कौन पत्रकार किसे समर्थन देता और क्यों, यह उसका व्यक्तिगत विषय है, किसी को तर्क-वितर्क नहीं करना चाहिए। परन्तु जब कोई सीमाओं का उल्लंघन कर पत्रकारिता करे, उस स्थिति में उसकी पत्रकारिता पर उंगली उठना सही है।
पुण्य प्रसून एक्सपोज़ उस समय ज्यादा हुए जब नरेंद्र मोदी लहर की फुस निकालने के लिए अरविन्द केजरीवाल को महान क्रांतिकारी सिद्ध करने वाले साक्षात्कार की क्लिपिंग लीक होने से आजतक चैनल की भी बहुत किरकिरी हुई थी।
अब फिर कांग्रेस के करीबी पक्षकार पुण्य प्रसून बाजपेयी को सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर यूजर्स लताड़ रहे हैं। असल में पुण्य प्रसून बाजपेयी ने किसान आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर एक ट्वीट किया। पुण्य प्रसून बाजपेयी के ट्वीट करते ही यूजर्स उन्हें ट्रोल करने लगे। आप भी देखिए…
KBC का सवाल : वो कौन शख़्स था जिसने शास्त्री जी के नारे “जय जवान जय किसान” को 49 वर्ष बाद 2014 में बुलंद किया था
— punya prasun bajpai (@ppbajpai) November 26, 2020
विकल्प :
1. प्रधानमंत्री पद का दावेदार
2. आरएसएस का प्रचारक
3. गुजरात के मुख्यमंत्री
4. खुद को प्रधानसेवक कहने वाला
इसका सही जवाब है दल्ला पत्रकार पुण्य प्रसून
— अंकुर सिंह परमार (@IAnkurParmar04) November 26, 2020
जो रंगे हांथ विडियो में एक नेता को क्रांतिकारी बनाने के लिए सेटिंग कर रहा था और हर न्यूज़ चैनल से लतियाव निकालने के बाद बेरोज़गार हो गया है।
देशद्रोहियों और देश लूटने वालों का सफाया करने वाला देश का चौकीदार
— Omi-ॐ (@Omi77450190) November 26, 2020
नरेन्द्र दामोदर दास मोदी
♥️♥️♥️
किसान बिलों की आड़ में कांग्रेस अपनी नाकामियों छुपाना चाहती है.... लोकतंत्र की हत्या करती है....आज ही के दिन 1975 मे देश पर एमरजैंसी थोपी गई थी, 2006 मुंबई आतंकवादी हमला कांग्रेस की नाकामी, जय जवान जय किसान/ गरीबी हटाओ का जुमला देने वाली कांग्रेस की नाकामी 😡
— 🇮🇳Singh Saab🙏 सिंह साब (@SukhaDhillon_) November 26, 2020
KBC का सवाल: वो कौन क्रांतिकारी पत्रकार है जो घोर पक्षकार होते हुए भी निष्पक्ष कहलाना पसंद करता हो?और २०१४ से जिसे हड्डी भी मिलनी बंद हो गयी हो? विकल्प १- पुण्य २- प्रसून ३- क्रांतिकारी वाजपेइ ४- ये सभी जवाब। @IAnkurParmar04
— आलोक गहरवार (@alokgaharwar) November 26, 2020
भाई प्रसून साब। ये सब बेइज्जती सुन के डूब के मार जाना। क्योंकि तुम कभी नहीं सुधरोगे। समझे।
— GAAP IND (@GAAPIND) November 26, 2020
तुम लोगों को खाली गंदगी आती है। उपाय बताओ। फालतू की बाजार बाजार मत करो। समझे।
वो कौन है जो पहले पत्रकार था अब कांग्रेस की दलाली करता है?
— प्रमोद - Hindu Ecosystem 👊 (@realPramod) November 26, 2020
1. पापी प्रसून
2. दल्ला अभिसार
3. रंडवा रवीश या
4. कलुआ आशुतोष
उसी की बनाई सम्पत्ति बेचकर तुम्हारा पापा गुजारा कर रहा है।😂😂
— Manoj kumar (@Manojku44314907) November 26, 2020
इन्हीं किसानों ने बिहार में तेजस्वी को सीएम बनाकर अपना आशीर्वाद दिया है।😂
— Ravi Kumar (@RaviKum57369502) November 26, 2020
सब गन्दगी की पैदावार
— Jai Hind Shyam CU2 (@Cu2Jai) November 27, 2020
"जय जवान जय किसान" नारा देकर किसान को "आड़तीयों" साहूकारों से बचाना, OROP और सेना को सम्मान देना क्या गलत है ?
— संजय शर्मा (@sharma__sanjay) November 26, 2020
शास्त्री जी मौत की सन्धिग्ध फ़ाईल, संघरालय ... इसमे क्या आपत्ति है ?
तुम चंदा चोर अर्बन नक्सल से दिल्ली मे इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगवा सकते हो क्रांतीकारी बता कर?
KBC का सवाल :-
— एक राष्ट्रभक्त (@SatishM81957227) November 26, 2020
वो कौन सा पत्रकार है जिसका घर 2014 से पहले इंटरव्यू फिक्सिंग व कमीशनखोरी से चलता था...
