सौराष्ट्र के समुद्र तट पर स्थित भगवान "श्रीकृष्ण" का मंदिर

 

                                "श्री द्वारिकाधीश मंदिर" गुजरात

अगर इसे मुगलों ने बनवाया होता तो यह हमारे इतिहास की किताबों में पहले पन्ने पर होता..!!ताजमहल से लाख गुना सुंदर और आकर्षक है भारतीय शिल्प कला का अद्भुत नमूना है संपूर्ण हिन्दू पौराणिक कथाओं के शिल्प है!

पर अफ़सोस देश इसके बारे में कहाँ जानता है ये दुनिया की सबसे श्रेष्ठ अद्भुत वास्तु है..
अब भगवान की सेवा कौन कर सकता है और किस ढंग से करनी चाहिए, बहुत सारे लोगों की समझ नही आती ! प्रभु की सेवा एक ढंग है कर्मकांड का, दूसरा ध्यान का और तीसरा है ज्ञान का जिसकी जैसी रुचि हो !

कुछ व्यक्त्ति तीनों तरीके से ईश्वर की सेवा करते हैं ! उनको पूण्य पुंज कहते हैं !

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