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ममता बनर्जी ने उस अहमद हसन इमरान को बनाया राज्य सभा सांसद जिसका हिंदू विरोधी हिंसा में नाम, ISI से लिंक…: संदेशखाली पर TMC जो कर रही, वही उसका DNA

संदेशखाली में हिंदू महिलाओं की आपबीती सुन देश सन्न है। लेकिन बंगाल मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने पार्टी नेताओं से सवाल तक नहीं कर रहीं। उलटा वह उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं और इसके लिए भाजपा-आरएसएस को जिम्मेदार बता रही हैं। उन्होंने संदेशखाली को आरएसएस बंकर कहा है। साथ ही अपने नेता शाहजहाँ शेख का बचाव करते हुए ये कहा कि जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के जो इल्जाम सामने आए हैं वो महिलाओं ने दबाव में दिए।

ऐसा पहली बार नहीं है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो किसी ऐसे शख्स का बचाव कर रही हों जिसपर हिंदू विरोधी घटनाओं में शामिल होने का इल्जाम हो। बीते समय में भी वह कई हिंदू विरोधी नेताओं का पक्ष ले चुकी हैं। इसके अलावा एक बार तो उन्होंने पाकिस्तान के जन्मे हिंदू विरोधी नेता को राज्यसभा तक पहुँचा दिया था। उस नेता का नाम अहमद हसन इमरान था।

आतंकी संगठनों से लिंक से लेकर हिंदू विरोधी हिंसा में था अहमद हसन का नाम

अहमद हसन इमरान का जन्म कथित तौर पर पूर्वी पाकिस्तान के सिलहट के श्रीहट्टा के एक गाँव में हुआ था और वह बांग्लादेश के बनने से पहले 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आया था। इमरान ने पश्चिम बंगाल में ‘कलाम’ नाम की एक बंगाली पत्रिका में कार्यकारी संपादक के रूप में काम किया।
हालाँकि, बाद में उसने पत्रिका को शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन को बेच दिया। इसके अलावा इमरान ने बांग्लादेशी दैनिक नया दिगंता के लिए भारत संवाददाता के रूप में भी काम किया था। आज नया दिगंता जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का मुखपत्र है।
अहमद हसन इमरान के बारे में खुफिया एजेंसियों की जाँच कहती हैं कि उसके पाकिस्तान की ISI से संबंध थे। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में (अब) प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सदस्य भी था। इसके अलावा उसने जमात-ए-इस्लामी (पहले जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, जेएमबी के नाम से जाना जाता था), जमात-उल-मुजाहिदीन और अन्य इस्लामी आतंकवादी संगठनों के लिए भी काम किया।
खुफिया रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अहमद हसन इमरान 1977 के बाद नियमित रूप से बांग्लादेश जाता था और जेएमबी आतंकवादियों से मिलता था। 2001 में, अहमद हसन इमरान ने हावड़ा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (आईडीबी) द्वारा आयोजित इस्लामिक दर्शन पर एक सेमिनार में भाग लिया था। यहाँ जेएमबी आतंकी गुलाम आजम के बेटे ने कहा था कि इस्लाम एक राष्ट्र से बड़ा है। इस सेमिनार से एक साल पहले इमरान की पत्रिका ‘कलाम’ की ओर से भी एक सेमिनार आयोजित किया था जिसमें जमात के आतंकवादी अबुल कासेम अली और अबू जाफर ने भाग लिया था।

