‘यूरोप के हथियारों से भारत पर हमला होता है’: रूसी तेल पर ज्ञान देने वाले पश्चिमी देशों को जयशंकर ने दिखाया आईना

                                                         साभार - एक्स/@DrSJaishankar
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले का मजबूती से बचाव किया है और पश्चिमी देशों की आलोचना पर सवाल उठाए हैं। यह पूरा मामला फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतारांता टॉक्स’ के दौरान सामने आया, जहाँ उनसे रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की ऊर्जा नीति को लेकर सवाल पूछे गए। एक पत्रकार ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस के प्रति ‘ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण’ है और वहाँ से तेल खरीदकर उसका समर्थन कर रहा है।

भारत ने क्यों खरीदा रूस से तेल?

इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने साफ कहा कि भारत का फैसला पूरी तरह आर्थिक और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित था। उन्होंने कहा, “मैं तेल उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर खरीदता हूँ।”

उन्होंने समझाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तो यूरोप ने मिडिल ईस्ट से तेल खरीदना शुरू कर दिया, जो पहले भारत का पारंपरिक सोर्स था। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों के कारण भारत को रूस से सस्ता और अधिक तेल मिलना शुरू हुआ।

जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में अमेरिका ने खुद भारत से कहा था कि वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदा जाए, ताकि महँगाई अचानक न बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और इसी आधार पर निर्णय लिया है।

पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर सवाल

अपने बयान में विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूरोप के किसी भी देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ, लेकिन यूरोप कई देशों को हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल संघर्षों में होता है।
उन्होंने कहा, “यूरोप हथियार बेचता है, जिनका उपयोग हम पर भी हुआ है। भारत ने कभी यूरोप के लिए कोई खतरा नहीं पैदा किया।” जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि अमेरिका गैस का प्रमुख सप्लायर है।
उन्होंने वैश्विक नीति को डीरिस्किंग की दिशा में बताया और कहा कि आज ऊर्जा बाजार पूरी तरह बदल चुका है। भारत ने साफ किया है कि वह किसी भी प्रतिबंध का हिस्सा नहीं है और अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले लेता रहेगा।


‘फहीम, उसका अब्बू, मौलवी और…. याद भी नहीं कितनों ने किया रेप’: मेरठ में जबरन निकाह के बाद ‘जहन्नुम’ बनी हिंदू बेटी की जिंदगी

              फहीम (बाएँ), फहीम का घर (बीच में), हिंदू पीड़िता (दाएँ), (फोटो साभार : Dainik bhaskar)
अक्सर चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी और INDI गठबंधन वाले दलितों पर अत्याचार होने का रोना रोते दिखाई पड़ते हैं। लेकिन जब इन लोगों के शांतिदूतों के ही द्वारा दलित लड़कियों का गैंग रेप और इस्लामीकरण किया जाता है सबके सब पता नहीं कब्र में छुप कर बैठ जाते हैं। सबको सांप सूंघ जाता है। जनता है कि इनके मकड़जाल में फंस जाती है। अगर गहराई से देखा जाए तो मुसलमानों के असली दुश्मन ये ही लोग हैं। उधर बंगाल में देखा किस तरह ममता बनर्जी ने हिन्दुओं को बीजेपी का साथ देने पर मुसलमानों की धमकी दी। क्या मुसलमान इंसान नहीं? क्यों उनको बहशी, बलात्कारी और मवालिओं की तरह दिखाकर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है?  

राजधानी दिल्ली के जामिया नगर में एक दलित हिंदू युवती के साथ मजहबी हैवानियत और जबरन धर्मांतरण का ऐसा खौफनाक खेल खेला गया, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। सोशल मीडिया पर ‘साहिल’ बनकर मेरठ के फहीम ने पहले हिंदू युवती को प्रेमजाल में फँसाया, फिर किडनैप कर उसका जीवन नर्क बना दिया।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित फहीम, उसके अम्मी-अब्बू (तस्लीम-खुर्शीद), भाई और मौलवी (जैद और मोहम्मद खालिद) सहित 5 दरिंदों को जेल में डाला है, जबकि दो आरोपित अभी भी फरार हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि नवंबर 2021 में इंस्टाग्राम पर साहिल नाम के लड़के ने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी।

धीरे-धीरे दोस्ती गहरी हुई तो मार्च 2022 में उसने लड़की को दिल्ली के बाटला हाउस बुलाया। साहिल ने हिंदू युवती को अपनी बातों में फँसाकर दोस्त के फ्लैट पर ले गया। वहाँ युवती को नशीला जूस पिलाया गया।

होश आने पर पता चला कि साहिल और उसके दोस्त ने मिलकर उसका रेप किया था। उन्होंने रेप करते हुए का Video भी बना लिया और वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगे। इसके बाद आरोपित साहिल ने दोबारा हिंदू युवती को दिल्ली बुलाया।

इस बार उसने सरेआम पिस्टल तान दी और डरा-धमकाकर उसे मेरठ के सठला गाँव ले गया। वहाँ पहुँचकर युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिसे वह साहिल समझ रही थी, वह असल में मुसलमान था और उसका असली नाम फहीम था।

उसी रात फहीम और उसके अब्बू खुर्शीद ने हिंदू युवती के साथ जबरदस्ती की। जब हिंदू पीड़िता ने भागने की कोशिश की, तो फहीम की अम्मी तस्लीम और बहन ने उसे बेरहमी से पीटा और बंधक बना लिया।

‘हिंदू लड़की लाओ, जन्नत जाओ’, मदरसे में जबरन निकाह और गोमांस का टॉर्चर

हैवानियत यहीं नहीं रुकी। फहीम की अम्मी तस्लीम और बहन हिंदू युवती को एक मदरसे में ले गईं। वहाँ मौजूद मौलवी (मोहम्मद खालिद) ने हिंदू युवती से कहा, “तू खुशनसीब है कि मुसलमान के घर आ गई, अब तुझे जन्नत मिलेगी।”

इसके बाद जबरन उसका निकाह फहीम से करा दिया गया। घर लाकर उसे पाँचों वक्त की नमाज पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाने लगा। उसे जबरदस्ती गोमांस खाने को दिया जाता था। विरोध करने पर उसके सामने जिंदा मुर्गा काटकर उसका खून युवती के ऊपर छिड़क दिया जाता था।

‘कितने लोग कमरे में आए गिनती याद नहीं’, पैसे लेकर सास कराती थी धंधा

निकाह के बाद हिंदू युवती के साथ जो हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। हिंदू पीड़िता ने रोते हुए बताया कि निकाह के बाद मौलवी (मोहम्मद खालिद) आए दिन उसके कमरे में आने लगा और जोर-जबरदस्ती करता था। जब युवती ने चीख-पुकार मचाई, तो मौलवी ने हँसते हुए कहा, “यह सब फ्री में नहीं होता, तेरी सास को इसके पैसे देते हैं।”

तब पीड़िता को समझ आया कि उसकी सास ही उससे जिस्मफरोशी का धंधा करवा रही थी। उसकी सास कहती थी कि हिंदू लड़की लाने का मतलब जन्नत का रास्ता साफ करना है। वह अपने बाकी बेटों को भी हिंदू लड़कियाँ फँसाकर लाने को कहती थी।

