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ISI से लिंक, सेना मुख्यालय से लेकर सरकारी दफ्तरों में आना-जाना: मेरठ में अम्मी-बेटी निकली PAK की नागरिक, 30 सालों से फर्जी आधार कार्ड-पासपोर्ट के जरिए भारत में रह रहीं

पाकिस्तानी नागरिक अम्मी-बेटी के खिलाफ जाली भारतीय दस्तावेज और अवैध निवास के आरोप में FIR दर्ज (साभार: Dall-E/X)
उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस ने 14 फरवरी 2026 को एक अम्मी और उसकी बेटी के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप है कि ये दोनों करीब 30 साल से भारत में रह रही थीं, जबकि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं। इस मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता रुखसाना ने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अम्मी-बेटी ने धोखे से भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए। रुखसाना ने शिकायत में बताया कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद दोनों ने फर्जी तरीके से आधार कार्ड, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया।

मीडिया से बात करते हुए SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि उन्हें फरहत मसूद नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली। वह दिल्ली गेट इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि फरहत मसूद पाकिस्तान गया था, जहाँ उसने सबा नाम की औरत से निकाह किया। वहीं पाकिस्तान में उनकी एक बेटी पैदा हुई। सबा और उसकी बेटी दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं।

SSP ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह साफ हो गया है कि आरोपित बिना वैध भारतीय नागरिकता के यहाँ रह रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले SP सिटी द्वारा की गई जाँच में भी आरोपों में सच्चाई पाई गई थी। जाँच में तथ्य सामने आने के बाद अब इस मामले में औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की गहराई से जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

मामले में FIR की पूरी जानकारी

ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी देखी है। इस FIR में सबा मसूद उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उशकी बेटी ऐमन फरहत को मुख्य आरोपित बताया गया है। इन दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS)2023 की कई धाराएँ लगाई गई हैं।

इनमें धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 351(2) और 352 शामिल हैं। ये धाराएँ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोपों से जुड़ी हुई हैं।

                                                                       साभार: UP पुलिस

शिकायतकर्ता ने बताया कि सबा ने पाकिस्तान में फरहत मसूद से निकाह किया था और उनके बेटी ऐमन का जन्म वहीं 25 मई 1993 को हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि जब सबा भारत आई, तो ऐमन भी उसके साथ ही आई थी। ऐमन ने भारत में एंट्री सबा के पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए की थी। उस पासपोर्ट में ऐमन का नाम और उसकी जन्मतिथि साफ-साफ दर्ज थी।

शिकायतकर्ता रुखसाना ने आगे बताया कि अम्मी और बेटी, दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद मेरठ में रह रही थीं। उन्होंने कभी भी कानूनी तरीके से भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की। रुखसाना ने यह भी कहा कि ऐमन ने मेरठ में ही पढ़ाई की, जबकि वह पाकिस्तानी नागरिक थी।

                                                              साभार: UP पुलिस

उन्होंने आगे बताया कि ऐमन के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी और बनावटी दस्तावेज तैयार किए गए। रुखसाना के मुताबिक, सबा ने भी दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवा लिए थे। इनमें एक सबा मसूद के नाम से और दूसरा नाजिया मसूद के नाम से था। शिकायत में कहा गया है कि ये सब जानबूझकर अपनी असली पहचान छिपाने और भारतीय अधिकारियों को धोखा देने के लिए किया गया।

रुखसाना ने अपनी शिकायत में सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि आरोपित फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर कई बार पाकिस्तान और दूसरे देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि सबा के अब्बा हनीफ अहमद कथित तौर पर पाकिस्तान नागरिक थे और उनका संबंध ISI से बताया जाता है। रुखसाना के अनुसार, इसी वजह से यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर हो जाता है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित अपनी असली पहचान छिपाकर दिल्ली में सेना मुख्यालय और दूसरे सरकारी दफ्तरों में भी अकसर आते-जाते रहे हैं।
FIR में यह भी दर्ज है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पहले इस मामले पर आपत्ति जताई थी तब उन्हें धमकाया और डराया गया था। रुखसाना का कहना है कि आरोपितों ने उन्हें यह कहकर दबाव बनाने की कोशिश की कि उनकी राजनीतिक पहुँच है और पुलिस प्रशासन में भी उनके संबंध हैं।

टेक्सास में बैन हुआ राहुल गाँधी के ह्यूस्टन प्रोग्राम से जुड़ा आतंकी संगठन CAIR, हमास-अलकायदा से कनेक्शन: हिंदू और भारत विरोधी कामों से जुड़ाव

   टेक्सास के गवर्नर एबॉट ने राज्य कानून के तहत CAIR को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया (फोटो साभार -     टेक्सास के गवर्नर एबॉट ने राज्य कानून के तहत सीएआईआर को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया/                  सीएआईआर))
टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) को राज्य कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन घोषित कर दिया। इस घोषणा में CAIR को मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ सूचीबद्ध किया गया है, जिसे एबॉट ने इसका उत्तराधिकारी संगठन बताया।

इस फैसले के बाद दोनों संगठनों पर टेक्सास में जमीन खरीदने-बेचने पर रोक लग गई है। इसके अलावा इन संगठनों की किसी भी तरह से मदद करने वालों के लिए कड़ी नागरिक और आपराधिक सजाओं का रास्ता भी खुल गया है।

                                                                                                                                    स्रोत: एक्स

घोषणा में क्या कहा गया है?

