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नूपुर शर्मा, टी राजा सिंह, सुरेश चव्हाणके समेत 4 की गर्दन काट दो: मौलवी अबू बकर को मिला पाकिस्तान-नेपाल से हुक्म, पैगंबर के अपमान की पिलाई घुट्टी; 'सर तन से जुदा' गैंग के विरुद्ध तैयार हो रही हिन्दू-मुस्लिम महिला फ़ौज

           हिन्दूवादी नेताओं की हत्या की साजिश रचता हमास समर्थक मौलवी अबू बकर (दाएँ) गुजरात में गिरफ्तार
गुजरात पुलिस ने शनिवार (4 मई 2024) को सूरत से एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। मौलवी का नाम सोहेल अबू बकर तिमोल है। 27 वर्षीय मौलवी पर भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा, हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह, सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपदेश राणा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। मौलवी इन सभी को ‘गुस्ताख़’ मानता था। इन साजिशों को अंजाम देने के लिए सोहेल नेपाल और पाकिस्तान में बैठे आकाओं के सम्पर्क में था। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए वह विदेशी सिम भी प्रयोग कर रहा था। फिलहाल उससे पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है।
दंगाग्रस्त क्षेत्रों में पुलिस को ढोल पीटने के लिए डंडे लेकर नहीं भेजे, बल्कि blind firing order देकर भेजे। जिन घरों, मस्जिदों पर पत्थरों का जमावड़ा मिले, उन्हें कम से कम 3 सालों के लिए सील कर दिया जाए। जब तक इन लोगों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा बंद नहीं करेगी, ये कुकुरमुत्ते की तरह निकलते ही जाएंगे। बच्चे से लेकर वृद्ध तक जो पत्थरबाज़ी करते पकड़ा जाए, उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्टेड किया जाये।  

 

मुस्लिम कट्टरपंथी चाहे भारत में हो या भारत से बाहर किसी भी देश में, अगर 'सर तन से जुदा' कर डर बैठाने की जो कोशिश हो रही है, भूल रहे हैं कि सनातन धर्म 4+अरबों साल पुराना धर्म है, जिस दिन इसकी ज्वालामुखी फट गयी, दुनियां की कोई ताकत इन शैतानों को बचा नहीं पाएगी। संयम की भी एक सीमा होती है। विदेशी भीख पर पलने वाले इन भिखारियों को सबक सीखने हिन्दू और मुस्लिम महिलाएं कमर कस रही है। याद रखो जब नारी शक्ति जाग्रत होती है, ब्रह्माण्ड हिल जाता है। सनातन धर्म साक्षी है, कोई इंकार नहीं कर सकता। नवरात्रे इस कारण पूजनीय हैं। महिलाओं में क्रांति की ज्वाला भड़कने लगी है। देखिए वीडियो: 


 

गुजरात पुलिस के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2024 के तहत पुलिस टीमें पूरी तरह से सतर्क थीं। इसी बीच सूरत की क्राइम ब्रांच ने एक मौलवी की संदिग्ध हरकतों पर नजर गड़ाई। मौलवी का नाम मोहम्मद सोहेल है, जिसे कुछ लोग अबू बकर तीमोल भी कहते हैं। वह मूल रूप से महाराष्ट्र के नंदुरबार का रहने वाला है। फिलहाल वह सूरत के एक मदरसे में हाफ़िज़ है और करजा-अम्बोली गाँव में मुस्लिम छात्रों को ट्यूशन के माध्यम से मज़हबी तालीम देता है। इन सभी के अलावा अबू बकर सूरत के डायमंड नगर की एक धागा फैक्ट्री में मैनेजर के तौर पर भी ड्यूटी करता है।

पुलिस ने मौलवी की जाँच की तो पाया कि वह पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान और नेपाल के हैंडलरों के सम्पर्क में था। नेपाल के हैंडलर का नाम शहजाद बताया जा रहा है। इन सभी से बात करने के लिए मौलवी अबू बकर लाओस देश के एक नंबर का इस्तेमाल करता था। बातचीत के लिए वह व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया हैंडलों का प्रयोग करता था।

आरोप है कि दोनों विदेशी आकाओं ने मौलवी को भारत में हिन्दू संगठनों द्वारा इस्लाम के पैगंबर के अपमान की पट्टी पढ़ाई। मौलवी को उसके आकाओं ने फरमान सुनाया कि वह नबी की शान में गुस्ताखी कर रहे लोगों को ‘सीधा करे’। यहाँ सीधा करने के कोड का अर्थ ‘हत्या करना’ माना जा रहा है।

