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प्रकाश राज और RJ सायमा सहित पूरा गिरोह उतरा कानून का उल्लंघन करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में: मासूम बच्चों का वीडियो वायरल कर किया था

                     आरजे सायमा, मोहम्मद जुबैर और प्रकाश राज (दाएँ से बाएँ) (फोटो साभार :                                                                                                                        ट्विटर__sayema/starsunfolded/IMBD)
फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले कथित फैक्ट चेकर जुबैर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से उसकी गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई है। आम लोग जहां एक पीड़ित बच्चे का वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर करने वाले और वीडियो को एडिट कर समाज में जहर घोलने वाले जुबैर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, तो पूरा वामपंथी गिरोह उसके बचाव में खुलकर उतर आया है। इस लिस्ट में प्रकाश राज, आरजे सायमा, सीमा चिश्ती जैसे नाम हैं।

सबसे पहले पढ़िए सायमा का ट्वीट, जिसने कौशिक राज के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को गलत ठहरा दिया। सायमा ने लिखा, “क्या समय आ गया है, तृप्ति त्यागी नाबालिग के साथ अपराध करने के बाद भी खूब सपोर्ट पा रही है, तो इस खबर को सामने लाने वाले पर ही पुलिस ‘अटैक’ कर रही है।” सायमा ने ‘आई स्टैंड विद जुबैर’ का हैशटैग भी आगे बढ़ाया है।

वहीं, वामपंथी मीडिया संस्थान द वायर की संपादक सीमा चिश्ती को जुबैर इसलिए बेचारे लगने लगे, क्योंकि जुबैर ने आग लगाकर पानी डाल दिया था। उसका एडिट किया हुआ वीडियो सारी दुनिया में घूमने के बाद। अब सीमा चिश्ती यूपी पुलिस पर ही सवाल उठा रही हैं, पढ़िए ट्वीट…

हालाँकि प्रकाश राज के ट्वीट करते ही लोगों ने जम कर लताड़ लगाई। प्रकाश राज ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि वो जुबैर का समर्थन करने के लिए इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी आई स्टैंड विद जुबैर हैशटैग के साथ ट्वीट करने की अपील की।

प्रकाश राज कई मामलों में बुरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं, जो एक्स (पूर्व में ट्विटर) की आम जनता भी उन्हें उसी तरह आड़े हाथों लेती है। प्रकाश राज के ट्वीट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने प्रकाश राज को उसकी असल औकात याद दिला ली। देखिए कुछ ट्वीट्स…

दिनेश भट्ट नाम के एक यूजर ने प्रकाश राज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रकाश राज को रिप्लाई देते हुए लिखा, “एक ऐसा मूर्ख जो अपनी मक्कारी भरी हरकतों से आज तक एक निम्न स्तरीय जंतु की तरह रेंग रहा है, जिसका मन मस्तिष्क घटियापन से भरा हुआ है, वो एक ऐसे बेयर रूपी मक्कार को सहारा देकर खड़े होने की बात कर रहा है, पहले तुम मेरे खड़े हुए कड़क जंतु का सहारा लेकर अपने पृष्ठ भाग को रख कर बैठ जाओ, तुम्हारे पृष्ठ भाग की खुजली के साथ साथ तुम्हारी मानसिक खुजली भी दूर हो जाएगी।।”

अनूप रावत लिखते हैं, “फॉर्म भरते वक्त फादर वाली जगह पर अब्दुल तो नहीं लिखते हो?”

जॉन कबीर एक तस्वीर के माध्यम से बोल रहे हैं कि तुम कुछ भी करो, हमें क्या मतलब है।

योगी आदित्यनाथ नाम से बने एक पेरोडी अकाउंट से अलग ही वीडियो शेयर किया गया है। कैप्शन में उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हालत की तुलना प्रकाश राज और जुबैर से की गई है।

मोहम्मद ज़ुबैर ने वीडियो के जरिए फैलाया था प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर FIR दर्ज की है। ये मामला खुब्बापुर गाँव स्थित ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ के वायरल वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में शिक्षिका तृप्ता त्यागी बैठी हुई दिख रही है। साथ ही एक मुस्लिम बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया जाता है। वीडियो उस मुस्लिम बच्चे के चचेरे बड़े भाई ने ही बनाया था। वीडियो में वो हँसता हुआ सुनाई दे रहा है। वही शिक्षा के पास अपने भाई की शिकायत लेकर आया था।

वहीं मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में वीडियो वायरल किया था, लेकिन बच्चों के चेहरों को ब्लर नहीं किया था। इस FIR में बताया गया है कि AltNews के पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का उल्लंघन करते हुए बच्चे की पहचान उजागर की गई है। इसके लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ये FIR सोमवार (28 अगस्त, 2023) को दर्ज की गई है। मोहम्मद ज़ुबैर ने बाद में इस वीडियो को डिलीट कर लिया था, लेकिन माफ़ी तक नहीं माँगी थी।

ज़ुबैर के ट्वीट से ट्रेंड में आया कीवर्ड: शिकायत के बाद अब दे रहा सफाई, अर्शदीप पर प्रोपेगंडा की खुली पोल

