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भूकंप के बाद तुर्की के लोगों में आक्रोश : ‘सीरिया वाले शरणार्थियों को बाहर निकालो, ये लूट रहे हमारी घरें-दुकानें’

                           तुर्कों ने सीरियाई लोगों पर भूकंप के बाद दुकानों को लूटने का आरोप लगाया
तुर्की (Turkey) और सीरिया (Syria) में हाल ही में आए भूकंप से हजारों लोगों की मौत हो गई है और मृतकों का आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर तुर्की में लाखों सीरियाई शरणार्थियों के प्रति तुर्कों के बीच नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। कुछ लोग सीरियाई शरणार्थियों पर अराजकता और तबाही के बीच लूटपाट का आरोप लगा रहे हैं।

यही वजह है कि एक मुस्लिम-बहुसंख्यक देश तुर्की में सीरियाई लोगों के खिलाफ घृणा के मामले बढ़ रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप प्रभावित कस्बों और शहरों में, कुछ तुर्कों ने सीरियाई लोगों पर क्षतिग्रस्त दुकानों और घरों से चोरी करने का आरोप लगाया है। ट्विटर पर सीरियाई विरोधी स्लोगन ट्रेंड कर रहा है। तुर्क लोग ‘हम सीरियाई नहीं चाहते हैं’, ‘अप्रवासियों को वापस भेजो’, ‘अब कोई स्वागत नहीं’ जैसे स्लोगन को ट्रेड करवा रहे हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक आपातकालीन शिविरों में शरण लिए हुए सीरियाई भूकंप पीड़ितों को कथित तौर पर आश्रय शिविरों से बाहर निकाल दिया गया है। एक सीरियाई व्यक्ति ने मेर्सिन शहर में अपने हमवतन लोगों के लिए विशेष रूप से आश्रय स्थापित किया था, उसे भी तुर्को द्वारा नस्लवादी टिप्पणी का सामना करना पड़ा। 

नाम न बताने की शर्त पर एक सीरियाई व्यक्ति ने अफसोस जताते हुए कहा कि अरबी बोले जाने पर लोग उनपर चिल्लाने लगते हैं। इसलिए, उन्होंने बचाव स्थलों पर जाना बंद कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि लोग कलह पैदा करने के लिए लगातार उन पर लूटपाट का आरोप लगाते हैं।

तुर्की और सीरिया में भूकंप के कारण मरने वालों की आधिकारिक संख्या 37,000 से अधिक हो गई है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशँका है। स्थानीय निवासियों और सहायता सहायता कर्मियों के अनुसार हजारों विस्थापितों को भोजन और आपातकालीन आश्रय प्रदान करने में कई क्षेत्रों में कई दिनों की देरी हुई है। इसके अलावा, लूटपाट की खबरें आई हैं। कुछ विदेशी सहायता टीमों ने बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण अस्थायी रूप से अपने काम को रोक दिया है।

तुर्की के न्याय मंत्री ने घोषणा कर कहा है कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने लूटपाट के आरोप में 48 लोगों को बिना पहचान के आधार पर गिरफ्तार किया है। राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) ने लुटेरों से सख्ती से निपटने का संकल्प लिया है।

2011 में सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद से तुर्की ने लगभग 40 लाख सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहाँ शरण दी और उन्हें घर उपलब्ध कराया है। इनमें से अधिकांश शरणार्थी देश के दक्षिण में सीरियाई सीमा के पास रहते हैं। गज़ियान्तेप (Gaziantep) शहर भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और यहाँ लगभग 500,000 सीरियाई लोग रहते हैं, जो आबादी का 25% है।

हालाँकि, सीरियाई लोगों के प्रति आक्रोश कोई नई घटना नहीं है, वो बात अलग है कि भूकंप ने मौजूदा तनाव को बढ़ा दिया है। ताजा मामले अरब दुनिया के देशों के बीच मौजूद मतभेदों को रेखांकित करते हैं, भले ही वे इस्लाम के बैनर तले एकता का दिखावा करते रहे हों।

यहाँ तक कि तुर्की गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, इसने सीरियाई शरणार्थियों पर पिछले एक दशक में 40 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया है। कुछ तुर्की लोग सीरियाई लोगों को सस्ते मजदूर मानते हैं जिन्होंने नौकरियों पर कब्जा कर लिया है और सेवाओं का इस्तेमाल किया है।

