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उत्तर प्रदेश : 2019 से किराया नहीं देने पर प्रियंका वाड्रा की रैली के बाद कांग्रेस कार्यालय पर ताला

कॉन्ग्रेस कार्यालय पर लगा ताला: 2019 से नहीं दिया किराया
जिस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गाँधी विश्व की धनी महिलाओं में से एक हो, उसकी पार्टी का कार्यालय केवल इसलिए बंद हो जाये कि 2019 से उसका किराया नहीं दिया गया, बहुत शर्मनाक है। साथ ही यह भी साबित हो गया कि परिवार केवल वर्चस्व बनाये रखना चाहता, इसे पार्टी से कोई मतलब नहीं। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की रैली के बाद गोरखपुर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर फिर से ताला जड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि तीन साल से किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने कांग्रेस कार्यालय पर ताला लगा दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मनी त्रिपाठी ने ‘गोरखपुर के बुजुर्ग राजमन राय जी का किराया मत मारिए, दे दीजिए, नैतिकता नाम की कोई चीज़ बची है?’ लिखते हुए ट्विटर अकाउंट पर इसका वीडियो पर भी शेयर किया है।

उन्होंने राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी को टैग करते हुए लिखा, ”राहुल गाँधी जी गोरखपुर के राजमन राय जी की रातों की नींद उड़ी हुई है कांग्रेस की ‘प्रापर्टी हड़पो नीति’ के चलते। आपसे अनुरोध है कि इन बुजुर्ग को बख्श दीजिए, आदत के अनुसार इनकी संपत्ति पर कब्जा मत करिए, इनका किराया दे दीजिए।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी साल 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले पुरदिलपुर स्थित कांग्रेस के कार्यालय पर ताला लगा दिया गया था, जिसके बाद कांग्रेसियों ने ट्रांसपोर्ट नगर में किराए पर कमरा लेकर कार्यालय खोला था। इस मामले में पीड़ित मकान मालिक का कहना है कि मैंने कांग्रेस कार्यालय पर ताला इसलिए मारा है, क्योंकि मुझे आज तक किराया नहीं मिला है। मैं बार-बार किराया माँगता हूँ, तो कहते हैं बस प्रियंका जी से बात हो गई है, अध्यक्ष जी से बात हो गई है, लेकिन ऐसा कहकर मुझे लॉलीपॉप देते रहे।

उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 से लेकर अब तक का किराया बाकी है। अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है। ताला मारने के बाद मेरी उनसे कोई बात नहीं हुूई है, क्योंकि उन्हें संपर्क करने में शर्म आ रही है। किराया नहीं मिला तो कानूनी कार्रवाई भी करूँगा। बता दें कि 31 अक्टूबर को प्रियंका गाँधी वाड्रा की चंपा देवी पार्क में हुई रैली के तत्काल बाद मकान मालिक ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर ताला लगा दिया था।

राजस्थान पंचायत चुनाव : सबसे बड़े ‘मिनी चुनाव’ में भाजपा ने कांग्रेस को धूल चटाई

कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल कृषि बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी को किसान विरोधी साबित करने में दिल्ली के बॉर्डर रोके बैठे हैं, लेकिन लोग के मन पढ़ने में पूर्णरूप से असफल हैं। शुरू से अपने लेखों में स्पष्ट लिख रहा हूँ, जितना इस तथाकथित किसान प्रदर्शन को लंबित करेंगे, उतना ही इन तीनों और इनके समर्थक पार्टियों को उतना ही नुकसान होगा, जो राजस्थान में पंचायत और जिला परिषद् चुनावों में देखने को मिला। 
राजस्थान में पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को हार मिली है। ‘किसान आंदोलन’ को लेकर कांग्रेस के आक्रामक रवैये के बावजूद गाँवों की जनता ने भाजपा पर ही भरोसा जताया। कांग्रेस के लिए स्थति इतनी खराब हो गई कि प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट – तीनों के ही गृह जिलों में पार्टी को मुँह की खानी पड़ी है।

फाइनल रिजल्ट्स की बात करें तो पंचायत समिति चुनाव में कांग्रेस ने 1836 और भाजपा ने 1718 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं जिला परिषद के चुनावों में 323 सीटों पर भाजपा को विजय मिली और कांग्रेस 246 सीटों पर जीती। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी सत्ताधारी पार्टी को पंचायत चुनावों में हार मिली हो। निर्दलीयों को भी 422 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों में फजीहत का सामना करना पड़ा है।

