अब से सोनिया गांधी का उपचार हर हाल में कोई SC/ST/OBC डॉक्टर ही करेगा; हलवा केवल फिर गांधी परिवार को मिलेगा

 सुभाष चन्द्र 

इतनी लंबी लंबी छोड़ने वाले राहुल गांधी को पता भी नहीं है कि वो क्या बोल रहा है। बजट बनने के शुरू होने से पहले “हलवा समारोह” 1950 से चल रहा है यानी नेहरू के समय से जिसका आज राहुल गांधी ने मजाक उड़ा दिया इस समारोह के बाद बजट बनाने में कार्यरत कोई भी स्टाफ मंत्रालय से बाहर नहीं जा सकता चाहे कोई चपरासी हो, क्लिक हो या सचिव और उनके  रहने का प्रबंध ऑफिस में ही होता है 1950 में वित्त मंत्री जॉन मथाई को त्यागपत्र देना पड़ा क्योंकि बजट का कुछ हिस्सा लीक हो गया था और उसके बाद से यह समारोह होना शुरू हुआ

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लेकिन राहुल गांधी दिमाग में शायद एक फितूर है कि यह हलवा समारोह भी शायद कोई “सनातनी परंपरा” है तो बस इस पर ही बरस पड़ो

क्या खोपड़ी है इस आदमी की जो बोल रहा था कि बजट की टीम में एक भी OBC नहीं था, एक भी आदिवासी नहीं था और एक भी दलित नहीं था और ये 20 अफसर देश का हलवा बांट रहे हैं बजट में जातिगत जनगणना की बात नहीं थी जिससे हर किसी को पता चले कि उनकी हिस्सेदारी क्या है और बजट में पेपर लीक पर भी कुछ नहीं था और न अग्निवीरों की पेंशन के बारे में कुछ कहा गया कभी कभी लगता है इसके सलाहकार जो बोलने के लिए कहते हैं, वो इसका सर्वनाश कराना चाहते हैं और मज़ाक का पात्र बनाना चाहते हैं

भारत के संसदीय इतिहास में लोकसभा को पहली बार ऐसा विपक्ष का नेता मिला है जिसे बस ऊलजलूल बोलने से मतलब है, उसे न किसी को आदर सत्कार देना आता है और न बजट की समझ है बस अडानी अंबानी का राग अलापना आता है अडानी अंबानी और मोदी का नाम लिए बिना उसकी “कब्ज” बेकाबू हो जाती है और सुबह उतरती ही नहीं उसे पता नहीं अंबानी अडानी कांग्रेस के समय से बढ़ते रहे हैं और देश की सेवा ही कर रहे हैं मगर उसे तो जॉर्ज सोरोस और जिनपिंग की जी हुजूरी करने के लिए अडानी अंबानी को बर्बाद करना है जिससे देश आर्थिक तौर पर 15 नंबर पर पहुंच जाए

राहुल गांधी को पता नहीं कि पेपर लीक और अग्निवीरों की पेंशन का बजट से कोई लेना देना नहीं होता लेकिन एक रट्टू तोते की तरह बस बोलना है

राहुल गांधी ने बजट टीम में SC/ST/OBC न होने की बात कही है और यह कह कर बजट बनाने वाली टीम के सदस्यों का घोर अपमान कर दिया है चल छोड़, सारी बातें, कांग्रेस के कार्यकाल में जितने बजट पेश किये गए, उनकी टीमों में कितने कितने SC/ST/OBC होते थे, वह संख्या बता दे और नहीं पता तो चिदंबरम और मनमोहन सिंह से पूछ ले 

राहुल गांधी को याद करा दें कि 2013 की बजट बनाने वाली टीम में कौन कौन था - 

आर एस गुजराल, वित्त सचिव, एक सिख;

सुमित बोस, रेवेनुए सेक्रेटरी, (कायस्थ);

पार्थसारथी शोम, सलाहकार वित्त मंत्री (कायस्थ); 

अरविन्द मायाराम, इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी (ब्राह्मण);

रघुराम राजन, चीफ इकोनॉमिक सलाहकार, (ब्राह्मण); और 

राजीव टकरू, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी (ब्राह्मण)

उस समय वित्त मंत्री चिदंबरम थे, एक बार उनसे पूछ लो कि 2013 की इस टीम में एक भी SC/ST/OBC न होकर 3 ब्राह्मण और 2 कायस्थ क्यों थे 

वैसे 2004 से 2014 तक कांग्रेस राज में वित्त मंत्री रहे चिदंबरम (2 बार); मनमोहन सिंह (2 बार) और प्रणब मुखर्जी - चिदंबरम और मनमोहन सिंह तो अभी जिंदा हैं, उनसे पूछ कि क्या बजट टीम में SC/ST/OBC होने जरूरी है

अगर इतना ही SC/ST/OBC से लगाव है तो सोनिया गांधी अपना इलाज कराने अमेरिका क्यों जाती थी और अभी भी सर गंगाराम अस्पताल में क्या उनका इलाज SC/ST/OBC डॉक्टर करते हैं राहुल गांधी ये घोषणा करे कि भविष्य में सोनिया गांधी, कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्रियों और कांग्रेस के नेताओं के लिए SC/ST/OBC या मुस्लिम ही करेंगे

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