व्हाट्सएप ग्रुप में इंडोनेशिया से कजाकिस्तान के मेंबर

टारगेट के तौर पर विदेशी आकाओं ने मौलवी अबू बकर को सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके, भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा, सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपदेश राणा और हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह के नाम गिनाए। इन लोगों की हत्या कमलेश तिवारी की तरह गर्दन काट कर करने को कहा गया था। इन हत्याओं की एवज में मौलवी को 1 करोड़ रुपए देने का वादा भी किया गया था। बताया यह भी जा रहा है कि विदेशी आकाओं के कहने पर मौलवी ने अपना एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसमें अपनी सोच के लोगों को एड किया।
इस ग्रुप में मौलवी ने हिन्दू धर्म के खिलाफ अभद्र बातें लिखीं और उपदेश राणा की फोटो शेयर करके उनका काम तमाम करने की अपील की। अबू बकर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज के चित्रों से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है। वह 6 दिसंबर को काला दिवस कहता था। अपने ग्रुप में वह हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें को आपत्तिजनक तरीके से एडिट करके शेयर कर रहा था। माना यह भी जा रहा है कि उसका सम्पर्क पाकिस्तान और नेपाल के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान आदि के नंबरों से भी सामने आया है।
मौलवी अबू बकर विदेशी हैंडलरों के माध्यम से हथियार मँगवाने की भी फिराक में था। हालाँकि आरोपित अपनी साजिश को अंजाम दे पाता, उससे पहले वह सूरत क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। अबू बकर के खिलाफ सूरत के डी.सी.बी. पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153(ए), 467, 468, 471, 120(बी) के साथ आईटी एक्ट की धारा धारा 66(डी), 67, 67(ए) के तहत कार्रवाई की गई है। सूरत क्राइम ब्राँच मामले की जाँच कर रही है। माना जा रहा है कि आगे की पूछताछ में अबू बकर कुछ और खुलासे कर सकता है।

ओवैसी का फॉलोवर, सलमान का फैन और हमास का प्रेमी

ऑपइंडिया ने मौलवी अबू बकर और उसके हैंडलरों की पड़ताल की। गिरफ्तार मौलवी ने अपने व्हाट्सएप पर हमास के आतंकियों की प्रोफ़ाइल फोटो लगा रखी है। इन तस्वीरों में कई नकाबपोश आतंकी घातक हथियारों के आगे खड़े होकर सजदा कर रहे हैं। टूटी-फूटी अंग्रेजी में मौलवी अबू बकर ने अपने ट्रू कॉलर पर परिचय के तौर पर ओवैसी का फॉलोवर लिख रखा है।
                                    मौलवी की ट्रू कॉलर और व्हाट्सएप प्रोफ़ाइल फोटो
वहीं नेपाल में बैठा मौलवी का हैंडलर शहजाद बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का फैन है। उसने अपने व्हाट्सएप DP पर सलमान खान और ऐश्वर्या राय की प्रोफ़ाइल लगा रखी है।
                                          मौलवी के नेपाली आका के व्हाट्सएप का प्रोफ़ाइल फोटो

साजिश रचने में ऐप का इस्तेमाल

मौलवी द्वारा अपडेट किए जा रहे व्हाट्सएप ग्रुप की पड़ताल में भी पुलिस जुटी है। सूरत के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि 27 वर्षीय मौलवी को सूरत के चौक बाजार इलाके से पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि मौलवी का मोबाइल चेक करके प्रथम दृष्टया ही पता चल गया था कि वह चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित है।
सूरत में ही रहने वाले उपदेश राणा को पिछले महीने मिली जान से मारने की धमकी में भी मौलवी अबू बकर का ही हाथ बताया जा रहा है। आरोपित कुछ ऐसे ऐप भी प्रयोग कर रहे थे, जिनको आसानी से ट्रेस नहीं किया जा सकता है। ये सभी अपने टारगेट की तस्वीरें और वीडियो अपने ग्रुप में डालते थे और उसकी हत्या की सामूहिक साजिश रचने में जुट जाते थे।

‘ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो… अपने नस्लों के फायदे के लिए पावर हाथ में लो’ – इमरान प्रतापगढ़ी

ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा इमरान प्रतापगढ़ी
पिछले दिनों सुरेश चव्हाणके ने अपने आगामी शो का एक ट्रेलर ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि सिविल सेवाओं में ‘संप्रदाय विशेष की घुसपैठ’ का ‘पर्दाफाश’ किया गया है। वीडियो में उन्होंने जामिया के रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में स्थान पाने वाले छात्रों को ‘जामिया के जिहादी’ कहा था।
सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाणके वाले इस न्यूज एपिसोड को लेकर काफी बवाल हुआ। इस कार्यक्रम के 4 एपिसोड टेलीकास्ट हो चुके हैं, आगे के प्रसारण के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
इस बीच इमरान प्रतापगढ़ी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिमों से ब्यूरोक्रेसी पर ‘कब्जा’ करने के लिए कहते हैं। वीडियो में इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि फासिस्टों ने पिछले 30 सालों में उनके नस्ल का काफी नुकसान किया है।
इमरान प्रतापगढ़ी के अनुसार इससे एक फायदा भी हुआ है और वह फायदा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और नेपाल के बॉर्डर से लेकर राजस्थान के बॉर्डर तक डंडा लेकर भैंस चराने वाला आम मुस्लिम भी यह समझ चुका है कि इस देश में जिंदा रहना है तो बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।
इमरान प्रतापगढ़ी आगे कहते हैं:
“किसी भी देश का सिस्टम परफेक्ट नहीं होता है। माइक पर खड़े होकर कितना भी कोस लो, कितनी भी गालियाँ दे दो, लेकिन निजाम नहीं बदलता। मैं आपको दावत देता हूँ, अगर निजाम बदलना है तो सिस्टम का हिस्सा बनिए। अगर थाने में तुम्हारे नाम का सिपाही आ जाता है, तो थाने का निजाम बदल जाता है। अगर तुम मुल्क को सुधारना चाहते हो, अपना हक लेना चाहते हो तो ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। अगर बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या बहुत बड़ा बिजनेसमैन बनाते हो तो सिर्फ तुम्हारा फायदा होगा। अगर नस्लों का फायदा करना चाहते हो तो सिर्फ ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो, पावर अपने हाथ में लो।”
सितंबर 15, 2020 को सुदर्शन न्यूज के कथित विवादित कार्यक्रम ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब आप कहते हैं कि जामिया मिलिया के छात्र सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने वाले समूह का हिस्सा हैं, तो फिर हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकार को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।”
सुरेश चव्हाणके ने शो के दौरान कहा था कि यूपीएससी के लिए प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाने के लिए उड़ान योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को 1 लाख रुपए दिए जाते हैं, जबकि हिंदुओं को ऐसा कोई लाभ नहीं मिलता है। इसी तरह, राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) में गैजेटेड पदों के लिए, अल्पसंख्यक समुदाय को 50000 रुपए और PSC के नन-गैजेटेड पोस्ट एवं SSC परीक्षा के लिए 25000 रुपए दिए जाते हैं।
सुदर्शन न्यूज ने यह भी खुलासा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए योजनाओं का लाभ उठाने वालों में से अधिकांश मुस्लिम हैं। मुस्लिम समुदाय के बाद, ईसाई दूसरे स्थान पर आते हैं; इसके बाद क्रमशः सिख, बौद्ध और पारसी आते हैं। बहरहाल, ब्योरोक्रेसी में ‘जाना’ एक बात है, मगर उस पर ‘कब्जा’ करने की तमन्ना अलग और नकारात्मक है।

इस्लामोफोबिक प्रोग्राम पर 'सुदर्शन न्यूज़' वाले सुरेश चव्हाणके को बड़ा झटका

Suresh Chavhanke (Sudarshan News) Age, Wife, Biography, Family & More -  FamousJoy
दिल्ली हाईकोर्ट के बाद अब सुरेश चव्हाणके को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। इनके ‘सुदर्शन’ चैनल के विवादित शो के प्रसारण पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है
शो का नाम ‘बिंदास बोल’ है। इसके प्रोमो में सुरेश चव्हाणके ने ‘यूपीएससी जिहाद’, ‘नौकरशाही जिहाद’ का पर्दाफाश करने का दावा किया था। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि ऊपरी तौर पर यही लगता है कि इस कार्यक्रम का मकसद मुस्लिमों की गलत छवि प्रस्तुत करना है
कोर्ट ने कहा,
‘प्रोग्राम में मुस्लिमों की अपर एज लिमिट और वो कितनी बार परीक्षा दे सकते हैं, इसे लेकर कई फैक्चुअली गलत दावे किए गए हैं. सभी समुदायों का को-एग्जिस्टेंस लोकतंत्र का मूल है ऐसे में किसी भी धर्म को विलेन की तरह प्रस्तुत करने की कोशिश का समर्थन नहीं किया जा सकता है
कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक सुदर्शन न्यूज़ टीवी अपने शो के बचे हुए एपिसोड प्रसारित नहीं कर सकता है। नाम बदलकर भी प्रसारण करने पर रोक रहेगी


फैसला सुनाते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ये भी कहा कि वो पांच नागरिकों की एक ऐसी कमिटी बनाने पर भी विचार कर रहे हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ स्टैंडर्ड तय कर सके
चैनल ने ट्रेलर जारी किया और विवाद शुरू हुआ
25 अगस्त सुदर्शन न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुदर्शन चव्हाणके ने एक ट्वीट किया। लिखा,
“सावधान. लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ कार्यपालिका के सबसे बड़े पदों पर मुस्लिम घुसपैठ का पर्दाफ़ाश। #UPSC_Jihad #नौकरशाही_जिहाद. देश को झकझोर देने वाली इस सीरीज़ का लगातार प्रसारण प्रतिदिन। शुक्रवार 28 अगस्त रात 8 बजे से सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ पर।”


