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मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, में बुर्के पहन फर्जी वोट डालते पुलिस ने पकड़ा |
इसी वर्ष हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभाओं के चुनावों के लिए चुनाव आयोग आज से मतदाता पुनरीक्षण का काम शुरू करेगा। पुनरीक्षण करते हुए बोगस मतदाताओं को मतदाता सूचियों से बाहर निकाला जाना सबसे जरूरी है। वैसे अगले साल दिल्ली में भी चुनाव होने हैं।
अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में एक गंभीर जानकारी सामने आई थी कि हैदराबाद के 15 विधानसभा क्षेत्रों में जनवरी, 2023 से मतदाता सूची से 5,41,201 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसका मतलब भाजपा उम्मीदवार माधवी लता का दावा गलत नहीं था कि हैदराबाद में 6 लाख फर्जी वोटर हैं। जो चौकाने वाला है। जब एक संसदीय क्षेत्र का यह हाल है बाकी 542 में क्या होगा, चुनाव आयोग को कठोर कदम उठाने होंगे। जब तक फर्जी वोट डालने वालों को कम से कम 2/3 साल की जेल नहीं होगी, फर्जी मतदान रुकने वाला नहीं।
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लेखक चर्चित YouTuber |
वोटर लिस्ट की ऐसी जांच हर राज्य में होनी चाहिए। लोकसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र ओखला में 20% वोटर बढ़ गए थे और इतने वोटरों का बढ़ना साबित करता है कि बोगस वोटर बढे हैं जो बांग्लादेश से आए हुए हैं या रोहिंग्या है।
चुनाव आयोग को ऐसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या वोटरों को केवल आधार कार्ड के अनुसार ही सही नहीं मानना चाहिए बल्कि कुछ और तरीके अपनाने चाहिए जिससे साबित हो कि वे भारतीय हैं ही नहीं। यह प्रक्रिया पूरे देश के लिए अमल में लानी चाहिए क्योंकि विपक्ष अब केवल मुस्लिम वोटरों की राजनीति कर रहा है और करेगा।
जब फर्जी आधार कार्ड बन सकते हैं तो फर्जी वोट भी उसके सहारे बन सकता है। जिन प्राइवेट एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में आधार कार्ड बनाए हैं उनकी जांच होनी चाहिए। जब लट्ठ बजेगा तो अपने आप उगलेंगे कितने फर्जी कार्ड बनाए थे उन्होंने।
वोट किसी हाल में शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को नहीं होना चाहिए या अन्य किसी ऐसे दिन पर जो सरकारी छुट्टी के आगे पीछे हो। इससे मतदान प्रतिशत पर असर पड़ सकता है।
अगर वोटर राज्य के बाहर गए हुए हैं अपने काम के लिए तो उनके लिए Postal Ballot का प्रबंध किया का सकता है तो आयोग उस पर विचार करे।
चुनाव अधिकारी के सामने किसी भी वोटर को चेहरा ढकने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। मतलब साफ़ वोट करने के लिए चुनाव अधिकारी के सामने बुरखा पहनने की अनुमति नहीं होनी चाहिए और अगर यह किसी के मज़हब के खिलाफ है तो घर में रहें, वोट देने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त होना चाहिए। बुरखा पहन कर पुरुष वोट करते हैं, छोटी छोटी स्कूल जाने वाली बच्चिया भी वोट कर जाती है।
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