की साज़िश रचने वाले मुख्य आरोपितों में एक नाम कलीम पाशा का भी है।
इरशाद बेगम बेंगलुरु नगरपालिका के नगवाड़ा वार्ड से कांग्रेस पार्षद हैं। लेकिन क्षेत्र के ज़्यादातर काम उसका पति कलीम पाशा ही देखता है। टाइम्स नाउ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जब पुलिस कलीम को गिरफ्तार करने गई तब वह अपने घर पर नहीं था। पुलिस को अभी तक कलीम की कोई जानकारी नहीं मिली है। 
पूर्व कांग्रेस मंत्री केजे जॉर्ज
इसके अलावा कलीम पाशा के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केजे जॉर्ज से भी काफी अच्छे संबंध हैं। पिछले साल सितंबर में कर्नाटक राष्ट्र समिति ने केजे जॉर्ज पर प्रवर्तन निदेशालय को संज्ञान में लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कराया था। केजे जॉर्ज पर आरोप लगा था कि उनके पास विदेशों में करोड़ों की संपत्ति मौजूद है।
दंगों से संबंधित एफ़आईआर में और भी कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। एफ़आईआर में लिखा है कि 5 लोगों ने लगभग 200 से 300 लोगों की भीड़ का नेतृत्व किया। उनके पास मशाल से लेकर पेट्रोल बम जैसे ख़तरनाक हथियार मौजूद थे। साथ ही उन्हें इस बात के आदेश मिले हुए थे कि रास्ते में आने वाले हर पुलिसकर्मी को जान से मार देना है। बीते दिन पुलिस ने SDPI के 2 नेताओं को दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं SDPI के ज़िला सचिव का कहना था कि उनकी पार्टी के सदस्यों का दंगों से कोई लेना देना नहीं है। उनकी पार्टी से जुड़े लोगों पर झूठे आरोप लगा जा रहे हैं।  
कलीम पाशा
भूतपूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ पाशा 
बेंगलुरु में हुई दंगे की घटनाओं में लगभग 200 से 250 वाहन मौके पर ही जला दिए गए थे। कुछ ही समय पहले इस घटना का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलाने की इजाज़त माँग रहे थे। वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ी। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति माँगी थी। 
जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें, वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 कर्नाटक द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे उग्र कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।
न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं। 
कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।” 
इस आगजनी के पीछे अयोध्या में राममंदिर की पीड़ा है, जिसे छद्दम धर्म-निरपेक्ष बन रही पार्टियों के हाथ होने से इंकार भी नहीं किया जा सकता, क्योकि इसमें स्थानीय कांग्रेस के नाम आ रहे हैं, जिन्हें सोनिया गाँधी द्वारा अब तक पार्टी से निष्कासित करना तो दूर, कोई कार्यवाही तक नहीं की गयी। क्योकि इतने वर्षों तक अयोध्या मुद्दे को लंबित रखने में वामपंथी, कांग्रेस और इनकी समर्थक पार्टियों का रहा है। देश और कोर्ट से सच्चाई छुपाकर भाजपा, विहिप, हिन्दू महासभा और अन्य हिन्दू संगठनों को साम्प्रदायिक करार कर बदनाम कर रहे थे। 
मुसलमानों को मोहरा बनाकर फिरकापरस्ती करती  पार्टियां 
आखिर सच्चाई को लम्बे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। आज जनता को समझना होगा कि साम्प्रदायिक कौन? अयोध्या मुद्दे पर कांग्रेस मुसलमानों को मोहरा बना फिरकापरस्ती फैलाती रही और पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी द्वारा हिन्दू विरोधी दंगे के बाद अब बेंगलुरु में कांग्रेस, और दोनों ही दंगों में मुसलमानों के ही कन्धों का सहारा। अगर यही घिनौना खेल भाजपा या किसी हिन्दू संगठन ने खेला होता, ये जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष हैं, आसमान को सिर पर उठा रहे होते। इनके प्रायोजित #not in my name, #intolerance, #freedom of speech, #award vapasi और गंगा-जमुना तहजीब आदि गैंगस्टर भी बाहर आकर अराजकता फैला रहे होते, अब सब खामोश हैं। अगर अभी भी मुसलमान ने आंख नहीं खोल वास्तविकता से आमने-सामने का साहस नहीं कर सकता, फिर मुसलमान को क्या जाये, खुद फैसला करे?  