ट्वीट में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और आरएएस को टैग भी कर दिया. इसी ट्रेलर के ख़िलाफ याचिका लगाई गई। चव्हाणके पर जामिया मिल्लिया और मुस्लिम समुदाय के छात्रों के खिलाफ ग़लत भाषा के इस्तेमाल और मानहानि का आरोप लगा। प्रोग्राम के खिलाफ याचिका लगाई गई। इसमें कहा गया,
“ट्रेलर और इसके साथ प्रस्तावित प्रसारण केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम के तहत प्रोग्राम कोड का उल्लंघन करता है। प्रस्तावित प्रसारण और ट्रेलर में अभद्र भाषा और आपराधिक मानहानि भी होती है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (1), 153B (1), 295A और 499 के तहत अपराध है।”
याचिका में यह भी लिखा गया,
“इस ट्रेलर या प्रस्तावित प्रसारण को अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ताओं, अन्य छात्रों, जामिया मिल्लिया के पूर्व छात्रों और 2020 में सिविल सेवा परीक्षा पास कर चुके छात्रों और मुस्लिम कम्युनिटी को खतरे का सामना करना पड़ेगा। यह अनुच्छेद-21 के तहत याचिकाकर्ताओं को प्रदत्त जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का खुला उल्लंघन होगा।”
इसी के बाद कोर्ट ने ट्रेलर और प्रस्तावित शो पर रोक लगाने का फैसला किया। शो का पहला एपिसोड 28 अगस्त को प्रसारित होना था। चव्हाणके कह रहे थे कि उन्हें कोर्ट की तरफ से शो पर रोक का कोई नोटिस नहीं मिला, इसलिए वो प्रसारित करेंगे. लेकिन शो के टाइम से पहले उन्हें नोटिस मिल गया और प्रसारण रोक दिया गया
हालांकि, केंद्र सरकार ने 9 सितंबर को प्रसारण की अनुमति दे दी। इसके बाद 11 और 14 सितंबर को इसके दो एपिसोड प्रसारित हुए। अब सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक प्रोग्राम के प्रसारण पर रोक लगा दी है

सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी, चैनल में घुसने की कोशिश

सुदर्शन न्यूज पर हमला
हाल ही में अपने शो ‘बिंदास बोल’ पर ‘जिहाद ब्यूरोक्रेसी’ दिखाने का ऐलान करने के कारण चर्चा में आए सुदर्शन न्यूज चैनल के ऊपर आज (सितंबर 11, 2020) हमला हुआ है। इस हमले की जानकारी मीडिया संस्थान के प्रमुख संपादक सुरेश चव्हाणके ने स्वयं दी है।
उन्होंने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “सुदर्शन पर हमला करने पहुँचे कट्टरपंथी। स्टूडियो में घुसने से रोकने पर सुरक्षा रक्षकों पर किया हमला। सेक्टर 58 थाने के प्रमुख “नावेद ख़ान” को कई बार निवेदन देने के बावजूद नोएडा पुलिस ने यहाँ एक भी पुलिसवाला नहीं लगाया है। ट्वीट लिखते समय हंगामा जारी है।”
सुरेश चव्हाणके के इस ट्वीट के बाद सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले पर यूपी के डीजी को फौरन एक्शन लेने की बात कही है।
सुदर्शन न्यूज के ट्विटर अकॉउंट पर भी एक वीडियो साझा की गई है। इस वीडियों में दूसरे समुदाय के लोगों का जमावड़ा मुख्यालय के बाहर देखा जा सकता है। साथ ही उनमें से एक व्यक्ति संस्थान के लोगों से कहता दिख रहा है, “इस शो को बंद होना चाहिए। ये हिंदू-मुसलमान के सिवा कोई बात ही नहीं करते। देश में रोजगार भी है, शिक्षा भी है, स्वास्थ्य भी है। उस पर शो चलाइए। बेवजह हर वक्त हिंदू-मुस्लिम करते रहते हो।”

वहीं न्यूज चैनल के ट्वीट में लिखा है, “सुदर्शन मुख्यालय के बाहर मुस्लिमों का जमावड़ा। जबरन चैनल में घुसने की कोशिश। अंदर फेंके पत्थर। सुरेश जी को बाहर निकालने के नारे।”

