अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, या फिर आपको हाल ही में पता चला है कि आप मां बनने वाली हैं, तो समय-समय पर चेकअप आपके और आपके होने वाले बच्चे के लिए बेहद ज़रूरी है। डॉक्टर से पहली मुलाकात में आपकी प्रेग्नेंसी कंफर्म होगी और कई तरह के चेकअप जिससे इस दौरान दिक्कतें न आएं
हेल्दी डाइट बनाए रखें
प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी डाइट फॉलो करना भी ज़रूरी है। कभी-कभी चीट मील खा सकती हैं, लेकिन ध्यान दें कि आपको दिन में सिर्फ 300 कैलोरीज़ की ही ज़रूरत है। प्रोटीन और कैल्शियम की अच्छी मात्रा लें।
मल्टी-विटामिन्स का सेवन
अपने डॉक्टर से पूछें की प्रेग्नेंसी के दौरान आपके और आपके बच्चे के लिए किस तरह के विटामिन्स ज़रूरी हैं। खासतौर पर फॉलिक एसिड और कैल्शियम की कितनी मात्रा लेनी चाहिए। इन स्प्लीमेंट्स की मदद से आपके बच्चे को ज़रूरी विटामिन्स, खनीज मिलेंगे। यह सभी पोषक तत्व आपके बच्चे की हड्डियों, आंखों, दिमाग के विकास में काम आते हैं।
रोज़ाना एक्सरसाइज़ करें
अगर आप रोज़ाना वर्कआउट करेंगी, तो नॉर्मल डिलिवरी के चांस बढ़ेंगे और साथ ही आपकी प्रेग्नेंसी का समय अच्छा बीतेगा। इससे आप डिलिवरी के बाद जल्दी रिकवर होंगी। हालांकि, रोज़ाना वर्कआउट न करें और इस बारे में अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें।
अपने शरीर की सुनें
पहली और तीसरी तिमाही में थकान काफी होती है, जो कि आपके शरीर का बताने का तरीका है कि आप आराम ज़्यादा लें। इसलिए शरीर की सुनें और ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें। किताबें पढ़ें, जब थकावट महसूस हो तो आराम करें।
शराब और कैफीन से दूर रहें
प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। इसलिए शराब से दूर रहें, कैफीन का सेवन कम से कम करें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां न खाएं। शराब का सेवन आपके बच्चे के दिमाग़ और रीढ़ के विकास को रोक सकता है। ज़्यादा कैफीन का सेवन मिसकैरिज से जुड़ा है और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां खाना भी आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
कैमिकल एक्सपोज़र से बचें
कैमिकल्स जन्म दोष के लिए जाने जाते हैं, इसलिए अगर आप ऐसे रसायनों या अन्य पदार्थों के आसपास काम करते हैं, तो अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। घर की साफ-सफाई के लिए भी नॉन-टॉक्सिक क्लीनिंग सोल्यूशन का इस्तेमाल करें।
- डॉक्टर से कब संपर्क करें?
- योनि से खून बहना या तरल पदार्थ का रिसाव
- किसी भी तरह का दर्द
- कॉन्ट्रेक्शन जो हर 20 मिनट या उससे कम समय में हो रहा हो
- तेज़ एंठन
- दिल की घबराहट
- चक्कर आना
- बच्चे की एक्टिविटी कम होना
- सांस लेने में दिक्कत

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