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| कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन PFI ने किसानों के विरोध को दिया अपना समर्थन |
क्या इस आंदोलन के आयोजक और समर्थक पार्टियां "जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे" आदि नारों का समर्थन करती हैं?
इस आंदोलन को समर्थन दे रही समस्त पार्टियां यह बताएंगी कि "जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे" और "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" क्या इन नारों का समर्थन करती हैं? यदि नहीं करती हैं, फिर इन नारों का विरोध क्यों नहीं किया जा रहा? क्या मोदी विरोधी देश में 1984 दोहराकर देश में अराजकता फ़ैलाने वालों के साथ हैं? आखिर इस तरह की घिनौनी सियासत क्यों खेली जा रही? क्या नरेंद्र मोदी का विरोध करने के कोई और कारण तुम लोगों के पास समाप्त हो चुके हैं? देश में अराजकता फ़ैलाने वाले क्या नेता कहलवाने और एक भी वोट देने के लायक हैं? फिर जिस आंदोलन में इंदिरा गाँधी की तरह मोदी को भी ठोकने के नारे लग रहे हों, ऐसे आंदोलन को कांग्रेस को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने की बजाए मोदी के समर्थन खड़े होकर, इन नारों का विरोध करना चाहिए, क्योकि इंदिरा गाँधी केवल कांग्रेस ही नहीं देश की प्रधानमंत्री थीं। यदि फिर भी कांग्रेस इस आंदोलन का समर्थन करती है, फिर जनता यह भी पूछना चाहेगी कि "गोली लगने के बाद इंदिरा गाँधी को निकटतम डॉ राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल की बजाए एम्स क्यों लेकर जाया गया? वरिष्ठ पत्रकारों एवं नेताओं को अच्छी तरह स्मरण होना चाहिए कि उस समय भी काफी समय तक यही प्रश्न चर्चा में रहा, जिसका आज तक किसी कांग्रेसी ने जवाब नहीं दिया। यह प्रश्न अपने आपमें परदे के पीछे की कहानी को सार्वजनिक करने को लालायित है।
हरियाणा-पंजाब सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को पीएफआई का समर्थन उस समय मिला, जब खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा किसान विरोध प्रदर्शनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह, हरियाणा-पंजाब सीमा पर ‘किसान विरोध’ के दौरान खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे भी लगाए गए। हाल ही में एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।
सिर्फ खालिस्तान समूह ही नहीं, यहाँ तक कि इस्लामी संगठनों और वामपंथी तत्वों ने भी इन प्रदर्शनकारियों को मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए किसान विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। तथाकथित प्रदर्शनकारियों को उकसाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टियों के लिंक भी सामने आए हैं।
PFI का हिंसा फ़ैलाने का पुराना इतिहास
पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। उनके सदस्य हिंसा के कई मामलों में जाँच के घेरे में आ गए हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया है।
Video Press Release:
— Popular Front of India (@PFIOfficial) November 26, 2020
Popular Front extends support to farmers’ protests; calls for the struggle to preserve the constitution
किसान प्रदर्शनों को पॉपुलर फ्रंट का समर्थन; संविधान बचाने के लिए संघर्ष की अपील#FarmersProtest #किसान_विरोधी_मोदी_सरकार pic.twitter.com/SvdvV0ED2U
It's been 2 days and no media has linked PFI to the #FarmersProtest ? So strange? May be because there are no upcoming elections?
— Anis Ahmed (@AnisPFI) November 27, 2020
Don’t oppress kisaan movements by force, let them come in Delhi and listen to them. They too have a right to protest. They are peaceful but police is using force. I condemn brutality.
— Taslim Ahmed Rehmani (@Drrehmani) November 27, 2020
Farmers are worried that the Minimum Support Price(MSP), now in vogue might be scrapped and they would be left to the mercy of the markets #StopStateTerrorAgainstFarmers @PMOIndia @GovtOfIndia_ @timesofindia @ndtvhindu
— SDPI (@sdpofindia) November 28, 2020
कांग्रेस का शांतिप्रिय किसान आंदोलन pic.twitter.com/ST93u1Z5xt
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniBJP) November 28, 2020
No, we won’t speak to Aaj Tak - Protesting Farmers
— Ravi Nair (@t_d_h_nair) November 28, 2020
Congratulations @aajtak. You guys have really worked hard for this. Well deserved 👏👏👏pic.twitter.com/kbU7Inai71
किसानों पर काले बिलों से प्रहार किया और युवाओं को हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा कर उनके हर ख्वाब को तोड़ दिया है।
— Congress (@INCIndia) November 29, 2020
प्रधानमंत्री ने युवाओं से लेकर किसानों तक, हर वर्ग से धोखा किया है। pic.twitter.com/Ur52hsUHQr
सांसद @SanjayAzadSln जी @AAPDelhi के विधायकों के साथ बुराड़ी पहुंचे। किसानों के रहने के इंतेज़ाम का जायज़ा लिया। किसानों से मिले और उनका होंसला बढ़ते हुए कहा के आम आदमी पार्टी उनके इस आंदोलन में सड़क से सांसद तक उनके साथ खड़ी है। pic.twitter.com/hG4WSJY7oA
— Ajit Tyagi (@_AjitTyagi) November 28, 2020
लगता है इन्हें corona vaccine मिल गयी है ... मास्क नहीं , social distancing नहीं , hand sanitisation की ज़रूरत ही नहीं है https://t.co/S5oZoqPi7F
