मुनव्वर राना (बाएँ) और कुमार विश्वास (दाएँ) (फोटो : द डे मीडिया/अमर उजाला)
देश में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो तालिबान का महिमामंडन कर रहे हैं। कोई नई बात नहीं। 1962 में हुई इंडो-चीन युद्ध, 1965 और 1971 में हुए इंडो-पाक युद्ध, याद करो कितने स्लिपर सेल बिलों में से निकल आये थे। कई मुस्लिम धर्मगुरु और नेता तालिबान की प्रशंसा करते फूले नहीं समा रहे हैं, ऐसे में लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट करके ऐसे लोगों को लताड़ लगाई है।
विश्वास ने ट्वीट करके कहा, “ज्यादा दिमाग न लगाइए। अगर पड़ोस के घर में मची अफरा-तफरी के कारण, जिंदगी भर आपसे इज्जत पाने वाले और आपके घर में रह रहे, बदबूदार सोच से भरे किसी जाहिल शख्स का पर्दाफाश हो रहा है तो शोक नहीं, शुक्र मनाइए कि दो पैसे की प्याली गई (वो भी पड़ोसियों की), पर कुत्ते की जात पहचानी गई।”
ज़्यादा दिमाग़ न लगाइए।अगर पड़ोस के घर में मची अफ़रातफ़री के कारण,ज़िंदगी भर आपसे इज़्ज़त पाने वाले और आपके घर में रह रहे, बदबूदार सोच से भरे किसी जाहिल शख़्स का पर्दाफ़ाश हो रहा है तो शोक नहीं, शुक्र मनाइए कि दो पैसे की प्याली गई (वो भी पड़ोसियों की) पर कुत्ते की जात पहचानी गई👎🏿
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) August 19, 2021
मैं भी आखिर मर्द हूँ मुझको भी औरत चाहिए....
— Neha Chaudhary (@_NehaChaudhary_) August 19, 2021
कितना गंदे दिमाग का शायर हैं ये आदमी😡😡👎👎👎#munnawarrana#MunawwarRana pic.twitter.com/BUU4qO7HJp
हालाँकि विश्वास ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसी बहाने शायर मुनव्वर राना को निशाने पर ले रहे हैं। कई यूजर्स का मानना है कि कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए मुनव्वर राना के लिए ही यह बात कही है।
गुरुदेव धक्का तो आपको भी लगा होगा मंच पर मुनव्वर राना की तारीफ करते रहे और वह ऐसी मानसिकता के थे🙂
— साकेत सुमन (@saket_hi) August 19, 2021
इसका मुनव्वर राणा से तो कोई लेना देना नहीं होगा?
— Shiv Chaudhary 🇮🇳 शिव (@shivchaudhary0) August 19, 2021
मुनव्वर राना ने कहा था कि तालिबानी आतंकी नहीं हैं बल्कि उन्होंने अपने मुल्क को आजाद कराया था। इस पर गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अपनी आपत्ति जताई थी और कहा था, “फिर तो आज़ाद कश्मीर की माँग करने और वादी में बेगुनाहों का खून बहाने वाले भी आतंकवादी नहीं हैं। राना साहब, मजबूर कर रहे हैं आप कि मैं अपनी लाइब्रेरी से आपकी किताबें हटा दूँ। बाज़ आ जाइए!”
फिर तो आज़ाद कश्मीर की माँग करने और वादी में बेगुनाहों का खून बहाने वाले भी आतंकवादी नहीं हैं. राना साहब, मजबूर कर रहे हैं आप कि मैं अपनी लाइब्रेरी से आपकी किताबें हटा दूँ. बाज़ आ जाइए! https://t.co/vsSNJqzx8I
— Manoj Muntashir (@manojmuntashir) August 19, 2021
‘न्यूज नेशन’ चैनल पर दीपक चौरसिया से बात करते हुए राना ने तालिबान का महिमामंडन किया था और कहा था कि तालिबान ने भारतीयों के खिलाफ कोई खराब कदम नहीं उठाया और उन्हें जाने के लिए नहीं कहा, लेकिन हालात बिगड़ने पर लोग आ रहे हैं। मुनव्वर राना ने कहा कि तालिबान के जुल्म को लेकर हमें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान के हजार वर्ष का इतिहास कहता है कि हिंदुस्तान ने उनसे हमेशा मोहब्बत की है। यहाँ तक कि उन्होंने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबान से कर डाली और कहा कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है।
Aur gaddar woh v hain jinhone desh ka batwara kiya aur 25 jameen Pakistan ko diya magar wahan gaye nahi..kyu? pic.twitter.com/aFse3xMMOU
— Bob Marley (@Robinho97366622) August 20, 2021

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