प्रशांत भूषण वामपंथी ने 11 अन्य के साथ सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर करके मांग की हैं कि भारत सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह उन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करें और भविष्य में ऐसी कंपनियों को नए लाइसेंस जारी न करे जो इजराइल को Arms & Ammunitions की आपूर्ति करती हैं क्योंकि इजराइल गाज़ा में युद्ध लड़ रहा है। इस गिरोह ने रक्षा मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों से बंधे होने के कारण भारत का दायित्व बनता है कि वह ऐसे देश को Military Weapons की आपूर्ति न करे जो युद्ध अपराध का दोषी है और भारत द्वारा ऐसा निर्यात किये गए हथियार international humanitarian laws के गंभीर उल्लंघन करते हुए इस्तेमाल हो सकते हैं।
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यह भी दलील दी गई है कि 26 जनवरी, 2024 को International Court of Justice (ICJ) ordered provisional measures against Israel for violations in Gaza Strip of obligations under the Convention on the Prevention and Punishment of crime of Genocide” और Provisional, measures include immediately military halt to all killings and destruction that is being perperated by Israel on Palestinian people” इसलिए UNO ने बयान जारी करके इजराइल को military ammunitions transfer करने के खिलाफ चेतावनी दी।
ICJ का निर्णय जनवरी, 2024 में आया और प्रशांत भूषण 8 महीने के बाद उसे आधार बना कर सुप्रीम कोर्ट में बकवास याचिका लेकर गया है जिससे सुप्रीम कोर्ट को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए, ये सरकार पर निर्भर करता और कोई अदालत उसे इस बारे में निर्देश नहीं दे सकती। UNO और ICJ अगर बयान और फैसला दे दिया तो क्या पूरे विश्व ने उस पर अमल कर लिया जो ढक्कन प्रशांत भूषण अपने चमचों के साथ सुप्रीम कोर्ट गया है।
सुप्रीम कोर्ट को कब से अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर भारत सरकार के खिलाफ सुनवाई का अधिकार मिल गया। Article 14 और Article 21 की हमारे देश में और सुप्रीम कोर्ट में पिछले 10 साल से इस तरह तोड़ मरोड़ कर व्याख्या की गई है कि इन दोनों अनुच्छेदों की पवित्रता (Sanctity) ही ख़त्म हो गई है।
Article 14 of the Constitution of India states that all people in India are equal before the law and are entitled to equal protection of the law और
Article 21 talks about Freedom of speech and expression
इजराइल और फिलिस्तीनियों के लिए भारतीय संविधान के यह अनुच्छेद किसी तरह भी लागू नहीं होते हैं और ऐसा होने लगा तो कल को ये लोग पाकिस्तान बांग्लादेश और पूरी दुनिया के लोगों को इसमें समेट लेंगे। सुप्रीम कोर्ट अगर इस याचिका को सुनवाई के लिए Admit करती है तो उसका मतलब साफ़ होगा कि वह भी मोदी के खिलाफ एक टूल किट की तरह काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि प्रशांत भूषण पर पूरी तरह इस Frivolous Petition को दायर करने के लिए भविष्य में कम से कम 25 लाख का जुर्माना ठोके। इन याचिका कर्ताओं को एक तो कांग्रेस का गुलाम हर्ष मंदर और कई पूर्व IAS अधिकारी भी हैं, ऐसे ही लोगों की वजह से System उन्ही का चलता रहा है चाहे सरकार किसी की भी हो।


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