प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा के लक्ष्मणगढ़ में 25 में से भाजपा ने 13 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त किया, वहीं कांग्रेस 11 पर अटकी रह गई। पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के एरिया टोंक में भाजपा ने 19 में से 9 सीटें जीती, तो कांग्रेस 7 पर आकर रुक गई। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के अजमेर में तो 11 में से 9 सीटें भाजपा ले गई। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के निंबाहेड़ा में 14 में से 14 सीटें भाजपा को मिलीं।

खेल मंत्री अशोक चांदना के हिण्डोली में 23 में से 13 पंचायत समिति की सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी के नाँवा में 21 में से 14 सीट भाजपा ने झपट लिए। प्रदेश और जिला स्तर तक कॉन्ग्रेस संगठन में न वो जोश दिखा और न ही सक्रियता। जयपुर, कोटा और जोधपुर नगर निगम चुनावों की गलतियाँ दोहराते हुए विधायकों को सिंबल दे दिया गया और उन्होंने अपने रिश्तेदारों में टिकट बाँट दिए।

टिकट बेचने तक के भी आरोप लगे हैं। परिवारवाद के आरोपों के बीच कांग्रेस को घाटा हुआ। अगले साल होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले पार्टी के मनोबल को ठेस पहुँची है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में होने वाली नियुक्तियों में इसका असर देखने को मिल सकता है और हार का ठीकड़ा फोड़ने के लिए सिर-फुटव्वल हो सकती है। अब बात करते हैं अशोक गहलोत के गढ़ पाली की, जहाँ 10 साल पहले कांग्रेस का दबदबा था।

पाली में जिला परिषद के 33 वार्डों में से 30 पर भाजपा ने कब्ज़ा जमाया। वहीं पंचायत समिति की बात करें तो 10 में से 9 सीटें जीत कर भाजपा ने बड़ा बहुमत प्राप्त किया। कांग्रेस अब तक गहलोत-पायलट गुट में ही बँटी हुई है और पार्टी नेतृत्व का फायदा संगठन को नहीं मिला। संगठन में समन्वय नहीं दिखा। कई नेताओं ने जनता के बीच निकलना भी ठीक नहीं समझा। वहीं भाजपा ने गंभीरता से चुनाव लड़ा।

भाजपा के जनप्रतिनिधि बूथों तक पहुँचे। संगठन के नेताओं ने सर्वसम्मति से ही टिकट बँटवारे का निर्णय लिया। बड़े पदाधिकारियों और नेताओं ने अपने क्षेत्रों तक सीमित रह कर वहाँ जीत सुनिश्चित की। पीएम मोदी के चेहरे के अलावा राम मंदिर और अनुच्छेद-370 पर केंद्र के फैसलों को भाजपा ने मुद्दा बनाया। गहलोत सरकार कोरोना को लेकर किए गए कार्यों को गिनाते रही, जिससे जनता संतुष्ट नहीं दिखी।

इससे पहले अक्टूबर 2020 में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ उनके ही एक विधायक ने मोर्चा खोल दिया था। कॉन्ग्रेसी विधायक बाबूलाल बैरवा ने आरोप लगाया था कि सरकार में न तो दलित विधायकों की बात सुनी जाती है और न ही कर्मचारियों की कोई सुनवाई होती है। उन्होंने कहा था कि सरकार में जो ब्राह्मण मंत्री बैठे हुए हैं वह दलितों के काम नहीं करते हैं। कठूमर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले कॉन्ग्रेस के विधायक बाबूलाल बैरवा दलित हैं।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर AAP और कांग्रेस नेता-समर्थक खुलेआम मना रहे जश्न

फासीवाद का रोना रोने वाले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस नेता और समर्थक मुंबई पुलिस द्वारा अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर जश्न मनाते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि सत्ता में बैठे उद्धव सरकार के इशारे पर मुंबई पुलिस के अधिकारी AK-47 के साथ अर्णब के घर, उन्हें गिरफ्तार करने पहुँचे।

कथित तौर पर उन्होंने न सिर्फ रिपब्लिक चीफ अर्णब के बाल खिंचे बल्कि उनके बेटे को भी मारा और उनके ससुराल वालों से बद्तमीजी भी की। यह गिरफ्तारी पुलिस ने अदालत द्वारा बंद किए गए 2018 के केस में की है।

