खालिस्तानियों के बाद कट्टरपंथी PFI भी उतरा ‘किसान विरोध’ के समर्थन में

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन PFI ने किसानों के विरोध को दिया अपना समर्थन
पंजाब से चलकर हरियाणा के रास्ते दिल्ली पहुंचा किसान आंदोलन कई प्रश्न पूछ रहा है: 1. क्या आंदोलन किसान समस्याओं को लेकर है?; 2. यदि आंदोलन किसान समस्याओं को लेकर है, फिर भिंडरावाला की फोटो क्यों?; 3. यह आंदोलन पंजाब से ही क्यों शुरू है, क्या शेष भारत में किसान नहीं है?; 4. आंदोलन सरकार के नए कानून को लेकर है, तो "जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे" आदि नारे किस मानसिकता का सबूत दे रहा है?; 5. "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" नारा क्या दर्शा रहा? आदि आदि। 

क्या इस आंदोलन के आयोजक और समर्थक पार्टियां "जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे" आदि नारों का समर्थन करती हैं? 

इस आंदोलन को समर्थन दे रही समस्त पार्टियां यह बताएंगी कि "जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे" और "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" क्या इन नारों का समर्थन करती हैं? यदि नहीं करती हैं, फिर इन नारों का विरोध क्यों नहीं किया जा रहा? क्या मोदी विरोधी देश में 1984 दोहराकर देश में अराजकता फ़ैलाने वालों के साथ हैं? आखिर इस तरह की घिनौनी सियासत क्यों खेली जा रही? क्या नरेंद्र मोदी का विरोध करने के कोई और कारण तुम लोगों के पास समाप्त हो चुके हैं? देश में अराजकता फ़ैलाने वाले क्या नेता कहलवाने और एक भी वोट देने के लायक हैं? फिर जिस आंदोलन में इंदिरा गाँधी की तरह मोदी को भी ठोकने के नारे लग रहे हों, ऐसे आंदोलन को कांग्रेस को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने की बजाए मोदी के समर्थन खड़े होकर, इन नारों का विरोध करना चाहिए, क्योकि इंदिरा गाँधी केवल कांग्रेस ही नहीं देश की प्रधानमंत्री थीं। यदि फिर भी कांग्रेस इस आंदोलन का समर्थन करती है, फिर जनता यह भी पूछना चाहेगी कि "गोली लगने के बाद इंदिरा गाँधी को निकटतम डॉ राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल की बजाए एम्स क्यों लेकर जाया गया? वरिष्ठ पत्रकारों एवं नेताओं को अच्छी तरह स्मरण होना चाहिए कि उस समय भी काफी समय तक यही प्रश्न चर्चा में रहा, जिसका आज तक किसी कांग्रेसी ने जवाब नहीं दिया। यह प्रश्न अपने आपमें परदे के पीछे की कहानी को सार्वजनिक करने को लालायित है।  

हरियाणा-पंजाब सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को पीएफआई का समर्थन उस समय मिला, जब खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा किसान विरोध प्रदर्शनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह, हरियाणा-पंजाब सीमा पर ‘किसान विरोध’ के दौरान खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे भी लगाए गए। हाल ही में एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।

सिर्फ खालिस्तान समूह ही नहीं, यहाँ तक कि इस्लामी संगठनों और वामपंथी तत्वों ने भी इन प्रदर्शनकारियों को मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए किसान विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। तथाकथित प्रदर्शनकारियों को उकसाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टियों के लिंक भी सामने आए हैं।

PFI का हिंसा फ़ैलाने का पुराना इतिहास 

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। उनके सदस्य हिंसा के कई मामलों में जाँच के घेरे में आ गए हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

इन ट्विटर पर लोगों की प्रक्रियाएं भी सामने आ रही हैं:-

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। पिछले साल दिसंबर में, CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI और पीएफआई जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) और उसके राजनीतिक मोर्चे, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के सदस्य मुस्लिम विरोधी भीड़ को सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राज्य भर में हिंसा में शामिल करने के लिए उकसाने में शामिल था। यूपी पुलिस ने राज्य में व्यापक हिंसा के बाद पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी

सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, पीएफआई ने हाल ही में बेंगलुरु दंगों में भी भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूर्वी बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा को भड़काने के लिए ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए एसडीपीआई नेता मुजामिल पाशा को नामित किया था। मुस्लिम भीड़ ने दो पुलिस स्टेशन पर हमला किया था और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासमूर्ति के आवास पर भी हमला किया था।

एनआईए ने कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से संबंधित कई भड़काऊ दस्तावेज और सामग्री भी बरामद किया था।

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों- पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) से जुड़े चार लोगों को राज्य में जाति-आधारित अशांति पैदा करने की योजना के लिए गिरफ्तार किया था। केरल के पत्रकार ‘सिद्दीकी कप्पन, जो कि इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का एक पदाधिकारी है, को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। फर्जी पत्रकार हाथरस की घटना के बाद जाति संघर्ष पैदा करने के लिए हाथरस जा रहा था।


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