गवर्नर एबॉट के आदेश में सबसे पहले मुस्लिम ब्रदरहुड के इतिहास और विचारधारा का उल्लेख किया गया। इसमें इसे एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिस्ट आंदोलन बताया गया, जिसकी नींव हथियारबंद जिहाद और शरिया कानून लागू करने वाले वैश्विक खिलाफत के लक्ष्य पर रखी गई थी।

एबॉट ने इसके संस्थापक हसन अल-बन्ना और बाद में इसके सुप्रीम गाइड मोहम्मद बदी के बयानों का हवाला देकर कहा कि संगठन के उद्देश्यों में लगातार यही सोच बनी रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम ब्रदरहुड का नेटवर्क दुनिया भर में फैला है, जिसमें हमास भी शामिल है, जो इसका फ़िलिस्तीनी शाखा के रूप में शुरू हुआ था।

इसके बाद आदेश में CAIR का जिक्र किया गया और इसे अमेरिका में मौजूद मुस्लिम ब्रदरहुड के नेटवर्क का हिस्सा बताया गया। एबॉट ने इसके लिए फेडरल जाँचों, होली लैंड फ़ाउंडेशन टेरर फाइनेंसिंग केस के कानूनी निष्कर्षों और कई शैक्षणिक अध्ययनों का हवाला दिया, जिनमें CAIR के हमास और उससे जुड़े ढाँचे के साथ संबंध बताए गए थे।

आदेश में यह भी कहा गया कि 2008 में FBI ने CAIR के साथ अपने आधिकारिक संबंध खत्म कर दिए थे, और 2023 में बाइडेन प्रशासन ने भी कुछ संघीय दस्तावेजों से CAIR से जुड़े उल्लेख हटा दिए थे।

घोषणा का सबसे बड़ा हिस्सा उन CAIR से जुड़े व्यक्तियों पर केंद्रित था, जिन्हें बाद में आतंकवाद से जुड़े अपराधों में पकड़ा गया या उजागर किया गया। एबॉट ने इन मामलों को उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया ताकि यह दिखाया जा सके कि CAIR सिर्फ विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ढाँचा चरमपंथी नेटवर्कों से परिचालन स्तर पर भी जुड़ा हुआ है।

घोषणा में CAIR से जुड़े व्यक्तियों का उल्लेख

घोषणा में कई ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए गए जो कभी CAIR के नेतृत्व, स्टाफ या फंडरेज़िंग नेटवर्क का हिस्सा रहे थे और बाद में आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए या आरोपित हुए। एबॉट ने कहा कि यह एक लंबे समय से चल रहा पैटर्न है कि CAIR ऐसे लोगों को अपने संगठन में महत्वपूर्ण जगह देता रहा है जिनके आतंकवादी संगठनों से सक्रिय संबंध रहे हैं।
सबसे प्रमुख नाम घसान इलाशी का था, CAIR टेक्सास के संस्थापक बोर्ड सदस्य और होली लैंड फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष। उन्हें 2009 में आतंक वित्तपोषण के लिए दोषी ठहराया गया था और 65 साल की सजा मिली थी।
दूसरा नाम अब्दुरहमान आलामूदी का था, जिसने CAIR द्वारा आयोजित एक रैली में भाषण दिया था और खुद को हमास और हिज्बुल्लाह का समर्थक बताया था। बाद में वह अल-कायदा को फंडिंग करने का दोषी पाया गया।
तीसरा नाम रैंडल टॉड रोयर का था, जो CAIR में कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट और सिविल-राइट्स कोऑर्डिनेटर था। उसे 2004 में अल-कायदा और तालिबान की मदद की साजिश के लिए 20 साल की जेल हुई।
इसके बाद नाम आया बासेम खाफागी का, जो CAIR में कम्युनिटी रिलेशंस डायरेक्टर था। उसने 2003 में बैंक और वीजा फ्रॉड की बात कबूल की थी और उस पर पैसा कट्टरपंथी संगठनों को भेजने और अमेरिका पर आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रकाशित करने के आरोप थे।
घोषणा में रबीह हद्दाद का नाम भी था, जो CAIR के लिए फंड जुटाता था। उसे ग्लोबल रिलीफ फ़ाउंडेशन के मामले में गिरफ्तार किया गया और बाद में देश से निकाला गया। यह संगठन 2002 में अल-कायदा को फंडिंग के चलते बंद किया गया था।
सूची में मुथन्ना अल-हनूटी का नाम भी शामिल था, मिशिगन का CAIR डायरेक्टर, जिसे 2011 में इराक के दो लाख बैरल तेल लेने और सद्दाम हुसैन की मदद के लिए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में दोषी ठहराया गया।
एक और बड़ा नाम सामी अल-अरियान का था, पीआईजे (पैलेस्टीनियन इस्लामिक जिहाद) का फाइनेंसर और दोषी आतंकवादी। CAIR ने उसे 2014 में ‘Promoting Justice Award’ दिया था और 2020 के एक कार्यक्रम में भी उसे मंच दिया, जहाँ उसने CAIR का समर्थन बढ़ाने की अपील की।
घोषणा में निहाद अवाद का जिक्र था, CAIR के लंबे समय से कार्यकारी निदेशक। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले पर खुशी जताई थी। इन गंभीर आरोपों और नामों के जवाब में CAIR ने ग्रेग एबॉट को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी और उन्हें इजराइल फर्स्ट राजनेता कहा, साथ ही आरोप लगाया कि वह अमेरिकी मुसलमानों को बदनाम करने के लिए महीनों से एंटी-मुस्लिम माहौल बना रहे हैं।
                                                                                                                                  स्रोत: एक्स

