सावन का महीना ना केवल चारों ओर हरियाली और खुशहाली का होता हैं बल्कि भक्ति में लीन होने का भी होता है। सावन मास खासतौर पर शिव भक्तों के लिये काफी विशेष होता है। भक्त इस महीने पूरे दिल से भगवान शिव की उपासना करते हैं।
क्यूँ होता है सावन का हर सोमवार बेहद खास - खास बात ये है कि इस महीने के सभी सोमवार काफी विशेष होते है। सोमवार का दिन भगवान शिव जी का बहुत ही प्रिय दिन है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भोलेनाथ शिव ने राजा दक्ष को वरदान दिया था कि सावन महीने में वह कैलाश पर्वत से उतर कर नीचे आयेगें और दुनिया में उपस्थित सभी शिवलिंग में वास करेंगे।
क्या करें सावन में -
सावन के महीनें मे अगर कोई भी श्रद्धालु शिवलिंग पर जल को च़ढाता है तो वह गंगाजल चढाने के समान माना जाएग। और शिव जी इसे अपने भक्त की ओर से चढाये गये प्रेम के रुप में स्वीकार कर लेगें। इस पवित्र महीने में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाकर आसानी से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त कर सकते है।
जल गंगाजल बनकर स्वयं भगवान शिव जी को प्राप्त होगा और भगवान शिव को जल धारा काफी प्रिय है। इसीलिये शिवलिंग पर जल अवश्य चढायें । इसके अलावा सावन महीना में बेलपत्र चढ़ाने को भी काफी शुभ माना गया है। केसर युक्त चंदन, सूखे मेवे का भोग, आकड़े के फूल व धतूरा के साथ पूजा करे। ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप अवश्य करें। नकारात्मकता से दूर रहें।
सावन का पहला सोमवार
हिंदू धर्म में श्रावण का महीना पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए श्रावण के सोमवार का व्रत रखा था. माता पार्वती ने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ श्रावण के सोमवार का व्रत करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था.
श्रावण सोमवार व्रत का महत्व-
हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार श्रावण के महीने में सोमवार व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि श्रावण महीने में पड़ने वाले सभी सोमवारों का व्रत करने से वर्ष में पड़ने वाले सभी सोमवार के उपवास जितना पुण्य प्राप्त होता है. अगर किसी व्यक्ति की शादी में लगातार रुकावट आ रही है तो उसे श्रावण सोमवार का व्रत करना चाहिए. श्रावण के महीने में सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि श्रावण के सोमवार का व्रत करने से कुंडली में मौजूद चंद्र दोष भी दूर हो सकता है. श्रावण का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है. इसी वजह से इस महीने में पड़ने वाले सभी सोमवारो का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. श्रावण के महीने में पड़ने वाले सोमवार के दिन भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए लघु रूद्र, महारुद्र का पाठ करना चाहिए.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण सोमवार व्रत का महत्व-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति सच्चे मन से श्रावण के महीने में सोमवार का व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. अगर कोई व्यक्ति श्रावण के महीने से सोलह सोमवार का व्रत शुरु करता है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है. एक अन्य मान्यता के अनुसार श्रावण के महीने में ही भगवान परशुराम शिव ने उपासना करने के पश्चात कांवड़ में गंगाजल भरकर भगवान शिव का अभिषेक किया था. तभी से सावन के महीने में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान परशुराम की पूजा भी की जाती है. ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव का व्रत और पूजन भगवान परशुराम ने ही शुरू किया था.
श्रावण सोमवार पूजन विधि-
सावन सोमवार के दिन प्रातः काल स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करके एक तांबे के लोटे में जल ले ले. अब इसमें अक्षत, दूध, पुष्प, बिल्वपत्र डालें. अब किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का श्रद्धा पूर्वक अभिषेक करें. भगवान शिव का अभिषेक करते समय शिव पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करें. इसके पश्चात शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करें. अगर आप मंदिर नहीं जा सकते हैं तो घर में ही भगवान् शिव की पूजा कर सकते हैं. भगवान शिव की पूजा में धतूरे के फूल और गंगाजल अवश्य अर्पित करें. श्रावण सोमवार के दिन भगवान शिव के साथ-साथ मां गौरी की भी पूजा करनी चाहिए.
श्रावण सोमवार व्रत के लाभ-
श्रावण सोमवार का व्रत करने से वैवाहिक जीवन में चल रही सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है. जो भी व्यक्ति मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करना चाहता है उन्हें श्रावण सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए. श्रावण सोमवार का व्रत करने से अकाल मृत्यु और दुर्घटना के भय से मुक्ति मिलती है. श्रावण सोमवार का व्रत करने से निरोगी शरीर प्राप्त होता है और जीवन में सुख और समृद्धि आती है. अगर कोई व्यक्ति संतान प्राप्ति की कामना रखता है तो उसे श्रावण सोमवार के दिन भगवान शिव को धतूरा अर्पित करना चाहिए.
और अंत में – ऐसा माना जाता है कि श्रद्धालुओं भगवान भोले नाथ की उपासना इस महीने मे करने से भक्तों को सभी प्रकार के दैविक, दैहिक व भौतिक दुखों से मुक्ति प्राप्त होती है।

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