जब भी बॉलीवुड में ड्रग का मुद्दा चर्चा में आता है, लिबरल गैंग एकदम बॉलीवुड के पक्ष में खड़ा हो जाता है, लेकिन एक लम्बे समय से इसी बॉलीवुड में यौन शोषण का मुद्दा #metoo चर्चा में है, कोई नहीं बोलता, क्यों महिला यौन शोषण पर इन लोगों की आवाज़ क्यों नहीं निकलती? और जहाँ तक नवाब मलिक की बात है कि जब समीर के विरुद्ध उनके पास इतने सबूत हैं तो मंत्री होते हुए कार्यवाही क्यों नहीं की? क्यों अब तक चुप्पी साधे हुए थे?
एनसीबी (NCB) ने आर्यन खान को ड्रग मामले में गिरफ्तार किया तो परंपरागत और सोशल मीडिया पर युद्ध सा छिड़ गया। आर्यन खान के समर्थन और एनसीबी के विरोध में कई लोग उठ खड़े हुए। तर्क, कुतर्क और बालसुलभ बातों से मीडिया स्पेस भर गया। गिरफ्तारी के पीछे के कारणों को लेकर लगाए गए कुछ कयास और जारी किए गए कुछ बयानों को पढ़कर लगा जैसे उनका उद्देश्य ही एनसीबी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाना और आम लोगों में भ्रम पैदा करना था। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के खिलाफ माहौल बना कर भ्रम पैदा करना लिबरल इकोसिस्टम के टूलकिट का ऐसा हिस्सा है जिसे बार-बार आजमाया जाता रहा है।
आर्यन के बहाने NCB पर हमला: नवाब मलिक सहित लिबरल गिरोह की सोची-समझी चाल, कानूनी कार्रवाई को दिया राजनीतिक रंग
मुंबई क्रूज ड्रग्स पार्टी केस में एनसीबी ने एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस मुद्दे पर परिवार से ज्यादा महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक को ज्यादा मिर्ची लग रही है। वे शुरू से ही इस मामले में एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को निशाना बना रहे हैं। इसको लेकर आज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है कि आखिर नवाब मलिक किस हैसियत से जांच को लेकर रोज ट्विटर पर सवाल पर सवाल उठा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि असल में नवाब मलिक एनसीबी और समीर वानखड़े को इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि एनसीबी ने मलिक के दामाद को ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया था। उनके दामाद समीर खान को 9 महीने बाद इस साल सितंबर में जमानत पर रिहा किया गया था।
मियाँ नवाब का यहां से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा !
— Mohit Bharatiya ( Mohit Kamboj ) (@mohitbharatiya_) October 27, 2021
Nawab Claimed NCB Officer Has Send Him This Letter From Mumbai but it stamp says came from Bihar ! No date is there on Stamp !
It’s Scanned and Faked !
खुद ही लिख कर खुद ही को भेजा , खुद को और खुद के दमाद को बचाने के लिए ! pic.twitter.com/ESzXhYI8Gj
Nawab Malik is repetitively making bogus statements on Sameer Wankhede. Either He want a revenge of arresting his Son in law
— अंकित राघव (@ankitraghav717) October 27, 2021
For drug case or he himself is involved in the Drug Racket?#SendNawabMalikToJail @NSO365 pic.twitter.com/rcJTbDZCnR
ते जाओ जेल मे ।#SendNawabMalikToJail@NSO365 pic.twitter.com/EntN38uWni
— Jajabor (@jajabor_sanjeev) October 27, 2021
Nawab maliks son in law was self drug addict and was sent to jail nawab Malik intension of defaming Wankhede is not adorable now malik is targetting his family same on you nawab malik
— Aryan Sanatani (@SanataniAryan) October 27, 2021
Thu thu#SendNawabMalikToJail pic.twitter.com/HsrV9cqG3q
Nawab Malik is constantly trying to save the drugs peddlers and obstruct the NCB investigation, so only after sending him to jail will a fair investigation be done.#SendNawabMalikToJail@NSO365 pic.twitter.com/MALxQpUml6
— Rupesh Tondak (@rupeshtondak) October 27, 2021
— Hindustan Ki Kasam (@hindustan47) October 27, 2021
It is the time to@investigate nawab Malik looks like he has lot of information about drug suppliers
— Vgreddy (@Vgreddy8) October 27, 2021
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक की गुंडागर्दी।
— 💪 Jaat 💪 🇮🇳 (@RamJaat0) October 27, 2021
👇 pic.twitter.com/uZaHUzPQDt
Another reason why nawab Malik has targeting Sameer Wankhede#SameerWakhede https://t.co/y0YnZwcTkI
— Usha Narayan (@UshaNSR) October 27, 2021
कुछ समझ न आए तो समझाना.....#SameerWakhede#SendNawabMalikToJail pic.twitter.com/sqySILiTGv
— Shiva Kumar (@kumarshivsaini) October 27, 2021
अघाडी सरकार में जुल्मों सितम की दास्तां....
