"मोदी तेरी कब्र खुदेगी" नारेबाजी करने वाले क्या किसान हो सकते हैं?


नागरिकता संशोधन कानून ( सीएए ) के खिलाफ प्रदर्शन के समय जिस तरह से ‘हिंदुओं की कब्र खुदेगी’ ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे लगाए गए थे उसी तरह से किसान आंदोलन के दौरान ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगाए गए। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए खेती के अलावा कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया है। मोदी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठा चुकी है।
अब प्रश्न यह है कि यह आन्दोलन किसान समस्याओं को लेकर है या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध? इस प्रदर्शन के आयोजकों और समर्थकों को इसका उत्तर देना होगा। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने इन नारों का संज्ञान न लिया हो, सच्चाई तो सामंने आएगी, जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून पर हुए उपद्रव की सच्चाई सामने आनी शुरू हो चुकी है, इसकी भी सच्चाई सामने आने पर आयोजक और समर्थक कहाँ छुपेंगे?

मैं ये ढृढ़तापूर्वक यह कहता हूँ की सिख धर्म, हिन्दुओं में से ही बना है और हिन्दू धर्म के साथ मानवता की रक्षा करने के लिए ही मेरे सिख गुरुओं ने सिख पंथ की स्थापना की थी। मैंने सांझी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए, उस प्यार को बढ़ाने के लिए, एक परिवार में घर के एक बेटे तो सिख बनाने की परमपरा देखी है।लेकिन अफ़सोस आज वोटों की राजनीती ने, धार्मिक कट्टरता ने इस बहुत "बड़ी सकारात्मक सोच" और "Undivided पंजाब" के इस बहुत बड़े प्यार के खजाने को बिखरा के रख दिया है। मैं फिर वो सांझे प्यार वाली विरासत वापस चाहता हूँ, वो "लालाजी और सरदारजी" वाला समय वापस चाहता हूँ। 

मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई ऐसी पथ प्रदर्शक और क्रांतिकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनमें देश को बदलने और जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की क्षमता है। पिछले 6 वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए इतना कुछ किया गया है, जो 70 वर्षों में नहीं हुआ। फिर भी आजादी के बाद से किसानों की जरूरतों पर ध्यान ना देने वाली कांग्रेस आज उन्हें भड़काने का काम कर रही है। कांग्रेस के शह पर किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थन जुटे हुए हैं। देश विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। किसान आंदोलन में शामिल लोग ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि CAA की तर्ज पर किसानों के बहाने भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कौन चला रहा है अभियान?

कुछ समय पहले कर्ज माफ़ी को लेकर हुए आन्दोलन में जब सडकों पर दूध, फल और सब्जियों को फेंके जाने पर भी लोगों ने प्रश्न किया था कि कर्जदार अपने उत्पाद को क्यों बर्बाद करेगा? क्या किसी भूखे अथवा कर्जदार को इस तरह अपने ही उत्पाद को बर्बाद करते देखा है? फिर यदि कोई कर्जदार ऐसा करता है तो स्पष्ट है कि किसी ने उसको उस उत्पाद का पैसा देकर ऐसा करने को बोला है, जैसे ही इन प्रश्नों की भरमार होनी शुरू हुई, आंदोलन समाप्त हो गया। 

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