— नंदिता ठाकुर (@nanditathhakur) November 29, 2020
इन ट्विटर पर लोगों की प्रक्रियाएं भी सामने आ रही हैं:-#FarmersDelhiProtest
— News18 India (@News18India) November 28, 2020
बुराड़ी में किसानों से मिलने पहुँचे आप सांसद संजय सिंह,कहा-किसानों के साथ दुश्मन देशों सा बर्ताव,भगत सिंह और ऊधम सिंह के वंशजों को आतंकी कह रही है सरकार, जमाखोरी, कालाबाज़ारी,महँगाई बढ़ाने वाला कानून रद्द हो #FarmersProtests @PrashantChurhe @pri_kandpal pic.twitter.com/HelpBbZaQK
पंजाब सीएम पर फोन नहीं उठाने के आरोप, हरियाणा सीएम के निजी सचिव ने दिखाए कॉल डिटेल्स
— AajTak (@aajtak) November 29, 2020
(@satenderchauhan ) #FarmersProtests https://t.co/eC4PUfjxOT
Barkha has given platform to "Khalistan Agenda" knowingly
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) November 29, 2020
All the fight and argument was just a cover up
'इंदिरा ठोक दी' से शुरू हुआ आंदोलन दो दिन में भिंडरावाले को हीरो बताने तक पहुंच चुका हैं
कोई बेवक़ूफ़ी का अवार्ड हो तो इसे 26 जनवरी की परेड में हाथी पर बिठाना चाहिए ।@RahulGandhi pic.twitter.com/E6hUDrGqsx
— Parvesh Sahib Singh (@p_sahibsingh) November 28, 2020
This is the ugly face of protests in the name of farmers... pic.twitter.com/R6xELGBALq
— Amit Malviya (@amitmalviya) November 29, 2020
I appeal all Indians to address Punjab CM as only #AmarinderSingh and NOT as Captain Amarinder. He doesn't deserve to be addressed with military title for his connections with Pakistanis!! pic.twitter.com/l67TfcJ6JC
— Arun Deshpande (@ArunDeshpande20) November 28, 2020
“Those who cannot remember the past are condemned to repeat it.” pic.twitter.com/wLcr4ZsIIU
— Shubhendu (@BBTheorist) November 28, 2020
Jarnail Singh Bhindranwale was a dreaded terrorist, PERIOD.
— Pratiba Kaul (@pratiba_sk) November 28, 2020
What kind of suppressed farmers put Bhindranwale’s poster to protest? Nefarious design of anti-India forces or #FarmerProtest ? pic.twitter.com/hwkphaqs5A
— Monica (@TrulyMonica) November 27, 2020
लगता है फार्महाउस वाले भी आ गए आंदोलन में. या फिर यादव जी के कुनबे से भी हो सकते हैं. pic.twitter.com/VktFJUNY8U
— Sudhanshu S Singh🇮🇳 (@sssingh21) November 28, 2020
ह्म्म्म। शाहीनबाग कनेक्शन भी निकल आया।
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) November 28, 2020
जय जवान, जय किसान... जय सियासी दुकान। pic.twitter.com/lYEtRy4GdL
"मुंबई.में.कलावा" पहनकर हिंदुओं को बदनाम करेंगे "दिल्ली.में.पगड़ी" पहन कर सिखों को बदनाम करेंगे हम तो हर जगह "गजवा.ए.हिंद" करेंगे
— Pushpendra Kulshreshtha (@ThePushpendra_) November 28, 2020
Now farmers face FIRs for breaking barricades; Congress says 20,000 bookedhttps://t.co/L0yLwQwa1j
— The Indian Express (@IndianExpress) November 29, 2020
किसानों को दिल्ली बुलाकर कोरोना कैरियर बनाना चाहती है आम आदमी पार्टी और कांग्रेस-प्रदेश अध्यक्ष श्री @adeshguptabjp pic.twitter.com/f0V7jG3lM6
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) November 29, 2020
अचानक आई डिमांड के चलते मार्केट में ‘किसान कास्ट्यूम’ की कमी हो गई है, ‘शाहीनबागिए’ परेशान हैं, छुप छुपा के ‘CAA वाले कास्ट्यूम’ से ही काम चला रहे बेचारे !!
— Shalabh Mani Tripathi (@shalabhmani) November 29, 2020
पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। पिछले साल दिसंबर में, CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI और पीएफआई जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) और उसके राजनीतिक मोर्चे, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के सदस्य मुस्लिम विरोधी भीड़ को सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राज्य भर में हिंसा में शामिल करने के लिए उकसाने में शामिल था। यूपी पुलिस ने राज्य में व्यापक हिंसा के बाद पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी।
सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, पीएफआई ने हाल ही में बेंगलुरु दंगों में भी भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूर्वी बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा को भड़काने के लिए ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए एसडीपीआई नेता मुजामिल पाशा को नामित किया था। मुस्लिम भीड़ ने दो पुलिस स्टेशन पर हमला किया था और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासमूर्ति के आवास पर भी हमला किया था।
एनआईए ने कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से संबंधित कई भड़काऊ दस्तावेज और सामग्री भी बरामद किया था।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) से जुड़े चार लोगों को राज्य में जाति-आधारित अशांति पैदा करने की योजना के लिए गिरफ्तार किया था। केरल के पत्रकार ‘सिद्दीकी कप्पन, जो कि इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का एक पदाधिकारी है, को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। फर्जी पत्रकार हाथरस की घटना के बाद जाति संघर्ष पैदा करने के लिए हाथरस जा रहा था।

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