दिवाली के ‘पटाखों’ से पहले ही दमघोंटू हो गई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पटाखे नहीं पराली है प्रदूषण की बड़ी वजह
(साभार: दैनिक जागरण)
कुछ वर्षों से आभास हो रहा है कि मौसम विभाग और National Green Tribunal(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) कोहरा/fog का नाम शायद भूल गया है। जैसे ही श्राद्ध प्रारम्भ होते हैं, प्रदुषण नाम की महामारी दीवाली पर ग्रहण बन छा जाती है। हिन्दू संस्कृति के अनुसार हर त्यौहार किसी न किसी मौसम आने का संकेत देता है, लेकिन जब से हिन्दू विरोधियों ने जरुरत से ज्यादा सिर उठाना शुरू किया है, कभी होली पर, कभी करवा चौथ तो कभी दिवाली पर ज्ञान वाचक बन आ जाते हैं। लगभग 4 दशक पूर्व तक LPG आने से पहले हर घर में चूल्हा जलता था, कभी प्रदुषण का रोना नहीं रोया गया। फिर आज क्यों? क्या यह हिन्दुओं पर प्रहार नहीं? इस प्रश्न का जवाब हर हिन्दू विरोधियों के साथ-साथ नेताओं और पार्टियों को भी देना होगा। प्रदुषण के पीछे कौन-सा राज छुपा है? कोरोना के समय हुए लॉक डाउन में आसमान एकदम साफ दिखना शुरू हो गया था। कैसे? केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस पर चिंतन करने की जरुरत है। 

पराली आज पहली बार नहीं जल रही, लेकिन हिन्दू त्यौहारों पर कोहरा का नाम नहीं, पराली से हो रहे प्रदुषण का रोना रोकर दिवाली पर जलने वाली आतिशबाज़ी पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाता है, परन्तु आतिशबाज़ी नहीं जलने के बावजूद भी प्रदुषण दिवाली के अगले दिन कहीं अधिक होता है, क्यों? आतिशबाज़ी न जलने से इस उद्योग को कितनी हानि हो रही है, किसी नेता अथवा पार्टी ने कभी सोंचने की जहमत नहीं फ़रमाई। जिस कारण लोगों के रोजगार भी प्रभावित हो रहे हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है, लघु उद्योग निम्न स्तर पर जा रहा है।  
ठंड का मौसम आते ही देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बनकर उभरता है। दिल्ली में स्मॉग छा जाने से लोगों को साँस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसानों द्वारा पराली जलाया जाना इसकी सबसे बड़ी वजह है। इसी क्रम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बुलेटिन जारी किया है। बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक नवंबर 3 को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 3 को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 314 रहा, जिसमें पीएम 10 और पीएम 2.5 मुख्य प्रदूषक रहे। इससे पहले नवंबर 2 को यह आँकड़ा 303 से कुछ डिग्री अधिक था। नवंबर 3 को दिल्ली ही नहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बुलंदशहर और नोएडा समेत कई हिस्सों में AQI ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार, नवंबर 4 यानि दीपावली से हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।

माना जा रहा है कि एक्यूआई नवंबर 4 को ‘बेहद खराब’ श्रेणी के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच सकता है। पराली जलाने के कारण दिल्ली में पीएम 2.5 में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके अलावा, प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान नवंबर 3 के लगभग 8% से बढ़कर नवंबर 4 को अनुमानित 20% हो सकता है। हवा के उत्तर-पश्चिमी दिशा में हुए बदलाव को इसका कारण माना जा रहा है।

दिल्ली के उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवाएँ पराली जलाए जाने वाली हॉटस्पॉट पंजाब और हरियाणा से प्रदूषक हवाएँ लाती हैं। SAFAR के पूर्वानुमान में कहा गया है कि नवंबर 5 और 6 को प्रदूषण में पराली का शेयर 35 से 45 फीसदी तक पहुँच सकता है। ऐसे में पटाखों के कारण दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 4 से 6 नवंबर के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच सकता है।

हाल ही में पटाखों पर प्रतिबंध पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे अस्थायी मुद्दा हैं, जबकि पराली जलाना मुख्य मुद्दा है। यह स्वीकार करते हुए कि अदालत को इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वे दीवाली की छुट्टी के बाद इस मुद्दे को सुनवाई के लिए उठाएँगे।

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