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| नसरल्लाह को महबूबा मुफ्ती ने शहीद बताया |
कुछ लोगों का कहना है कि हसन नसरल्ला की मौत से आतंक ख़त्म हो जाएगा लेकिन ऐसा संभव हो ही नहीं सकता। आतंकवाद ऐसी बीमारी है जो कभी ख़त्म नहीं हो सकती क्योंकि इस्लामिक आतंकी जिस जिहादी सोच से पैदा होते हैं वह उनके मज़हब का आधार है। जिस दिन इस्लामिक आतंकियों को 72 हूरों का लालच ख़त्म होगा, उस दिन शायद आतंक भी ख़त्म हो सकता है।
भारत में अभी तक ममता बनर्जी में लेडी बगदादी दिखती थी लेकिन आज लेडी नसरल्लाह बन गई महबूबा मुफ़्ती। महबूबा ने खुलकर आज नसरल्ला का समर्थन करते हुए शहीद कहा और फिलिस्तीन और लेबनान के साथ खड़ी हो गई। फिलिस्तीन की आड़ में हमास का समर्थन करने वाले ओवैसी, महबूबा और फिलिस्तीन की जय कहने वाले उन सभी लोगों को गाज़ा और लेबनान भेज देना चाहिए हमास और हिज़्बुल्ला के लिए लड़ने के लिए।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
इस तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। भारत में, खासकर जम्मू-कश्मीर में, इस्लामिक कट्टरपंथी झुकाव वाली पार्टियों में इस घटना को लेकर सहानुभूति और विरोध दोनों ही देखने को मिल रहे हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नसरल्लाह की मौत पर शोक जताते हुए अपना चुनाव प्रचार भी स्थगित कर दिया है। महबूबा ने कहा कि “यह समय शांति और संवेदना का है, न कि राजनीति का।” महबूबा मुफ्ती ने नरसल्लाह की मौत को बलिदान करार दिया है।
इज़रायल का नसरल्लाह को मार गिराने का अभियान सच में साहसिक और कबीले तारीफ एक्शन है। अमेरिका से बेंजामिन नेतन्याहू ने जैसे ही यह कहा कि ईरान का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जहां हम नहीं पहुंच सकते, तभी ईरानी सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई अज्ञात स्थान पर जाकर छिप गया बताया जाता है।
खामनेई को आज इज़रायल में हड़पने वाला, निर्दयी और दुर्भावना से भरा Zionist दिखाई दे रहा है जो औरतों, बच्चों और आम नागरिकों की हत्या कर रहा है और हिज़्बुल्ला एक दिन अल्लाह की ताकत से इस अतिक्रमणकारी और दुर्भावना रखने वाले शत्रु को अपने एक्शन पर पछताने के मजबूर कर देगा। खामनेई ने कहा कि इज़रायल की क्रूरता दुनिया के सामने उजागर हुई, इज़रायल ने मूर्खतापूर्ण नीति अपनाई और अंत में जीत हिज़्बुल्ला की होगी।
मतलब इज़रायल क्रूरता दिखा रहा है और हमास तो एक साल पहले 7 अक्टूबर को इज़रायल में महिलाओं का बलात्कार करते हुए, छोटे छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हत्या करते हुए उन्हें बंधक बना कर, कुल 1200 निर्दोष लोगों की त्यौहार की छुट्टी मनाते हुए हत्या करके उन्हें फूलमालाएं भेंट करने गया था? कोई इस बात का जवाब नहीं देता अभी तक हमास ने इज़रायल के करीब 100 निर्दोष लोगों को क्यों बंधक बनाया हुआ है?
एक सोच कभी मध्य एशिया में शांति नहीं होने देगी जो कट्टरपंथी इस्लामिक देशों की है कि इज़रायल को Right to Existence है ही नहीं और इस सोच के कारण या तो इस्लामिक देश इज़रायल को ख़त्म करना चाहते हैं और या फिर इज़रायल उन्हें ठिकाने लगाने में कोई चूक नहीं करेगा। जब से इज़रायल की स्थापना हुई है तभी से इस्लामिक देश 7 अक्टूबर, 2023 को एक बार इज़रायल को रुलाने के अलावा हर बार खुद ही मार खाए हैं।
खामनेई ने तुरंत OIC की बैठक बुलाने के लिए कहा और सभी मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अपने सभी संसाधनों से हिज़्बुल्ला का साथ दें। ईरान ने नसरल्ला के लिए अपने यहां 5 दिन का, लेबनान, सीरिया और इराक ने 3-3 के राष्ट्रीय शोक मनाने की घोषणा की है।
दूसरी तरफ बेंजामिन नेतन्याहू ने UNO में 2 नक़्शे दिखा कर ईरान, इराक, सीरिया, यमन और लेबनान को अभिशाप बताया है और भारत को वरदान बताया है सऊदी अरब, मिस्र और सूडान के साथ।
एक सिद्धांत है “जियो और जीने दो” लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों और देशों का सिद्धांत है “न जीने देंगे और जरूरत हुई तो मर जाएंगे”। जो अपील खामनेई ने इस्लामिक देशों से हिज़्बुल्ला के साथ देने के लिए की है, वह अपील क्या कभी चीन की बर्बरता झेल रहे उइगर मुसलमानों के लिए की क्योंकि वह समझते हैं कि इज़रायल को तो निगल सकते हैं लेकिन चीन तो ड्रैगन है, वो इन सबको निगल सकता है।


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