ट्विटर पर कट्टरपंथियों के विरुद्ध छिड़ती जंग:
नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में
हिन्दुत्व के विरुद्ध ये बकवास करने वाले
कौन-कौन बिकाऊ लोग थे? चिंगारी छोड़ो,
फिर
पलटवार होने पर बेगैरत होकर चिल्लाते हो
"हमारे पर जुल्म हो रहा है।"  
आखिर सच्चाई उजागर होने से कट्टरपंथियों को क्यों परेशानी हो रही है? जहाँ तक ये लोग हिन्दू-मुसलमान होने की बात कर रहे हैं, ये लोग जवाब दें, नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हिन्दू-मुसलमान कौन कर रहा था? हिन्दुत्व के खिलाफ होती नारेबाजी के बावजूद बेशर्म हिन्दू चाहे वह किसी भी पार्टी से हों, इनका साथ दे रहे थे। आज वास्तव में दो चैनल कट्टरपंथियों, छद्दम सेक्युलरिस्ट्स और वामपंथियों के निशाने पर हैं। रिपब्लिक भारत और सुदर्शन दोनों ही देश की ज्वलन्त समस्याओं को उजागर करने में प्रयत्नशील है, जिसका हर चैनल को साथ देना चाहिए। मजे की बात यह है कि जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून का विरोध करने के लिए रूपए बांट कर भीड़ जमा की गयी थी, उसी तर्ज पर सुदर्शन चैनल पर जमा किया गया, जिसे वीडियो में सुना जा सकता है कि "उसकी दहाडी तो दो।"  

सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके बाद से ही चैनल समुदाय विशेष के निशाने पर था। दरअसल इस वीडियो में उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?
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सुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम ‘बिंदास बोल’ को सितंबर 10, 2020 को ब्रॉडक्रॉस्ट करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से...
इस वीडियो के वायरल होने के बाद जामिया के छात्रों ने इस शो को रुकवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शो पर रोक लगा दी। हालाँकि कल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश दिए कि चैनल अपना शो चला सकता है।

सुदर्शन न्यूज को मिले ‘बिंदास बोल’ ब्रॉडकास्ट करने के निर्देश

Suresh Chavhankeसुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम ‘बिंदास बोल’ को सितंबर 10, 2020 को ब्रॉडक्रॉस्ट करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से निर्देश दे दिए गए। मंत्रालय ने मीडिया संस्थान को यह प्रोग्राम ब्रॉडकास्ट करने से पहले सुनिश्चित करने को कहा कि उसमें किसी संहिता का उल्लंघन न हो।
इससे पहले 28 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज चैनल के प्रोग्राम को प्रसारित करने पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने यह फैसला जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर लिया था। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि शो में खुलेआम जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों और मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ हेट स्पीच दी जा रही है। 
दरअसल इस प्रोग्राम का विरोध करने का मुख्य कारण था, कट्टरपंथियों के फ़ैल रहे मकालजल का उजागर होना। ज्ञात हो, जब कश्मीर में अलगाववादियों को बंद कर कश्मीरी मुस्लिम युवकों द्वारा पुलिस एवं फौज में भर्ती के लगी होड़ पर भी कुछ लोगों द्वारा शंका व्यक्त की गयी थी। जो सुदर्शन न्यूज़ द्वारा सरकारी स्तर पर जेहादी उन्मादों के कब्ज़ा होने पर उपद्रवियों को गुप्त संरक्षण देने के षड़यंत्र का भांडा फूटने के डर से विरोध किया जा रहा है। हालाँकि सुदर्शन के दर्शक कम हैं, लेकिन विरोध ने इसकी लोकप्रियता को बढ़ा दिया है।
हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना फैलने पर चुनाव आयोग के भूतपूर्व आयुक्त कुरैशी ने "मोदी को कोरोना हो जाए" का ट्वीट किया था, क्यों? दूसरे, जब तक हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति रहे, उन्हें और मुसलमानों को कोई डर नहीं था, लेकिन पदमुक्त होते ही, डर सताने लगा। वैसे भी हामिद के कार्यकलापों पर उस दिन से निगाह रखी जा रही थी, जब वह ईरान में भारत के राजदूत होते हुए ईरान में नियुक्त रॉ अधिकारियों की सूचना पाकिस्तान को देते थे। जो अति गोपनीय होती है। शायद यही कारण था कि पाकिस्तान हम पर हावी रहता था। यह तो बस एक झलकी है, और चेहरों से नकाब उठना अभी बाकी है। संभव है, इस प्रोग्राम के एक-दो एपिसोड के बाद कट्टरपंथी, अलगाववादी और इनके समर्थक दलों में खलबली न मच जाए। 1965 इंडो-पाक के दौरान चर्चित गायक मोहम्मद रफ़ी का बहुचर्चित देशभक्ति गीत "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल कर रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से....." को याद कर देशविरोधियों के विरुद्ध कमर कसनी होगी। 
एक तरफ सुशांत राजपूत की हत्या बॉलीवुड में फैले गंद को बेपर्दा कर रही है, तो दूसरी तरफ सुदर्शन न्यूज़ का यह प्रोग्राम सत्ता में छिपे बैठे देश विरोधियों को बेनकाब करने की ओर देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।   



दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया था, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रोग्राम पर रोक लगाने से मना किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विचारों के प्रकाशन या प्रसारण के सम्बन्ध में रोक लगाने वाला निर्णय देने से पहले कोर्ट को सतर्कता बरतनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और ‘सुदर्शन न्यूज़’ को नोटिस भी भेजा था। 
पिछले दिनों सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के खिलाफ अभियान शुरू किया था, जिसमें कई सबूतों के आधार पर सच दिखाने का दावा किया गया था। इस प्रोग्राम के बारे में बताने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट की थी। जिसके बाद यह पूरा मामला गर्माया।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कट्टरपंथी किस सीमा तक पहुँच चुकी है, इसका उदाहरण पूर्व चुनाव आयुक्त के ट्वीट ...
उन्होंने इस वीडियो में बताया था कि उनका चैनल इस बात का विश्लेषण कर रहा है कि कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?

साम्प्रदायिकता फैलाती ‘इंडिया टुडे’ के पूर्व इनपुट हेड रहे रिफत जावेद की चलायी अमूल कंपनी के बहिष्कार की मुहिम

क्या सच्चाई को दिखाना गुनाह है? हर सच्चाई को मुस्लिम कट्टरपंथी और वामपंथी साम्प्रदायिक दृष्टि से ही क्यों देखते है? दूसरे शब्दों में यही कहा जाएगा कि इन लोगों के कुकृत्यों के उजागर होने से इन्हे डर सता रहा है कि जनता-जनार्दन के समक्ष हमारी काली करतूतें उजागर होने से कोई इनकी आवाज़ पर नहीं आएगा। सेकुलरिज्म के नाम पर परोसे जा रहे जहर के सार्वजनिक होने से क्यों घबरा रहे हैं? क्या छद्दम सेकुलरिज्म के नाम पर फैलाए गए जहर को ख़त्म कर वास्तविक सेकुलरिज्म को लाना साम्प्रदायिकता है?
इस पाखंडी सेकुलरिज्म ने 
राजनीति का नाश करने के साथ-साथ समस्त कार्य-प्रणाली को प्रभावहीन कर दिया है। अपनी कुर्सी की खातिर देश के गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर, मुग़ल आतताइयों को महान बताकर पढ़ाने का साहस सिर्फ और सिर्फ भारत में ही हो सकता है। अगर विदेश में ऐसा कुकृत्य किया होता, ऐसे इतिहासकारों को सलाखों के पीछे पटक दिया होता। हिन्दू हित की बात करने में साम्प्रदायिकता नजर आती है और मुस्लिम हित की बात करने पर सेकुलरिज्म, ये कौन-सी सियासत है, जहाँ मजहब के नाम पर गोटियां फेंकी जाती है? लगता है सेकुलरिज्म की दुहाई देने वालों को इसका क,ख,ग तक नहीं मालूम होगा, और सियासत करते हैं सेकुलरिज्म की। ये मजहब देख कर सियासत करने और धर्म के नाम साम्प्रदायिकता का जहर फ़ैलाने वाले लोग हैं। 
देश में कोरोना फैलने पर पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी का कहना "मोदी को कोरोना हो जाए" क्या प्रमाणित करता है? पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ईरान में भारतीय राजदूत होते पाकिस्तान का समर्थन करते रॉ अधिकारियों की जानकारी देते हैं, फिर उप-राष्ट्रपति रहते दशहरा समारोह में सम्मिलित होते हैं, और जब उनसे भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की आरती के लिए अनुरोध किया जाने पर कहते हैं, "इस्लाम इजाजत नहीं देता", तो क्या वहां माल बटोरने गए थे? फिर 2014 में मोदी सरकार बनने पर पुनः उप-राष्ट्रपति न बनाये जाने पर, भारत में मुसलमानों को डर लगने की अफवाह फ़ैलाने को सेकुलरिज्म कहते हैं? 
कमाल है सच्चाई सामने आने से पहले ही घबराहट। सुरेश ने अभी अंगड़ाई ली ही कहाँ है?

देश में एक ऐसा ‘गैंग’ सक्रिय है, जो देश को आत्मनिर्भर बनाने वाली स्वदेशी कंपनियों के खिलाफ मुहिम चलाता है और लोगों को उनके बहिष्कार के लिए भड़कता है। यह ‘गैंग’ खासकर उन कंपनियों को निशाना बनाता है, जो किसी-न-किसी रूप में राष्ट्रीय भावना और देशप्रेम को प्रदर्शित करती है। यह ‘गैंग’ विदेशी सरकारों और कंपनियों के इशारे पर स्वदेशी कंपनियों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाता है, ताकि लोगों में उनकी विश्वसनीयता को खत्म किया जा सके और अपने खास एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके। पतंजलि के बाद अब इस स्वदेशी विरोधी गैंग के निशाने पर विश्व की टॉप 20 डेयरी कंपनियों की सूची में शामिल अमूल कंपनी है। 
लेकिन चीन में इस्लाम के खिलाफ उठाए जा रहे किसी भी कदम पर बोलने का साहस नहीं, वहां भी किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, सब मुंह में दही जमाए बैठे हैं। चीन के किसी भी उत्पाद के बहिष्कार करने की आवाज़ तक निकालने की हिम्मत नहीं। लेकिन भारत में किसी भी उचित कदम पर इन्हे साम्प्रदायिकता नज़र आने लगती है, क्योकि 2014 से पूर्व तक पिछली सरकारें इनकी गीदड़ भबकियों से डर तुष्टिकरण की बैसाखी के सहारे चलती थीं, जिस कारण "सोने की चिड़िया " के नाम से चर्चित देश घोटाला प्रधान बन गया। लेकिन सत्ता बदलने के साथ-साथ बहुत कुछ भी बदल रहा है, परन्तु तुष्टिकरण और कट्टरपंथी नहीं। जिसे बदलने में समय लगेगा। 