नलियाखाली गाँव में हिंदू विरोधी हिंसा कराने वाला था अहमद हसन इमरान

13 फरवरी 2013 को मौलवी रोहुल कुद्दुस की कथित हत्या को लेकर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने नलियाखाली गाँव के हिंदुओं पर कहर बरपाया था। उस हिंदू विरोधी हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता भी अहमद हसन इमरान को बताया जाता है। इस हिंसा में नलियाखाली गाँव, जो दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग पुलिस स्टेशन परिसर के अंतर्गत आता है, वहाँ लगभग 10,000 लोगों की भीड़ ने नलियाखली और पड़ोसी हेरोभंगा, गोपालपुर और गोलाडोगरा गाँवों में 200 घरों को जला दिया था। रिपोर्ट बताती है कि तब ये भीड़ बड़ी संख्या में कोलकाता से ट्रक में भरकर नलियाखली लाई गई थी। भीड़ के हमले में कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
                                         हिंसा के बाद हिंदुओं के जले घर (तस्वीर साभार: NDTV)
उसी दौरान जयनगर पुलिस स्टेशन के बारुईपुर क्षेत्र में एक दर्जन हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों को लूट लिया गया। इसके बाद, कैनिंग, जयनगर, कुलतली और बसंती पुलिस थाना क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों में भी हिंसा की सूचना मिली थी। बाद में तत्कालीन जिला खुफिया ब्यूरो (डीआईबी) ने जिला पुलिस अधीक्षक को दो पेज की रिपोर्ट भेजी थी। (मामला संख्या: 84, दिनांक 19.02.2013, आईपीसी की धारा 394/302/307/153 ए और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27)।
डीआईबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि अहमद हसन इमरान के उकसावे के कारण, विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा राजाबाजार, मेटियाब्रुज़, मोगराहाट, बसंती और अन्य स्थान पर इकट्ठा हुए थे। रिपोर्ट में ये भी लिखा था- “…अहमद हसन इमरान और रहमान के बीच विवाद है। यदि हम रहमान से मिलें, तो उसकी (अहमद हसन) और अन्य लोगों की गुप्त गतिविधियों के संबंध में अधिक जानकारी और सबूत इकट्ठा करने की पूरी संभावना है, जिनके कारण पूरा माहौल खराब हो रहा है और सांप्रदायिकता फैल रही है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अहमद हसन विदेशी धन इकट्ठा करता है और चोरी-छिपकर ऐसी हिंसाओं को अंजाम दिलवाता है।
                                                        डीआईबी रिपोर्ट (साभार: इंडिया टुडे)

टीएमसी ने अहमद को भेजा राज्यसभा

2013 की हिंसा की घटना पर डीआईबी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अहमद हसन इमरान मुस्लिम युवाओं को भड़काने और उन्हें बम और अन्य हथियारों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजने के लिए जिम्मेदार था। लेकिन, बावजूद इस रिपोर्ट के 2014 में मुस्लिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए इमरान को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा की सदस्यता से पुरस्कृत किया था।
ऐसे में सोचिए जब तृणमूल कांग्रेस आतंकवादी समूहों से संबंध रखने के आरोपित और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को राज्यसभा भेज सकती है, तो टीएमसी प्रमुख द्वारा एक अन्य हिंदू विरोधी शाहजहाँ शेख को समर्थन देता देखना कहाँ आश्चर्य की बात है।

शारदा चिट फंड में नाम

दिलचस्प बात यह है कि अहमद हसन इमरान का नाम अन्य आतंकी संबंधों, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में शामिल होने के अलावा शारदा चिट फंड घोटाले में भी आया था। 2014 में, टीएमसी सांसद अहमद हसन इमरान से प्रवर्तन निदेशालय ने शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के साथ उनके संबंधों पर पूछताछ की थी। ईडी अधिकारियों ने इमरान से सवाल किया था कि वह बंगाली दैनिक कलाम कैसे चला रहे थे।

तुष्टिकरण की राजनीति में जुटी टीएमसी

टीएमसी वर्षों से मुस्लिम समुदाय के तुष्टीकरण की राजनीति में लगी हुई है। आज संदेशखाली मामले में पीड़िताओं का दावा है कि इलाके की विवाहित हिंदू महिलाओं को उनकी उम्र और सुंदरता के आधार पर उठाया जाता है और टीएमसी के लोग ‘संतुष्ट’ होने तक उनका रात-दिन उनका उत्पीड़न करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी इन आरोपों को भाजपा-आरएसएस की साजिश कहकर खारिज कर रही हैं। जो कि बिलकुल हैरान करने वाला नहीं है।
आखिरकार जब टीएमसी अहमद हसन इमरान जैसे किसी व्यक्ति का समर्थन कर सकती है, तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर पार्टी शाहजहाँ शेख को राज्यसभा के लिए नामांकित करती है और उनके कामों पर पर्दा डालती है।

कर्नाटक में कांग्रेस की जीत से नीतीश कुमार और ममता बनर्जी को झटका?