CAIR और उसका भारत विरोधी प्रचार

CAIR एक इस्लामिस्ट संगठन है, जिसने कई बार भारत और हिंदुओं के खिलाफ बयान दिए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि CAIR के रिश्ते आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। यह संगठन लगातार हिंदू-विरोधी हिंदूफोबिक अभियान और प्रोपेगैंडा फैलाता रहा है। पहले भी CAIR ने अत्यंत हिंदूफोबिक ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ़्रेंस का खुलकर समर्थन किया था।
CAIR ने जनवरी 2022 में राणा अय्यूब की रिपोर्ट के आधार पर हिंदू-विरोधी प्रोपेगैंडा चलाया। उन्होंने प्रेस रिलीज जारी कर हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशी’ को थिएटरों में रिलीज न करने की माँग की और फिल्म को घृणित और खतरनाक हिंदुत्व प्रेरित एंटी-मुस्लिम प्रोपेगैंडा तक बता दिया।
CAIR ने पाकिस्तानी आतंकी आफिया सिद्दीकी को भी रिहा करने की माँग की है, जो अमेरिकी सेना और FBI पर हमले के लिए 86 साल की सजा काट रही है।
उसी साल CAIR ने Still Suspect: The Impact of Structural Islamophobia नाम से रिपोर्ट जारी की और दावा किया कि अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, CAIR को एक साल में 6,720 शिकायतें मिलीं, जिनमें इमिग्रेशन, यात्रा संबंधी भेदभाव, कानून प्रवर्तन, सरकारी दखल, स्कूल घटनाएँ और फ्री स्पीच जैसे मुद्दे शामिल थे।
CAIR का दावा है कि अमेरिकी सरकार का भेदभाव मुसलमानों को अधिक प्रभावित करता है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जो CAIR अमेरिका में इस्लामोफोबिया की शिकायत करता है, वही भारत में हिंदू-विरोधी नैरेटिव को लगातार बढ़ावा देता है।
दिसंबर 2022 में भी CAIR ने न्यू जर्सी में एक मोबाइल ट्रक पर दिखाए गए 26/11 हमले के वीडियो और लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों के नामों पर आपत्ति जताई और इसे नफरत फैलाने वाला कहा, जबकि वीडियो में सिर्फ सच दिखाया गया था।
CAIR कई बार आफिया सिद्दीकी जैसे आतंकवादियों के समर्थन में भी खड़ा रहा है। जून 2023 में, जब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अमेरिका गए, तो वह सुनीता विश्वनाथ के साथ एक चर्चा में बैठे दिखाई दिए। वह HfHR नामक कट्टर हिंदू-विरोधी संगठन की सह-संस्थापक है और CAIR तथा ICNA जैसे संगठनों के लिए कार्यक्रम आयोजित करती रही है।
इसके अलावा राहुल गाँधी ने 2024 में कट्टर इस्लामिस्ट और भारत-विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर से भी मुलाकात की। ओमर इस्लामिस्ट एजेंडे को बढ़ावा देती हैं, मुस्लिम अपराधियों पर हुई कार्रवाई को इस्लामोफोबिया बताती हैं और आतंकवाद पर सवाल उठाने से बचती हैं।
वह 9/11 हमले को भी हल्के में लेते हुए CAIR के एक कार्यक्रम में बोली थीं कि यह कुछ लोगों ने कुछ कर दिया और इसके कारण मुसलमान अमेरिका में अपने अधिकार खो रहे हैं। इन सभी घटनाओं से CAIR के विचार, नेटवर्क और उसके भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी रुख स्पष्ट रूप से सामने आते हैं।

इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास के साथ संबंध

ध्यान देने वाली बात यह है कि CAIR के रिश्ते फ़िलिस्तीनी इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। हमास का मानवाधिकार उल्लंघन का लंबा इतिहास है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा, इजरायल, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कई देशों ने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है।

2047 तक भारत को गजवा-ए-हिन्द बनाने वालों का योगी सरकार ने किया भंडाफोड़; उत्तर प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट के तार पश्चिम बंगाल से पाकिस्तान तक जुड़े

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब कहा था "हिन्दुओं बटोगे तो काटोगे" और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना "एक हैं तो safe हैं" ऐसे ही नहीं कहा था। याद करो CAA विरोध के समय हिन्दुओं की गैर-मौजूदगी में मुसलमानों को कहा जाता था कि जब तक हिन्दुस्तान मुस्लिम देश नहीं बन जाता हिन्दुओं को गुमराह करने तिरंगा थामों और हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते रहो। उस समय लिखे ब्लॉग(नीचे लिंक में देखिए) को 1.5 लाख से अधिक आदरणीय पाठक पढ़ चुके हैं। ये Love Jehad बहुत गहरा षड़यंत्र है। जैसे-जैसे षड्यंत्रकारी पकडे जा रहे हैं, सारा विपक्ष और मुस्लिम कट्टरपंथी कुछ नहीं बोल पा रहा, मातम छाया हुआ है जिसकी भड़ास संसद में उपद्रव कर निकाली जा रही है। सदन से बाहर जिस बात को लेकर शोर इतना ही नहीं, अखिलेश मस्जिद में मीटिंग करते हैं तो शाम को जमीयत की मीटिंग में विपक्ष के ज्यादातर नेता शामिल होते हैं। इस मायाजाल को खुली आँखों और दिमाग से देखना और समझना होगा। जिस पर हर हिन्दू विशेषकर युवतियों को सोंचना होगा। आधुनिकता को त्याग भारतीय संस्कृति को धारण करें। उसमे ही उनका और देश का सम्मान है। 

