अरफ़ा खानुम शेरवानी, सबा नकवी और राजदीप सरदेसाई तीनो ने लगभग एक ही भाषा बोली है कि मोदी के मंत्रिमंडल में 72 मंत्री हैं लेकिन एक भी मुसलमान नहीं है।
अरफ़ा खानम की सुनों, वो तो मोदी के शपथ समारोह में शामिल होने के लिए शाहरुख़ खान पर बरस पड़ी। कहती है “ऐसी क्या मज़बूरी थी” और कहती हैं X पर - “293 MPs, 72 Ministers, Zero Muslims Zero. This is how the largest democracy of the world excludes its Muslims, by design.
राजदीप सरदेसाई ने लिखा - “ 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में हर जाति, समुदाय, राज्य का व्यापक प्रतिनिधित्व है जिसमें 7 पूर्व CM अनुभव भी हैं, बस एक पहलू गायब है : एक बार फिर मंत्री पद की सूची में एक भी मुस्लिम नहीं है ।
Muslims Ask Why No Muslim In Modi Cabinet | Reasi Incident | मोदी कैबिनेट में मुस्लिम माँग रहे जगह! https://t.co/Tgq6VVhwuy
— Ajeet Bharti (@ajeetbharti) June 10, 2024
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लेखक चर्चित YouTuber |
सबा नक़वी का कहना है - “As they have done with Christian and Sikhs by inducting non elected people into cabinet, it would be good form for #Modi regime to induct a muslim, 14% of India’s population. On TV last night both JDU and TDP spokies told me not to critique as this is not final cabinet”.
अब इन तीनों से मैं पूछना चाहता हूं आप लोग अफगानिस्तान में जाकर क्यों नहीं रहते जहां सब कुछ मुसलमानों के लिए है। अरफ़ा और सबा तो मुस्लिम होते हुए अपनी मर्जी से सब कुछ enjoy करती हैं भारत में, 6 महीने के लिए अफगानिस्तान की हुकूमत का भी जायका taste कर आओ।
ये तीनों लोगों का मोदी सरकार में मुसलमान न होने से दिल फटा जा रहा है। मंत्री परिषद में किसे रखा जाना है, यह सोचना प्रधानमंत्री का काम है। जब 14% मुसलमान एकजुट होकर सब कुछ सुविधाएं लेकर फैसला करते हैं कि मोदी को वोट नहीं देना तो फिर किस मुंह से ये तीन खपती पत्रकार उम्मीद करते हैं कि मोदी मुसलमानों को कैबिनेट में जगह देगा। वो मुसलमानों को बिना भेदभाव किए शौचालय, गैस, राशन, बच्चे पैदा करने के लिए 6000/- लाड़ली बहना का पैसा और घर दे रहा है, वह ही बहुत है। होना तो यह चाहिए कि किसी योजना का लाभ मुसलमानों को मिलना ही नहीं चाहिए।
मोदी बिना भेदभाव मुस्लिमों को सब सुविधाएं दे रहा है लेकिन मुसलमान मोदी भाजपा और RSS से भेदभाव करके वोट नहीं देता और विपक्ष को वोट देता है। इतनी सुविधाएं लेकर तो कोई भी पसीज सकता है लेकिन मुसलमान इतना “अहसानफरामोश” है जिसकी कोई सीमा नहीं है और इसके लिए अरफ़ा, सबा और राजदीप जैसे लोग भी जिम्मेमदार हैं।
जब मुसलमान democracy के सहारे किसी को भी वोट दे सकते हैं तो फिर उसी democracy में मोदी को अधिकार है जिस मर्जी को मंत्री बनाए।
2014 की सरकार में मोदी कैबिनेट में 3 मुस्लिम थे, नज़मा हेपतुल्ला, MJ Akbar और मुख़्तार अब्बास नक़वी। अकबर किसी ज़माने में मोदी के कट्टर विरोधी थे लेकिन सब कुछ भुला कर मोदी ने उन्हें कैबिनेट में लिया और विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया। बढ़िया काम कर रहे थे लेकिन वह खान मार्किट गैंग को बर्दाश्त नहीं हुआ और me too में फंसा कर उनकी राजनीती ख़त्म कर दी।
अब बहुत हो गया। मुसलमानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देना बंद होना चाहिए। अब योजनाएं केवल हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए होनी चाहिए। ऐसे समुदाय को कुछ भी देने से क्या फायदा जो देने वाले की ही जड़ें काटने में लगा रहे।
वैसे अफरा खानम को बता दूं कि अफगानिस्तान में केवल बुरका ही जरूरी नहीं है बल्कि औरत के बदन का कोई हिस्सा दिखाई भी नहीं देना चाहिए जबकि तुम तो भारत में रह कर मनचाहे वस्त्र पहन कर मौज करती हो। वहां अफगानिस्तान में महिलाओं की नौकरी पर भी पाबंदी है। देश में मुसलमान पहले ही भड़के रहते है “secular parties” के बहकाए में, तुम और आग लगाने की कोशिश मत करो।
सबा नकवी को पाकिस्तान के आरिफ अजाकिया का मुंह तोड़ जवाबआरिफ अजाकिया ने सबा नकवी को भारत के उन मुस्लिमों की याद दिलाते हुए कहा, जिन्हें भारत में हिन्दुओं ने खूब स्नेह दिया, “आपके सदर रहे हैं इंडिया के मुस्लिम, उन्होंने सम्मान हासिल किया है। आज भी कलाम साहब लोग हिन्दुओं से लेकर सबके रोल मॉडल हैं। कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें हिन्दू बहुत पसंद करते हैं। वहाँ मजहब नजर नहीं आता आपको?
“अब आपके मुख्य मुद्दे पर आते हैं। ताजमहल! मुझे सिर्फ इतना बता दो कि ताजमहल क्या मंगोलिया से उठाकर लाया गया था? या वहाँ से पैसे लेकर आए थे और उनसे बनाया गया था? या पैसे, मजदूर, पत्थर लेकर आए थे और उनसे मुसलमानों ने बनाया था?”
ताजमहल के इतिहास पर बात करते हुए आरिफ कहते हैं, “जिस मुहब्बत की निशानी को आप ये ताजमहल बताती हैं, वो मल्लिका 16वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी थी, जिसकी मोहब्बत के गम में ये ताजमहल बना था। और उसी गम में फिर उसकी बहन से शादी की थी, और ये मल्लिका जिसके मरने के गम में ये महल बनाया गया था उसके शौहर को जंग में भेजा था। उसका कत्ल करवाया था और उससे फिर ये शादी रचाई गई थी… ये है आपके गम की निशानी।”
“इस्लाम की तारीख को ना कुरेदो… बहुत गंद है इसमें। इसी मोहब्बत के देवता शाहजहाँ के बेटे ने अपने भाइयों का कत्ल किया था। विनती है तारीखों को ना कुरेदें। ताजमहल की बुनियाद में करोड़ों हिन्दुओं की कब्रें हैं।”
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