विकल्प-
1. दलाल पत्रकार
2. बेरोजगार पत्रकार
3.चापलूस पत्रकार
4.दरबारी पत्रकार
Hint :- वो स्वयं को क्रांतिकारी पत्रकार बताता है...!!!
वो कौन सा दो कौडी का पत्रकार हैं जो भारत के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को अमेरिकी वीजा न मिले ऐसे पत्र पर हस्ताक्षर करता है लेकिन जब वो व्यक्ति प्रधानमंत्री बन कर अमेरिका भी जाता है ओर कई मुस्लिम देशो के सम्मान से विभूषित होता है तो पत्रकार खाज वाले कुत्ते जैसे खीजता रहता हैं
— krishna Sood (@krishnaSood7) November 27, 2020
केजरीवाल को क्रांतिकारी सिद्ध करने वाला लीक साक्षात्कार
प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में अपनी पत्रकारिता का वजूद तलाशते पुण्य प्रसून बाजपेयी
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विरोध की हवा को बनाए रखना, पत्रकारों के एक खास समूह की आदत बन गई है। इन पत्रकारों को प्रधानमंत्री मोदी का हर मुद्दे पर विरोध करने में ही सच्ची पत्रकारिता नजर आती है और इस काम में वे दिन-रात लगे रहते हैं। ऐसे ही एक पत्रकार हैं पुण्य प्रसून बाजपेयी, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में हाथों को मसलते हुए टीवी पर एंकरिंग करने में बड़ा ही मजा आता है। ऐसा न करने पर इस एजेंडा पत्रकार को अपना अस्तित्व खतरे में दिखाई पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में अपना वजूद तलाशने वाले टीवी एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी की सोशल मीडिया पर टिप्पणियों को पढ़ने से लगता है कि वे प्रधानमंत्री मोदी से हद दर्जे तक नफरत करते हैं। आइए, आपको भी पुण्य प्रसून बाजपेयी की उस पत्रकारिता से रूबरू कराते हैं, जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से नफरत करने में ही अपने अस्तित्व का अहसास होता है।
मोदी विरोध में पत्रकारिता के वजूद की तलाश-1
13 दिसंबर 2017 को पुण्य प्रसून बाजपेयी ने Twitter पर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में जिस अमर्यादित तरीके से नफरत भरी टीप्पणी की उसे पढ़कर कोई भी समझ सकता है कि इस पत्रकार की सोच असंतुलित ही नहीं, घृणा से भरी है। आप भी उस Tweet को देखिए-
2. एजेंडा पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी हर किसी मुद्दे पर कोई न कोई कुतर्क गढ़कर प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने में अपनी शान समझते हैं। गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की सोच को उचित परिपेक्ष्य में देखने की जगह, अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए 12 दिसंबर के Tweet में लिखा-
3. पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी के 23 जनवरी के Tweet को देखकर लगता है कि दावोस में भी प्रधानमंत्री मोदी का जाना इनको नागवार गुजरा और इनके शैतानी दिमाग के कुतर्क पढ़कर हैरानी हुई कि यह पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के लिए कुछ भी लिख सकता है। उस Tweet को आप भी पढ़िए-
4. किसी भी स्वाभाविक घटना को पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसा एजेंडा पत्रकार किस तरह से प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के औजार के रुप में प्रयोग करता है, इसे उस Tweet को पढ़कर समझा जा सकता है, जो उन्होंने 1 फरवरी को वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट पेश करने पर किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली की हिन्दी बोलने में यदा-कदा लड़खड़ाहट को जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के लिए इस्तेमाल किया, उससे साफ अंदाजा लग जाता है कि इनका एकमात्र काम ही यही है-
5. एजेंडा पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का मौका तलाश लेते हैं। 7 दिसंबर के Tweet में अपने कुतर्कों के सहारे झूठ को सच के रुप में पेश किया। इस Tweet को पढ़कर लगता है कि पुण्य प्रसून बाजपेयी, कहीं की ईंट कहीं के रोड़े को इकट्ठा करके भानुमति का कुनबा बनाने में माहिर हैं-
6. 20 जनवरी को पुण्य प्रसून बाजपेयी ने Twitter पर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट से यह साफ हो जाता है कि उनका एक मात्र मकसद है, कोई भी समस्या हो उसे प्रधानमंत्री मोदी से जोड़ दो।
7. एजेंडा पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी खुद को अन्य सभी से हर मामले में उच्च मानते हैं, यहां तक कि पत्रकार बिरादरी में भी किसी को अपने पांव के नाखून के बराबर भी नहीं समझते। अपने इस अहंकार में डूबे पुण्य प्रसून ने 14 दिसंबर को एक Tweet में प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए सभी राजनेताओं, पत्रकारों और संपादकों पर अमर्यादित टिप्पणी करते हुए लिखा-
8. 19 सितंबर को एजेंडा पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में अमर्यादित टिप्पणी करते हुए लिखा-
जिस देश में पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे एजेंडा पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में अपने वजूद की तलाश करते हों, उस देश के विकास में पत्रकारिता की कितनी सकारात्मक भूमिका होगी, इसका उत्तर किसी से छिपा नहीं है।









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