दो दिन एक “आपिये”नदीम अली की धमकी का शोर मचा कि देश में गृह युद्ध होना चाहिए और अगले दिन सिसोदिया की जमानत दे दी गई; क्या गृह युद्ध की तैयारी के लिए छोड़ा गया ?

सुभाष चन्द्र 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के के विश्वनाथन की बेंच ने मनीष सिसोदिया को जमानत दे दी। किसी अंधे को भी दिखाई देगा कि यह जमानत किसी ठोस कारण से नहीं दी गई इसे हलके में लेने की जरूरत नहीं है 

दो दिन से सोशल मीडिया पर शोर मचा था कि केजरीवाल के साथ फोटो वाला “आपिया” नदीम अली कह रहा है कि देश में गृह युद्ध होना चाहिए और संघ वालों का कत्लेआम होना चाहिए उसकी फोटो केजरीवाल के साथ वायरल हो रही थी और ये संजय सिंह के भी करीब है

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अब सोचिए सारा विपक्ष देश में बांग्लादेश दोहराना चाहता है और कांग्रेस सबसे आगे है जिसके नेता ढोल पीट कर जनता को उकसा रहे हैं कि मोदी के घर में जनता घुस जाएगी 

दूसरी तरफ इस बात को भी याद रखना चाहिए कि जस्टिस गवई एक कांग्रेस परिवार से आते है, कहीं इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह कांग्रेस को गृह युद्ध में मदद करने और नदीम अली का साथ देने के लिए सिसोदिया को तो नहीं छोड़ा जिससे वह गृह युद्ध की तैयारी करा सके याद रखिए 2020 के दिल्ली दंगे भी “आप” के पार्षद ताहिर हुसैन ने कराए थे कांग्रेसी मानसिक रूप से कांग्रेसी ही रहता है

कोर्ट ने कहा मुकदमा ख़त्म होने में कितनी देर लगेगी कह नहीं सकते और बिना सजा सिसोदिया को जेल में नहीं रख सकते सिसोदिया की समाज में गहरी पैठ है और इसलिए उनका देश छोड़ कर भागने की कोई उम्मीद नहीं है

पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सिसोदिया की केस की देरी में कोई जिम्मेदारी नहीं पाई हमने 7 अक्टूबर के फैसले में कहा था कि कि ट्रायल कोर्ट में ट्रिपल टेस्ट आड़े नहीं आएगा क्योंकि वहां ट्रायल शुरू होने में देरी है 

सुप्रीम कोर्ट के 7 अक्टूबर के आदेश के बाद भी ट्रायल कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज की थी और उसके खिलाफ अपील, हाई कोर्ट ने भी खारिज की आपके पास अपील थी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तो हाई कोर्ट ने जो कुछ कहा आप उसे consider कीजिए ट्रायल कोर्ट की बात पर ध्यान क्यों देते हैं

हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने मार्च 2024 में कहा -

"The case at hand is a grave misuse of power and breach of public trust by the applicant who was serving as deputy Chief Minister of Delhi at the relevant point," Kanta said. और यह भी कहा कि केस की देरी ED / CBI की वजह से नहीं है मतलब देरी के लिए सिसोदिया दोषी है और आप कह रहे है सुनवाई में उसके कारण देरी के कोई सबूत नहीं है

मगर ताज्जुब की बात है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Open & Shut मामलों में जमानत न मिलने की वजह से सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में याचिकाएं भर गई है

Open & Shut केस वह होता है जिस पर तथ्यों के आधार पर आसानी से फैसला हो सके, अब समझ नहीं आता मीलॉर्ड को ये केस इस कैटेगरी का कैसे लगता है?

जमानत देते हुए गवई साहेब ने कहा कि बिना सजा के लंबे समय तक जेल में रखने से सिसोदिया के अनुच्छेद 21 में स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन होता है यानी किता भी गंभीर आरोप है, उसे आप जमानत दे देंगे

फिर तो एक समय सीमा तय कर दीजिए कि कोई भी undertrial हो उसे उसके बाद छोड़ देना अनिवार्य होगा (bail by default दे दी जाएगी) और फिर दिल्ली दंगों के आरोपी  ताहिर  हुसैन, उमर खालिद और शरजील इमाम को भी छोड़ दीजिए और तो और हेलीकाप्टर घोटाले के आरोपी Christian Michel को भी छोड़ दीजिए जो दिसंबर 2018 से जेल में है कोर्ट तो जैसे आजकल जमानत देने के लिए रह गई हैं चंद्रचूड़ ने तो गोधरा में लोगो को जिन्दा जलाने वालों भी जमानत दे दी

अब केजरीवाल का नंबर है बाहर निकलने का क्योंकि बांग्लादेश भारत में करने के लिए उसका निकलना बहुत जरूरी है

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