प्रधान ने बदलवाया आधार कार्ड, तंग आकर ट्रेन के आगे कूदने जा रही थी युवती

हताश और बेबस युवती 3 महीने बाद प्रेग्नेंट हो गई। गाँव के प्रधान फिरोज ने मिलीभगत करके पीड़िता के आधार कार्ड पर पिता का नाम हटवाकर जबरन फहीम का नाम दर्ज करवा दिया। मार्च 2023 में उसने एक बेटी को जन्म दिया। नवंबर 2024 में फहीम उसे लेकर वापस दिल्ली आया, जहाँ जनवरी में वह हथियारों की तस्करी के मामले में जेल चला गया।

इसके बाद जब युवती अपने मायके पहुँची, तो वहाँ से भी उसे दुत्कार मिला। हर तरफ से हारी-थकी पीड़ित बेटी 10 मई को अपनी 3 साल की बच्ची को लेकर ट्रेन के आगे कूदकर जान देने जा रही थी, तभी एक अजनबी ने उसकी जान बचाई और हिम्मत दी। इसके बाद जामिया नगर थाने में FIR दर्ज कराई गई। पुलिस फिलहाल मामले की गहन जाँच कर रही है।

पंचमुखी हनुमान : अगर हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण नहीं किया होता लंका पर विजय नहीं होती


रामायण का वह रहस्य जिसके बिना शायद लंका विजय कभी पूरी ही नहीं होती। अगर उस एक भयावह रात पवनपुत्र हनुमान ने अपना दिव्य पंचमुखी स्वरूप धारण नहीं किया होता, तो संभव है कि अधर्म की विजय हो जाती और संसार एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ जाता जहां मर्यादा, धर्म और सत्य की ज्योति हमेशा के लिए बुझ जाती। यह केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, यह उस क्षण की कथा है जब स्वयं समय ठहर गया था और एक भक्त ने अपने प्रभु की रक्षा के लिए अपनी समस्त दिव्य शक्तियों का आवाहन किया था।

लंका का युद्ध अपने अंतिम और सबसे निर्णायक चरण में पहुंच चुका था। रावण के एक-एक महारथी का अंत हो चुका था। मेघनाद, कुंभकर्ण और उसके अनेक पराक्रमी योद्धा युद्धभूमि में परास्त हो चुके थे। हर दिन रावण का साम्राज्य कमजोर होता जा रहा था और श्रीराम की विजय निश्चित दिखाई देने लगी थी। लेकिन रावण केवल बलवान ही नहीं था, वह अत्यंत चतुर और मायावी भी था। जब उसे समझ में आ गया कि साधारण युद्ध में वह श्रीराम को पराजित नहीं कर सकता, तब उसने अपनी अंतिम और सबसे भयानक चाल चलने का निश्चय किया।
रात का समय था। लंका के एक गुप्त कक्ष में बैठा रावण गहरी चिंता में डूबा हुआ था। तभी उसे अपने पुराने मित्र और पाताल लोक के अधिपति अहिरावण का स्मरण हुआ। अहिरावण कोई साधारण राक्षस नहीं था। वह तंत्र, मंत्र, मायावी शक्तियों और काले जादू का ऐसा महाज्ञाता था जिसके सामने बड़े-बड़े देवता भी सावधान रहते थे। कहा जाता था कि उसने ऐसी रहस्यमयी विद्याओं में सिद्धि प्राप्त कर ली थी जिनका ज्ञान स्वयं असुरों के बीच भी दुर्लभ था।
रावण ने तुरंत उसका आह्वान किया। कुछ ही क्षणों में पाताल लोक की गहरी अंधकारमयी शक्तियों से घिरा हुआ अहिरावण वहां प्रकट हुआ। उसकी आंखों में विचित्र चमक थी और उसके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान खेल रही थी। रावण ने उससे कहा, "मित्र, अब मेरी सारी आशाएं तुम पर टिकी हैं। यदि राम और लक्ष्मण जीवित रहे तो मेरा अंत निश्चित है। किसी भी प्रकार उन्हें मेरे मार्ग से हटाना होगा।"
अहिरावण ने कुछ क्षण ध्यान लगाया और फिर हंसते हुए बोला, "लंकेश, चिंता मत करो। मैं ऐसी योजना बनाऊंगा कि किसी को कुछ समझने का अवसर भी नहीं मिलेगा। सूर्योदय होने से पहले राम और लक्ष्मण मेरे होंगे।"
उधर समुद्र तट पर वानर सेना युद्ध की थकान के बाद विश्राम कर रही थी। चारों ओर शांति थी। लेकिन वह शांति किसी बड़े तूफान से पहले की निस्तब्धता थी। आधी रात के समय अहिरावण अपनी मायावी शक्तियों के साथ वहां पहुंचा। उसने ऐसे मंत्रों का उच्चारण किया कि पूरी वानर सेना गहरी निद्रा में डूब गई। यहां तक कि कई वीर योद्धाओं को भी उसकी उपस्थिति का आभास तक नहीं हुआ।
अहिरावण ने विभीषण का रूप धारण किया और सुरक्षा घेरा पार कर सीधे उस स्थान तक पहुंच गया जहां श्रीराम और लक्ष्मण विश्राम कर रहे थे। उसने अपने मायाजाल से दोनों भाइयों को अचेत किया और उन्हें लेकर पाताल लोक की ओर निकल पड़ा। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि किसी को कुछ समझने का अवसर ही नहीं मिला।
सुबह जब वानर सेना जागी तो पूरे शिविर में हाहाकार मच गया। श्रीराम और लक्ष्मण कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। सभी दिशाओं में खोज शुरू हुई। सुग्रीव, अंगद, जाम्बवान और अन्य सभी वीर चिंतित थे। तभी विभीषण ने ध्यान लगाकर सत्य का पता लगाया और गंभीर स्वर में बोले, "यह कार्य केवल एक ही व्यक्ति कर सकता है — पाताल लोक का राजा अहिरावण।"
यह सुनते ही हनुमान जी की आंखों में अग्नि प्रज्वलित हो उठी। उनके लिए श्रीराम केवल राजा नहीं थे। वे उनके प्राण, उनके आराध्य और उनके समस्त अस्तित्व का केंद्र थे। उन्होंने बिना एक क्षण गंवाए पाताल लोक की ओर प्रस्थान किया।
पाताल लोक का मार्ग अत्यंत भयावह था। वहां चारों ओर अंधकार, विषैले जीव और रहस्यमयी शक्तियां विचरण कर रही थीं। लेकिन हनुमान जी के साहस के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकी। वे हर संकट को पार करते हुए अंततः अहिरावण के महल तक पहुंच गए।
महल के भीतर जो दृश्य उन्होंने देखा, उसे देखकर उनका हृदय क्रोध से भर उठा। विशाल यज्ञ वेदी के सामने श्रीराम और लक्ष्मण मजबूत नागपाशों में बंधे हुए थे। चारों ओर तांत्रिक मंत्रों का उच्चारण हो रहा था। राक्षस उत्सव मना रहे थे क्योंकि उन्हें विश्वास था कि अब उनकी विजय निश्चित है।
तभी हनुमान जी की दृष्टि एक विचित्र रहस्य पर पड़ी। पांच अलग-अलग दिशाओं में पांच दीपक जल रहे थे। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और आकाश की ओर स्थित उन दीपकों से अद्भुत ऊर्जा निकल रही थी। तभी अहिरावण जोर से हंसा और बोला, "वानर, तू बहुत देर से आया है। जब तक ये पांचों दीपक एक साथ नहीं बुझेंगे, तब तक मेरी मृत्यु असंभव है। मेरी प्राणशक्ति इन्हीं में सुरक्षित है।"
यह सुनकर हनुमान जी कुछ क्षण विचार में डूब गए। पांचों दीपक इतनी दूर-दूर स्थित थे कि उन्हें एक साथ बुझाना लगभग असंभव था। लेकिन यह वह समय था जब केवल बल पर्याप्त नहीं था। यहां दिव्य शक्ति और बुद्धि दोनों की आवश्यकता थी।
तभी हनुमान जी ने अपने भीतर स्थित पंचदेव शक्तियों का आवाहन किया। अगले ही क्षण उनका शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगा उठा। उनके एक नहीं, पांच मुख प्रकट हो गए।
पूर्व दिशा में स्वयं हनुमान का वानर मुख था जो अदम्य साहस और भक्ति का प्रतीक था।
दक्षिण दिशा में भगवान नरसिंह का उग्र मुख प्रकट हुआ जो अधर्म के विनाश की शक्ति था।
पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख प्रकट हुआ जो विष और नाग शक्तियों का नाश करने वाला था।
उत्तर दिशा में भगवान वराह का मुख प्रकट हुआ जो पृथ्वी और धर्म की रक्षा का प्रतीक था।
और ऊपर आकाश की ओर भगवान हयग्रीव का दिव्य मुख प्रकट हुआ जो ज्ञान और दिव्य चेतना का स्वरूप था।
पंचमुखी हनुमान का वह विराट रूप इतना तेजस्वी था कि पूरा पाताल लोक कांप उठा। राक्षस भय से थर-थर कांपने लगे। स्वयं अहिरावण के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
अगले ही क्षण हनुमान जी ने अपने पांचों मुखों से एक साथ प्रचंड वायु प्रवाहित की। वह दिव्य वायु इतनी शक्तिशाली थी कि पांचों दिशाओं में स्थित दीपक एक ही क्षण में बुझ गए।
दीपक बुझते ही अहिरावण की सारी मायावी शक्तियां समाप्त हो गईं। उसका अभेद्य तिलिस्म टूट गया। उसके मंत्र निष्प्रभावी हो गए और उसका शरीर कमजोर पड़ने लगा।
हनुमान जी ने अवसर देखते ही अपने दिव्य पराक्रम से उस अधर्मी का अंत कर दिया। पूरी यज्ञ वेदी कांप उठी। पाताल लोक में गूंजती उसकी भयावह हंसी सदा के लिए शांत हो गई।
इसके बाद हनुमान जी ने श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। जैसे ही दोनों भाइयों ने अपने प्रिय भक्त को उस दिव्य पंचमुखी स्वरूप में देखा, उनके मुख पर प्रसन्नता की मुस्कान आ गई। श्रीराम ने प्रेमपूर्वक कहा, "हनुमान, तुम्हारी भक्ति के कारण ही धर्म की यह ज्योति आज सुरक्षित है।"
हनुमान जी ने विनम्रता से सिर झुका दिया। उनके लिए यह विजय उनकी नहीं थी। यह उनके प्रभु की कृपा थी।
यही कारण है कि पंचमुखी हनुमान को आज भी पांचों दिशाओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि उनका यह स्वरूप हर प्रकार के भय, तंत्र-मंत्र, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से अपने भक्तों की रक्षा करता है। यह कथा हमें सिखाती है कि जब भक्ति सच्ची हो और उद्देश्य धर्म की रक्षा हो, तब असंभव भी संभव हो जाता है।
और शायद यही कारण है कि आज भी करोड़ों भक्त विश्वास के साथ कहते हैं — जहां राम का नाम है, वहां हनुमान हैं, और जहां हनुमान हैं, वहां किसी भी संकट का टिक पाना असंभव है।
जय श्रीराम।
जय बजरंगबली।
जय पंचमुखी हनुमान।

