आज रिपब्लिक भारत पर अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए जारी हुए नए फरमान के बारे में पता चला और उसे देख कर तुरंत अरफ़ा खानुम, सबा नकवी और राणा अय्यूब जैसी मुस्लिम महिलाओं के बारे में ख्याल आया कि जिन्हें भारत में पूरी स्वतंत्रता मिली हुई है और मुस्लिम महिलाओं को भी वह सब मिलता है जो उनकी जरूरत है लेकिन फिर भी रोना रहता है कि मुस्लिम प्रताड़ित हो रहे है। एक हिज़ाब का रोना जगह जगह चालू कर देते हैं।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
इन महिलाओं को अफगानिस्तान में महिलाओं की हालत देखनी और समझनी चाहिए, ये हिज़ाब के लिए हाय तौबा मचाती हैं, वहां जाओ, मजा आ जाएगा, पूरा चेहरा “मोटे कपड़े” से ढकना जरूरी है, लड़कियां पढाई नहीं कर सकती, नौकरी नहीं कर सकती और अकेली बाहर नहीं निकल सकती, अब बोलो है ये सब मंजूर। इन तीनो को दिन में तारे नज़र आ जाएंगे यदि अफगानिस्तान चली गई और जाना भी चाहिए इन्हे वहां मुस्लिम महिलाओं की आवाज उठाने और उन्हें सम्मान से जीने का हक़ दिलाने के लिए।
अफगानिस्तान के सुप्रीम लीडर Hibatullah Akhundzada ने फरमान जारी किया है महिलाओं के लिए जिसमें कहा गया है -
-महिलाओं को चेहरे को मोटे कपड़े से ढकना होगा;
-महिलाएं गैर पुरुष को देखेंगी तो जुर्माना लगेगा;
-महिलाओं को नाजायज संबंध बनाने पर कोड़े मारने की सजा होगी;
-दुकानों पर महिलाओं की तस्वीर लगाई तो सजा होगी;
-महिलाएं ड्राइविंग नहीं कर सकती, पढ़ाई नहीं कर सकती और तेज आवाज़ में गाना नहीं गए सकती;
-किसी भी जिंदा शख्स की फोटो खींचने पर रोक होगी;
-महिलाओं के तेज़ आवाज़ में बोलने पर पाबंदी;
-महिलाओं के सार्वजनिक रूप से गाने या जोर से पढ़ने पर रोक; (आवाज़ से मर्दों का मन भटकता है);
-पुरुष भी घुटनों तक शरीर ढक कर ही घर से बाहर निकलें।
अब भारत की मुस्लिम महिलाएं सोच कर देखें कि क्या उन्हें अफगानिस्तान की महिलाओं की जिंदगी स्वीकार है या भारत में मिलने वाली सुविधाएं काफी हैं। व्यक्ति को अपना दुखड़ा रोने से पहले दूसरों की तरफ देखना चाहिए कि उन्हने क्या मिल रहा है और तुम्हे क्या मिला है।
भारत की अनेक मुस्लिम महिलाओं ने कबूल किया कि उन्हें मोदी ने घर दिया, शौचालय दिया, राशन दिया, गैस कनेक्शन दिया, जनधन खाता दिया, नल से जल भी दिया और सबसे बड़ी बात ट्रिपल तलाक से मुक्ति दी लेकिन फिर भी हम मोदी को वोट नहीं देंगे और उन्होंने वोट नहीं दिया क्योंकि पीछे भड़काने वाली ARS जैसी महिलाएं और कट्टरपंथी लोग खड़े थे।
अफगानिस्तान में तो मुसलमानों की हुकूमत है, वो अपनी कौम की महिलाओं की परवाह नहीं करती तो फिर भारत में सब कुछ मिलते हुए भी हर समय Victim Card खेलना कहां तक ठीक है। ये अरफ़ा खानुम, सबा और राणा को अफगानिस्तान जाकर मुस्लिम महिलाओं के लिए हल्ला मचाना चाहिए।
लेकिन ये ऐसा नहीं करेंगी क्योंकि इन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं और उनकी महिलाओं पर हो रही बर्बरता पर आनंद आ रहा है।


No comments:
Post a Comment