क्या तथाकथित किसान आंदोलन विपक्ष को चुनाव में धूल चाटने को मजबूर करने वाला है? मोदी सरकार द्वारा किसानों को 23 फसलों पर दी जा रही MSP

जिस स्वामीनाथन रिपोर्ट को तथाकथित किसान और विपक्ष,विशेषकर कांग्रेस, लागू करने कह रहे है, जनता को पागल बना रहे हैं, या वह रिपोर्ट है, जिसे मोदी सरकार तो क्या आंदोलनकारियों और इनके समर्थक सत्ता में आने के बाद भी लागू करने की सोंच भी नहीं सकते। अगर यह रिपोर्ट लागू करने योग्य होती कांग्रेस समस्त किसान समाज को अपनी जेब में रखने से नहीं चुकती। मामला सुलझने के बाद यही आंदोलनकारी कांग्रेस और अन्य विपक्ष से पूछेगी कि तुमने अपने कार्यकाल में क्यों नहीं लागू की, क्यों हमें जनता में नीचा दिखाया? अगर किसी मंदबुद्धि ने इसे लागू कर भी दिया समस्त भारत में ऐसा भयंकर आंदोलन होगा, जिसमें वर्तमान आंदोलनकारियों में से 80%भी शामिल होंगे। और आंदोलन के भयंकर रूप से वह सरकार इतनी अधिक भयभीत होगी कि सुरक्षा में भी बाहर आने से पहले 1000 बार सोंचना होगा। 

                          मुख्यमंत्री बनने पूर्व भगवंत सिंह मान का वायदा 

तथाकथित किसान आंदोलन को विपक्ष जितना अधिक समय तक चलवायेगा, उतना ही अधिक यह इनके लिए कष्टदायक होने जा रहा है, या फिर दूसरे अर्थों में कहा जाये कि ये आंदोलन विपक्ष ही नहीं इन सभी प्रदर्शनकारियों की अर्थी में कीलों का अम्बार लगा देगा, क्योकि अब जनता भी इन तथाकथित किसानों के पहले और अब चल रहे आंदोलन की वास्तविकता को जान गयी है कि आंदोलनों का संचालन खालिस्तानियों के हाथ रहा है। 2024 चुनाव के बाद जब इन पर सरकार की गाज गिरेगी, कोई खालिस्तानी इनके समर्थन में नहीं आने वाला।


पंजाब से हजारों किसान फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य-एनएसपी की गारंटी मांगते हुए एक बार फिर आंदोलन के लिए दिल्ली आ रहे हैं। किसानों की इस मांग को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे इसे लागू करेंगे। लेकिन आपको हैरानी होगी कि अभी फसलों की खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी लागू करने का वादा करने वाली कांग्रेस, इसके पहले जब उनकी अपनी सरकार थी तो इससे साफ इनकार कर दिया था। अभी किसान आंदोलन को हवा देने के लिए राहुल गांधी सहित कांग्रेस के तमाम नेता स्वामीनाथन रिपोर्ट की एमएसपी वाली जिस सिफारिश को लागू करने का वादा कर रहे हैं, उसी सिफारिश को 2010 में कांग्रेसी सरकार ने खारिज कर दिया था। उस समय बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर के सवाल पर तत्कालीन कृषि मंत्री केवी थॉमस ने राज्यसभा में यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा था कि अगर इसे लागू किया तो इसका बाजार पर बुरा असर होगा और इकॉनोमी प्रभावित होगी। ऐसे में अब केंद्र में बीजेपी की सरकार होने पर कांग्रेस के इस दोहरापन पर आप क्या कहेंगे। सोशल मीडिया पर तो लोग कांग्रेस को फटकार लगा रहे हैं। आप भी देखिए लोग क्या कह रहे हैं।