मोहम्मद जुबैर (फाइल फोटो साभार: न्यूजरूम पोस्ट)
भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह को खालिस्तानी कहने वालों का प्रचार करने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक और कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसका विरोध करते हुए मोहम्मद जुबैर ने 7 सितंबर, 2022 को अपने ट्विटर हैंडल पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। लेकिन, ट्विटर यूजर ‘द हॉक आई’ ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

जुबैर ने दावा किया कि उसके खिलाफ ‘नफरत फैलाने’ के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जुबैर ने सिरसा के आरोपों का जवाब देने की कोशिश करते हुए कहा कि अर्शदीप के कैच छोड़ने के एक घंटे बाद उन्होंने ट्वीट किया। उन्होंने ट्विटर हैंडल @MrSinha_ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने भी ‘खालिस्तानी’ शब्द का इस्तेमाल किया। दिलचस्प बात यह है कि सिन्हा ने अर्शदीप को ‘खालिस्तानी’ कहा ही नहीं था।

सिन्हा ने इस ओर इशारा किया था कि ‘किंग्स इलेवन पंजाब’ का ऑफिशियल हैंडल पाकिस्तानी टीम के लिए चीयर कर रहा था, लेकिन उन्होंने अर्शदीप को खालिस्तानी नहीं कहा था। ट्वीट के लिए एक वेब आर्काइव लिंक था, लेकिन आर्काइव लिंक में विशेष लिंक को आर्काइव नहीं किया गया था। सिन्हा ने जुबैर का भी जवाब दिया और कहा कि वह अर्शदीप का नहीं, बल्कि किंग्स इलेवन के ट्विटर हैंडल का जिक्र कर रहे हैं। जुबैर के झूठे ट्वीट के कारण सिन्हा ट्रोलिंग का शिकार हुए।

जुबैर ने आगे दावा किया कि भारतीयों और पाकिस्तानियों ने अर्शदीप को खालिस्तानी कहने के साथ उन्हें गालियाँ भी दीं। हालाँकि, हॉक आई ने इस बात को प्रमुखता से उठाया कि कैसे उसके (जुबैर) ट्वीट के बाद खालिस्तानी शब्द का प्रयोग हुआ। हैंडल ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखते हुए जुबैर के ट्वीट को साझा किया और कहा, “आपके ट्वीट करने के 45 मिनट पहले ये कीवर्ड ट्रेंड नहीं कर रहा था। आप अपने कोलाज में राइट विंग हैंडल को कोट कर रहे हैं। Google ट्रेंड, विकीपीडिया पेज में परिवर्तन, पाकिस्तानियों और इसे शुरू करने वाले ‘Dunya Ch’ के डेटा को क्यों छोड़ रहे हैं?”

‘द हॉक आई (The Hawk Eye)’ ने ट्वीट के साथ कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। पहले स्क्रीनशॉट में साफ देखा जा सकता है कि जुबैर के ट्वीट से पहले खालिस्तानी शब्द का इस्तेमाल करते हुए 500 से कम ट्वीट किए गए थे। लेकिन उसके ट्वीट के एक घंटे के भीतर यह 1000 से अधिक हो गया और बढ़ता ही रहा। अगले दिन दोपहर में 3:30 बजे तक यह 16,000 से अधिक तक पहुँच गया। गूगल ट्रेंड्स मैप के मुताबिक खालिस्तानी शब्द के प्रचार-प्रसार के पूरे विवाद में पाकिस्तान का 46 फीसदी योगदान था। इसके अलावा यूएई का 20%, भारत का 17% और कतर का 7% था।

पाकिस्तानी मूल के पत्रकार डब्ल्यूएस खान ने ट्वीट किया था कि कैच छूटने के महज 3 मिनट बाद ही अर्शदीप खालिस्तानी आंदोलन का हिस्सा हो सकते हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर ओसामा जिसे ‘ashaqueens’ ट्विटर हैंडल से जाना जाता है, उसने कहा था कि अर्शदीप को खालिस्तानी आंदोलन का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि वह कैच छोड़ने के बाद अब भारत नहीं जा सकता। कैच छूटने के 12 मिनट बाद ही ये ट्वीट किया गया था।

पूरे विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जुबैर ने जानबूझकर ‘खालिस्तानी’ शब्द को ही खोजा था। इस बात की पुष्टि उसके सभी स्क्रीनशॉट से होती है, जिसमें यह शब्द बोल्ड है। यह तभी होता है जब आप ट्विटर पर सर्च रिजल्ट से ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट ले रहे होते हैं।

पाकिस्तान और अरब देशों से किए गए ट्वीट

पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अर्शदीप ने 18वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए। जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं, वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए थे।

विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला

पाकिस्तानियों ने केवल सोशल मीडिया पर ही अर्शदीप को खालिस्तानी दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि उन्होंने विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदल दिया था। उन्होंने जहाँ-जहाँ अर्शदीप के नाम के साथ भारतीय होना चाहिए वहाँ जानबूझकर खालिस्तान लिखा था।