दिल्ली नगर निगम (MCD) की बड़ी कार्रवाई: क्या ये कार्यवाही साउथ ज़ोन तक है या उत्तरी जोन में भी लागू होगी?


दिल्ली नगर निगम (MCD) की बड़ी कार्रवाई: नियमों का पालन हर नागरिक और व्यापारी के लिए क्यों जरूरी है? लेकिन नगर निगम के लिए नहीं। बिना रिश्वत दिए आप घर में जरुरी निर्माण तक नहीं कर सकते। फर्श, प्लास्टर, टूटी छत की मरम्मत करवाओ पहले पुलिस ही अड़ंगा डालने पहुँच जाती है। पुलिस की नहीं मानी तो पॉलुशन आदि के मकड़जाल में फंसा देगी। जबकि कुछ वर्ष पहले तक रिहाशी मकानों में इन मरम्मतों में किसी भी तरफ से कोई अड़चन नहीं आती थी।
जिस तरह सेकुलरिज्म हिन्दुओं पर ही थोप सेकुलरिज्म के महाराजा बने घूमते हैं, ठीक उसी तरह जब अनधिकृत निर्माण और कब्जे पर कार्रवाही होती है तो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में। लेकिन शहरी क्षेत्रों में वही काम करने पर मातम छा जाता है। किरण बेदी जिन्हे "क्रेन बेदी" भी कहते थे उन्होंने भी शहरी क्षेत्र में घुटने टेक दिए थे। अब यह प्रशासनिक निर्णय है या कुछ और। अगर शहरी क्षेत्र का ज्यादा पुराना नहीं 1970 का ही नक्शा निकाल लिया जाए, मालूम होगा शहरी क्षेत्र में कितनी सरकारी जमीन को हड़पकर दुकानें बना ली गयी है। ना जाने कितनी बार कोर्ट के आदेश पर मीना बाजार और जामा मस्जिद सर्विस लेन की सफाई हुई वही ढाक के तीन पात।
दिल्ली को एक व्यवस्थित और सुरक्षित शहर बनाए रखने के लिए कानून और मास्टर प्लान के नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। आवासीय क्षेत्रों (Residential Areas) में बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां चलाना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह वहां रहने वाले स्थानीय निवासियों की शांति और सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।
हाल ही में, दिल्ली नगर निगम (MCD) के साउथ ज़ोन (ग्रीन पार्क) द्वारा एक सख्त कदम उठाया गया है। हुमायूँपुर, नई दिल्ली में स्थित एक संपत्ति पर नियमों की धज्जियां उड़ाकर गैर-कानूनी तरीके से रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था।
मुख्य बिंदु और कार्रवाई:
• मामला: हुमायूँपुर (नई दिल्ली) के प्रॉपर्टी नंबर 119-A के ग्राउंड फ्लोर पर 'Pemas' नाम का रेस्टोरेंट चल रहा था।
• उल्लंघन: यह रेस्टोरेंट आवासीय क्षेत्र में बिना किसी मंजूरी और स्वीकृत प्लान (Sanctioned Plan) के पूरी तरह गैर-कानूनी तरीके से चलाया जा रहा था, जो कि मास्टर प्लान-2021 और बिल्डिंग बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।
• सख्त आदेश: डिप्टी कमिश्नर (साउथ ज़ोन) ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 345-A के तहत नोटिस जारी कर रेस्टोरेंट को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है।
• अंतिम चेतावनी: अगर 48 घंटों के भीतर इस गैर-कानूनी गतिविधि को बंद कर निर्धारित फॉर्मेट में हलफनामा (Affidavit) जमा नहीं किया गया, तो बिना किसी और नोटिस के इस परिसर को पूरी तरह से सील (Seal) कर दिया जाएगा।
हमें इससे क्या सीख मिलती है?

