गांधी नेहरू के सपनों का भारत दिखाई दे रहा आज : हल्द्वानी के असली अपराधी तो न्यायाधीश हैं

                                                                                                                                साभार 
सुभाष चन्द्र

जो हल्द्वानी में हुआ वह गांधी नेहरू के सपने थे क्योंकि ऐसे ही दिन भारत में लाने के लिए दोनों ने पाकिस्तान बनने के बाद भी मुसलमानों को जबरन भारत में रखा था। जो मुस्लिमों ने हल्द्वानी में दिखाया वह कोई नई बात नहीं है और ऐसा कुछ दिन पहले हरियाणा के मेवात में भी हुआ, उसके कुछ दिन पहले लखनऊ और दिल्ली में किया गया जब CAA के विरोध में आग लगाई गई 

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यह सब कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान के व्यापार का हिस्सा है जब देश के किसी भी भाग में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा रहा है कुछ दिन पहले मणिपुर को भी कांग्रेस ने आग लगाईं थी

गांधी नेहरू दोनों की खुराफाती सोंच ने देश के आज़ाद होते ही दूसरे विभाजन की तैयारी की भूमिका बना दी थी और इसलिए मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोक दिया आज वे ही देश की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं

हल्द्वानी शहर के बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने और अवैध मदरसा तोड़े जाने की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़की नहीं बल्कि भड़काई गई। यहां दंगा करने के लिए पहले से ही पूरी तैयारी की गई थी। जिहादियों ने जिस तरह पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया उसकी कलई खुल चुकी है। जिहादी भीड़ ने पूरी साजिश के साथ वारदात को अंजाम दिया। हिंसा की पूरी प्लानिंग रची गई थी। उपद्रवी प्रशासन और पुलिस की टीम को जला देना चाहते थे। हल्द्वानी में हिंसा की बड़ी तैयारी थी। कांग्रेस की सरकारों में मुस्लिम तुष्टिकरण और PFI जैसे आतंकी संगठनों ने साजिश के तहत बीते कुछ सालों में रोहिंग्या मुसलमानों को उत्तराखंड के मैदान से लेकर पहाड़ तक तेजी से फैलाया है। इससे न सिर्फ सामाजिक तानाबाना छिन्न भिन्न हो रहा है बल्कि ये देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी खतरा हैं। देवभूमि उत्तराखंड के कई शहरों में कुछ साल पहले मुस्लिम आबादी जहां हजारों में होती थी वहीं अब यह लाखों में पहुंच चुकी है। 2012 के बाद इनकी लगातार बढ़ती संख्या सुरक्षा के साथ ही सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से भी गंभीर संकट उत्पन्न कर रही है।

पुलिस पर हमले की पहले से रची गई थी साजिश
हल्द्वानी में 8 फरवरी को हुई हिंसा पर नैनीताल की डीएम वन्दना सिंह ने कहा “ये योजना बनाई गई थी कि जिस दिन डिमोलिशन अभियान चलाया जाएगा उस दिन बलों पर हमला किया जाएगा। हमने पत्थरों वाली पहली भीड़ को तितर-बितर कर दिया और दूसरी भीड़ जो आई उसके पास पेट्रोल से भरे बोतल थे उसमें उन्होंने आग लाग के फेंकी।..तब तक हमारी टीम ने कोई बल प्रयोग नहीं किया था। भीड़ ने थाने को घेर लिया और थाने के अंदर मौजूद लोगों को बाहर नहीं आने दिया गया। उन पर पहले पथराव किया गया और फिर पेट्रोल बम से हमला किया गया। थाने के बाहर वाहनों में आग लगा दी गई।

लेकिन ऐसे आतताइयों को हिम्मत देने वाला तो सुप्रीम कोर्ट है जिसके न्यायाधीश उनके साथ खड़े रहते हैं - सिब्बल, प्रशांत भूषण और अन्य फर्जी सेकुलर वकील सुप्रीम कोर्ट के जजों के हैंडल चलाते हैं, आधी रात को आतंकियों के लिए कोर्ट खुलना, जिसकी वजह से आज देश में हर जगह सरकारी जमीन पर कब्जे हो रखे हैं लखनऊ के CAA दंगों के 274 आरोपियों से नुक़सान की भरपाई के नोटिस चंद्रचूड़ ने उत्तर प्रदेश चुनाव के दूसरे चरण के दिन वापस करने के आदेश दिए थे और एक तरह से दंगाइयों के सरकारी संपत्ति को आग लगाने को सही बता दिया था

पिछले वर्ष हल्द्वानी के बनफूलपुरा में दिसंबर, 2022 के अवैध कब्जे को हटाने के आदेश पर प्रशांत भूषण के mention करने पर CJI चंद्रचूड़, जस्टिस SA Nazeer और जस्टिस PS Narsimha की बेंच ने 5 जनवरी, 2023 को स्टे कर दिया और 7 फरवरी, 2023  की तारीख लगा दी। अवैध कब्जे और अतिक्रमण के पक्ष में क्यों स्टे लगाया जाता है?  