दूसरे, 2024 चुनावों में "संविधान और लोकतंत्र को बचाने मोदी को हराओ" का नारा लगाकर जनता को गुमराह किया और जनता गुमराह भी हुई। लेकिन अक्ल से पैदल जनता इन सनातन विरोधी विपक्ष के जहर को नहीं समझ पायी। आज बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता लिस्ट का सत्यापन होने पर देखो कितना हल्ला बोला जा रहा है। यहाँ तक कि संवैधानिक पद पर बैठी ममता बनर्जी अभी से चुनाव आयोग के विरोध भड़काऊ बयानबाज़ी कर रही है। आखिर क्यों? जिन घुसपैठियों का अपना दामाद बना वोटर लिस्ट में डाल उनकी वोटों से सत्ता हासिल की जाती थी। उनकी पहचान कर निकालने की प्रक्रिया होने से विपक्ष के पेट में मरोड़ हो रही है। इतना ही नहीं Operation Sindoor में आतंकियों पर हुए हमलों से पाकिस्तान से कहीं ज्यादा हमारा विपक्ष परेशान है।    
उत्तर प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट चलाने वाले गिरोह का कनेक्शन PFI, SDPI समेत पाकिस्तान के कई आतंकी संगठनों से होने के प्रमाण मिले हैं। इतना ही नहीं सिंडिकेट के तार मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हुए हैं। छह स्टेट्स में ऑपरेट कर रहे इस रेडकलाइज नेटवर्क में लव जिहाद के जरिए 100 से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन किए जाने के सबूत मिले हैं। प्रदेश की योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर चल रहे इस धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश किया है। बलरामपुर के छांगुर बाबा से लेकर आगरा तक इस सिंडिकेट में शामिल गिरफ्तार अभियुक्त पूरे नेटवर्क में अलग-अलग रोल निभाते थे। ये लोग ISIS पैटर्न पर लड़कियों को मुस्लिम बनाने का नेक्सस चलाते थे। इसके अलावा सिंडिकेट के लिए फंड जुटाना, फंड को चैनलाइज करना, धर्मांतरण के लिए लोगों को लीगल एडवाइस देना, नए फोन और सिम कार्ड दिलवाना, हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाना, धर्म परिवर्तन के लिए कानूनी दस्तावेज तैयार करना शामिल है।

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सेकुलरिज्म सिर्फ तब तक, जब तक भारत में इस्लाम की हुकूमत नहीं ले आते : अरफ़ा खानुम, मुस्लिम पत्रकार
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार ऐसा लगता है मानो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, CAA-NRC का विरोध अब शाहीन बाग़ से होते हुए अपने असल.... 

