प्रधानमंत्री मोदी को विपक्ष अपने बाप का नौकर समझता है जिसे उनकी मर्जी से सब काम करने चाहिए, किसे मिले किसे न मिले विपक्ष के निर्देश पर करना चाहिए। चीफ जस्टिस के घर गणेश पूजन में मोदी के जाने पर कोहराम मचा दिया है विपक्षी नफरत के सौदागरों ने।
उद्धव “शिवसेना” को आग लगी हुई है, प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत मैदान में उतरे हुए हैं मोदी और चंद्रचूड़ पर हमला करने और कपिल सिब्बल पगलाए हुए हैं। हाय हाय ये कैसे हो सकता है?
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लेखक चर्चित YouTuber |
कपिल सिब्बल की सुनो, वो कह रहा है कि “मैं 50 साल से ज्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट और इस संस्था में हूं। मैं CJI का बहुत सम्मान करता हूं। वे व्यक्तिगत रूप से बेहद ईमानदार व्यक्ति हैं, लेकिन जब मैंने यह वीडियो देखी जो वायरल हो रही थी, तो मैं हैरान रह गया”।
सिब्बल ने आगे कहा कि “उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को लेकर सैद्धांतिक रूप से कुछ दिक्कतें हैं। किसी भी सार्वजनिक पदाधिकारी को निजी कार्यक्रम का प्रचार नहीं करना चाहिए।
प्रधानमंत्री को कभी भी इस तरह के निजी कार्यक्रम में जाने में अपनी रुचि नहीं दिखानी चाहिए थी, और उसके आसपास बातचीत होती है, तो यह संस्था के लिए ठीक नहीं है”।
फिर एक प्रमाणपत्र खुद के लिए और दे दिया कि “वो ये बातें व्यक्तिगत रूप से बोल रहे न कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में”।
सिब्बल में दरअसल अभी तक कांग्रेस की आत्मा भटक रही है और वह कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर भौंकता है, उसे यदि मोदी के CJI के घर गणेश पूजन में जाने से सैद्धांतिक रूप से कुछ दिक्कतें हैं तो अपनी जेब में रखे, कौन परवाह करता है। मोदी सिब्बल या विपक्षी दलों का बाप का नौकर नहीं है जो उनसे पूछ कर सब काम करेगा।
सिब्बल चंद्रचूड़ को प्रमाणपत्र दे रहा है कि “वे व्यक्तिगत रूप से बेहद ईमानदार व्यक्ति हैं” तो क्या मोदी को अपने घर बुला कर कोई “बेईमानी” कर दी? और अगर वे “व्यक्तिगत रूप से ईमानदार हैं” तो क्या कहना चाहता है सिब्बल कि वे professionally बेईमान हैं?
सिब्बल को पता होना चाहिए कि वह जब चीफ जस्टिस और उनकी प्रधानमंत्री से मुलाकात पर बात कर रहे हैं तो वह कोई निजी विचार नहीं रह जाते बल्कि वह SCBA के अध्यक्ष के ही विचार माने जाएंगे। Profession में ऐसा कोई दोहरा व्यक्तित्व नहीं होता।
सिब्बल अपने 50 साल का घमंड करते हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि मोदी एक हिंदू धार्मिक आयोजन में गए थे लेकिन 2009 में जब वो केंद्रीय मंत्री थे तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद मुसलमान न होते हुए “इफ्तार” पार्टी दी थी जिसमें चीफ जस्टिस बालकृष्ण और विदेश सचिव निरुपमा राव समेत पूरा हुजूम आया था, मजे की बात है कि बालकृष्ण भी मुसलमान नहीं थे, तो फिर मनमोहन सिंह किस बात का प्रचार कर रहे थे।
अरे मूर्खों इतनी नफरत की आग किसी व्यक्ति के लिए अच्छी नहीं होती, मोदी का कुछ नहीं बिगड़ता, तुम्हारी ही सेहत ख़राब होती है, दिन रात टेंशन में रहते हो कि अब क्या करें - पूरा “इंडी ठगबंधन” मोदी के प्रति “नफरत की दुकान” बन चुका है। इस “नफरत की दुकान के लिए सामान विदेशों में ला रहे हैं।
“उठ जाएंगे जहाँ से, मोदी से लड़ते लड़ते”।
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