हर प्राणी को समझना चाहिए कि "बड़ा नवाला खा लो, बड़ा बोल मत बोलो", क्योकि समय से बड़ा बलवान और पाप से बड़ा कलंक कोई दूसरा नहीं होता। योगी सरकार से पूर्व तक जिन बाहुबलियों ने अपने सियासतखोरों की छत्रसाया में शेर बन जिसे चूहा कहकर मजाक बनाते थे, समय ने ऐसी पलटी मारी कि कल के बाहुबली आज खुद चूहे बन गए और मजे की बात यह है कि उनके आका भी उनकी कोई सहायता कर पा रहे। क्योकि उन्हें भी डर है कि पता नहीं कौन-सी फाइल खोल हमें ही नाप दे। अपने 4 दशक के पत्रकारिता अनुभव में योगी आदित्यनाथ जैसा कठोर प्रशासक उत्तर प्रदेश को नहीं मिला। पिछली सरकारों ने प्रदेश को जिस अंधकार में झोंक दिया था, उस अंधकार से प्रकाश में योगी जैसा ही सख्त मुख्यमंत्री ही लाने में सक्षम है। और उस अंधकार से निकलने के लिए कम से कम योगी को 10 वर्ष और चाहिए।
उत्तर प्रदेश का माफिया विधायक मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश की बांदा जेल पहुँच गया है। कल 100 लोगों की टीम उसे पंजाब की रोपड़ जेल से लेकर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल आई। इस स्थानांतरण के दौरान मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अफजल ने कहा, “उनकी मंशा सही नहीं है। बांदा जेल में उसे चाय में जहर मिला कर दिया गया था… हमें न्यायपालिका में पूरा भरोसा है। हमने उसे स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवाने के लिए याचिका डाली है।”
अफजल ने कहा, “मुझे आशा है कि सुप्रीम कोर्ट इस बात को सुनिश्चित करेगा कि जो लोग सत्ता में हैं, वह किसी को मारें नहीं। पब्लिक रैली में भाजपा राज्य अध्यक्ष ने (विकास दुबे के संदर्भ में) कहा था, ‘गाड़ी यूपी के किस बॉर्डर पर पलटेगी, ये नहीं बताऊँगा।’ वहीं एक मंत्री ने कहा, ‘गाड़ी तो पलट कर रहेगी।’”
अंसारी आगे बोले, “यदि वे मनमाने ढंग से कुछ करते हैं, तो ऐसे तानाशाहों के अंत का समय निकट है। तानाशाही खत्म करने के लिए बलिदान की जरूरत है। यदि ऐसा कुछ हुआ, तो मैं सोचूँगा कि मुख्तार, तानाशाह सरकार के अंत के लिए बलिदान हो गया।”
मुख्तार अंसारी को 900 किमी का रास्ता तय कर बांदा लाया गया है। इस काम के लिए यूपी की योगी सरकार को पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने होना पड़ा। बहुत दलीलों के बाद अंसारी को बांदा जेल में भेजा गया। वह एक वसूली केस में साल 2019 से रोपड़ जेल में बंद था।
मुख्तार के ऊपर उत्तर प्रदेश भर में 52 से ज्यादा केस होने के बावजूद अफजल अंसारी उनके साथ अच्छे बर्ताव और सभी सुविधाओं की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा जिन योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल को आज वह तानाशाही बता रहे हैं और अपने भाई के लिए चिंता प्रकट कर रहे हैं, उनके लिए साल 2019 में अफजल अंसारी चूहे शब्द का प्रयोग कर चुके हैं।
अफजल ने साल 2019 में द लल्लटॉप को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था, “मुलायम सिंह ने सिर्फ 5 दिन के लिए अंदर किया था और योगीजी भोएँ भोएँ संसद में खड़े होकर रोए थे कि दुनिया को लगा पता नहीं क्या हो गया। ये तो कुछ बड़े कमजोर दिल का चूहा है। ये दूसरे का क्या उपहास उड़ाएगा।”
अफजल अंसारी, मुख्तार अंसारी के भाई हैं। अफजल से पहले मुख्तार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट के पास जाकर अपना डर जताया था। वहीं सोशल मीडिया पर भी कुछ ‘बाप मास्टर’ गैंग वाले एक्टिव हुए जिन्होंने सोशल मीडिया पर ये बताने की कोशिश की, कि कैसे मुख्तार स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है।
इंडिया मुस्लिम हिस्ट्री ने अपने ट्वीट में लिखा था कि मुख्तार संभव है कि कुछ लोगों के लिए एक अभिशाप हो, लेकिन वह स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है। ट्वीट में कहा गया था कि मुख्तार अंसारी के दादा डॉ मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष थे और दादा के भाई भी बड़े हकीम थे।
अवलोकन करें:-
पूर्व उप राष्ट्रपति व कांग्रेस नेता हामिद अंसारी भी मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। इस खानदानी कनेक्शन के चलते मुख्तार की कांग्रेस और कई अन्य सियासी दलों में ठीक-ठीक जान पहचान और रूतबा है। कुछ लोग जहाँ मुख्तार के लिए भावनात्मक माहौल बनाने के लिए इन बिंदुओं का प्रयोग कर रहे हैं तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन सभी कनेक्शन को देखकर अंदाजा लगा रहे हैं कि पंजाब सरकार ने मुख्तार को बचाने के लिए इतनी लड़ाई क्यों लड़ी। वैसे हामिद अंसारी की राष्ट्रीयता को बेनकाब रॉ अधिकारी यादव ने अपनी पुस्तक कर चुके हैं, कि किस तरह ईरान में राष्ट्रदूत रहते वह पाकिस्तान की सहायता कर रहे थे।
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