कनाडा, कतर और UAE जैसे देशों की एजेंसियों से फंडिंग

आगरा के रहने वाले रमेश की FIR ने एक अंतरराष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा किया है। इसके बाद सिंडिकेट से जुड़े 6 राज्यों से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन्हें अमेरिका, लंदन, कनाडा, कतर और UAE जैसे देशों की एजेंसियों से फंडिंग मिल रही थी। लापता दोनों बहनों को भी पश्चिम बंगाल से रेस्क्यू कर परिवार को सौंपा गया। तब पता चला कि दीपाली ‘अमीना’ और खुशी ‘जोया’ बन चुकी हैं। शुरुआती जांच के बाद पुलिस के मुताबिक दोनों बहनों को टारगेट बनाने वाली गैंग हिंदू लड़कियों को ‘लव जिहाद’ और कट्टरपंथी बनाने की गतिविधियों में शामिल है। ये ISIS के पैटर्न पर धर्मांतरण करा रही है। इस गैंग के पाकिस्तानी आतंकी संगठन से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। गैंग का सरगना अब्दुल रहमान और आयशा अब तक सैकड़ों लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं। दोनों ने खुद भी धर्मांतरण किया है।
पुलिस कोलकाता नहीं जाती, तो बेटियों का निकाह हो जाता
आगरा के सदर इलाके से गायब हुईं दोनों बहनों को पुलिस ने कोलकाता से रेस्क्यू कर परिवार को सौंप दिया है। बेटियों की वापसी से परिवार खुश है, लेकिन सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने उन्हें मीडिया के सामने आने से मना किया है। विक्टिम बच्चियों के पिता रमेश से मीडिया को बताया कि दीपाली आगरा में PhD की तैयारी कर रही थी, तब उसकी दोस्त साइमा उसे कश्मीर घुमाने के बहाने अपने घर ले गई। वहां उसने मेरी बेटी का ब्रेनवॉश किया। दीपाली कश्मीर से लौटी तो अजीब सी बातें करने लगी। उसमें हिंदू रीति-रिवाजों को लेकर विरोध की भावना आ गई थी। घर पर कोई पूजा होती तो वो उसमें शामिल नहीं होती थी। वो दिनभर छोटी बहन खुशी के साथ ही रहती। वो उसे भी नमाज अदा करने और हिजाब पहनने के फायदे बताने लगी थी। ‘दोनों बहनें एक ही कमरे में रहती थीं। धीर-धीरे बड़ी बहन की बातों और सोच का असर छोटी बहन पर भी होने लगा। दोनों ने घर से भागने का प्लान बनाया और तीन माह पहले अचानक गायब हो गईं।’ रमेश आगे बताते हैं, ‘मेरी शिकायत पर पुलिस ने 4 मई को दोनों बेटियों के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और कोलकाता से उन्हें बचाकर ले आई। अगर ऐसा न होता तो वो लोग मेरी कुंवारी बेटियों का अब तक निकाह करवा चुके होते।
ब्रेनवाश से इस्लाम कबूल कराके कुर्बानी के लिए तैयार किया
इस मामले की जांच में शामिल UP-ATS के एक सीनियर अफसर के मुताबिक 24 मार्च को लड़कियों के परिजन घर से बाहर गए हुए थे। इसी का फायदा उठाकर दीपाली अपनी छोटी बहन खुशी को लेकर दिल्ली आ गई। यहां उनकी मुलाकात रीत उर्फ इब्राहिम नाम के लड़के से हुई, जो इस गैंग का मेंबर था। उसी ने ही दोनों को दिल्ली से पहले बिहार, फिर वहां से कोलकाता भिजवाया। दीपाली और खुशी को कोलकाता में एक मुस्लिम बस्ती में ठहराया गया। यहां उनकी मुलाकात आयशा से हुई। उसने दोनों का इस तरह से ब्रेनवॉश किया कि वो मुजाहिदा (कुर्बान होने को तैयार) बनने के लिए तैयार हो गईं। इसके बाद एक मौलवी की मदद से दोनों बहनों ने इस्लाम कबूल लिया। धर्म परिवर्तन के बाद दीपाली ‘अमीना’ और खुशी ‘जोया’ बन गईं।’ ‘पुलिस ने कोलकाता से रेस्क्यू की गईं दोनों लड़कियों के फोन की जांच की। इसमें पता चला है कि दोनों गैंग के सरगना अब्दुल रहमान के संपर्क में थीं। वो रोजाना चैट के जरिए उनसे बात करता था। पता चला है कि वो बातचीत में लड़कियों को उनकी जैसी दूसरी लड़कियों का धर्म बदलवाने की नसीहत देता था।’
छह स्टेट्स में ऑपरेट कर रहा रेडकलाइज नेटवर्क, 100 लव जिहाद के केस
आगरा धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों के खिलाफ हुए एक्शन के बारे में UP के DGP राजीव कृष्ण ने मीडिया को बताया कि मामले की शुरुआती जांच में इस गिरोह का कनेक्शन PFI, SDPI समेत पाकिस्तान के कई आतंकी संगठनों से होने के संकेत मिले हैं। आगरा से लापता हुई 2 लड़कियों की सूचना मिलने पर हमने पश्चिम बंगाल, गोवा, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान और UP में 11 टीमें लगाई थीं। करीब छह स्टेट्स में ऑपरेट कर रहे इस रेडकलाइज नेटवर्क में हमें लव जिहाद के जरिए 100 से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन किए जाने के सबूत मिले हैं। गिरफ्तार अभियुक्त पूरे नेटवर्क में अलग-अलग रोल निभाते थे।
आयशा उर्फ कृष्णा के फोन से मिले हिंदू धर्म विरोधी VIDEO
पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि धर्मांतरण गैंग की पूरी फंडिंग गोवा की रहने वाली आयशा उर्फ एसबी कृष्णा कर रही थी। आयशा कनाडा में सैयद दाऊद इब्राहिम से मिलने वाली फंडिंग को गैंग में बांटती थी। इन पैसों को UAE, लंदन, कनाडा और अमेरिका के रास्ते भारत भेजा जाता था, ताकि इसे ट्रैक करना मुश्किल हो। आयशा ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वो 2020 में पंजाब यूनिवर्सिटी से MSc डेटा साइंस की पढ़ाई कर रही थी। उसी दौरान यूनिवर्सिटी में कश्मीर के कुछ स्टूडेंट्स उसके संपर्क में आए। उन्होंने उसे इस्लाम धर्म कबूलने के लिए मोटिवेट किया। उनके कहने पर वो कोलकाता गई और वहीं एसबी कृष्णा से आयशा बन गई। 2021 से वो अब्दुल रहमान गैंग में फंडिंग का काम संभाल रही है। उसका पति शेखर रॉय उर्फ हसन अली कोलकाता के कोर्ट में नौकरी करता था। शेखर गैंग के लोगों के लिए लीगल एडवाइजर के तौर पर काम करता था।
छांगुर बाबा: 2015 से धर्मांतरण के खेल में एक्टिव हुआ
दूसरी ओर बलरामपुर का छांगुर बाबा भी धर्मांतरण गिरोह को लेकर सुर्खियों में है। छांगुर बाबा का घर बलरामपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर रेहरामाफी गांव में है। 2011 से पहले तक वह गांव-गांव साइकिल से अंगूठी और नग बेचने का काम करता था। 2011 में पत्नी कुतबुनिशा प्रधान बनी तो उसने यह काम कम कर दिया। वह अक्सर मुंबई भी जाता और वहां वरली में हाजी अली दरगाह के बाहर नग बेचता था। 2015 में उसने धर्मांतरण के काम में एंट्री ली। इसका पहला प्रूफ नवीन और नीतू के रूप में मिलता है। मुंबई के सिंधी परिवार से आने वाला बिजनेसमैन नवीन घनश्याम रोहरा इस्लाम धर्म अपनाकर जमालुद्दीन बन गया। नीतू रोहरा नसरीन बन गई। दोनों ने छांगुर को अपना सब कुछ मान लिया। छांगुर जो कहता, दोनों वही करते थे। 2020 में छांगुर दोनों को लेकर अपने गांव रेहरामाफी चला आया। अपने गांव के बगल मधुपुर में 3 बीघा जमीन ली। उस पर आलीशान कोठी और एक डिग्री कॉलेज बनवाया। फिर यहीं से धर्मांतरण की पूरी दुकान शुरू हो गई।
मुस्लिम युवाओं को उकसाता, हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाओ
छांगुर धर्मांतरण के लिए मुस्लिम युवाओं को हिंदू लड़कियों से दोस्ती करने और फिर उनका धर्मांतरण करवाने के लिए उकसाता था। ऐसे कई केस सामने आए हैं। एक केस औरैया जिले का है। यहां की 22 साल की मानवी शर्मा उर्फ गोल्डी 3 जुलाई को लखनऊ में दोबारा से हिंदू धर्म में वापस आ गई। उन्होंने जो कहानी बताई, वह हैरान करती है। मानवी कहती हैं- मेरा घर औरैया जिले के बाबरपुर गांव में है। मैंने वहीं आनंतराम के एक कॉलेज से बीएससी किया। मेरे पिता अरविंद शर्मा और मां ज्योति शर्मा कानपुर गए थे, तो उन्हें एक लड़का मिला। उसने अपना नाम रुद्र शर्मा बताया। मां ने उससे पापा की शराब की लत का जिक्र किया। इस पर उसने छांगुर बाबा का नाम बताया। कहा, बाबा शराब की लत छुड़ा देंगे। रुद्र शर्मा हम सबको छांगुर बाबा से मिलाने के लिए ले गया। वहां छांगुर ने हम सबको ताबीज दिया। इसके बाद उसकी मुझसे बात होने लगी। बाद में उसने फतेहपुर की एक मस्जिद में मुझसे निकाह किया। तब मुझे पता चला कि वह रुद्र शर्मा नहीं, मेराज अंसारी है। इसके बाद हम उसे छोड़कर अपने घर चले आए। वह एक दिन घर आया। उसके फोन में मेरे कुछ वीडियो थे। मेरे पापा ने कहा कि वीडियो डिलीट कर दो। उसने कहा कि अपनी छोटी बेटी से शादी करवाओगे, तब कर दूंगा। पापा को बहुत गुस्सा आया और मारपीट में मेराज अंसारी की मौत हो गई। मेरे मम्मी-पापा मेराज की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
फरीदाबाद और लखनऊ में लव जिहाद, छांगुर का नाम आया
हरियाणा के फरीदाबाद की मुजेसर थाने की पुलिस ने आमिर हुसैन को गिरफ्तार किया है। संजय कॉलोनी की रहने वाली 16 साल की नाबालिग ने कहा- आमिर उसके पास की कॉलोनी में ही रहता था। सहेली नेहा खान ने उससे मुलाकात करवाई। इसके बाद वह मुझे दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह ले गया। वहां हमारी मुलाकात जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा से हुई। छांगुर ने धर्म बदलकर शादी करने को कहा और कई बड़े-बड़े सपने दिखाए। इसके बाद उसने नमाज अदा करवाई। ताबीज भी दी। ऐसा ही एक मामला लखनऊ के विनय खंड का है। यहां की गुंजा गुप्ता को छांगुर ने इस्लाम धर्म में कन्वर्ट करवाकर अलीना बना दिया, क्योंकि अबू अंसारी नाम के एक लड़के ने खुद को अमित बताकर उससे शादी कर ली थी। बाद में पता चला कि वह हिंदू नहीं, मुस्लिम है। गुंजा को लेकर अबू बलरामपुर के मधेपुर पहुंचा। वहां एक उर्स में छांगुर से मुलाकात करवाई और गुंजा को अलीना बना दिया। अबू छांगुर गैंग का सदस्य है। वह इसी तरह से महिलाओं का धर्मांतरण करवाता रहा है।
मास्टरमाइंड जलालुद्दीन तीन तरीके से कराता था धर्मांतरण
दरअसल, धर्मांतरण का मास्टरमाइंड जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा मुख्य रूप से 3 तरह से धर्म परिवर्तन करवाता था। उसके इन 3 तरीकों में एक तरीका मुस्लिम युवाओं को हिंदू लड़की से शादी करने और फिर उसे इस्लाम कबूल करवाने का था। दूसरे तरीके में वह लोगों को नीतू यानी नसरीन और उसके पति नवीन (जमालुद्दीन) को दिखाता। कहता, इन्होंने इस्लाम कबूल किया और आज इनके पास करोड़ों रुपए हैं। आलीशान बंगला और गाड़ी है। लोग उसकी इस बात से प्रभावित होते और फिर एक समय के बाद इस्लाम अपना लेते थे। छांगुर के धर्मांतरण का तीसरा तरीका नौकरी का लालच देना, मुकदमे और मुसीबतों को खत्म कराना था। वो कई तरह के प्रलोभन देकर हिंदुओं को मुस्लिम धर्म में कन्वर्ट करवाना था। छांगुर का धर्मांतरण का यह खेल पिछले 10 साल में खूब फला-फूला, लेकिन अब योगी सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए छांगुर बाबा की पोल खोल कर रख दी है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने उसके काले कारनामों की फाइलें खोलनी शुरू कीं। छापेमारी करके साथ के लोगों को पकड़ना शुरू किया।