— Shiva Kumar (@kumarshivsaini) October 27, 2021
तो महाराष्ट्र सरकार में एक आम इंसान की क्या इज्जत होगी?#SameerWakhede#SendNawabMalikToJail pic.twitter.com/Xiz3iLXnan
आइए अब देखे, मंत्री जी के भाई "कप्तान मलिक" कैसे कानून अपने हाथों में लेते है, मजदूरों को भद्दी गाली और धमकी दे रहे है ! pic.twitter.com/4zCEIe3Cr8
— MishraJi (@MishraJi_01) October 26, 2021
अल्लाह आपको ज़हर से निजात दिलाए #NawabMalik जी। #GETWELLSOON https://t.co/xIKRT87LCa
— Rajkishor (@RajkishorLive) October 27, 2021
#SameerWakhede की जाति क्या है , धर्म कौनसा मानते है , मां बाप क्या करते थे , कितनी शादी की है ?? इन सब का उनके काम और जांच से क्या लेना देना ???#NawabMalik को इतना पर्सनल होकर क्या मिल रहा है , ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना हिसाब चुकाना हो इनको #NCB से ...
— Deepak Srivastav (@Deepak4IND) October 27, 2021
Sham On this ...
वो चाहते हैं?
— राजकुमार सिंह(राजू चौधरी), दिल है हिंदुस्तानी (@Raajbhai99951) October 27, 2021
समीर वानखेड़े को बिना सबूत दोषी मान लो,,
और जो सबूत के साथ पकडा गया, उसे निर्दोष
नवाब की दामाद के लिए अच्छी फिलिंग है..
पर देशप्रेमी ऐसे मंत्री को "गद्दार" कहते हैं..#SameerWakhede
Sahi kaha...... U KNOW NOW EVEN Many people in Maharashtra r seeing and come to know how this MVA government is targeting good people like #SameerWakhende
— Likhit (@Likhit53384765) October 26, 2021
Even #NCP party supporters r saying they r really disappointed with current MVA govt
And now they won't support this party
गजब मेहनत कर रहे हैं मंत्री जी! महाराष्ट्र सरकार के सबसे मेहनती मंत्री हैं!#SameerWakhede #NawabMalik https://t.co/b2deAFd8xN
— Akhilesh Nath Tripathi (@antripathi101) October 27, 2021
हे भगवान 😮! https://t.co/Wxvz0NKroR
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) October 27, 2021
यह बताया गया कि केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी दरअसल आर्यन खान को नहीं बल्कि उनके बहाने शाहरुख खान के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ऐसे बयान के पीछे के कारण तो इसे जारी करने वाले बयानबाजों को ही पता होंगे पर सबकुछ धड़ल्ले से कहा गया। जैसे शाहरुख खान की वर्तमान केंद्र सरकार से कोई दुश्मनी है और सरकार इसी कारण से शाहरुख़ खान को परेशान कर रही है। यह तब जब शाहरुख़ खान की केंद्र सरकार से ही नहीं, भाजपा के साथ भी कभी किसी तरह का सार्वजनिक विवाद नहीं रहा। फिर भी कुछ टीवी न्यूज़ चैनल, उनके संपादक और संवाददाताओं ने अपनी चिर परिचित नीति के तहत एनसीबी की कार्रवाई का खुलकर विरोध और आर्यन खान का समर्थन किया।
आगे चलकर कहा गया कि शाहरुख खान को इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। इस तरह के तर्क हमेशा से अजीब लगते रहे हैं पर समय-समय पर यह दोहरा कर इसे सच बनाने का प्रयास जारी है। कुछ तो अपने कुतर्क मार्ग पर चलकर वहाँ पहुँच गए जहाँ से यह कहते सुने गए कि; चूँकि शाहरुख़ खान सदी के सबसे लोकप्रिय भारतीय हैं इसलिए उनके बेटे के साथ ऐसा व्यवहार न तो कानून सम्मत है और न ही संविधान सम्मत।
भारत का कानून या सरकार शाहरुख़ खान की लोकप्रियता के आधार पर आचरण करें, यह कहना वैसा ही है जैसे यह कहा जाए कि अमिताभ बच्चन के कर्ज बैंकों द्वारा केवल इसलिए माफ़ कर देने चाहिए थे क्योंकि उन्हें सदी का महानायक माना जाता रहा है।