भारत में कुछ प्रदेश ऐसे हैं, जहां हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता रहता है, लेकिन जनता और पार्टियां समझती हैं, मानो कोई किला जीत लिया हो। ठीक वही स्थिति कर्नाटक की है। परन्तु कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत से कुछ भाजपा विरोधी पार्टियों को ही बेचैनी हो रही है।  
हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस जीत को लेकर पूर्व सांसद राहुल गाँधी समेत पार्टी के कई नेता खुश नजर आए। वहीं, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेता 
कांग्रेस की जीत में अपनी खुशी ढूँढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। निश्चित तौर पर इस जीत से कांग्रेस नेताओं ने अपना खोया हुआ आत्मविश्वास हासिल कर लिया होगा। लेकिन कांग्रेस की इस सफलता से पीएम पद का ख्वाब देख रहे नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के सपनों को गहरा धक्का लगा है।

नीतीश-ममता देख रहे पीएम बनने का ख्वाब

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पीएम बनने का ख्वाब सँजोए हुए हैं। अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए नीतीश कुमार तो पूरे विपक्ष को एकजुट करने में लगे हुए हैं। वह कांग्रेस ‘अध्यक्ष’ मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव, बंगाल सीएम ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, झारखंड सीएम हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी, उद्धव ठाकरे से लेकर ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक तक से मुलाकात करते दिखाई दिए हैं।
भले ही इस मुलाकात के बाद नवीन पटनायक ने खुद को विपक्षी दलों की तथाकथित एकता से अलग करने का ऐलान करते हुए लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की बात कही हो और तमाम नेताओं से मुलाकात का परिणाम सिफर ही रहा हो लेकिन नीतीश कुमार किसी भी नेता से मुलाकात करने में कभी भी पीछे नहीं दिखाई दिए। वहीं, ममता बनर्जी भी नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं से मुलाकात कर चुकी हैं। साथ ही खुले मंच से विपक्षी एकता की वकालत करती देखी गईं हैं। ऐसे में इस बात में कोई दो राय नहीं है कि नीतीश और ममता सीएम की कुर्सी में बैठकर प्रधानमंत्री बनने का रास्ता खोज रहे हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने से पहले तक राहुल गाँधी की विपक्ष में भूमिका प्रश्नचिन्ह के घेरे में थी। यहाँ तक कि हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद भी राहुल गाँधी पार्टी के चेहरे की तरह नहीं दिख रहे थे। हालाँकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि राहुल की सांसदी जाने के बाद विपक्ष ने एकजुटता दिखाई थी। लेकिन वह एकजुटता राहुल गाँधी के लिए कम बल्कि भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ अधिक थी। कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस तो राहुल गाँधी का कद बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित करेगी, ये तो तय है।
यह बढ़ोतरी विपक्ष के नजरिए से अच्छी हो सकती है। विपक्ष इस बात से संतोष कर सकता है कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ मोदी लहर का कहर नहीं झेलना पड़ेगा। बल्कि कांग्रेस भी बीजेपी का मुकाबला करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत होती दिख रही है। लेकिन ममता और नीतीश के लिए कर्नाटक में कांग्रेस की जीत किसी सदमे से कम नहीं होगी। दोनों ही नेताओं को यह पता है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट करने को तैयार है। वहीं, यह भी साफ है कि राहुल गाँधी के नाम पर विपक्ष को एकजुट करने में किसी के भी दाँत खट्टे हो जाएँगे। ऐसे में, नीतीश और ममता को विपक्ष को एक कर पीएम बनने का सपना टूटता हुआ दिख रहा होगा।
हालाँकि विपक्ष एकजुट होगा या नहीं और यदि एकजुट होता है तो क्या नीतीश कुमार या ममता बनर्जी के नाम पर एकजुट हो पाता है या नहीं यह सब तो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है। लेकिन एक बात साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद आम चुनाव में जिस तरह मोदी लहर चली उससे हर कोई वाकिफ है। ऐसे में यदि एक बार फिर मोदी लहर चलती है तो विपक्ष का एक होना और न होना एक बराबर ही है।

बंगाल चुनाव : बंगाल में होती है महिलाओं की तस्करी -- कांग्रेस का ममता पर गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मार्च 16, 2021 को तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया। कांग्रेस नेता का कहना है कि टीएमसी राज्य में लड़कियों की तस्करी का काम कराती है। वह बोले कि यहाँ आरोपित इसलिए नहीं पकड़े जाते क्योंकि सत्ताधारी पार्टी का इसमें हाथ होता है। 

