क्या पाकिस्तान गृह युद्ध की तरफ बढ़ रहा है?

जिस तरह भारत के छद्दम सेक्युलरिस्ट गलत इतिहास पढ़ाकर अपनी जनता को मुर्ख बनाकर राज करते रहे, लेकिन समय ने ऐसा वार किया कि आज सत्ता के लिए सिर पटक रहे हैं, ठीक वही स्थिति पाकिस्तान की भी है, जहां अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए वहां की जनता को भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध इतिहास पढ़ाते रहे, भारत की तरह वहां भी समय रंग बदल रहा है। क्योकि जिस प्रकार सुगंध को छुपाया नहीं जा सकता, वैसे ही सच्चाई को भी नहीं छुपाया नहीं जा सकता। जिस गलत इतिहास की बुनियाद पर पाकिस्तानी सियासतखोर अपनी जनता को पागल बनाकर राज कर रहे हैं, वही गलत इतिहास उन्हें खाने को दौड़ रहा है।  
पाकिस्तान ने बड़ा कदम उठाते हुए Facebook, Twitter, Tiktok, WhatsApp और YouTube पर शुक्रवार(अप्रैल 16) को 11 से 3 बजे तक के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। शाम 4 बजे से ये सेवाएँ फिर से पहले की ही तरह काम करना शुरू कर देंगी।

सरकार ने यह फैसला देश में आंतरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया है। इमरान सरकार ने यह कदम तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के एक दिन बाद उठाया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने सभी टीवी चैनलों को प्रतिबंधित संगठन के किसी भी कवरेज से रोक दिया है।

सुरक्षाबलों को आशंका है कि टीएलपी शुक्रवार की नमाज के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन कर सकता है।

आंतरिक मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि सरकार के पास पुख्ता सबूत है कि टीएलपी “आतंकवाद में लिप्त है और पूर्वाग्रह तरीके से काम करती है व देश की शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती है”। यह भी कहा गया है कि इस संगठन ने जनता को डराया, धमकाया लोगों को चोटें पहुँचाई और कानूनी एजेंसियों से जुड़े लोगों की हत्या भी किए हैं।

टीएलपी पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम, 1997 की धारा 11 बी (1) के तहत मुकदमा चलाया गया है। इस एक्ट के तहत सरकार आतंकवाद में शामिल संगठनों पर प्रतिबंध लगा सकती है।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख रशीद ने अप्रैल 14 को टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी उनके इस आदेश का अनुमोदन किया। इसके मुताबिक, धार्मिक समूह द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शनों में दो पुलिस अधिकारी मारे गए थे और सुरक्षाबलों के 30 वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

टीएलपी कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने के बाद 12 अप्रैल को पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी संगठन के मुखिया साद की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। साद की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थकों ने कई शहरों की सड़कों को जाम कर दिया था। हालाँकि, सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया है।

इस मामले में अब तक कम से कम 115 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 2,063 कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए हैं। पंजाब में 1669 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, सिंध में 228, खैबर पख्तूनख्वा में 193, और इस्लामाबाद में 43 आंदोलकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

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