ऐसा लगता है जैसे मीडिया में आर्यन और शाहरुख़ खान के समर्थन में दिए गए बयान और कुतर्क वगैरह का असर होता दिखाई न दिया तो राजनीतिक हस्तक्षेप का सहारा लिया गया। अब महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने इसे ड्रग मामले में की गई सामान्य कानूनी कार्रवाई से आगे ले जाकर खुद और एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के बीच का मामला बना दिया है। नतीजा यह हुआ है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के दिनों से भी नीचे चली गई है। नवाब मलिक को वानखेड़े से चाहे जो समस्या हो पर आर्यन खान मामले में उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप किसी भी तरह से संवैधानिक नहीं है।
वानखेड़े के विरुद्ध वे रोज कोई न कोई ऐसा बयान जारी करते हैं जो लगते तो व्यक्तिगत हमले हैं पर उनका उद्देश्य एनसीबी के साथ-साथ केंद्र सरकार के अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाना जान पड़ता है। ऐसा महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार के मंत्री और सत्ताधारी दलों के अन्य नेता पहले भी कर चुके हैं। आज नवाब मलिक जो कर रहे हैं वो केंद्र सरकार के विरुद्ध खड़े होने के अनिल देशमुख के अजेंडे का ही विस्तार है। पूर्व गृहमंत्री देशमुख अपने दिनों में लगभग रोज केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कोई न कोई जाँच का आदेश देते ही रहते थे। यह बात और है कि बाद में उनका और उनके पुलिस अफसरों का क्या बना वह सबके सामने है।
पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय जाँच एजेंसियों के विरुद्ध कुछ राज्य सरकारों ने जिस तरह की राजनीति की है वह कई स्तरों पर संघीय ढाँचे को क्षति पहुँचाने वाली रही है। चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी का अपने राज्य में सीबीआई को न घुसने देने की घोषणा इसी राजनीति का हिस्सा थी। अपने मंत्रियों की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी द्वारा सीबीआई का घेराव इसी वर्ष किया गया। नवाब मलिक आज जो कर रहे हैं वह इसी राजनीति का नवीनतम संस्करण है। उन्हें वानखेड़े से जो भी समस्या है, उसका खुलासा जब होगा तब होगा पर फिलहाल उनके आचरण ने एनसीबी की एक विशुद्ध कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक लड़ाई बना दिया है। यह बात वर्तमान विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार के विरुद्ध शुरू की गई राजनीतिक प्रवृत्ति को पुख्ता ही नहीं करेगी बल्कि अन्य राज्य सरकारों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगी।
मलिक एक मंत्री की हैसियत से यह सब कर रहे हैं पर आश्चर्य यह है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अपने मंत्री के ऐसे आचरण पर प्रतिक्रिया नहीं देते। मुख्यमंत्री ठाकरे की यही चुप्पी अनिल देशमुख की अति सक्रियता के समय भी थी। ठाकरे तो चुप हैं ही पर शरद पवार की चुप्पी और महत्वपूर्ण है। वर्तमान भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेता पिछले लगभग दो वर्षों से चुप होकर अपने दल के नेताओं को निकृष्ट राजनीतिक आचरण करते हुए लगातार देख रहे हैं पर हस्तक्षेप नहीं करते। उनका ऐसा राजनीतिक आचरण महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति पर उनकी लगातार ढीली होती पकड़ का नतीजा है या फिर केंद्र सरकार से अलग-अलग स्तर पर टकराव का, यह देखना दिलचस्प रहेगा।


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