कोर्ट से लठ्ठ पड़ने के बाद राहुल गांधी 26 जुलाई को सुल्तानपुर के MPMLA कोर्ट में गए अपने बयान दर्ज कराने के लिए उस केस में जो उन पर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को दायर किया था राहुल के अमित शाह को “हत्यारा” कहने के आरोप में, यानी 7 साल बाद बयान दर्ज हो रहे है। इतना लंबा समय लगने के कारण ही राहुल और अन्य नेता बेलगाम जुबान से आग उगलते रहे हैं।
राहुल ने 8 मई, 2018 को बेंगलुरु की चुनावी रैली में कहा- “भाजपा अपने को Honest और Clean Politics में विश्वास करने वाली पार्टी मानती है लेकिन उसका अध्यक्ष ऐसा है जो एक हत्या के मुकदमे में “आरोपी” है। उस समय अमित शाह भाजपा अध्यक्ष थे और उन्हें मुंबई की अदालत ने दिसंबर, 2018 में 2005 के एक Fake Encounter केस में Discharge कर दिया था।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
राहुल गांधी ने जो अमित शाह को हत्यारा कहा, वो भी क्या किसी की साजिश थी, किसकी राजनीति थी जो ऐसा आरोप अब लगाया है उसने कोर्ट में?
26 जुलाई को कोर्ट में राहुल गांधी ने कहा -
“ये सारा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है, मुझे सियासी वजहों से फंसाया गया है;
सरकार के दबाव में आकर मेरे ऊपर इस तरह के इलज़ाम लगाए गए;
मेरी छवि ख़राब करने की कोशिश की गई, मैं निर्दोष हूं;
मैंने कभी किसी गलत भाषा का प्रयोग करके मानहानि की, सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए आरोप लगाया गया है”।
आप देश के गृह मंत्री को हत्यारा कहें, वह ठीक है जैसे आप उसका महिमामंडन कर रहे हों और फिर उस भाषा को सभ्य समझ रहे हो जबकि ऐसा आरोप लगा कर तो सस्ती लोकप्रियता आप हासिल कर रहे थे। ये रोज रोज प्रधानमंत्री मोदी के लिए आपका और आपकी पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नेताओं द्वारा अपशब्द बोलना सस्ती लोकप्रियता नहीं है तो क्या है। आप अडानी/अंबानी के खिलाफ हर रोज विधवा विलाप करते हो, वो भी तो सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का तरीका है। वीर सावरकर को आपने लगातार बदनाम किया जबकि आपके परिवार में किसी ने वह नहीं झेला जो सावरकर ने झेला।
जब कोर्ट में में फंस गए तो खैरात बंटने लगी। अहंकारी परिवार के वारिस अपनी जुबान पर लगाम लगाना सीखे, हां जस्टिस बी आर गवई ने कांग्रेस परिवार का सुप्रीम कोर्ट का जज होने के नाते तुम पर मेहरबानी कर के तुम छोड़ दिया और एक तरह हर अदालत को Advisory दे दी थी कि अवमानना के केस में जरूरी नहीं है कि 2 साल की अधिकतम सजा दी जाए, दो साल से कम सजा देने से सांसदी बच सकती है। गवई ने यह सवाल उठाया था कि गुजरात की अदालत ने अधिकतम सजा क्यों दी ?

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