वहीं एक पत्रकार की गिरफ्तारी की निंदा करने के बजाय, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के समर्थक और नेता इस मामले में खुश होते हुए नजर आए।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने ट्विटर पर कहा कि अर्णब किसी भी प्रकार से सहानुभूति के हकदार नहीं हैं। यह कह कर उन्होंने मुंबई पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग को भी सही ठहराया। इसके अलावा कांग्रेस नेताओं ने अर्णब की गिरफ्तारी का श्रेय भी लिया।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी का श्रेय लेने की होड़ में कांग्रेसी नेता इतना खो गए कि उन्होंने 2018 आत्महत्या के मामले में हुए उन्मूलन के बारे में गलत सूचना फैलाना शुरू कर दिया।

गौरव पांडे और रुचिरा चतुर्वेदी जैसे कांग्रेसी नेताओं ने 2018 में आत्महत्या मामले की रिपोर्ट का हवाला भी दिया। हालाँकि इन लोगों ने मुंबई पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट के बारे में बताना सही नहीं समझा।

अन्य लोगों ने भी अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी की खुशी मनाई।

इस मामले में राहुल गाँधी के प्रशंसक ने भी मुंबई पुलिस की सराहना की।

फ्रीडम ऑफ स्पीच का हवाला देते हुए हमेशा से मातम मनाने वाले भी इस मामले में जश्न मनाने में पीछे नहीं दिखे।

मुखौटा पहनकर प्रोपेगैंडा फैलाने वाले फैक्टचेकर भी अर्णब की गिरफ्तारी पर अपने फ्रीडम ऑफ स्पीच की लड़ाई भूलते हुए नजर आए।

 अर्णब गोस्वामी ने खुद इस बात का खुलासा किया कि उन्हें जबरदस्ती ले जाया जा रहा और मुम्बई पुलिस ने उनसे और उनके परिजनों ने मारपीट की है। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस समर्थक इन बातों से मुँह फेरते हुए पुलिस के इस कारनामे पर उनकी प्रशंसा करते हुए नजर आए। 

कल तक फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का रोने वालों का अर्नब की गिरफ़्तारी पर ख़ुशी व्यक्त करने पर लोगों ने ट्विटर पर इनको बेनकाब कर रहे हैं:-

#DemolishPriyankaHimachalHome यूजर्स की मांग ‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’

हिमाचल में प्रियंका का बंगला 
अंग्रेजी में एक कहावत है "You show me the man, I will show you the rule", यह बात पता नहीं कितनी चरितार्थ हो चुकी है और हो भी रही है। कानून का डंडा चलता है आम नागरिकों पर, लेकिन सियासतखोरों के पास कानून फटकता तक नहीं। कार्यवाही केवल राजनीतिक बदले में ही होती है, अन्यथा कानून इन्हें छू भी नहीं पाता। उदाहरणार्थ गाँधी परिवार और मायावती आदि पर कितने घोटालों के आरोप हैं, यदि यही आरोप किसी आम नागरिक पर होते, क्या वह इस तरह खुला घूम रहा होता? इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशांत की हत्या का मुख्य कारण उजागर हो या न हो, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में बॉलीवुड में चल रहे कांडों से पूर्णरूप से पर्दा हटेगा, इस बात पर भी शक है।
   
सुशांत मामले में मुखर अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर सोशल मीडिया पर लोग शिमला में प्रियंका गांधी की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग कर रहे हैं। बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली व्यक्ति राज्य में घर नहीं खरीद सकता, इसलिए प्रियंका का शिमला के छराबड़ा स्थित घर अवैध है। इसे हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है।
आज प्रियंका की संपत्ति पर जो भी लोग ऊँगली उठा रहे हैं, अब से पहले कहां थे? क्यों नहीं पहले आवाज़ उठी? अब इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदला ही कहा जाएगा। प्रियंका ने हिमाचल में क्या आज संपत्ति बनाई है, जो उस पर ऊँगली उठाई जा रही है? यानि प्रियंका ने जो भी संपत्ति बनाई राजनीतिक संरक्षण में बनाई और राजनीतिक संरक्षण मिलता भी रहेगा, जनता चाहे जितना सिर पटक ले। 


मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।
कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।




जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।
एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”
प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।
यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ
#DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।
लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

CAA : क्या सोनिया और राहुल गाँधी की खतरे में नागरिकता?

