हमारे “खोजी पत्रकारों” की सूंघने की शक्ति ख़त्म हो जाती है जब या तो पैसा मिलता है या डर होता है; जसुबेन खोज ली थी पर राहुल के बीवी बच्चे नहीं ढूढ़ सकते

सुभाष चन्द्र

यही सत्य है कि “खोजी पत्रकार” होने का दावा करने वाले हमारे अधिकतर पत्रकार किसी खोजी पत्रकारिता में या तो तब रुचि नहीं लेते जब पैसा चढ़ाया गया हो और या जब उन्हें किसी तरह का भय होता है। पैसे का खेल तो हमने केजरीवाल के मामलों में खुल कर देख लिया कि किस तरह केजरीवाल मीडिया की फंडिंग करता है बड़े बड़े मीडिया हाउसेस को अपने इशारों पर नृत्य करवाने के लिए अब बात करते हैं मीडिया के डर की

आपको याद होगा कभी 2008 में राहुल गांधी की एक गरीब कलावती के साथ मुलाकात की बहुत चर्चा हुई थी लेकिन उसके बाद क्या हुआ ज्यादा पता नहीं चला, हां एक NGO Sulabh International ने राहुल गांधी से मिलने के बाद उसे 25 लाख का चेक दिया था, जाहिर है राहुल के आदेश पर दिया होगा 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
उस वर्ष ही 8 अप्रैल, 2013 को नरेंद्र मोदी, तब के गुजरात के मुख्यमंत्री ने दिल्ली के एक 5 Star Hotel में FICCI की महिला विंग को संबोधित करते हुए गुजरात की “जसुबेन” का परिचय करते हुए बताया कि उनके पिज़्ज़ा अहमदाबाद के Secret Guilty Pleasures में एक हैं और यह भी कहा कि -”Jasuben Exemplified how successful women enterprenures can be if they are given right opportunity, which is available in plenty in Gujarat”.

मोदी ने बताया मीडिया को लगेगा जसुबेन भी कोई कलावती है और उसकी तलाश करेगा लेकिन उनकी मृत्यु 2008 में हो चुकी है

लेकिन हमारे मीडिया के “खोजी पत्रकारों” को चैन कहां था, एक एक करके सारे चैनल अहमदाबाद पहुंच गए खोजने के लिए कि कोई जसुबेन थी भी या मोदी ऐसे ही हवा बाजी कर गए सबने एक एक करके रिपोर्ट दी, हमने ढूंढा जसुबेन का ठिकाना और कई दिन तक उसका गुणगान हुआ मीडिया चैनल्स में

लेकिन जब बांग्लादेश के The Blitz के एडिटर Salahuddin Shoaib Chaudhari ने खुलासा किया कि जोनिता विंची राहुल गांधी की पत्नी है, नोहाक विंची (19 वर्ष) बेटा है और मीनिक विंची (15 वर्ष)  बेटी है, लेकिन एक भी कथित “खोजी पत्रकार” ने अभी तक खोजने की जरूरत नहीं समझी कि राहुल का परिवार कहां है?

कम से कम सलाहुद्दीन शोएब चौधरी से उसकी जानकारी की source पूछ कर verify करने कोई तो पत्रकार पता लगाने जा सकता था लेकिन किसी में हिम्मत नहीं है क्योंकि लगता है गांधी परिवार का “भय” है कि भेद खोला तो देश भर में FIR दर्ज करा दी जाएगी और मौका मिलते ही उड़ाया भी जा सकता है  

इसी तरह वर्षों से राहुल गांधी विदेश यात्रा पर जाता है लेकिन अपने गंतव्य से कहीं और ही निकल जाता है किसी कथित “खोजी पत्रकार” ने पीछा करके पता लगाने की कोशिश नहीं की वह कहां जाता है किससे मिलता है, बस जो कुछ routine ख़बरों में आ जाता है, वही पता चलता है मीडिया चैनलों से ज्यादा तो सूचना आजकल सोशल मीडिया पर आ जाती है और इसलिए मीडिया भी सोशल मीडिया के सामने फेल हो रहा है

अवलोकन करें : -

बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार और ब्लिट्ज के संपादक शोएब चौधरी के चौकाने वाले खुलासों पर सोनिया

जाने कहाँ गए निर्भीक पत्रकार, सभी कहीं लुप्त हो गए या मोटे दामों में बिक जाते हैं? एक विदेशी पत्रकार खबर दे रहा है जो सत्य ही होगी क्योंकि इतना बड़ा जोखिम वह ले नहीं सकता, परंतु हमारे लोग उसकी सत्यता भी पता नहीं कर सकते? वकील लोग कहते हैं कि The Blitz के सलाहुद्दीन की सूचना पर राहुल से कोर्ट में कोई सवाल नहीं किया जा सकता, फिर सत्य कैसे पता चलेगा क्योंकि यदि परिवार की बात सत्य है तो चुनाव आयोग में गलत सूचना देने के आरोप में सांसदी जा सकती है?

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