यह कार्रवाई याद दिलाती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि आप कोई भी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो हमेशा सही कानूनी प्रक्रिया, ज़ोनिंग नियमों और आवश्यक अनुमतियों (Permissions) के साथ ही शुरुआत करें। नियमों का पालन करने से ही हमारा समाज और शहर सुरक्षित रह सकता है। 

‘अगर हम नहीं रहे, तो एक सेकेंड लगेगा…’: हिंदुओं को बीजेपी का साथ देने पर मुस्लिमों के हमले की ममता ने दी थी धमकी, कोलकाता में FIR दर्ज


पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शुक्रवार (12 जून 2026) को कोलकाता में FIR दर्ज की गई। यह मामला उनके मार्च 2026 के उस भाषण से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने बंगाली हिंदुओं को चेतावनी दी थी कि अगर वे BJP को वोट देकर उन्हें सत्ता से बाहर कर देंगे, तो मुस्लिम उन्हें निशाना बना सकता है।

ममता की इस धमकी के बाद भी बीजेपी को सत्ता में लाकर योगी आदित्यनाथ की बात "बटोगे तो कटोगे" सच साबित कर दी। हिन्दुओं पर वामपंथी सरकार से कहीं ज्यादा हमले ममता के राज में हुए। जिन गुंडों के दम पर ममता उछल रही थी आज सब भीगी बिल्ली बन छुपे फिर रहे हैं, तो कहीं परेड निकाली जा रही है। 

मुसलमानों को भी ममता और इसे समर्थन देने वालों से होशियार रहने की जरुरत है। जिस तरह अपनी कुर्सी की खातिर हिन्दुओं को मुसलमानों का डर दिखाया जा रहा है मानों मुसलमान इंसान नहीं कोई गुंडा या मवाली हो।   

ममता बनर्जी ने यह बयान स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में आयोजित एक प्रदर्शन रैली के दौरान दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा था, “हम (TMC) हैं इसलिए आप (हिंदू) सब अच्छे से हैं। जिस दिन हम नहीं रहेंगे, एक सेकंड लगेगा।”

इसके बाद उन्होंने कहा, “अगर एक खास समुदाय (मुस्लिम) एकजुट होकर आपको घेर ले, तो एक सेकंड लगेगा, वे आपको पूरी तरह खत्म कर देंगे।” 20 मई 2026 को कोलकाता निवासी तुषार कांती दास ने दक्षिण कोलकाता के नेताजी नगर पुलिस स्टेशन में ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि ममता बनर्जी का यह बयान उस समय चुनावी माहौल वाले राज्य में डर, गलतफहमी और तनाव पैदा कर सकता था। इसी शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार (12 जून 2026) को FIR दर्ज की।

ममता बनर्जी पर BNS की धारा 351(2) (आपराधिक धमकी), धारा 196 (धर्म, जाति, भाषा या अन्य आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने) समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

ईरान युद्ध चलता रहेगा; समझौता होना दूर की कौड़ी है

सुभाष चन्द्र 

चार दिन पहले ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान और लेबनान पर हमले न करने की सलाह दे रहे थे और उन्हें पागल तक कह दिया अगर सर्वे हो जाए कि पागल ट्रंप है या नेतन्याहू तो ट्रंप भारी बहुमत से जीत जाएंगे ट्रंप ने नेतन्याहू को यहाँ तक कह दिया कि मैं तुम्हे न बचाता तो तुम जेल में होते 

किसका पक्ष ले रहे थे ट्रंप, हिजबुल्लाह का जो ईरान का पालतू आतंकी संगठन है और ईरान का जो इज़रायल को ख़त्म कर देना चाहता है। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
लेकिन ईरान ने जब अपाचे गिरा दिया तो ट्रंप ने ईरान पर दनादन हमले कर दिए यानी इज़रायल को फालतू नसीहत दे रहे थे ईरान और हिज्बुल्ला इज़रायल पर हमले करेंगे तो क्या वो चुप बैठा रहेगा? ट्रंप के हमले के बाद ईरान ने तुरंत कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी अड्डों पर हमला कर दिया

हमारे मीडिया में बैठे मिलिट्री के बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि ईरान बड़ी बहादुरी से लड़ा है जबकि ईरान की लड़ाई सीधे अमेरिका से तो हुई ही नहीं और न हो सकती क्योंकि उसकी कोई मिसाइल अमेरिका नहीं पहुँच सकती

वो बस आस पास के middle east के देशों में अमेरिकी Air Bases पर हमले कर रहा है 


ईरान ने सभी सुन्नी मुस्लिम देशों पर हमले किए

Bahrain, Kuwait, Qatar and the United Arab Emirates, Jordan, Oman किसी को नहीं छोड़ा और उनकी oil refineries पर भी हमले किए 

ईरान की भी Oil refineries पर कुछ जगह हमले किये अमेरिका और इज़रायल ने लेकिन Oil ही ईरान की backbone है ईरान को ठंडा करने के लिए उसकी Refineries को हमलों से बंद करना होगा ट्रंप ईरान के तेल का लालच छोड़ दे उसके पास तेल की कमी नहीं है और वेनेजुएला उसके कब्जे में है जो विश्व का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है वेनेजुएला से तेल भारत आने दो और भारत से refined oil लेते रहो

ईरान इतनी बहादुरी से लड़ा है कि अपने ही देश के 45 हजार लोग मार दिए क्योंकि वो खामनेई के खिलाफ बगावत कर रहे थे

इतनी बहादुरी से लड़ा है कि अमेरिका से बातचीत से पहले अपने नुकसान की भरपाई के लिए 24 बिलियन डॉलर मांग रहा है उसके नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है लेकिन हमारा मीडिया उसके नुकसान की बात ही नहीं करता

ट्रंप अपने आप ही बयान देते रहते हैं जैसे आज कहा है कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न खरीदेगा लेकिन यह बात ईरान नहीं कहता नहीं खरीदेगा और न ही बनाएगा तो पाकिस्तान तो उसे या हिजबुल्लाह को उपहार में दे सकता है

और ईरान के पास परमाणु हथियार का मतलब है सबसे पहले इज़रायल का खात्मा यह ट्रंप और नेतन्याहू की सही सोच है कि ईरान के पास परमाणु हथियार दुनिया के लिए खतरा होंगे

मीडिया में कोई ईरान की होर्मुज को बंद करने के लिए निंदा नहीं करता लेकिन अमेरिका की नाकेबंदी को जरूर निशाने पर ले लेते हैं

अब सवाल उठता है कि क्या ईरान से कोई समझौता हो भी सकता है?

मुझे नहीं लगता ऐसा हो सकता है मुजताबा खामनेई ने हज के दौरान दुनिया भर के मुसलमानों का आह्वान किया कि हज में अमेरिका और इजरायल की मौत की कामना करें (Death to America and death to इज़रायल)

ये कॉल देख कर नहीं लगता कभी ईरान के साथ Permanent Peace Agreement हो सकता है और युद्ध भी रुक रुक कर चलता रहेगा युद्ध एक स्थिति में ख़त्म होगा मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूँ लेकिन इतना कह सकता हूँ कि क्योंकि ईरान सीधा अमेरिका से युद्ध नहीं कर सकता, इसलिए एक दिन वह अमेरिका पर 9/11 से भी बड़ा आतंकी हमला करेगा और तब वह अपने अंत को निमंत्रण देगा अमेरिका तब उसे जहन्नुम बना देगा और तब ही युद्ध बंद होगा

