तालिबान का प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन और हेरात में कब्जे के बाद तालिबानी (फोटो साभार: AFP)
तालिबान ने अब तक अफगानिस्तान की 14 प्रांतीय राजधानियों पर कब्ज़ा कर लिया है और वो वहाँ के सबसे बड़े शहर काबुल की तरफ बढ़ रहे हैं। अब खबर आई है कि पूर्वी अफगानिस्तान के पकतिया में तालिबान ने कोरोना वैक्सीन को प्रतिबंधित कर दिया है। वहाँ के क्षेत्रीय अस्पताल में इस सम्बन्ध में नोटिस भी चस्पा दिया गया है। पिछले 3 दिनों से अस्पताल का कोविड-19 वैक्सीन वार्ड बंद पड़ा हुआ है।
जो भी लोग कोरोना वैक्सीन लेने आ रहे हैं, उन्हें बताया जा रहा है कि ये प्रतिबंधित है। वैक्सीन से सम्बंधित प्रशासनिक टीम को भी तालिबान ने कह दिया है कि वो अपना काम बंद कर दें। हालाँकि, तालिबान ने इस सम्बन्ध में कोई बयान नहीं दिया है। तालिबान पर निशान साहिब गुरुद्वारे पर से झंडा हटाने के आरोप भी लगे हैं। हालाँकि, तालिबान का कहना है कि सिखों ने खुद ही अपना झंडा हटा दिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है।
Taliban Banned Using of COVID-19 Vaccines in Paktiahttps://t.co/x0O9qPbfUN pic.twitter.com/3G9TOlwzbk
— ShamshadNews (@Shamshadnetwork) August 12, 2021
बकौल तालिबान, उसके ‘सिक्योरिटी अधिकारियों’ ने सिखों को आश्वासन दिया कि कोई उन्हें प्रताड़ित नहीं करेगा, जिसके बाद वो झंडा फिर लगा दिया गया। तालिबान ने अफगानिस्ता की जनता के लिए भारत द्वारा वहाँ चलाई जा रही परियोजनाओं की तारीफ़ करते हुए कहा है कि भारत पहले से ही ऐसा करता आ रहा है और ये प्रशंसनीय है। लेकिन, साथ ही धमकाया कि अगर भारत अफगानिस्तान में सेना का इस्तेमाल करता है तो ये उसके लिए अच्छा नहीं होगा।
तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने कहा कि अफगानिस्तान में सैनिक गतिविधियों का अंजाम भारत ने भी देखा होगा, इसीलिए अब ये उनके ऊपर है। तालिबानी प्रवक्ता ने ये भी कहा कि भारतीय प्रतिनिधियों से तालिबान के मिलने की खबर आई है, लेकिन वो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता है। उसने कहा कि क़तर की राजधानी दोहा में एक बैठक हुई थी, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी हिस्सा लिया था।
तालिबान के प्रवक्ता ने ये भी आश्वासन दिया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पकिस्तान के आतंकी संगठनों से अपने संपर्कों को तालिबान ने एक आधारहीन आरोप करार दिया। साथ ही प्रतिबद्धता जताई कि वो किसी भी दूतावास या विदेशी राजनयिकों को नुकसान नहीं पहुँचाएगा। उधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी तालिबान की निंदा की है।
They (India) have been helping the Afghan people or national projects. They did it in the past. I think that is something which is appreciated: Taliban Spokesperson Muhammed Suhail Shaheen to ANI pic.twitter.com/CF0xhQigda
— ANI (@ANI) August 14, 2021
1. India doesn't need to go for boots on the ground in Afghanistan unless Taliban is direct threat to India (leave aside proxies and sending afgani militia to help ISI in Kashmir valley)
— DB Junkie (@ws_concat) August 14, 2021
2. Indian forces don't accept challenge from any Tom, dick and harry(As per comment section).
Agreed. India doesn't need offensive policy against Taliban as you can't uproot Taliban unless you nuke. Moreover, it's not a military necessity and it will create burden over indian economy which is not justifiable in any manner.
— DB Junkie (@ws_concat) August 14, 2021
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान अब नियंत्रण से बाहर जा रहा है, इसीलिए तालिबान को अपनी कार्रवाई रोक देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध के रास्ते पर चल कर सत्ता पाने वालों के लिए विश्व समुदाय का संदेश है कि वो विश्वास खो देंगे और अंत में अफगानिस्तान ही अलग-थलग हो जाएगा। साथ ही उन्होंने तालिबान द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन, खासकर महिलाओं व पत्रकारों के खिलाफ अत्याचार पर आपत्ति जताई।
उधर कनाडा के अफगानिस्तान के 20,000 शरणार्थियों को शरण देने का फैसला लिया है, जिन्हें तालिबान से खतरा है। कनाडा ने कहा कि खासकर महिला एक्टिविस्ट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को यहाँ बसाने पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें अफगानिस्तान में तालिबान से ज्यादा खतरा है। इसके लिए कनाडा एक स्पेशल इमीग्रेशन प्रोग्राम लेकर आ रहा है। अफगानिस्तान के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर कंधार व हेरात पर तालिबान का कब्ज़ा हो चुका है।

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