अधीर रंजन द्वारा गंभीर आरोप लगाने के साथ ही सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट हो रही है कि इतने वर्षों तक हर पार्टी क्यों मुंह में दही जमाकर बैठी रहीं? दूसरे, चुनाव अभियान में आरोप लगाने की बजाए अधीर ने लोकसभा में क्यों नहीं मुद्दा उठाया? यदि इस आरोप में सच्चाई है, तो कांग्रेस को यह भी मालूम होगा कि महिलाओं की तस्करी किन-किन देशों में होती रही है? अधीर को यह मालूम होगा कि महिला तस्करी किस धर्म एवं जाति की हो रही है? यदि चुनाव घोषित होने के पूर्व ही लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया होता, तृणमूल को अपनी नाक बचानी मुश्किल होती और कांग्रेस जो इस चुनाव में कहीं दिखाई नहीं दे रही, भाजपा की बजाए कांग्रेस की तूती बोल रही होती।  

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा, “कोयला तस्करी के साथ बंगाल गौ तस्करी के लिए भी कुख्यात स्थान माना जाता है। यहाँ हमारी माँ, बेटियाँ और बहनों की भी तस्करी होती है। बंगाल की सत्ताधारी पार्टी और ब्यूरोक्रेसी मिल कर ये सब करते हैं। इसलिए कोई नहीं पकड़ा जाता।”

कांग्रेस नेता ने ममता सरकार पर अम्फान तूफान के दौरान जरूरतों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया और कहा कि यहाँ लोगों को जबरन लड़कियों की तस्करी के लिए मजबूर किया जाता है।

इससे पहले अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री पर सियासी पाखंड और नौटंकी करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा था, “नंदीग्राम समेत पूरे बंगाल में स्थिति खराब होते देख ममता अब खुद पर हमले का नाटक करके लोगों की संवेदना बटोरने की कोशिश कर रही हैं।”

नंदीग्राम में चोटिल हुई ममता पर अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाया था कि आखिर घटना के समय मुख्यमंत्री की पूरी सिक्योरिटी कहाँ चली गई थी? पूरे इलाके में सीसीटीवी है जबकि जाँच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। ममता बनर्जी ने पाँव पर लगे प्लास्टर पर उन्होंने कहा, “थोड़ी बहुत चोट तो किसी को चलते-फिरते भी लग जाती है, ममता केवल पाखंड कर रही हैं।”

बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता दावा कर चुके हैं कि इस बार वाम-कांग्रेस धर्म निरपेक्ष ताकतों के साथ मिल कर बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी और बीजेपी दोनों को हराएगा। उनका कहना है कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस चाहती हैं कि इन दोनों दलों के अलावा कोई राजनीतिक ताकत न रहे। जबकि भविष्य में भाजपा या टीएमसी कोई नहीं होगा, सिर्फ़ महागठबंधन होगा।

अनुच्छेद 370 : पाकिस्तान भारत की इन हस्तियों को मानता है अपना पैरोकार

पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। पाकिस्तान सरकार की ओर से भारत को हमले तक की धमकी दी गई। वैश्विक मंच पर भारत के इस आंतरिक मसले में दखलअंदाजी करते हुए पाकिस्तान ने इसे गलत साबित करने की कोशिश की, लेकिन उसकी ये कोशिश उस पर ही भारी पड़ती नजर आई। धारा 370 खत्म करने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कवायद में जुटा, परन्तु सब तरफ से केवल निराशा ही हाथ लगी। लेकिन अब उसने भी मान लिया है कि उसे कहीं से कोई उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से माना कि संयुक्त राष्ट्र में कोई हार लेकर नहीं खड़ा है । इस मसले पर उन्हें खासा संघर्ष करना होगा।
पाकिस्तान ने मानी हार 
पाकिस्तानी मंत्री ने लोगों को अकसाने वाला बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है। हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। आपको संघर्ष करना होगा। अभी कुछ दिन पूर्व, शाह महमूद कुरैशी ने विपक्षी दलों से कश्मीर पर एक साथ आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूरा पाकिस्तानी राष्ट्र और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट है और कश्मीरियों के समर्थन में 14 अगस्त को एक आवाज सुनाई देगी।
दुनियाभर के किसी भी देश से समर्थन नहीं मिलने से बौखलाए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस मसले पर जज्बात उभारना बहुत आसान है, मुझे दो मिनट लगेंगे। उन्होंने कहा कि 35-36 साल से सियासत कर रहा हूं,ऐसा करना मेरे लिए बाएं हाथ का काम है। इस मसले पर जज्बात उभारना आसान है और ऐतराज जताना उससे भी आसान है।


पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माकूल समर्थन नहीं मिल पा रहा है। इसलिए, अब उसे कुछ भारतीयों में ही उम्मीद की किरण दिखाई पड़ रही है। पाकिस्तान ने भारत में पल रहे उसके समर्थकों या दूसरे अर्थों में कहा जाये जयचन्द ही भीतरघात लगाकर हमारे मकसद को पूरा करवा सकते हैं। कुछ तो  मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान आकर मिन्नतें करते थे, क्यों न अब "घर का भेदी लंका ढहाहे" नीति अपनाई जाए। पाकिस्तान के लोगों को लगने लगा है कि भारत की कुछ बड़ी हस्तियां, राजनेता और राजनीतिक पार्टियां उनसे सहानुभूति रखते हैं। ऐसे में वहां यह मांग होने लगी है कि पाकिस्तान को भारत को घेरने के लिए अन्य विकल्पों के अलावा उसके इन भारतीय पैरोकारों का भी समर्थन हासिल करने के लिए पूरजोर कोशिश करनी चाहिए। पाकिस्तान को पक्का यकीन है कि जम्मू-कश्मीर जैसे राष्ट्रीय मसलों पर भी भारत में अपनी ही सरकार और प्रधानमंत्री की टांग खींचने वाले हस्तियों की फेहरिस्त लंबी है।
पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद 
पाकिस्तान कुछ भारतीयों से उम्मीद लगाए बैठा है तो वह बेवजह भी नहीं है। ये सारे के सारे लोग और सारी की सारी पार्टियां पहले दिन से ही ऐसा बयान दे रहे हैं, जिससे पाकिस्तान को ही फायदा मिल रहा है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति तो ये हो चुकी है कि इस मुद्दे पर वह लगभग विभाजन के मुहाने पर खड़ी है। लेकिन, फिर भी उसके कुछ नेता कश्मीर के मुद्दे पर ऐसी लाइन ले रहे हैं, जिससे भारत को ही नुकसान हो सकता है। संसद में भी इस मुद्दे पर कांग्रेस, सीपीआई-सीपीएम और टीएमसी जैसी पार्टियां अपना विरोध जता चुकी हैं। सीपीएम महासचिव ने तो जमीनी हालात का जायजा लेने के नाम पर कश्मीर पहुंचने की भी कोशिश की थी। जबकि, उन्हें पूरा इल्म है कि अभी वहां हालात को सामान्य करने में कुछ वक्त लग सकता है। अरुंधति रॉय और सागरिका घोष जैसे पत्रकार तो विवादास्पद मुद्दों पर अलग राय रखने के लिए हमेशा ही सुर्खियों में रही हैं। शायद यही वजह है कि पाकिस्तानियों को भले ही अपनी सरकार के राजनयिक सूझबूझ और अपनी आर्मी की ताकत पर भरोसा नहीं है, लेकिन मुट्ठी भर भारतीयों से ज्यादा उम्मीद है।
जबकि जम्मू-कश्मीर पर भारत के कदम से बौखलाये पाकिस्तान ने अब भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी संस्था ने भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक अधिकरण ने 14 अगस्त को एक पत्र जारी करते हुए प्रतिबंध की घोषणा की है। नियामक ने कहा कि डिटॉल सॉप, सर्फ एक्सल पाउडर, पेंटिन शैम्पू, हेड एंड शॉल्डर शैम्पू, लाइफबॉय शैम्पू, फॉग बॉडी स्प्रे, सनसिल्क शैम्पू, नॉर नुडल्स, फेयर एंड लवली फेश वॉश जैसे उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे पूर्व राजनायिक सम्बन्ध, व्यापारिक सम्बन्ध और भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा चुका है, उसके बावजूद भी पाकिस्तान समर्थक भारतीयों को पाकिस्तान का समर्थन करने में शर्म नहीं आती। 
दूसरे यह कि कल तक आतंकवाद से जो पाकिस्तान भारत को डरा कर रखे हुए था, आज मोदी सरकार की आतंकवाद पर कार्यवाही से वही पाकिस्तान डर के साये में रहने को मजबूर हो गया है। जिस देश से सहायता माँग रहा है, वही देश भारत के आंतरिक मामले में हाथ डालने से पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे, और भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थक पाकिस्तान को समर्थन देकर, अपने ही राष्ट्र से खिलवाड़ कर रहे हैं, आखिर ऐसी छिछोरी राजनीती क्या देश का भला करेगी? 
लाल किले के प्राचीर से स्वतन्त्रता दिवस पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन में अनुच्छेद 370 के समर्थकों से पूछा कि "यदि अनुच्छेद 370 और 35A हितकारी था, फिर किस आधार पर इसे अस्थायी रखे हुए थे, क्यों नहीं इसे स्थायी किया गया?"   
सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ- मुशाहिद हुसैन 