उत्तर प्रदेश : कैसे-कैसे होना चाहिए संभल में दंगा… व्हॉट्सऐप ग्रुप पर सब तय हुआ: एडमिन समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क निकला, 1000+ पन्नों की चार्जशीट में दुबई तक का कनेक्शन उजागर

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (बाएँ), संभल हिंसा (बीच में), शारिक साठा (दाएँ), (फोटो साभार : Aajtak & Organiser)
अनेकों बार लिखा जा रहा है कि हिन्दू हितों की रक्षा करने वालों की जेहादी बेशक जान लेकर सात समुन्दर पार भाग जाएं, लेकिन जाँच होने पर ईश्वर सामने ले ही आता है। जिस तरह आतताइयों के क्रूर राज में हिन्दू मन्दिरों और देवी-देवताओं को धरती माता में दबा दिया गया था, आज वही मूर्तियां चीख-चीखकर अपने दबे होने के संकेत दे रही है। इसीलिए जहाँ खुदा वहीं मंदिरों के अवशेष निकल रहे हैं। और जितने भी दंगे-फसाद हो रहे हैं सच्चाई को बाहर आने से रोकने के लिए होते रहे हैं, भविष्य में भी होते रहेंगे। यहाँ सनातनियों को वोट देते समय सतर्क होना पड़ेगा कि किसी सनातन विरोधी नेता और पार्टी को वोट न दे। दूसरे, चुनाव आयोग और निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सबको इस गंभीर मुद्दे पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर तो और भी सतर्कता बरतनी चाहिए।         

दंगाग्रस्त क्षेत्रों के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को सभी सरकारो और पुलिस को सख्त आदेश देने चाहिए कि दंगा होने पर सबसे पहले दो राउंड अश्रुगैस फिर blind fire और आखिर में ढोल पीटने के लिए लाठीचार्ज। अक्सर यही सुनने में आता है कि बाहरी लोग आकर यहाँ का माहौल ख़राब कर दिया। जब blind fire होने पर जो जख्मी होंगे स्थानीय ही होंगे और उनको रोने वाले भी स्थानीय कोई बाहरी नहीं होगा।    