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी खो सकते हैं अपनी भारत की नागरिकता
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश की बड़ी और सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी जल्द ही भारत की नागरिकता खो सकते हैं। इस बात का खुलासा बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने दिए एक भाषण में किया है।
दूसरे, काफी समय से चर्चा है कि इटली में जन्मे कोई भी व्यक्ति यदि किसी अन्य देश में रहने पर वहां की नागरिकता ले लेता है, उस स्थिति में उसकी इटली की नागरिकता समाप्त नहीं होती। लेकिन कांग्रेस का बोलबाला होने के कारण सोनिया के विरुद्ध उठती आवाज़ों का असर नहीं हुआ। क्योकि उस समय किसी में सोनिया के विरुद्ध बोलने अथवा कार्यवाही करने का साहस नहीं था। कांग्रेस और इसके समर्थक दल विरोधी स्वरों को "देश की बहु" कह कर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था, परन्तु दोहरी नागरिकता को ठंठे बस्ते में डाल दिया जाता था। लेकिन नागरिकता संशोधक कानून ने उस दोहरी नागरिकता मुद्दे को पुनः जीवित कर दिया है और अपनी नागरिकता को बचाने मुसलमानों को मोहरा बना कर, नागरिकता संशोधक कानून का विरोध करवाया जा रहा है। जबकि भारत में रह रहे किसी मुसलमान की नागरिकता प्रभावित नहीं होने वाली।  
हैदराबाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पहुँचे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “फाइल गृह मंत्री अमित शाह की मेज पर है और जल्द ही वे अपनी नागरिकता खो देंगे।” संविधान की बात करते हुए स्वामी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के दौरान दूसरे देश की नागरिकता लेने वाले लोग स्वतः ही अपनी भारतीय नागरिकता खो देंगे।

दरअसल बीजेपी सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी हैदराबाद विश्वविद्यालय में आयोजित “सीएए– एक समकालीन राजनीति से परे एक ऐतिहासिक अनिवार्यता” विषय पर छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान स्वामी ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने इंग्लैंड में व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्रिटिश नागरिकता का विकल्प चुना था। हालाँकि, राहुल गाँधी नागरिकता के लिए नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि उनके पिता राजीव गाँधी एक भारतीय थे। लेकिन वह अपनी माँ सोनिया गाँधी की साख का इस्तेमाल करते हुए आवेदन नहीं कर सकते, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।
वहीं, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बोलते हुए स्वामी ने कहा, “सीएए को ठीक से समझा नहीं गया है, यहाँ तक कि इसका विरोध करने वालों ने भी खुद इस अधिनियम को नहीं पढ़ा है। इस कानून से भारतीय मुसलमानों को कोई प्रभाव नहीं पढ़ने वाला है। रही बात यह तर्क देने की कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भी नागरिकता दी जानी चाहिए, तो यह हास्यापद है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यकों के बचने के लिए एकमात्र स्थान भारत है। वहीं पाकिस्तान रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे रहा है और यहाँ कुछ लोग चाहते हैं कि पाकिस्तानी यहाँ आएँ।

अनुच्छेद 370 : पाकिस्तान भारत की इन हस्तियों को मानता है अपना पैरोकार

पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। पाकिस्तान सरकार की ओर से भारत को हमले तक की धमकी दी गई। वैश्विक मंच पर भारत के इस आंतरिक मसले में दखलअंदाजी करते हुए पाकिस्तान ने इसे गलत साबित करने की कोशिश की, लेकिन उसकी ये कोशिश उस पर ही भारी पड़ती नजर आई। धारा 370 खत्म करने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कवायद में जुटा, परन्तु सब तरफ से केवल निराशा ही हाथ लगी। लेकिन अब उसने भी मान लिया है कि उसे कहीं से कोई उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से माना कि संयुक्त राष्ट्र में कोई हार लेकर नहीं खड़ा है । इस मसले पर उन्हें खासा संघर्ष करना होगा।
पाकिस्तान ने मानी हार 
पाकिस्तानी मंत्री ने लोगों को अकसाने वाला बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है। हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। आपको संघर्ष करना होगा। अभी कुछ दिन पूर्व, शाह महमूद कुरैशी ने विपक्षी दलों से कश्मीर पर एक साथ आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूरा पाकिस्तानी राष्ट्र और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट है और कश्मीरियों के समर्थन में 14 अगस्त को एक आवाज सुनाई देगी।
दुनियाभर के किसी भी देश से समर्थन नहीं मिलने से बौखलाए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस मसले पर जज्बात उभारना बहुत आसान है, मुझे दो मिनट लगेंगे। उन्होंने कहा कि 35-36 साल से सियासत कर रहा हूं,ऐसा करना मेरे लिए बाएं हाथ का काम है। इस मसले पर जज्बात उभारना आसान है और ऐतराज जताना उससे भी आसान है।


पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माकूल समर्थन नहीं मिल पा रहा है। इसलिए, अब उसे कुछ भारतीयों में ही उम्मीद की किरण दिखाई पड़ रही है। पाकिस्तान ने भारत में पल रहे उसके समर्थकों या दूसरे अर्थों में कहा जाये जयचन्द ही भीतरघात लगाकर हमारे मकसद को पूरा करवा सकते हैं। कुछ तो  मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान आकर मिन्नतें करते थे, क्यों न अब "घर का भेदी लंका ढहाहे" नीति अपनाई जाए। पाकिस्तान के लोगों को लगने लगा है कि भारत की कुछ बड़ी हस्तियां, राजनेता और राजनीतिक पार्टियां उनसे सहानुभूति रखते हैं। ऐसे में वहां यह मांग होने लगी है कि पाकिस्तान को भारत को घेरने के लिए अन्य विकल्पों के अलावा उसके इन भारतीय पैरोकारों का भी समर्थन हासिल करने के लिए पूरजोर कोशिश करनी चाहिए। पाकिस्तान को पक्का यकीन है कि जम्मू-कश्मीर जैसे राष्ट्रीय मसलों पर भी भारत में अपनी ही सरकार और प्रधानमंत्री की टांग खींचने वाले हस्तियों की फेहरिस्त लंबी है।
पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद 
पाकिस्तान कुछ भारतीयों से उम्मीद लगाए बैठा है तो वह बेवजह भी नहीं है। ये सारे के सारे लोग और सारी की सारी पार्टियां पहले दिन से ही ऐसा बयान दे रहे हैं, जिससे पाकिस्तान को ही फायदा मिल रहा है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति तो ये हो चुकी है कि इस मुद्दे पर वह लगभग विभाजन के मुहाने पर खड़ी है। लेकिन, फिर भी उसके कुछ नेता कश्मीर के मुद्दे पर ऐसी लाइन ले रहे हैं, जिससे भारत को ही नुकसान हो सकता है। संसद में भी इस मुद्दे पर कांग्रेस, सीपीआई-सीपीएम और टीएमसी जैसी पार्टियां अपना विरोध जता चुकी हैं। सीपीएम महासचिव ने तो जमीनी हालात का जायजा लेने के नाम पर कश्मीर पहुंचने की भी कोशिश की थी। जबकि, उन्हें पूरा इल्म है कि अभी वहां हालात को सामान्य करने में कुछ वक्त लग सकता है। अरुंधति रॉय और सागरिका घोष जैसे पत्रकार तो विवादास्पद मुद्दों पर अलग राय रखने के लिए हमेशा ही सुर्खियों में रही हैं। शायद यही वजह है कि पाकिस्तानियों को भले ही अपनी सरकार के राजनयिक सूझबूझ और अपनी आर्मी की ताकत पर भरोसा नहीं है, लेकिन मुट्ठी भर भारतीयों से ज्यादा उम्मीद है।
जबकि जम्मू-कश्मीर पर भारत के कदम से बौखलाये पाकिस्तान ने अब भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी संस्था ने भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक अधिकरण ने 14 अगस्त को एक पत्र जारी करते हुए प्रतिबंध की घोषणा की है। नियामक ने कहा कि डिटॉल सॉप, सर्फ एक्सल पाउडर, पेंटिन शैम्पू, हेड एंड शॉल्डर शैम्पू, लाइफबॉय शैम्पू, फॉग बॉडी स्प्रे, सनसिल्क शैम्पू, नॉर नुडल्स, फेयर एंड लवली फेश वॉश जैसे उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे पूर्व राजनायिक सम्बन्ध, व्यापारिक सम्बन्ध और भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा चुका है, उसके बावजूद भी पाकिस्तान समर्थक भारतीयों को पाकिस्तान का समर्थन करने में शर्म नहीं आती। 
दूसरे यह कि कल तक आतंकवाद से जो पाकिस्तान भारत को डरा कर रखे हुए था, आज मोदी सरकार की आतंकवाद पर कार्यवाही से वही पाकिस्तान डर के साये में रहने को मजबूर हो गया है। जिस देश से सहायता माँग रहा है, वही देश भारत के आंतरिक मामले में हाथ डालने से पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे, और भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थक पाकिस्तान को समर्थन देकर, अपने ही राष्ट्र से खिलवाड़ कर रहे हैं, आखिर ऐसी छिछोरी राजनीती क्या देश का भला करेगी? 
लाल किले के प्राचीर से स्वतन्त्रता दिवस पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन में अनुच्छेद 370 के समर्थकों से पूछा कि "यदि अनुच्छेद 370 और 35A हितकारी था, फिर किस आधार पर इसे अस्थायी रखे हुए थे, क्यों नहीं इसे स्थायी किया गया?"   
सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ- मुशाहिद हुसैन 