चित्रगुप्त जी महाराज के चार धाम: कायस्थों की आस्था, इतिहास और गौरव के प्रतीक

ब्रह्माजी की कठोर तपस्या से चित्रगुप्तजी महाराज की उत्पत्ति हुई। कायस्थ समाज चित्रगुप्तजी महाराज का ही परिवार है। पृथ्वी पर आए हर प्राणी का लेखा-जोखा रखने का दायित्व इन्हीं के सुपुर्द है। दीपावली के बाद दूज जिसे भाई दूज कहते हैं उस दिन कायस्थ समाज चित्रगुप्त महाराज जी का पूजन करता है और कई कायस्थ संगठन उस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ भंडारे भी करते हैं। 
कहते हैं कि पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या लौटने पर राजतिलक में गुरु वशिष्ठ द्वारा चित्रगुप्तजी को निमंत्रण नहीं देने की भूल हो गई। चित्रगुप्तजी महाराज को सभा में न देख प्रभु राम ने पूछा कि "चित्रगुप्त महाराज कहीं नहीं दिख रहे।" उनको बताया गया कि उन तक निमंत्रण नहीं दे पाने की गलती हो गयी। उधर चित्रगुप्तजी महाराज ने अपने आपको अपमानित महसूस कर समस्त कार्य रोक दिया जिस कारण मृत्यु लोक (यमराज के दरबार) में खलबली मच गयी। पृथ्वी पर जिनकी जीवनलीला समाप्त हो चुकी थी किसी को मृत्युलोक नहीं लाया गया। बरहाल, समारोह सम्पूर्ण होने उपरान्त उन्हें गुरुदेव द्वारा हुई त्रुटि का बोध करवाने पर प्रभु श्रीराम का सन्देश दिया कि पृथ्वीलोक पर समय पूर्ण होने पर अपने धाम लौटने पर सर्वप्रथम चित्रगुप्तजी के भेंट कर गुरुदेव की तरफ से क्षमा याचना करूँगा। 
इतना सुन चित्रगुप्तजी महाराज ने बिना विश्राम किए दिन-रात काम कर कार्य को व्यवस्थित किया। इसीलिए कायस्थ समाज भाईदूज को यमदुतिया ने नाम से मनाता है।      
कायस्थ समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में भगवान चित्रगुप्त के चार प्रमुख धामों का विशेष महत्व है। ये केवल मंदिर नहीं, बल्कि हमारी पहचान, परंपरा और आस्था के जीवंत केंद्र हैं।

उज्जैन (मध्य प्रदेश) – अंकपात स्थित चित्रगुप्त मंदिर
मान्यता है कि इसी पावन भूमि पर भगवान चित्रगुप्त का प्रादुर्भाव हुआ था। महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित यह मंदिर कायस्थ समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है और इसे चित्रगुप्त जी की जन्मस्थली के रूप में भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
पटना (बिहार) – आदि चित्रगुप्त मंदिर
नौजर घाट के समीप स्थित यह प्राचीन मंदिर भगवान चित्रगुप्त के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित मंदिरों में गिना जाता है। यहाँ स्थापित काले बेसाल्ट पत्थर की दिव्य प्रतिमा सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
कांचीपुरम (तमिलनाडु) – चित्रगुप्त स्वामी मंदिर
दक्षिण भारत का यह ऐतिहासिक मंदिर भगवान चित्रगुप्त को समर्पित सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर दर्शाता है कि भगवान चित्रगुप्त की महिमा पूरे भारतवर्ष में समान श्रद्धा के साथ पूजित है।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश) – चित्रगुप्त मंदिर
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित यह मंदिर कायस्थ समाज के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है। भगवान चित्रगुप्त की कृपा और धर्मनगरी की पवित्रता इसे चार धामों में विशेष स्थान प्रदान करती है।
चार धामों का संदेश
भगवान चित्रगुप्त हमें सत्य, न्याय, कर्तव्य और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं। इन चारों धामों की यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से जुड़ने का अवसर है।
आइए, अपने चार धामों का सम्मान करें, उनकी महिमा को जन-जन तक पहुँचाएँ और कायस्थ समाज की एकता को और अधिक सशक्त बनाएं।
जय भगवान चित्रगुप्त
जय कायस्थ समाज

गुजरात: जामा मस्जिद में हिंदू-जैन मूर्तियाँ मिलने के बाद ASI का सर्वे, प्राचीन प्रतिमाएँ और नक्काशी मिली; हटाया गया अतिरिक्त ‘वजू खाना’


गुजरात के भरूच में स्थित कथित जामा मस्जिद के तहखाने में मिली मूर्तियों के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने तहखाने का सर्वे किया है। दरअसल, हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें इस कथित मस्जिद के बंद पड़े तहखाने में हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियाँ नजर आ रही थीं।

इस वीडियो में भगवान गणेश, हनुमान और जैन तीर्थंकर मल्लिनाथ की प्रतिमा दी थीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके के विभिन्न हिंदू व जैन संगठनों ने मामले की जाँच की माँग उठाई। इसके बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया है और फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

पुरातत्व विभाग की जाँच और सामने आए दावे

पुरातत्व विभाग की टीम ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जामा मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया और तहखाने की वीडियोग्राफी भी कराई। जाँच के दौरान कुछ संरचनात्मक निशान, स्तंभों पर पारंपरिक नक्काशी और एक प्रतिमा पर संवत 1213 अंकित होने के दावे सामने आए हैं।

हालाँकि, विभाग ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

इस बीच शंकराचार्य मठ के महंत स्वामी मुक्तानंद ने कहा है कि यह खोज उनके पुराने दावों को मजबूत करती है और उनका दावा है कि यह स्थान पहले जैन धर्म से जुड़ा हुआ था। उन्होंने इसे ‘जैन समरी विहार’ बताते हुए श्री चक्रधर स्वामी के जन्मस्थल से भी जोड़ा है।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी बीच पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर में बिना अनुमति बनाए गए अतिरिक्त ‘वजू खाने’ को हटा दिया है। इसके साथ ही एक विवादित दरवाजे को भी सील कर दिया गया है।

मस्जिद ट्रस्ट और प्रशासन की स्थिति

इसी बीच मुस्लिम समाज के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और निष्पक्ष जाँच की माँग की। फिलहाल पूरा मामला पुरातत्व विभाग की अंतिम रिपोर्ट पर टिका हुआ है, जिसके बाद आगे की प्रशासनिक और कानूनी दिशा तय होगी।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स : ‘रेप कर पूछा- क्या तुम्हें मजा आया?’: पाकिस्तान के शेराज मलिक ने ब्रिटिश लड़की का किया बलात्कार, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

                                                             साभार - आज तक/ TOI
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इसी बीच पाकिस्तानी मूल के शरणार्थी शेराज मलिक को 18 साल की युवती से रेप मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई है।

अदालत ने उसे समाज के लिए खतरा बताते हुए सजा पूरी होने के बाद चार साल तक निगरानी में रखने का भी आदेश दिया है। यह घटना जून 2025 में नॉटिंघमशायर के सटन लॉन पार्क में हुई थी। पीड़िता अपने एक दोस्त के साथ पार्क पहुँची थी। कुछ देर बाद उसका दोस्त वहाँ से चला गया और युवती शेराज मलिक व उसके साथियों के बीच रह गई।

आरोप है कि शेराज मलिक युवती को पार्क के सुनसान हिस्से में ले गया और उसका रेप किया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसने कई बार विरोध किया, लेकिन आरोपित ने उसके चेहरे और सिर पर हमला किया।

28 साल के मलिक ने पूरे मामले में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि संबंध सहमति से बने थे, लेकिन अदालत में पेश गवाहों और सबूतों के आधार पर जूरी ने उसे रेप के दो मामलों में दोषी ठहराया।

