फरवरी, 2022 में कर्नाटक में विपक्ष और PFI के चलाए हुए “हिज़ाब” अभियान पर 15 मार्च, 2022 को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा दीक्षित और जस्टिस JM Khazi ने फैसला देते हुए कहा कि, “wearing the hijab is not an Essential Religious Practice for Muslim women” और स्कूलों द्वारा ड्रेस कोड के नियम अनुसार हिज़ाब की अनुमति न देने को सही कहा।
मामला सुप्रीम कोर्ट में गया जहां 2 जजों की बेंच ने 13 अक्टूबर 2022 को फैसला देते हुए रायता फैला दिया क्योंकि दोनों जजों ने विपरीत फैसले दिए।
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक के हिज़ाब बैन को सही माना जबकि सुधांशु धुलिया ने कहा कि This is the choice of muslim women, “nothing less than nothing more”. ये मामला बड़ी बेंच को भेजा जाना था लेकिन आज तक भेजा नहीं गया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ये दो जजों की बेंच का फैसला क्योंकि Split Verdict था और क्योंकि फैसला हुआ ही नही, इसलिए यह बड़ी बेंच को भेजा जाना था लेकिन 2 वर्ष बाद भी अभी बड़ी बेंच गठित नहीं हुई है।
अभी यह मामला सुलझाया भी नहीं गया, फिर भी मुंबई का एक नया केस CJI चंद्रचूड़ ने सुनवाई के लिए पकड़ लिया है।
मुंबई का NG Acharya & DK Marathe College of Arts, Science and Commerce की स्थापना 1978 में Chembur Trombay Education Society ने की थी। तब से न जाने कितनी मुस्लिम लड़कियां उस कॉलेज में पढ़ी होंगी लेकिन june, 2024 से कुछ समय पहले उस कॉलेज में अचानक लड़कियों ने हिज़ाब पहनना शुरू कर दिया जिसे कॉलेज प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। मामला बॉम्बे हाई कोर्ट गया और कोर्ट ने NG Acharya & DK Marathe के फैसले को सही करार दिया जिसमें उन्होंने छात्राओं को Hizabs, Nakabs, Burquas, Stole or caps पहनने पर पाबंदी लगाई थी जिनसे किसी भी छात्र की Religious Identity उजागर होती हो।
इस डबल बेंच के फैसले के खिलाफ Zainab Abdul Qayyum & others ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की जिसकी सुनवाई के लिए CJI चंद्रचूड़ तैयार हो गए और कहा कि हमने केस के लिए पहले ही बेंच का गठन कर दिया है और जल्दी ही वह लिस्ट होगा - इस अपील को दायर करने वाली कोई “पीड़ित” छात्रा होनी चाहिए थी लेकिन दायर की है एक पुरुष ने, क्या कोर्ट उसे पूछेगा कि आपको हाई कोर्ट ने कैसे प्रभावित किया है।
यह सोचने वाली बात है कि 1978 से 2024 तक यानी 45 साल में मुस्लिम छात्राओं को हिज़ाब और बुरके की जरूरत महसूस नहीं हुई कॉलेज में, फिर आज ही क्या स्थिति पैदा हो गई जो पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए। जाहिर है इसके पीछे कुछ और शक्तियां काम कर रही हैं जो कर्नाटक की तरह महाराष्ट्र चुनाव से पहले हंगामा खड़ा करना चाहती हैं लेकिन बिना कर्नाटक का मामला सुलझाए चंद्रचूड़ जी के बॉम्बे का केस सुनवाई के लिए लेने का औचित्य समझ नहीं आया।
सवाल यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट क्या स्कूल/कॉलेज में हिज़ाब की अनुमति के लिए सुनवाई करने से पहले यह फैसला करेगा कि सुप्रीम कोर्ट में वकीलों का ड्रेस कोड होते हुए क्या किसी महिला वकील को हिजाब और बुरका पहनने की अनुमति देगा? जब सुप्रीम कोर्ट का ड्रेस कोड इसकी अनुमति नहीं देता तो आप स्कूल कॉलेज में इस मनमानी की अनुमति कैसे दे सकते हैं? और इसलिए कोई भी सुनवाई करने की जरूरत नहीं है।
हिजाब के मामले कुछ और भी शुरू किए गए हैं कुछ अन्य राज्यों में जो अगले अंक में प्रस्तुत करूंगा और यह भी बताऊंगा कि इस्लामिक देशों समेत किन देशों में हिज़ाब और बुरके पर बैन है।
(क्रमश:)



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