उसी दिन की खबर में बताया गया था कि जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश पर जिस तरह लोगों को प्रशासन हटाने की कोशिश कर रहा है, वह गलत है, उनके पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए मानवता के आधार पर यह जरूरी है क्योंकि दावा किया गया है कि वे लोग वहां 60-70 वर्ष से रह रहे हैं। उन नेताओं और अधिकारियों को चिन्हित कर अतिक्रमण और अवैध कब्ज़ा करवाने का दोषी क्यों नहीं ठहरा जाता। बिना राजनितिक संरक्षण के कोई किसी अधिकारी में अनुचित कार्य करने की हिम्मत नहीं सकती। क्या नेताओं और पार्टियों को अवैध कब्जे और अतिक्रमण करवाने के लिए वोट दी जाती है?

अब अंजाम देख लीजिए मीलार्ड के लचर आदेशों का - इन आदेशों ने क्षेत्र के मुसलमानों को एक वर्ष में इतना सशक्त होने का मौका दे दिया कि ठीक एक साल बाद 8 फरवरी, 2024 को पूरे क्षेत्र को आग के हवाले कर दिया। जजों ने केवल यह देखा कि जो लोग हटाए जाने हैं वे अधिकांश मुस्लिम हैं मगर उन जजों ने यह नहीं देखा कि वे लोग कहां से आए हैं  क्योंकि इनमें अधिकांश बांग्लादेशी और रोहिंग्या थे। वो रोहिंग्या जिस कौम को मुस्लिम होते हुए कोई मुस्लिम देश कदम नहीं रखने दे रहा। फिर घुसपैठियों के लिए इतनी मानवता क्यों दिखाई जाती है? जब विश्व में कोई भी देश घुसपैठियों को देश से रखने की बजाए बाहर निकालने के लिए कठोरता से निर्णय लेते है, क्या उनमे मानवता नहीं? 

पुलिस बल पर इतना भयंकर हमला करने वाले देश के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे हैं  लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट तुरंत स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की जरूरत नहीं समझ रहे और हाई कोर्ट भी 14 फरवरी तय किए बैठा है तो उसके पहले सोता ही रहेगा

ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन, जर्मनी में मुस्लिम करते हैं दंगा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हल्द्वानी क्यों जला? इसका सीधा जवाब है कि जहां मुसलमान की आबादी ज्यादा होती है वहां जिहाद शुरू हो जाता है और दंगा-हिंसा का दौर शुरू हो जाता है। ब्रिटेन में मुस्लिम दंगा करते हैं, हिंदू नहीं। फ़्रांस में मुसलमान दंगा करते हैं, हिंदू नहीं। स्वीडन में मुस्लिम दंगा करते हैं, हिंदू नहीं। कनाडा में मुसलमान दंगा करते हैं, हिंदू नहीं। जर्मनी में मुसलमान दंगा करते हैं, हिंदू नहीं। लेकिन भारत में लिबरल कहते हैं कि हिंदु दंगा भड़काते हैं और गरीब मुसलमान पीड़ित होते हैं।

अवैध मुस्लिम बस्ती से फेंके गए पत्थर
हल्द्वानी जिस अवैध मुस्लिम बस्ती से पत्थर फेंके गए वहां हजारों की संख्या में अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्या बसे हुए हैं। इन लोगों ने फर्जी रूप से आधार और वोटर कार्ड बनवा रखा है ! यह बताता है कि पूरी तैयारी से षड्यंत्र के तहत हमला किया गया। अब घर में घुस-घुसकर पुलिस दंगाईयों को तलाश रही है।

मीलॉर्ड कभी अपराध के शिकार नहीं होते, कभी उनके रिश्तेदार आतंकी हमले में नहीं मारे गए और इसलिए आतंकियों की फांसी की सजा रोक देते हैं, कभी इनकी बच्चियों का बलात्कार नहीं होता और इसलिए every sinner has a future कह कर अपराधी की सजा कम कर देते हैं देश भर में जमीनों पर बलात कब्जे होते हैं लेकिन मीलॉर्ड अपने महलों में मस्त रहते हैं और इसलिए वे उन्हें हटाने के लिए “मानवीय दृष्टिकोण” देखते हैं 

दर्द के अहसास के लिए एक दिन मीलॉर्ड और उनके परिवार को भी कुदरत की आग में झुलसना जरूरी है

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