सुनवाई में यह भी सामने आया कि उसी रात एक अन्य व्यक्ति ने भी युवती के साथ रेप किया था, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। सजा सुनाते हुए जज साइमन ऐश केसी ने कहा कि आरोपित ने नशे की हालत में अकेली और असहाय युवती का फायदा उठाया तथा अपने अपराध पर कोई पछतावा नहीं दिखाया।

TMC नेता मछली फ्राई के बहाने बुलाकर गरीब महिलाओं की लूटता था इज्जत: बांग्लादेश भागते समय रबीउल इस्लाम गिरफ्तार

           TMC नेता रबीउल इस्लाम का करोड़ों का घर, जहाँ लूटता था महिलाओं की इज्जत (साभार : News18)
जैसे-जैसे TMC के सत्ता से बाहर होने के दिन बीत रहे हैं वैसे-वैसे ममता बनर्जी के समय हुई काली करतूतें सामने आने लगी हैं। जिसे देख शंका होती है कि ये जो नेता ममता का साथ छोड़ रहे हैं इसके पीछे बहुत गहरा षड़यंत्र दिखाई पड़ता है। क्योकि जो आज पार्टी को छोड़ अपने आपको दूध का धुला साबित करने की कोशिश कर रहे हैं इन काली करतूतों में इनके भी शामिल होने पर शक होना स्वाभाविक है। इनको मालूम है कि पहले तो ममता की छत्रसाया में चाहे कुछ भी कर लो कोई पूछने वाला नहीं। जिस हिसाब से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं उस हिसाब से तो इतनी काली करतूतें नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हुई, क्यों? क्यों नहीं जिस तरह हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हो रहा था, हिन्दू त्यौहारों पर हमले हो रहे थे और हिन्दुओं पर जानलेवा हमले हो रहे थे तब क्यों नहीं पार्टी छोड़ी? तब कहाँ मर गया था इनका जमीर?           

बंगाल में संदेशखाली के विलेन शेख शाहजहाँ के बाद एक और दरिंदा सामने आया है। TMC नेता रबीउल इस्लाम पर महिलाओं को बंधक बनाकर उनका जिस्म लूटने और करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है। पुलिस ने इस हैवान को बांग्लादेश भागते समय बॉर्डर पर दबोचा।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर 24 परगना के देगंगा से इस TMC नेता की काली करतूत बाहर आई है। आरोप है कि रबीउल इस्लाम ने 100 बीघे की जमीन पर अपना एक आलीशान गार्डन हाउस बना रखा था।

वह गरीब महिलाओं को रात के अँधेरे में वहाँ मछली तलने और खाना बनाने के बहाने बुलाता था। वहाँ पहुँचने के बाद महिलाओं को बंधक बना लिया जाता था। फिर रबीउल और उसके गुर्गे उनके साथ अमानवीय अत्याचार करते थे। इलाके में इसका इतना खौफ था कि पीड़ित परिवार डर के मारे मुँह नहीं खोलते थे।

मजदूर से करोड़पति बनने का खूनी सफर

रबीउल इस्लाम के अपराध और रसूख की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। साल 2011 से पहले रबीउल एक साधारण दिहाड़ी मजदूर था। वह दो वक्त की रोटी के लिए तरसता था। लेकिन सत्ता का हाथ मिलते ही वह देगंगा पंचायत समिति में वन एवं भूमि विभाग का बड़ा अफसर बन बैठा। इसके बाद उसने सरकारी पैसों और पेड़ों को लूटकर अपना 10 करोड़ का अय्याशी का अड्डा तैयार किया।

पुलिस को ठेंगा, फिर भागते हुए दबोचा गया

रबीउल ने अपने राजनीतिक रसूख के दम पर लंबे समय तक कानून की धज्जियाँ उड़ाईं। उसके खिलाफ जबरन वसूली और महिला उत्पीड़न के कई केस थाने पहुँचे, लेकिन पुलिस हाथ डालने से डरती थी।

अब जब बीजेपी की सरकार आई, तब जाकर इस हवस के शिकारी पर शिकंजा कसा, और ये डरपोक अंडरग्राउंड हो गया। जान बचाकर सीमा पार बांग्लादेश भागने की फिराक में था। लेकिन बसिरहाट बॉर्डर पर मुस्तैद पुलिस ने उसकी चालाकी फेल कर दी और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

गुजरात: भरूच की जामा मस्जिद के तहखाने में मिलीं हिंदू-जैन देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, Video सामने आया


गुजरात के भरूच की विवादित जामा मस्जिद के बेसमेंट में हिंदू और जैन देवी-देवताओं की पुरानी मूर्तियाँ दिखाने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में मस्जिद के बेसमेंट में भगवान गणेश, हनुमान और जैन तीर्थंकर मल्लिनाथजी की मूर्तियाँ दिख रही हैं।

ऑपइंडिया से बातचीत में भरूच के स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि यह वीडियो सही है और संतों द्वारा लंबे समय से कही जा रही बातों की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता और सच्चाई आज सबके सामने है।

गौरतलब है कि हिंदू संत और संगठन लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि भरूच में जामा मस्जिद हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी। जनवरी की शुरुआत में ऑपइंडिया ने एक डिटेल्ड रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें बताया गया था कि यह दावा कितना सच है और इसके लिए क्या ऐतिहासिक सबूत और फैक्ट्स मौजूद हैं।

स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि भरूच में जामा मस्जिद ASI से सुरक्षित स्मारक होने के बावजूद कुछ नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। हमारी माँग है कि इसका मैनेजमेंट ASI नियमों के तहत किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

                                                         तहखाने का सील दरवाजा

हाल ही में, स्थानीय प्रशासन ने यहाँ अवैध रूप से निर्मित एक शेड को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटा दिया। इसके अलावा, तहखाने की ओर जाने वाले एक दरवाजे को भी सील कर दिया गया है।

नेताओं के दल बदलने की ख़बरें ढोल पीट कर दिखाते हैं चैनल लेकिन चैनलों के पत्रकार कब चैनल बदल लेते हैं, किसी को पता नहीं चलता

सुभाष चन्द्र

नेताओं के दल बदलने की ख़बरें ढोल पीट कर दिखाते हैं चैनल लेकिन चैनलों के पत्रकार कब चैनल बदल लेते हैं, किसी को पता नहीं चलता। आज इसी विषय पर लिखता हूं नेताओं के दल बदलने की ख़बरें हर चैनल पर पत्रकार वरीयता से और चटकारे ले ले कर सुनाते हैं। ठीक है, ये उनका काम होगा जो ऐसी खबरे देते हैं लेकिन चैनेलो के पत्रकार/एंकर खुद कब एक चैनल छोड़ कर दूसरे में चले जाते हैं यह किसी को पता नहीं चलता। नेता अगर अपने स्वार्थ के लिए दल बदलते हैं तो पत्रकार/एंकर भी अपने फायदे के लिए ही चैनल बदलते हैं और वह भी दल बदलने से कम नहीं हैं 

कुछ पत्रकारों/एंकरों के चैनल बदलने के बारे में बताते हैं -

-रुबिका लियाकत : एक तेज तर्रार एंकर ने अपना सफर होमटाउन उदयपुर से शुरू किया - 2015 में वो ज़ी न्यूज़ में गई और 2018 तक रही; 2018 से 2022 तक ABP News में: 2022 से 2023 तक भारत-24 में; 2023 के अंत से मई 2026 तक न्यूज़ 18 में थीं और अब जून, 2026 में टाइम्स नाउ नवभारत में आ गई ;

