महाराष्ट्र : नगर पंचायतों में BJP सबसे आगे, शिवसेना चौथे नंबर की पार्टी बनी

महाराष्ट्र के नगर पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के कुल 384 उम्मीदवार जीते हैं। दूसरे नंबर पर एनसीपी है, जिसके 344 उम्मीदवार जीते हैं। कॉन्ग्रेस के 316 उम्मीदवारों को जीत मिली है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का नेतृत्व कर रही शिवसेना चौथे नंबर पर है। उसे 284 सीट मिली है। 206 निर्दलीय भी जीतने में कामयाब रहे हैं।

नगर पंचायत की 1649 सीटों के लिए मंगलवार (18 जनवरी 2022) को मतदान हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह चुनाव ओबीसी आरक्षण के बगैर हुआ था। पंचायत चुनावों में मिली सफलता के बाद भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सत्ताधारी पार्टी ने इन चुनावों में पैसे, पावर और प्रशासन का गलत इस्तेमाल किया, इसके बाद भी महाराष्ट्र के लोग दृढ़ता के साथ भाजपा के साथ खड़े रहे। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “बीजेपी फिर एक बार महाराष्ट्र में नम्बर 1। जब प्रदेश में हमारी सरकार थी तब से भी 65 सीट, इस बार अधिक आई है। महाराष्ट्र की जनता ने फिर एक बार हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताया है। मैं महाराष्ट्र की जनता का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।”

इन चुनावों में लगभग 81 प्रतिशत मतदाता ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि पार्टी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। लगभग 26 महीनों तक सत्ता से बाहर रहने के बावजूद, भाजपा सफल रही है और इससे पता चलता है कि हम सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के बावजूद अच्छे परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी 24 नगर पंचायतों का नेतृत्व हासिल कर सकती है।

बात अगर अलग-अलग क्षेत्रों की करें तो मराठवाड़ा में कुल 22 नगर पंचायत हैं। इसमें बीजेपी के खाते में 6 गई हैं। शिवसेना को चार, कॉन्ग्रेस को तीन और एनसीपी को 2 जगहों पर सफलता मिल पाई। वहीं विदर्भ की बात करें तो वहाँ की 28 पंचायतों में से बीजेपी और कॉन्ग्रेस को 5-5 और एनसीपी को दो मिली है। शिवसेना का यहाँ खाता भी नहीं खुला है। कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में बीजेपी ने पाँच नगर पंचायत जीती है। शिवसेना को यहाँ चार,  NCP को 8 और कॉन्ग्रेस को केवल एक नगर पंचायत में सफलता मिली है।

नगर पंचायत चुनावों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण से इनकार किए जाने के बाद सभी सीटे अनारक्षित कर दी गई थी। जानकारों का मानना है कि चुनावों में इसका असर नहीं दिखा। महाराष्ट्र सरकार ने वैसे यह फैसला वापस लेने के लिए दिसंबर में शीर्ष अदालत के सामने एक अनुरोध भी दायर किया था।

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