दरअसल जिस तरह अमूल कम्पनी अपने विज्ञापनों के माध्यम से देश की तरफदारी करती है इससे एक खास ‘गैंग’ को परेशानी हो रही है। इनमें ‘इंडिया टुडे’ के पूर्व इनपुट हेड रहे रिफत जावेद भी शामिल है। उन्होंने अमूल पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने वाले टीवी चैनलों को विज्ञापन देने का आरोप लगाया है। उन्हें समस्या है कि अमूल कम्पनी ‘रिपब्लिक भारत’ और ‘सुदर्शन टीवी’ को विज्ञापन क्यों दे रही है? क्या इस तरह की अनर्गल बातें साम्प्रदायिकता नहीं फैला रहीं? गृह मंत्रालय को ऐसे तत्वों का संज्ञान लेकर सख्ती से पेश आए। अगर पलटवार में मुस्लिम संस्थानों द्वारा निर्मित उत्पादों को न खरीदने की मुहिम छिड़ने पर क्या हश्र होगा, उसका संज्ञान लेना चाहिए। हलाल मीट का तो हो चूका है। 


हालांकि इस ‘गैंग’ को इस्लामोफोबिया से कोई लेना-देना नहीं है। इन्हें समस्या है कि अमूल कम्पनी सर्जिकल स्ट्राइक के समर्थन में विज्ञापन क्यों बनाती है? इस जमात को समस्या है कि अमूल कम्पनी ‘चीनी कम्पनियों’ के बहिष्कार पर विज्ञापन क्यों बनाती है? आखिर ये माइंडसेट क्या कहता है कि जब भी कोई कंपनी भारत के हित की बात करती है ये ‘गैंग’ नाक-मुंह सिकुड़ता हुआ अपने असली रंग में आ जाता है। सोशल मीडिया पर #BoycottAmul जैसा ट्रेंड चलाने लगता है।
इन पोस्टरों से स्पष्ट है कि इस ‘गैंग’ को विज्ञापन से ज्यादा अमूल की देशभक्ति से परेशानी है। इसके अलावा अमूल प्रोडक्ट्स के विरोध के पीछे इन लोगों की मानसिकता में जहर घुला हुआ है क्योंकि यह जानते हैं कि अमूल गुजरात का ब्रांड है और देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खासी दिलचस्पी अमूल की सफलता में रही है। प्रधानमंत्री अक्सर अमूल की सफलता के किस्से उद्यमियों को सुनाते रहे हैं और गुजरात का ब्रांड व प्रधानमंत्री मोदी का विशेष लगाव अमूल से होने के चलते ही अमूल डेयरी प्रोडक्ट के खिलाफ ये लोग मुहिम चला रहे हैं।
अमूल से इन्हें नफरत इसलिए है क्योंकि अमूल प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में मील का पहला पड़ाव है और अभी आगे इस अभियान के लिए लंबी लड़ाई बाकी है। 1946 में बनी अमूल कंपनी गुजरात की लाखों परिवारों को रोजी रोटी कमाने का मौका देती है, अमूल के लिए विशेष तौर पर लाखों महिलाएं प्रतिदिन काम करती हैं और इसलिए अमूल कंपनी प्रधानमंत्री मोदी की नजरों में विशेष दर्जा रखती है।




अवलोकन करें:-
एक खास एजेंडे तहत किए जा रहे इस बहिष्कार की धज्जियां उड़ाने के लिए भी लोग सामने आए हैं। अमूल के समर्थन में ट्रैंड चलाकर इस ‘गैंग’ को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई थी रोक, फिर हाई कोर्ट ने क्यों?