लेखक 
चर्चित YouTuber 
-सुमित अवस्थी आज तक में 5 साल रहे, न्यूज़ -18 में 4 साल रहे, ABP News में 5 साल रहे, NDTV में ढाई साल रहे और अब दिसंबर 2025 से टाइम्स नाउ नवभारत में आ गए;

-मीमांसा मलिक 24 साल जीव में रहने के बाद 2 वर्ष भारत 24 में रही और अब ओडिशा के फोकस टीवी के प्रोजेक्ट देख रही हैं;

-अनन्या शर्मा न्यूज़ -18 से 2025 के अंत में रिपब्लिक भारत में आई;

-सुमित झा भारत एक्सप्रेस से 2025 में रिपब्लिक भारत में आए;

-वैभव मिश्रा ज़ी न्यूज़ से रिपब्लिक भारत में आ गए;

-राममोहन शर्मा ज़ी न्यूज़ में 7 साल सेवा करने के बाद अब रिपब्लिक भारत में हैं;

-रिपब्लिक मीडिया में काम करने वाले प्रदीप भंडारी अब भाजपा के प्रवक्ता हैं;

-सैयद सोहेल रिपब्लिक भारत छोड़ कर NDTV में चले गए;

-सुचरिता कुकरेती भी रिपब्लिक भारत छोड़ कर NDTV में चली गई जो काफी समय तक रजत शर्मा के इंडिया टीवी में रही थी;

-राहुल कंवल इंडिया टुडे से NDTV में आ गए (याद रहे इस चैनल का स्वामित्व अब अडानी के पास है);

-अभी राजदीप सरदेसाई इंडिया टुडे से चिपका हुआ है और पता नहीं कब तक रहेगा क्योंकि उसकी बीवी सागरिका घोष का ममता बनर्जी से पंगा हो गया लगता है जो उसकी बुलाई हुई बैठक में नहीं गई;

-NDTV से सौरभ शुक्ला और रवीश कुमार  का पत्ता कट गया और अब रवीश बाबू यूट्यूब चैनल पर झूठ का बाजार चला रहे हैं;

-इनके साथ ही कई चैनलों की खाक़ छानने के बाद हाथ मलते रहने वाले पुण्य प्रसून बाजपेई अभिसार शर्मा और अजित अंजुम भी ऐसे यूट्यूब पर अपने अपने झूठ के बाज़ार चला रहे हैं;

-अमिश देवगन जून, 2016 से न्यूज़ 18 में हैं - उसके पहले 2 साल वो ज़ी न्यूज़ में थे;

-संदीप चौधरी न्यूज़ 24 से कुछ समय पहले ABP News में चले गए;

-19 साल ज़ी न्यूज़ में रह कर सुधीर चौधरी ने डी डी न्यूज़ का दामन थामा है; इसके पहले वो आज तक में गए कुछ समय के लिए;

-पल्की शर्मा उपाध्याय भी न्यूज़-18 छोड़ कर अब अपना डिजिटल प्लेटफार्म, “इंडिया ग्लोबल रिव्यु” चला रही हैं;

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जगत में अंजना ओम कश्यप ऐसी एंकर हैं जो 2012 से लगातार “आज तक” में चल रही हैं उनका करियर 2003 में दूरदर्शन से शुरू हुआ और वे ज़ी न्यूज़ और न्यूज़-24 में भी रही

ये थी कहानी न्यूज़ एंकरों के चैनल बदलने की कुछ नाम छूट गए हों, तो आप जोड़ सकते हैं 

टीएमसी में बगावत पर वर्ल्ड मीडिया : अदम्य योद्धा का दुखद राजनीतिक अंत; ममता को छोड़ भागने वालों को पार्टी से नहीं अपनी तिजोरी से मतलब


ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) में मचे अभूतपूर्व राष्ट्रीय विद्रोह (20 लोकसभा सांसदों और अब शायद 65 विधायकों का दलबदल) की गूंज अब कोलकाता और दिल्ली तक सीमित नहीं रही। भारत के इस सबसे बड़े राजनीतिक उलटफेर को ग्लोबल मीडिया ने भी अपने मुख्य पन्नों पर प्रमुखता से जगह दी
 द न्यूयॉर्क टाइम्स, बीबीसी, द गार्जियन और ले मोंडे आदि मीडिया संस्थाओं ने ममता बनर्जी की बिखरती पार्टी पर विश्लेषणात्मक लेख प्रकाशित किये

दुनिया भर के विश्लेषकों ने ममता बनर्जी को ‘जुझारू और अदम्य लड़ाकू’ (Tenacious Leader) नेता बताया यह भी बताया कि कैसे अपने ही भतीजे अभिषेक बनर्जी के अंधमोह और कॉरपोरेट सिंडिकेट (I-PAC) के चक्रव्यूह में फंसकर उन्होंने अपनी ही बनायी सल्तनत पर से अपना पूरा नियंत्रण खो दिया

शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस टूट में अन्तर 

महाराष्ट्र में बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना में भी दो फाड़ हुए। एक शिंदे गुट दूसरा उद्धव ठाकरे गुट। लेकिन वो फाड़ हुए थे विचारधारा को लेकर। लेकिन तृणमूल में जो टूट हुई है यह विचारधारा को नहीं बल्कि अवसरवादिता को लेकर। जब तक ममता राज में इन लोगों को मलाई खाने को मिलती रही ममता के हर अनुचित कदम का साथ देते रहे, अब जब देखा मलाई की बजाए प्रहार सहने पड़ेंगे उसी ममता को बीच मंझधार में छोड़कर भाग रहे हैं। यानि जहाँ दिखी तवा परत वहीँ बिताई सारी रात। ममता के असली वफादार सिपाही वही हैं जो संकट की इस घडी में साथ खड़े हैं। शिवसेना में तो नेता मान लिया गया उस नेता के नेतृत्व में चुनाव भी लड़ लिए परन्तु तृणमूल से अलग हुआ गुट किसे नेता मानेगा? अगर तिजोरी के चक्कर में फ़िलहाल किसी को नेता मान लिया क्या उसके नेतृत्व में चुनाव लड़ने की हिम्मत है किसी में? 15 सालों तक इनकी नैतिकता कहां थी? ऐसे लोगों को नेता नहीं अवसरवादी कहते हैं। इन्हे पार्टी से नहीं अपनी तिजोरी से मतलब होता है। 

मित्र और शत्रु की सही पहचान संकट के समय होती है। जो संकट में साथ नहीं दे उसे अवसरवादी कहते हैं। दूसरे, सत्ता परिवर्तन होते ही घुसपैठियों का भागना भी ममता को भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि जितने भी नेता TMC को छोड़ भाग रहे हैं, उन्हें डर है कि कहीं घुसपैठियों को बसाने में सरकार उन्हें न लपेट ले। इसलिए अपने आपको दूध का धुला साबित करने पाखंडी नेता मुसीबत के समय ममता को अकेला छोड़ भगदड़ में लगे हैं। अगर बंगाल में घुसपैठियों की भरमार थी तब पार्टी छोड़ भागने वालों ने क्यों नहीं विरोध किया? जब हिन्दू त्यौहारों पर हमले और हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हो रहा था तब क्यों नहीं इनका जमीर जागा? तब तो ये सब ममता की गोद में बैठ मलाई खाने में लगे थे, और अब मलाई खिलाने वाली उसी ममता की गोद को छोड़कर भागने वाले कभी किसी पार्टी के नहीं हो सकते। कल तक NDA और बीजेपी को कोसने वाले क्यों NDA की गोदी में जा रहे हैं? ममता का शासन चाहे जैसा था इन अवसरवादियों की हरकतों को अपने आंचल में समेट सबको बचा रही थी लेकिन जब ममता को उनका सहारा चाहिए छोड़कर भाग रहे हो। NDA हो या बीजेपी अगर इन अवसरवादियों को शामिल करती है तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।       

