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राहुल जवाब दो "वह भारतीय संसद का LoP या भारत विरोधियों का"? कभी अमेरिका कभी पाकिस्तान, लेकिन भारत पर राहुल गाँधी को नहीं है ऐतबार: बिहार में फिर बने विदेशी तोता, बदतमीजी भरे लहजे में कहा- ट्रंप के बोलते ही 5 घंटे में PM मोदी ने रोकी लड़ाई

                                      ट्रंप के दावे पर राहुल गाँधी को यकीन ( साभार-x@rahulgandhi, ht)
2014 चुनाव के बाद से होने वाले हर चुनाव में कांग्रेस खुद अपने आपको बेनकाब कर अपनी असली पहचान दिखा रही है। कांग्रेस का गठन किसी भारतीय ने नहीं बल्कि एक ब्रिटिश ने किया था, मकसद आज़ादी नहीं बल्कि आज़ादी के लिए उमड़ते सैलाब को भटकाने का था। आज उसी राह पर कांग्रेस सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनते ही चल निकल पड़ी है। पार्टी में बात मानी जाती है पार्टी अध्यक्ष की लेकिन अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के कहते है कि फैसला हाई कमांड लेगा। आखिर किस को पागल बनाया जा रहा है? अध्यक्ष हाई कमांड होता है या फिर कोई सड़क पर घूमने वाला राहगीर? ब्रिटिश नागरिक द्वारा कांग्रेस स्थापित करने के बाद से पार्टी में जिसने भी गुलामी की मानसिकता से अलग काम किया उसे दरकिनार कर दिया गया। इतिहास गवाह है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल, सीताराम केसरी, लालबहादुर शास्त्री, आदि एक लम्बी लिस्ट है। 

फिर आज जीता-जागती मिसाल राहुल की है। जो LoP तो है भारतीय संसद में विपक्ष का लेकिन आवाज़ बुलंद की जा रही भारत विरोधियों की, क्यों? अगर राहुल किसी भी वजह से भारत में उपद्रव करवाने में सफल हो जाते हैं तो मोदी सरकार को हिटलर बन लठ और गोली से कोई गुरेज नहीं करना चाहिए। कांग्रेस की बदतमीजी को देख कांग्रेस को वोट देने वाले भी अपने संस्कारों को जाहिर करेंगे।             

सरकार के बार-बार कहने, संसद में बयान देने, सेना के खुले तौर पर बताने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को भरोसा है, तो सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पर, जो बार-बार सीजफायर का श्रेय लेने के लिए बेताब हैं। ट्रंप 40 से ज्यादा बार दुनिया को ये बता चुके हैं कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया है, लेकिन भारत शुरू से ही कह रहा है कि पाकिस्तान ताबड़तोड़ हमले के बाद नाक रगड़ते हुए सीजफायर के लिए भारत से गुहार लगाई थी।

संसद के अंदर और बाहर सरकार स्थिति कर चुकी है साफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में आधिकारिक रूप से दो टूक कहा था कि सीजफायर के लिए सिर्फ पाकिस्तान के डीजीएमओ का फोन आया था। इसको लेकर किसी भी देश से कोई बात नहीं हुई। पीएम मोदी ने संसद में एक और खुलासा किया था कि 9 मई की रात जेडी वैंस का कई बार फोन आया था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान भारत पर बहुत बड़ा हमला करने वाला है। पीएम मोदी ने उन्हें बता दिया था कि पाकिस्तान ऐसा करता है, तो वो बहुत बड़ी गलती करेगा। इसके बाद जो हुआ वो सबको पता है, बात खत्म।

राहुल गाँधी ने ट्रंप के दावे को दोहराया

 लेकिन राहुल गाँधी की बात है जो खत्म ही नहीं होती। ट्रंप के बयान के बाद राहुल गाँधी का दावा सामने आ जाता है। बिहार में ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान एक रैली में फिर उन्होंने दावा किया, “ट्रंप ने आज कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था, तो मैंने फोन उठाया और नरेंद्र मोदी को बताया और कहा कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं उसे 24 घंटे के भीतर बंद कर दें। नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे नहीं, बल्कि पाँच घंटे में सब कुछ बंद कर दिया।”

उनके बोलने का अंदाज और भाषा शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

राहुल गाँधी ने कहा, “ट्रंप ने मोदी से कहा- सुन जो तू ये कर रहा है, इसे 24 घंटे में बंद कर। जिसको नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में बल्कि पाँच घंटों में बंद कर दिया।”

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही राहुल गाँधी और उनकी कॉन्ग्रेस ट्रंप- ट्रंप का रट लगाए हुए है। उन्हें सेना के बयान पर भी विश्वास नहीं है। सेना ने खुले तौर पर कहा कि दोनों सेनाओं के डीजीएमओ स्तर पर बातचीत हुई और पाकिस्तान के कहने पर भारत ने हमले रोके।

हर आतंकी हमले को भारत मानेगा युद्ध

ये वही कॉन्ग्रेस है जिसके राज में मुंबई सीरियल ब्लास्ट, 26/11 जैसी घटनाएँ घटी, लेकिन डोजियर देने के अलावा कुछ नहीं कर सकी कॉन्ग्रेस सरकार। पाकिस्तान के प्रति सख्ती 2014 के बाद दिखलाई दी और पीएम मोदी ने पिछले 11 सालों में दुनिया को दिखाया कि भारत बदल गया है। अब तो मोदी सरकार ने ये भी घोषणा कर दी है कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकी हमलों को भारत युद्ध की तरह मानेगा। यानी अगर अब आतंकी हमला होता है, तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं।