बेंगलुरु दंगा : सिर्फ घर ही नहीं जलाया, 3 करोड़ रुपए के सोने-चाँदी भी लूटे

बेंगलुरु दंगा कॉन्ग्रेस MLA
कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति अपने जले
और लूट लिए गए घर को दिखाते हुए
बेंगलुरु में हुई दंगों की घटनाओं मे हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं।अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक़ 11 अगस्त 2020 के दिन हुए दंगों में पुलिस की गाड़ियाँ जलाई गई थीं। कांग्रेस विधायक के घर तोड़-फोड़ हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने कुछ और बड़े खुलासे किए हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ उस दिन भीड़ ने लगभग 3 करोड़ के सामान भी लूटे। चर्चा है कि पहले FIR दर्ज करने से मना करने वाले कांग्रेस के दलित विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने अब क्यों FIR करवाई? क्या पहले हाई कमांड से इजाजत नहीं मिली थी? या फिर इनका मीम भाईचारा रोक रहा था? मूर्ति द्वारा सीबीआई जाँच की मांग सिद्ध करती है कि ये FIR और CBI के लिए जरूर ऊपर से दबाव है।  कमाल है कि जय मीम ने जय भीम को ही लूट लिया।    
बेंगलुरु पुलिस की जाँच में एक और हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। दंगों के संबंध में 12 अगस्त को सैयद नदीम नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। कुछ समय बाद नदीम ने सीने और पेट में दर्द की बात कही। जिसके बाद उसे बोरिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस पर ट्विटर पर लोगों की आती प्रतिक्रियाओं में यह भी बात हो रही है कि एक दलित के पास 3 करोड़ (नकद, सोना अथवा चांदी) घर पर था, फिर बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं में कितना होगा, वाकई जाँच का विषय है। इसकी जाँच सीबीआई ही नहीं आयकर विभाग को भी करनी चाहिए।   
इस दौरान नदीम पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। शनिवार(अगस्त 15) के दिन नदीम की मृत्यु हो गई। कुछ ही समय बाद उसकी कोरोना जाँच की रिपोर्ट भी सामने आई। जिसमें यह पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव था। क्षेत्र के अतिरिक्त मंडलायुक्त हेमंत निम्बलकर ने भी इस घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सैयद नदीम को कई तरह की परेशानियाँ थी, जब उसकी हालत पर संदेह हुआ, तब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। 
घटना के संबंध में कांग्रेस विधायक ने भी प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें दंगों से जुड़ी कई अहम बातें आई हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर में लगभग 3 हज़ार लोगों ने तोड़-फोड़ मचाई और गाड़ियों को आग के हवाले किया। इतना ही नहीं घर में मौजूद सोना, चाँदी और नकदी मिला कर लगभग 3 करोड़ का सामान भी लूटा गया। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है और अभी तक कुल 206 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।  
इसके पहले कांग्रेस विधायक इस घटना पर अपना पक्ष रख चुके हैं। कांग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने पत्रकारों से बात करते हुए दुखी मन से कहा था, “मैं मुसलमानों को अपना भाई मानता था। कम से कम 25 साल से हम मिल-जुलकर रह रहे थे। फिर भी आज मैंने अपना 50 साल पुराना घर खो दिया।”
दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनके घर पर 2000-3000 मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ पहुँची, पथराव किया, पेट्रोल डाला, टायर जलाए और घर में आग लगा दी। उन्होंने बताया कि उग्र दंगाइयों ने तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी से हमला किया और उनके आवास पर पेट्रोल बम भी फेंके। इसके अलावा कांग्रेस MLA ने कहा, “सवाल यह उठता है कि अगर कानून बनाने वाले को यह भुगतना पड़े तो मैं आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकता हूँ?”
उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपने परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। साथ ही मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी ​​को सौंपने की अपील की है। उन्होंने कहा, “एक विधायक होने और कर्नाटक में सबसे बड़े मार्जिन से जीतने के बावजूद आज मेरी यह हालत है। अन्य विधायकों की क्या स्थिति हो सकती है?”
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