वैश्विक मीडिया की नजरों में ममता बनर्जी की क्रोनोलॉजी

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ममता बनर्जी के राजनीतिक ग्राफ को 3 मुख्य हिस्सों में बांटकर दुनिया के सामने पेश किया है, जो इस संकट की कड़वी हकीकत बयां करता है
  • वैश्विक लेखों में कहा गया है कि ममता बनर्जी ने 3 दशक पहले अपने दम पर वामपंथ के क्रूर शासन के खिलाफ सड़कों पर लाठियां खाकर तृणमूल कांग्रेस खड़ी की थी। वह भारत की सबसे जुझारू महिला नेताओं में शुमार थीं, जिन्होंने जमीन से उठकर कोलकाता की सत्ता पर कब्जा किया था
  • द गार्जियन’ के एक विशेष लेख के अनुसार, ममता बनर्जी की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को खत्म कर अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अघोषित ‘युवराज’ घोषित करना रही। इसके चलते पार्टी के संस्थापक और सबसे वफादार जमीनी चेहरे (ओल्ड गार्ड) पूरी तरह अलग-थलग पड़ते चले गये
  • विदेशी अखबारों ने लिखा है कि चुनावी रणनीतिकार एजेंसी आई-पैक (I-PAC) के कॉरपोरेट दखल ने विधायकों और सांसदों के टिकट तय करने शुरू कर दिये, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा कालीघाट से टूट गया। इसी का नतीजा रहा कि 2026 के चुनाव में जनता ने उन्हें नकार दिया और पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गयी

दलबदल और साइन-गेट ने धूमिल की छवि

  • वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि किसी राष्ट्रीय दल के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों का एक साथ पाला बदलकर एनडीए (NDA) को समर्थन दे देना भारतीय संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी बगावतों में से एक है
  • डॉ काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में हुए इस विद्रोह और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चल रही साइन-गेट(फर्जी हस्ताक्षर मामले) की सीआईडी जांच ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर का अनुशासन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है
  • ‘बीबीसी’ की रिपोर्ट में दिल्ली में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की भावुक मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि जो क्षेत्रीय क्षत्रप कभी दिल्ली की सत्ता में ‘किंगमेकर’ बनने का सपना देख रही थीं, आज वे राष्ट्रीय राजनीति में अपने वजूद को बचाने के लिए बेहद असहाय और अकेली खड़ी नजर आ रही हैं
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ममता बनर्जी के लिए अब इस गहरे दलदल से बाहर निकलना लगभग असंभव प्रतीत होता है राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की नयी सरकार का तेजी से पैर पसारना और सचिवालय ‘नबान्न’ की दीवारों का भगवाकरण यह दिखाता है कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति अब पूरी तरह बदल चुकी है
विदेशी मीडिया ने अपने निष्कर्ष में लिखा है कि तृणमूल कांग्रेस इस समय बिल्कुल उसी तरह के लिविंग इन्फर्नो (अंदरूनी विनाश) से गुजर रही है, जैसा कुछ साल पहले महाराष्ट्र की शिवसेना और एनसीपी ने झेला था महुआ मोईत्रा और कल्याण बनर्जी जैसे गिने-चुने वफादार नेताओं के तीखे बयानों के बावजूद यूसुफ पठान जैसे बड़े चेहरों की रहस्यमयी चुप्पी यह साफ बयां करती है कि ममता बनर्जी के हाथ से उनकी पार्टी की कमान हमेशा के लिए फिसल चुकी है 

भारत में घुसे बांग्लादेशी मियाँ-बीवी (रमजान-सादिना) ने 14 साल में खड़ा कर लिया करोड़ों का साम्राज्य: कभी सड़क किनारे बेचते थे नारियल-ताड़

        सड़क पर नारियल बेचने वाले बांग्लादेशी रमजान-सादिना निकले करोड़ों के मालिक(फोटो साभार : ChatGPT)
अक्सर फल-सब्ज़ी और खोमचे वाले को लोग गरीब कहते हैं, जबकि वह किसी वेतनभोगी से ज्यादा खुशहाल होते हैं। वेतनभोगी एक छोटा-सा मकान लेने से पहले हज़ार बार सोंचता है लेकिन ये खड़े-खड़े शानदार मकान का सौदा करने की हिम्मत रखते हैं। दिल्ली गोलचा सिनेमा के पीछे तिराहे बहराम खां पर रेहड़ी पर फल बेचने वाले मकान मालिक बने बैठे हैं। 
दो बार एक जूस बेचने वाले और एक गोलगप्पे बेचने वाले के बच्चों की शादी में जाने का मौका मिला। कोई वेतनभोगी उस तरह की शादी नहीं कर सकता जिस तरह की शानदार शादी इन लोगों ने की। 
इतना ही नहीं, जामा मस्जिद पर कल्लन स्वीट्स के थोड़ा-सा आगे शाम के समय एक माँ-बेटी भीख मांगती थी। कई दिन से नहीं दिखने पर जानकर दुकानदारों से पूछने पर मालूम हुआ की लड़की का निकाह हो गया। उन्होंने जो खुलासा किया वाकई चौकाने वाला था। महावीर वाटिका में निकाह हुआ, दहेज़ में कार, चिकन और मटन(कोई दूसरा मीट नहीं)  की दावत। दहेज़ में कार सुनकर हैरानी तो हुई लेकिन उन्होंने बताया कि इसकी दो कारें पहले ही किराये पर चल रही है। 
भीखना मांगना अपने आपमें एक बहुत बड़ा व्यापार है। शायद ध्यान हो, कुछ महीने पहले शायद मुंबई से एक भिखारी को गिरफ्तार करने पर मालूम हुआ कि वह करोड़ों का मालिक है और सैकड़ों भिखारी उसके अंतर्गत भीख मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहुत उस करोड़पति व्यापारी की फोटो भी खूब वायरल हुई थी। देखिए वीडियो 

              
पश्चिम बंगाल के हावड़ा से पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिया दंपती रमजान गाजी और उसकी बीवी सादिना बेगम को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

कभी सड़क किनारे कच्चा नारियल (डाब) और ताड़ के फल बेचने वाला यह दंपती महज कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा। अब पुलिस और जाँच एजेंसियाँ इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या इस खेल के पीछे सत्ताधारी पार्टी TMC के स्थानीय नेताओं का हाथ है।

दलालों के सहारे आए, प्रमोटर बनकर छाए

यह दंपती करीब 14 साल पहले दलालों की मदद से बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत घुसा था। शुरुआत में दोनों ने पेट पालने के लिए फल बेचे। इसके बाद रमजान गाजी ने चालाकी से स्थानीय प्रमोटरों से साँठगाँठ कर ली। वह पुराने मकान तोड़ने और जमीन की खरीद-बिक्री के धँधे में उतर गया।

कारोबार चमकते ही रमजान ने मलबा ढोने के लिए अपना ट्रक खरीद लिया और जमीनों की डीलिंग करने लगा। इसी अवैध कमाई से उसने कई जमीनें खरीदीं और अपना एक आलीशान दोमंजिला पक्का मकान भी बना लिया। पुलिस अब इनके पूरे सिंडिकेट और पॉलिटिकल नेटवर्क को खंगाल रही है।