गंगा-जमुना तहजीब का क्या है औचित्य?
जब भी देश में साम्प्रदायिक दंगों में आरोपितों को पकड़ने की नौबत आने पर तुरंत गंगा-जमुना तहजीब का ढोल पिटना शुरू हो जाता है, और मुर्ख इस भ्रमित नारे की गूंज असली मुद्दे को दबाते आए हैं। यह किसी पर कोई आरोप नहीं कटु सच्चाई है, जिसे हर मानव को--साम्प्रदायिक को नहीं--मनन करना होगा, आत्मचिंतन करना होगा कि अगर इस इस नारे में वाकई सच्चाई है, फिर किस कारण अयोध्या मुद्दे पर झूठ बोला जा रहा था? क्यों कोर्ट से खुदाई में मिले मंदिर के हज़ारों सबूतों को छुपाया गया? क्यों पुरुषोत्तम श्रीराम को काल्पनिक बता गया? अगर राम काल्पनिक थे, फिर क्यों दशहरे के दिन रामलीला मंचन स्थल पर जाते थे? जो पार्टियां अपने ही देश के गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आक्रांताओं को महान बताकर पढ़ने के मजबूर कर रही हों, क्या उनसे देशहित की कल्पना की जा सकती है? अगर आज देश के सम्मुख वास्तविक इतिहास होता अयोध्या तो क्या काशी, मथुरा और अन्य स्थल बिना किसी अड़चन के ना जाने कब के सुलझ गए होता। 
गजब गजब के नरेटिव बनाते हो तुम लोग। क्योंकि हिन्दू मूर्ख हैं ना... नही समझता तुम्हारे अल तकिये... तुम्हारे षड्यंत्र... तुम्हारी वामपंथी चालें.. कोई समझाए भी गर तो हिन्दू शुतुरमुर्ग की भांति जमीन में सिर घुसाए All is well करता रहेगा। 
पहले आपत्तिजनक पोस्ट के विरोध में पूरा शहर जला दिया। 3 लोगो की जान ले ली। 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, थाना फूंक दिया। लेकिन जब विरोध हुआ तो खुद को पाक साफ बताने के लिए गंगा जमुनी तहजीब दरिया में डुबकी लगाने का खेल शुरू कर दिया। जबकि दूसरी ओर कांग्रेस विधायक के भतीजे नवीन को कुत्ते की मौत मारने के लिए सोशल मीडिया पर खेल, क्या है ये ड्रामा? जनमानस कब इस गंगा-जमुनी तहजीब की सच्चाई जानेगा?


एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं, जिसमे कुछ मुस्लिम युवक मानव-चैन बनाकर मन्दिर जलने से बचा रहे हैं। कट्टरपंथियों की हिंसा की खबरें दबाकर दक्षिण से लेकर उत्तर तक के न्यूज चैनलों में यही वीडियो चलाया जा रहा हैं। मुस्लिम कट्टरपंथियों की दंगाई, असहिष्णुता छोड़कर भाईचारे की खबरें चलाई जा रही हैं। इसे कहते है इकोसिस्टम.. कार्यप्रणाली..

हिंसा भी कर ली,  जान भी ले ली, सुरक्षा तंत्र भी कमजोर कर दिया, गैर-मुस्लिमों के भीतर डर, ख़ौफ़, भय भी भर दिया और फिर मन्दिर जलने से बचाकर "भाईचारा", सौहार्द, गंगा-जमुनी तहजीब भी कायम कर ली। अब इस गंगा-जमुनी तहजीब को भ्रमित और धूर्त न कहा जाए तो क्या कहा जाए?
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