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों को उनकी फसलों पर मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में पहले की तुलना में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। साल 2006 में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को मोदी सरकार ने 2018 में लागू किया। इसके तहत किसानों को उनके उत्पादन खर्च का 1.5 गुना MSP मिलना सुनिश्चित हुआ। MSP लागू करने से किसानों को सामान्य समय में या जब बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिले, तब उन्हें उनकी फसल की सही कीमत सुनिश्चित होता है। पीएम किसान योजना के माध्यम से किसानों के लिए सीधी आय सहायता सुनिश्चित की गई, जिसके माध्यम से पैसा अब सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचता है। कोल्ड चेन, मेगा फूड पार्क और इस तरह के एग्रो-प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर स्थापित किया गया है। किसानों की खेती के अलावा दूसरी गतिविधियों को आय के स्रोत के रूप में कभी नहीं देखा गया था। मोदी सरकार इस दिशा में भी काम कर रही है।

मोदी सरकार ने 2018 में लागू किया स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप MSP
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू किया एवं वर्ष 2018-19 के बजट में उत्‍पादन लागत के कम-से-कम डेढ़ गुना एमएसपी करने की घोषणा की। तब से केंद्र सरकार एमएसपी की घोषणा अखिल भारतीय भारित औसत उत्‍पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर लगातार कर रही है, जो कि किसानों की आय को बढ़ाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री पीएम मोदी के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक निर्णय है। केंद्र सरकार, कृषि लागत और मूल्‍य आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर तथा राज्‍य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के तर्कों पर विचार करके 22 कृषि फसलों के लिए एमएसपी निर्धारित करती है।

किसानों को 23 फसलों पर दी जा रही MSP
कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफ़ारिशों के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से सरकारी ख़रीद के लिए फ़सलों की न्यूनतम क़ीमत तय होती है। वर्तमान में भी केंद्र सरकार 22 फ़सलों के लिए एमएसपी का निर्धारण करती है. गन्ना के Fair and remunerative price या’नी उचित एवं लाभकारी मूल्य को मिला दें, तो फ़सलों की संख्या 23 हो जाती है। गन्ना को छोड़कर इनमें 16 ख़रीफ़, 6 रबी और 2 नकदी या’नी कमर्शियल फ़सल हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं। जनाधार की कमी का सामना कर रही इन पार्टियों के नेता किसी ना किसी तरह से सत्ता पाने की जुगत में लगे हुए हैं। अब चुनाव से पहले हार पक्की देख किसानों के कंधे पर बंदूक रख मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं। अब किसान आंदोलन की आड़ में दिल्ली को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे इन किसानों के एक नेता के वायरल वीडियो से सनसनी फैल गई है। इस वीडियो में भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धुपर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल कह रहे हैं कि राम मंदिर के कारण मोदी का ग्राफ काफी ऊपर चला गया है। चुनाव से पहले हमारे पास बहुत कम समय है और हमें मोदी का ग्राफ नीचे लाना है। विरोध प्रदर्शन के बीच किसान नेता डल्लेवाल के इस वीडियो ने किसान आंदोलन को लेकर एक नया विवाद पैदा कर दिया है। लोग किसानों के प्रदर्शन की मंशा को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी किसान आंदोलन को लेकर फेक न्यूज फैलाने में लगी है। दिल्ली में किसान आंदोलन के लिए आ रहे ज्यादातर किसान पंजाब के हैं। पंजाब में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार है और वो लोकसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन को हवा देने का काम कर रही है। इसी कड़ी में किसान आंदोलन को लेकर फेक न्यूज फैलाते हुए आम आदमी पार्टी के ट्वीटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है। इस ट्वीट में लिखा गया है कि मोदी सरकार द्वारा देश के अन्नदाता किसानों को रोकने के लिए जितनी ताक़त लगाई जा रही है उससे कम ताक़त में तो MSP क़ानून बन सकता है। लेकिन नीयत हो तब ना। इस ट्वीट के साथ केजरीवाल की पार्टी ने हरियाणा-दिल्ली की बॉर्डर पर बैरिकेडिंग की एक तस्वीर को भी शेयर किया है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हरियाणा-दिल्ली की बॉर्डर पर बैरिकेडिंग की यह तस्वीर तीन साल पहले किसान आंदोलन के समय की है।

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