संभल हिंसा की गहराई में जाने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं, जो पहले की रिपोर्टों में नहीं थीं। SIT की चार्जशीट के अनुसार, इस खूनी खेल का साजिशकर्ता दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा है, जिसे संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का खुला प्रोटेक्शन मिला था।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने दावा किया कि साठा ने सीधे तौर पर मुस्लिम भीड़ को भड़काया था। शारिक साठा ने मुस्लिमों को उकसाया कि वे जामा मस्जिद के सर्वे को रोकें, क्योंकि यह उनकी ‘500 साल पुरानी बाबर की निशानी’ है, जिसे बचाना उनका फर्ज़ है।

इस साज़िश का सबसे घिनौना पहलू यह है कि शारिक साठा के इशारे पर ही हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की साज़िश रची गई थी। इस काम के लिए शारिक साठा गैंग से जुड़े मोहम्मद गुलाम को सुपारी दी गई थी, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया था।

 मोहम्मद गुलाम के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार भी बरामद हुए, जो इस साज़िश की गंभीरता को दिखाते हैं। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि शारिक साठा गैंग का संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की D कंपनी से है, जिससे इस हिंसा के पीछे एक गहरी और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साज़िश की बू आती है।

व्हाट्सएप ग्रुप में साजिश का पटकथा

संभल हिंसा की साज़िश एक व्हाट्सएप ग्रुप ‘सांसद संभल’ से रची गई थी, जिसके एडमिन खुद सांसद जियाउर्रहमान बर्क थे। पुलिस को पक्के सबूत मिले हैं कि 22 और 24 नवंबर को इसी ग्रुप में हिंसा भड़काने के मैसेज भेजे गए। इन मैसेज में भारी भीड़ जुटाने और सरकारी सर्वे को किसी भी कीमत पर रोकने का निर्देश था।

दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा ने भी 23 नवंबर को फोन पर निर्देश दिए थे कि सर्वे नहीं होना चाहिए। इस भीड़ का मुख्य निशाना हिंदू वकील विष्णु शंकर जैन थे, जिनकी हत्या की साज़िश रची गई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।

सुनियोजित थी संबल हिंसा साजिश

24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा ने पूरे नॉर्थ इंडिया को हिला दिया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि विवादित मस्जिद उस जगह बनी है, जहाँ पहले श्रीहरिहर मंदिर था। कोर्ट के आदेश पर जब एडवोकेट कमिश्नर की टीम सर्वे के लिए पहुँची, तो मुस्लिम भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया।
पुलिस की जाँच में सामने आया है कि यह हिंसा कोई अचानक नहीं हुई, बल्कि एक सुनियोजित साज़िश का नतीजा थी। SIT ने अपनी 11वीं चार्जशीट में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 23 लोगों को आरोपित बनाया है, जबकि विधायक पुत्र सुहैल इकबाल को क्लीनचिट मिली है।
इस सुनियोजित हमले में चार लोगों की जान गई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। शाही जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने पुलिस को बताया कि सपा सांसद बर्क की इसमें बड़ी भूमिका थी। पहले 3000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई थी, और अब 1200 पन्नों की एक और चार्जशीट दाखिल की गई है।

ममता बनर्जी ने उस अहमद हसन इमरान को बनाया राज्य सभा सांसद जिसका हिंदू विरोधी हिंसा में नाम, ISI से लिंक…: संदेशखाली पर TMC जो कर रही, वही उसका DNA

संदेशखाली में हिंदू महिलाओं की आपबीती सुन देश सन्न है। लेकिन बंगाल मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने पार्टी नेताओं से सवाल तक नहीं कर रहीं। उलटा वह उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं और इसके लिए भाजपा-आरएसएस को जिम्मेदार बता रही हैं। उन्होंने संदेशखाली को आरएसएस बंकर कहा है। साथ ही अपने नेता शाहजहाँ शेख का बचाव करते हुए ये कहा कि जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के जो इल्जाम सामने आए हैं वो महिलाओं ने दबाव में दिए।

ऐसा पहली बार नहीं है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो किसी ऐसे शख्स का बचाव कर रही हों जिसपर हिंदू विरोधी घटनाओं में शामिल होने का इल्जाम हो। बीते समय में भी वह कई हिंदू विरोधी नेताओं का पक्ष ले चुकी हैं। इसके अलावा एक बार तो उन्होंने पाकिस्तान के जन्मे हिंदू विरोधी नेता को राज्यसभा तक पहुँचा दिया था। उस नेता का नाम अहमद हसन इमरान था।

आतंकी संगठनों से लिंक से लेकर हिंदू विरोधी हिंसा में था अहमद हसन का नाम

अहमद हसन इमरान का जन्म कथित तौर पर पूर्वी पाकिस्तान के सिलहट के श्रीहट्टा के एक गाँव में हुआ था और वह बांग्लादेश के बनने से पहले 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आया था। इमरान ने पश्चिम बंगाल में ‘कलाम’ नाम की एक बंगाली पत्रिका में कार्यकारी संपादक के रूप में काम किया।
हालाँकि, बाद में उसने पत्रिका को शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन को बेच दिया। इसके अलावा इमरान ने बांग्लादेशी दैनिक नया दिगंता के लिए भारत संवाददाता के रूप में भी काम किया था। आज नया दिगंता जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का मुखपत्र है।
अहमद हसन इमरान के बारे में खुफिया एजेंसियों की जाँच कहती हैं कि उसके पाकिस्तान की ISI से संबंध थे। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में (अब) प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सदस्य भी था। इसके अलावा उसने जमात-ए-इस्लामी (पहले जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, जेएमबी के नाम से जाना जाता था), जमात-उल-मुजाहिदीन और अन्य इस्लामी आतंकवादी संगठनों के लिए भी काम किया।
खुफिया रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अहमद हसन इमरान 1977 के बाद नियमित रूप से बांग्लादेश जाता था और जेएमबी आतंकवादियों से मिलता था। 2001 में, अहमद हसन इमरान ने हावड़ा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (आईडीबी) द्वारा आयोजित इस्लामिक दर्शन पर एक सेमिनार में भाग लिया था। यहाँ जेएमबी आतंकी गुलाम आजम के बेटे ने कहा था कि इस्लाम एक राष्ट्र से बड़ा है। इस सेमिनार से एक साल पहले इमरान की पत्रिका ‘कलाम’ की ओर से भी एक सेमिनार आयोजित किया था जिसमें जमात के आतंकवादी अबुल कासेम अली और अबू जाफर ने भाग लिया था।