पाकिस्तान के लोग जिन भारतीयों के आसरे बैठे हुए हैं, ये खुलासा वहां हुए एक टीवी डिबेट से हुआ है। इसमें पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ, पत्रकार और जियो स्ट्रैटजिस्ट मुशाहिद हुसैन ने ये दावा किया कि भारतीय लेखकर अरुंधति रॉय, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममत बनर्जी, सोनिया गांधी की कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ सहानुभूति रखते हैं। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो टीवी पर हुए बहस के दौरान एंकर ने मुशाहिद से पूछा के कश्मीर के लोगों का कथित 'दुर्भाग्य' कैसे खत्म होगा? इसके जवाब में हुसैन बोले, भारत बहुत बड़ा देश है और हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक नहीं है। उन्होंने कहा, "इंडिया बहुत बड़ा मुल्क है। कई हिंदुस्तान के लोग आपके साथ सहानुभूति रखने वाले भी हैं, अरुंधति रॉय है, ममता बनर्जी है, कांग्रेस पार्टी है, कम्यूनिस्ट पार्टी है....लेफ्ट पार्टियां हैं...दलित पार्टियां हैं.....हिंदुस्तान....सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ ....."
14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' मनाएगा पाकिस्तान 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' और 15 अगस्त को 'काला दिवस' मनाने का ऐलान किया है। दरअसल, जब से जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म किया गया है और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों का दर्जा दिया गया है, पाकिस्तान आपे से बाहर हो चुका है। वह अपनी अंदरूनी आर्थिक तंगी से जनता का ध्यान हटाने के लिए कश्मीर के नाम पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश में लगा हुआ है। वह अपनी सेना को भी तैयार कर रहा है और आतंकियों की फौज को भी भारत में घुसपैठ कराने की ताक में लगा हुआ है। पाकिस्तान को लग रहा है अगर भारत के कदम से कश्मीर में शांति कायम हो गई तो उसके नेताओं का वह दानापानी ही उठ जाएगा, जिसके नाम पर उनकी रोजी-रोटी टिकी हुई है।
सोच ले पाकिस्तान- सेनासोच ले पाकिस्तान- सेना 

इस बीच इंडियन आर्मी चीफ जनरन बिपिन रावत ने पाकिस्‍तान को चेतावनी दी है। जनरल रावत ने कहा है कि अगर पाकिस्‍तान युद्ध भड़काना चाहता है तो फिर उसे हमारी प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना होगा। आर्मी चीफ जनरल रावत ने कहा है, 'अगर एलओसी को दुश्‍मन फिर से सक्रिय करना चाहता है तो यह उसकी मर्जी है। हर कोई सावधानी और सुरक्षा के लिए सेना तैनात करता है और ऐसे में हमें इस बात से चिंतित नहीं होना चाहिए। सेना हमेशा जवाब देने के लिए तैयार है।' सेना प्रमुख जनरल रावत की मानें तो सेना और कश्‍मीरी नागरिको के बीच होने वाला संवाद बिल्‍कुल सामान्‍य है। सेना पहले भी उनसे बिना बंदूक के मिलती थी और उम्‍मीद है कि आगे भी ऐसा होता रहेगा। सेना प्रमुख के शब्दों में, '70 और 80 के दशक में सेना और कश्‍मीर के लोगों के बीच जैसा भाई-चारा रहता था, सेना फिर से उसी तरह का रिश्‍ता कश्‍मीर के लोगों के साथ बनाना चाहती है।' इससे पहले चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लन ने भी पाक को चेतावनी दी है। उन्‍होंने आगाह किया है कि अगर घाटी में कोई भी शांति भंग करने के लिए आएगा तो हम उसे खत्‍म कर देंगे। इस बीच पाकिस्तान के नापाक मंशा को नाकाम करने के लिए इंडियन नेवी की तरफ से वॉरशिप्‍स को भी हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। पाकिस्‍तान से सटे 754 किलोमीटर की तटीय सीमा पर संभावित हमले के मद्देनजर नेवी चौकन्‍नी है।
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