वामपंथ के विरोध के दौरान मीडिया जगत में पुलिस बल अर्थात खाकी के समर्थन की  शुरुआत सुरेश चव्हाणके जी ने की.. आगे भी साथ देते रहने का संकल्प भी
                                                         साभार : सुदर्शन चैनल 
क्या सच्चाई को दिखाना गुनाह है? हर सच्चाई को मुस्लिम कट्टरपंथी और वामपंथी साम्प्रदायिक दृष्टि से ही क्यों देखती है? दूसरे शब्दों में यही कहा जाएगा कि इन लोगों के कुकृत्यों के उजागर होने से इन्हे डर सता रहा है कि जनता-जनार्दन के समक्ष हमारी काली करतूतें उजागर होने से कोई इनकी आवाज़ पर नहीं आएगा। सेकुलरिज्म के नाम पर परोसे जा रहे जहर के सार्वजनिक होने से क्यों घबरा रहे हैं? क्या छद्दम सेकुलरिज्म के नाम पर फैलाए गए जहर को ख़त्म वास्तविक सेकुलरिज्म को लाना साम्प्रदायिकता है?
राजनीति का इस पाखंडी सेकुलरिज्म ने नाश करने के साथ-साथ समस्त कार्य-प्रणाली को प्रभावहीन कर दिया है। अपनी कुर्सी की खातिर देश के गौरवमयी इतिहास को धूमिल कर, मुग़ल आतताइयों को महान बताकर पढ़ाने का साहस सिर्फ और सिर्फ भारत में ही हो सकता है। अगर विदेश में ऐसा कुकृत्य किया होता, सलाखों के पीछे पटक दिया होता। हिन्दू हित की बात करने में साम्प्रदायिकता नजर आती है और मुस्लिम हित की बात करने पर सेकुलरिज्म, ये कौन-सी सियासत है, जहाँ मजहब के नाम पर गोटियां फेंकी जाती है? 
देश में कोरोना फैलने पर पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी का कहना "मोदी को कोरोना हो जाए" क्या प्रमाणित करता है? पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ईरान में भारतीय राजदूत होते पाकिस्तान का समर्थन करते रॉ अधिकारियों की जानकारी देते हैं, फिर उप-राष्ट्रपति रहते दशहरा समारोह में सम्मिलित होते हैं, और जब उनसे भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की आरती के लिए अनुरोध किया जाने पर कहते हैं, "इस्लाम इजाजत नहीं देता", तो क्या वहां माल बटोरने गए थे? फिर 2014 में मोदी सरकार बनने पर पुनः उप-राष्ट्रपति न बनाये जाने पर, भारत में मुसलमानों को डर लगने की अफवाह फ़ैलाने को सेकुलरिज्म कहते हैं? 
कमाल है सच्चाई सामने आने से पहले ही घबराहट। सुरेश ने अभी अंगड़ाई ली ही कहाँ है?
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2020 को ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर आने वाले सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुरेश चव्हाणके ने दावा किया था कि इस कार्यक्रम के जरिए वो ‘UPSC जिहाद’ की पोल खोलते हुए बताएँगे कि कैसे सिविल सेवाओं में मुस्लिमों को एक एजेंडे के तहत घुसाया जा रहा है। बाद में हाई कोर्ट ने एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसफ की पीठ ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर शाम को प्रसारित होने वाले शो ‘बिंदास बोल’ पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत को विचारों के किसी प्रकाशन या प्रसारण सम्बन्धी चीजों पर रोक लगाने से पहले सतर्क रहना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्तर पर हम 49 सेकंड के अपुष्ट ट्रांसक्रिप्ट के आधार पर कार्यक्रम के प्रसारण से पहले उसे प्रतिबंधित किए जाने का फैसला देने से बच रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि विचारों के प्रकाशन या प्रसारण के सम्बन्ध में रोक लगाने वाला निर्णय देने से पहले कोर्ट को सतर्कता बरतनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का ये निर्णय हाई कोर्ट द्वारा कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने के कुछ ही घंटों पहले आया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ पर सुरेश चव्हाणके के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के उक्त एपिसोड पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला देते समय समाजिक समरसता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखने की जिम्मेदारी की बात की। सुप्रीम कोर्ट में फिरोज इक़बाल खान ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस शो से समाज में विभाजन होगा और इसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया है।
ट्विटर पर आती प्रतिक्रियाएं





वहीं हाई कोर्ट में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने याचिका दायर की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और ‘सुदर्शन न्यूज़’ को नोटिस भी भेजा। जामिया वालों ने इस कार्यक्रम पर मुस्लिमों के प्रति घृणा फैलाने का आरोप लगाया था। सुरेश चव्हाणके ने ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के खिलाफ अभियान शुरू किया है, जिसमें कई सबूतों के आधार पर सच दिखाने का दावा किया जा रहा है।

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सुदर्शन न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ सुरेश चव्हाणके ने कुछ दिनों पहले अपने चैनल पर एक सीरीज लाने का ऐलान किया। उन्हो.....
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साभार : यूट्यूब आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार शीर्षक देख आप सोंचगे...
सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि चैनल विश्लेषण कर रहा है कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित मुसलमानों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?