नलियाखाली गाँव में हिंदू विरोधी हिंसा कराने वाला था अहमद हसन इमरान

13 फरवरी 2013 को मौलवी रोहुल कुद्दुस की कथित हत्या को लेकर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने नलियाखाली गाँव के हिंदुओं पर कहर बरपाया था। उस हिंदू विरोधी हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता भी अहमद हसन इमरान को बताया जाता है। इस हिंसा में नलियाखाली गाँव, जो दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग पुलिस स्टेशन परिसर के अंतर्गत आता है, वहाँ लगभग 10,000 लोगों की भीड़ ने नलियाखली और पड़ोसी हेरोभंगा, गोपालपुर और गोलाडोगरा गाँवों में 200 घरों को जला दिया था। रिपोर्ट बताती है कि तब ये भीड़ बड़ी संख्या में कोलकाता से ट्रक में भरकर नलियाखली लाई गई थी। भीड़ के हमले में कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
                                         हिंसा के बाद हिंदुओं के जले घर (तस्वीर साभार: NDTV)
उसी दौरान जयनगर पुलिस स्टेशन के बारुईपुर क्षेत्र में एक दर्जन हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों को लूट लिया गया। इसके बाद, कैनिंग, जयनगर, कुलतली और बसंती पुलिस थाना क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों में भी हिंसा की सूचना मिली थी। बाद में तत्कालीन जिला खुफिया ब्यूरो (डीआईबी) ने जिला पुलिस अधीक्षक को दो पेज की रिपोर्ट भेजी थी। (मामला संख्या: 84, दिनांक 19.02.2013, आईपीसी की धारा 394/302/307/153 ए और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27)।
डीआईबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि अहमद हसन इमरान के उकसावे के कारण, विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा राजाबाजार, मेटियाब्रुज़, मोगराहाट, बसंती और अन्य स्थान पर इकट्ठा हुए थे। रिपोर्ट में ये भी लिखा था- “…अहमद हसन इमरान और रहमान के बीच विवाद है। यदि हम रहमान से मिलें, तो उसकी (अहमद हसन) और अन्य लोगों की गुप्त गतिविधियों के संबंध में अधिक जानकारी और सबूत इकट्ठा करने की पूरी संभावना है, जिनके कारण पूरा माहौल खराब हो रहा है और सांप्रदायिकता फैल रही है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अहमद हसन विदेशी धन इकट्ठा करता है और चोरी-छिपकर ऐसी हिंसाओं को अंजाम दिलवाता है।
                                                        डीआईबी रिपोर्ट (साभार: इंडिया टुडे)

टीएमसी ने अहमद को भेजा राज्यसभा

2013 की हिंसा की घटना पर डीआईबी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अहमद हसन इमरान मुस्लिम युवाओं को भड़काने और उन्हें बम और अन्य हथियारों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजने के लिए जिम्मेदार था। लेकिन, बावजूद इस रिपोर्ट के 2014 में मुस्लिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए इमरान को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा की सदस्यता से पुरस्कृत किया था।
ऐसे में सोचिए जब तृणमूल कांग्रेस आतंकवादी समूहों से संबंध रखने के आरोपित और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को राज्यसभा भेज सकती है, तो टीएमसी प्रमुख द्वारा एक अन्य हिंदू विरोधी शाहजहाँ शेख को समर्थन देता देखना कहाँ आश्चर्य की बात है।

शारदा चिट फंड में नाम

दिलचस्प बात यह है कि अहमद हसन इमरान का नाम अन्य आतंकी संबंधों, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में शामिल होने के अलावा शारदा चिट फंड घोटाले में भी आया था। 2014 में, टीएमसी सांसद अहमद हसन इमरान से प्रवर्तन निदेशालय ने शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के साथ उनके संबंधों पर पूछताछ की थी। ईडी अधिकारियों ने इमरान से सवाल किया था कि वह बंगाली दैनिक कलाम कैसे चला रहे थे।

तुष्टिकरण की राजनीति में जुटी टीएमसी

टीएमसी वर्षों से मुस्लिम समुदाय के तुष्टीकरण की राजनीति में लगी हुई है। आज संदेशखाली मामले में पीड़िताओं का दावा है कि इलाके की विवाहित हिंदू महिलाओं को उनकी उम्र और सुंदरता के आधार पर उठाया जाता है और टीएमसी के लोग ‘संतुष्ट’ होने तक उनका रात-दिन उनका उत्पीड़न करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी इन आरोपों को भाजपा-आरएसएस की साजिश कहकर खारिज कर रही हैं। जो कि बिलकुल हैरान करने वाला नहीं है।
आखिरकार जब टीएमसी अहमद हसन इमरान जैसे किसी व्यक्ति का समर्थन कर सकती है, तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर पार्टी शाहजहाँ शेख को राज्यसभा के लिए नामांकित करती है और उनके कामों पर पर्दा डालती है।