पाकिस्तान के लोग जिन भारतीयों के आसरे बैठे हुए हैं, ये खुलासा वहां हुए एक टीवी डिबेट से हुआ है। इसमें पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ, पत्रकार और जियो स्ट्रैटजिस्ट मुशाहिद हुसैन ने ये दावा किया कि भारतीय लेखकर अरुंधति रॉय, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममत बनर्जी, सोनिया गांधी की कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ सहानुभूति रखते हैं। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो टीवी पर हुए बहस के दौरान एंकर ने मुशाहिद से पूछा के कश्मीर के लोगों का कथित 'दुर्भाग्य' कैसे खत्म होगा? इसके जवाब में हुसैन बोले, भारत बहुत बड़ा देश है और हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक नहीं है। उन्होंने कहा, "इंडिया बहुत बड़ा मुल्क है। कई हिंदुस्तान के लोग आपके साथ सहानुभूति रखने वाले भी हैं, अरुंधति रॉय है, ममता बनर्जी है, कांग्रेस पार्टी है, कम्यूनिस्ट पार्टी है....लेफ्ट पार्टियां हैं...दलित पार्टियां हैं.....हिंदुस्तान....सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ ....."
14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' मनाएगा पाकिस्तान 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' और 15 अगस्त को 'काला दिवस' मनाने का ऐलान किया है। दरअसल, जब से जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म किया गया है और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों का दर्जा दिया गया है, पाकिस्तान आपे से बाहर हो चुका है। वह अपनी अंदरूनी आर्थिक तंगी से जनता का ध्यान हटाने के लिए कश्मीर के नाम पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश में लगा हुआ है। वह अपनी सेना को भी तैयार कर रहा है और आतंकियों की फौज को भी भारत में घुसपैठ कराने की ताक में लगा हुआ है। पाकिस्तान को लग रहा है अगर भारत के कदम से कश्मीर में शांति कायम हो गई तो उसके नेताओं का वह दानापानी ही उठ जाएगा, जिसके नाम पर उनकी रोजी-रोटी टिकी हुई है।
सोच ले पाकिस्तान- सेनासोच ले पाकिस्तान- सेना 

इस बीच इंडियन आर्मी चीफ जनरन बिपिन रावत ने पाकिस्‍तान को चेतावनी दी है। जनरल रावत ने कहा है कि अगर पाकिस्‍तान युद्ध भड़काना चाहता है तो फिर उसे हमारी प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना होगा। आर्मी चीफ जनरल रावत ने कहा है, 'अगर एलओसी को दुश्‍मन फिर से सक्रिय करना चाहता है तो यह उसकी मर्जी है। हर कोई सावधानी और सुरक्षा के लिए सेना तैनात करता है और ऐसे में हमें इस बात से चिंतित नहीं होना चाहिए। सेना हमेशा जवाब देने के लिए तैयार है।' सेना प्रमुख जनरल रावत की मानें तो सेना और कश्‍मीरी नागरिको के बीच होने वाला संवाद बिल्‍कुल सामान्‍य है। सेना पहले भी उनसे बिना बंदूक के मिलती थी और उम्‍मीद है कि आगे भी ऐसा होता रहेगा। सेना प्रमुख के शब्दों में, '70 और 80 के दशक में सेना और कश्‍मीर के लोगों के बीच जैसा भाई-चारा रहता था, सेना फिर से उसी तरह का रिश्‍ता कश्‍मीर के लोगों के साथ बनाना चाहती है।' इससे पहले चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लन ने भी पाक को चेतावनी दी है। उन्‍होंने आगाह किया है कि अगर घाटी में कोई भी शांति भंग करने के लिए आएगा तो हम उसे खत्‍म कर देंगे। इस बीच पाकिस्तान के नापाक मंशा को नाकाम करने के लिए इंडियन नेवी की तरफ से वॉरशिप्‍स को भी हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। पाकिस्‍तान से सटे 754 किलोमीटर की तटीय सीमा पर संभावित हमले के मद्देनजर नेवी चौकन्‍नी है।
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