ट्रंप का भारत-पाक युद्ध रुकवाने पर फिर बयान

27 अगस्त 2025 को अपनी कैबिनेट बैठक में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने बताना शुरू किया कि कैसे उन्होंने यूक्रेन-रूस संघर्ष में एक विश्व युद्ध को उन्होंने टाल दिया था और फिर बात को मोड़कर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत होने का जिक्र किया।

ट्रंप ने कहा, “मैं एक शानदार व्यक्ति की बात कर रहा था, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मैंने पूछा कि पाकिस्तान के साथ क्या चल रहा है। नफरत काफी थी और ये कई सालों से चल रहा है।”

ट्रंप ने अपना बात में आगे कहा, “मैंने उनसे कहा कि मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा। आप परमाणु युद्ध में उलझ जाएँगे। मैंने कहा, मुझे कल फोन करना। मैं आपके साथ कोई डील नहीं करूँगा या फिर इतना ज्यादा टैरिफ लगा दूँगा कि आपका सिर चकरा जाएगा।”

ट्रंप के मुताबिक, “भारत और पाकिस्तान के बीच जो स्थिति थी, उससे न्यक्लियर वॉर हो सकती थी। उन्होंने पहले ही 7 जेट मार गिराए थे, हालात बेहद खतरनाक थे। तब मैंने उनसे कहा – क्या आप व्यापार करना चाहते हैं? अगर आप लड़ाई जारी रखते हैं, तो अमेरिका आपके साथ कोई व्यापार या सहयोग नहीं करेगा। आपके पास इसे सुलझाने के लिए सिर्फ 24 घंटे हैं।” अगर ट्रंप की माने तो बातचीत के 5 घंटे के अंदर ही भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया।

ट्रंप का ये बयान उस समय आया है जब भारत पर नए टैरिफ नियम लागू हो गया है। इसके साथ ही अब भारतीय सामानों के आयात पर 50% टैरिफ लागू हो गया है। यानी व्यापार की जो धमकी देने का दावा ट्रंप कर रहे हैं, वह भारत पर नहीं चला। सरकार ने कई बार साफ किया है कि वो किसानों, पशुपालकों के हितों के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेगी। अगर व्यापार के नाम पर सीजफायर होता, तो भारत अमेरिका के सामने अपनी शर्तों पर इस तरह अडिग नहीं रहता।

इस बीच दावा ये भी किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई फोन कॉल्स को नजरअंदाज कर दिया। 50% टैरिफ दरों को लेकर भारत ने ‘अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक’ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही अमेरिका को बार-बार यह संकेत दिया है कि वह रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखेगा।

मोदी जापान के दौरे पर हैं। इसके बाद वो चीन जाने वाले हैं जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात होगी। इनकी बैठक पर दुनिया की नजर है। ये बैठक ट्रंप के टैरिफ को ‘फुस्स’ कर सकता है।

मोदी ने अमेरिका जाने से मना किया लेकिन ट्रम्प ने भारत आना स्वीकारा ; पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने पर हुआ सीजफायर, अमेरिका की नहीं कोई भूमिका: PM मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर की 35 मिनट बातचीत, कहा- भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता

मोदी/भाजपा विरोधियों ने बहुत शोर मचाया हुआ था कि मोदी ने व्यापार के लालच में अमेरिका के आगे घुटने टेक कर युद्ध-विराम को राजी हो गए। लेकिन मोदी मौके पर ही किसी बात का जवाब देना जानते हैं। और मौका मिलते ही उस अमेरिका को जवाब दे दिया जिसका विपक्ष डर दिखा रहा था। आज 2014 से पहले का भारत नहीं। कनाडा में G7 सम्मेलन में आतंकवाद के ही विरुद्ध नहीं आतंकवाद को समर्थन वालों के खिलाफ भी बोले। जो भारत में आतंकवाद के समर्थक और पाकिस्तान sleeper cells को भी चेतावनी देखी जा सकती है। वो दिन लद गए जब मुस्लिम वोटों के लिए इस्लामिक आतंकवादी हमलों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर हिन्दुओं को कलंकित किया जाता था। आज डंके की चोट पर दुनियां को भी बता दिया कि आतंकवाद का धर्म नहीं मजहब होता है और विश्व भी मान गया। दूसरे, ये वही विपक्ष है जो मोदी के गुजरात मुख्यमंत्री रहते अमेरिका को पत्र लिखते थे कि मोदी को अमेरिका आने का वीसा मत देना। लेकिन प्रधानमंत्री बनने पर सबसे पहला विदेशी निमंत्रण अमेरिका से ही मिला था।      
राजनीति गलियारों में चर्चा है ट्रम्प से मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने के साथ-साथ अमेरिका में पल रहे DeepState और Toolkit पर लगाम लगाएं।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और पाकिस्तान के सीजफायर में अमेरिका की भूमिका साफ कर दी है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में व्यापार से संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई। पीएम ने कहा कि पाकिस्तान के कहने पर भारत ने सीजफायर किया था।

दरअसल, कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर 35 मिनट तक बात की। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कॉल के लिए ट्रंप ने ही आग्रह किया था। इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसकी जानकारी दी।

विदेश सचिव ने बताया कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि भारत कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और आगे भी नहीं करेगा। इसके साथ पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अब भारत आतंकवाद की घटनाओं को परदे के पीछे से नहीं लड़ेगा, बल्कि सीधे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा। पीएम ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।

प्राप्त समाचारों के अनुसार ट्रम्प ने मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया, लेकिन मोदी ने व्यस्ता के चलते मना कर दिया परन्तु ट्रम्प ने भारत आने के मोदी के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया।