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उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है : अर्नब गोस्वामी

अर्नब गोस्वामी/ उद्धव ठाकरे
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सुशांत सिंह हत्या पर हो रही कार्यवाही से इतने विचलित क्यों हो रहे हैं? क्या उनकी सरकार ड्रग माफियों के सहारे चल रही है? यदि नहीं रिपब्लिक टीवी पर पाबन्दी लगाने का क्या मतलब निकाला जाए? क्या जिस उद्देश्य से आपके पिताश्री बालासाहेब ने शिव सेना उसे क्यों ताक रख सुशांत हत्या की आड़ में बॉलीवुड के माध्यम से पूरे देश में फ़ैल रही गंदगी के उजागर होने से क्यों परेशानी हो रही है? क्यों पत्रकारों को गिरफ्तार किया? जितना इस मुद्दे को उलझाया जाएगा, उससे कहीं अधिक गुल खिलाने वाला है। 
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के मुखिया अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए अपने दो कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मॉंग महाराष्ट्र सरकार से की है। साथ ही रिपब्लिक टीवी का प्रसारण बंद करने को लेकर केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी को लेकर भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार और कैमरामैन यशपालजीत सिंह को महाराष्ट्र पुलिस ने उस वक़्त हिरासत में लिया था, जब दोनों रिपोर्टिंग के लिए रायगढ़ गए थे। अर्नब गोस्वामी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ तीखा हमला करते हुए दोनों पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की है।
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने मुख्यमंत्री से कहा है,” मेरे पत्रकारों को तुरंत रिहा करें और अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाते हुए अपने पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करें, जो केबल ऑपरेटरों को सरेआम धमकी देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।”
गोस्वामी ने रिपब्लिक चैनल के लिए की गई कड़ी मेहनत और प्रयास को लेकर कहा,”मैं एक मुंबईकर हूँ।” साथ ही अपने चैनलों पर मनमाने प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना उनके नेटवर्क को छू भी नहीं सकती है, क्योंकि मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लोग उनके साथ हैं।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे। रिपब्लिक टीवी ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार उनके रिपोर्टर अनुज कुमार से जबरन पूछताछ का प्रयास कर रही है।


अर्नब गोस्वामी की हालिया सुशांत सिंह राजपूत और पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में मामले में व्यापक कवरेज और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ किए गए हमलावर सवालों की वजह से रिपब्लिक टीवी को डराने और धमकाने का काम किया जा रहा है।
सितम्बर 10 को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा था। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की थी।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातका....
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।

महाराष्ट्र सरकार का अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला ;अघोषित आपातकालीन

शिवसेना-रिपब्लिक टीवी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातकाल की याद करवा दी है। इस दौरान प्रेस सेंसरशिप के साथ गायक किशोर कुमार द्वारा संजय गाँधी के एक कार्यक्रम में जाने से मना करने की वजह से किशोर के रेडियो और फिल्मों में गायन पर पाबन्दी के साथ संजीव कुमार और सुचित्रा सेन अभिनीत फिल्म "आंधी" पर प्रतिबन्ध केवल इसलिए लगाया कि नायिका इंदिरा गाँधी की छवि प्रस्तुत कर रही थी, अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म "रोटी कपडा और मकान" एक गीत "हाय महंगाई मार गयी...." को फिल्म से निकलवाने के साथ-साथ रेडियो प्रसारण पर भी पाबन्दी इसलिए लगाई कि यह चर्चित हो रहा था। इस गीत के रेडियो प्रसारण पर भी पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। फिल्म "किस्सा कुर्सी का" को सेंसर से पास नहीं होने दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के विरुद्ध बोलने वाले नेताओं को जेलों में डाल दिया था। यानि जिस तरह कांग्रेस ने आपातकाल में व्यक्ति की अभिव्यक्ति पर पूर्णरूप से पाबन्दी लगा दी थी, उसी राह पर कांग्रेस के सहयोग से चल रही शिव सेना सरकार चल पड़ी है। 
पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने सितम्बर 10, 2020 को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी है।
बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की हैं।
शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ उठाया गया यह कदम बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिपब्लिक टीवी द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग के बीच आई है। इसके अलावा, हाल ही में अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में द्वारा BMC द्वारा किए गए विवादास्पद नुकसान को लेकर भी महाराष्ट्र कि शिवसेना घिरती हुई नजर आ रही है और रिपब्लिक टीवी ने इसे भी प्रमुखता से अपने समाचार चैनल पर जगह दी है।
                शिव सेना द्वारा महाराष्ट्र के केबल ऑपरेटर्स
को लिखा गया पत्र
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।
इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला 
शिवसेना द्वारा रिपब्लिक टीवी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के प्रयासों के बाद, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि शिवसेना केबल, जो कि शिवसेना विंग का हिस्सा है, ने ‘संजय राउत के मार्गदर्शन’ के तहत एक आदेश जारी किया। रिपब्लिक टीवी ने कहा कि यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में केबल ऑपरेटरों के लिए एक खुला खतरा है।


रिपब्लिक टीवी ने इस पर बयान देते हुए कहा, “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।”
मीडिया नेटवर्क ने अपने बयान में कहा, “वे हर घर में दर्शकों तक पहुँचने के अपने रिपोर्ट के अधिकार और बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। मीडिया नेटवर्क ने कहा कि वे रिपब्लिक के सवालों को बंद करना चाहते हैं और रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग को रोकना चाहते हैं। हालाँकि, वे रिपब्लिक टीवी को ब्लॉक नहीं कर सकते क्योंकि भारत के लोग हमारे साथ हैं।”
महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के कवरेज के बाद से ही रिपब्लिक टीवी चैनल महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ कि कवरेज के दौरान भी मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक चैनल के पत्रकारों से धक्का-मुक्की की और उन्हें गिरफ्तार भी किया।

#DemolishPriyankaHimachalHome यूजर्स की मांग ‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’

हिमाचल में प्रियंका का बंगला 
अंग्रेजी में एक कहावत है "You show me the man, I will show you the rule", यह बात पता नहीं कितनी चरितार्थ हो चुकी है और हो भी रही है। कानून का डंडा चलता है आम नागरिकों पर, लेकिन सियासतखोरों के पास कानून फटकता तक नहीं। कार्यवाही केवल राजनीतिक बदले में ही होती है, अन्यथा कानून इन्हें छू भी नहीं पाता। उदाहरणार्थ गाँधी परिवार और मायावती आदि पर कितने घोटालों के आरोप हैं, यदि यही आरोप किसी आम नागरिक पर होते, क्या वह इस तरह खुला घूम रहा होता? इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशांत की हत्या का मुख्य कारण उजागर हो या न हो, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में बॉलीवुड में चल रहे कांडों से पूर्णरूप से पर्दा हटेगा, इस बात पर भी शक है।
   
सुशांत मामले में मुखर अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर सोशल मीडिया पर लोग शिमला में प्रियंका गांधी की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग कर रहे हैं। बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली व्यक्ति राज्य में घर नहीं खरीद सकता, इसलिए प्रियंका का शिमला के छराबड़ा स्थित घर अवैध है। इसे हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है।
आज प्रियंका की संपत्ति पर जो भी लोग ऊँगली उठा रहे हैं, अब से पहले कहां थे? क्यों नहीं पहले आवाज़ उठी? अब इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदला ही कहा जाएगा। प्रियंका ने हिमाचल में क्या आज संपत्ति बनाई है, जो उस पर ऊँगली उठाई जा रही है? यानि प्रियंका ने जो भी संपत्ति बनाई राजनीतिक संरक्षण में बनाई और राजनीतिक संरक्षण मिलता भी रहेगा, जनता चाहे जितना सिर पटक ले। 


मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।
कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।




जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।
एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”
प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।
यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ
#DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।
लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

राजदीप के लिए कभी दाऊद इब्राहिम भी था ‘विक्टिम’

रिया के झूठ की पोल खोलता सुशांत का पुराना इंटरव्यू वायरल, राजदीप और रिया के  PR स्टंट का पर्दाफ़ाश | द छीछालेदरफिलहाल रिया चकवर्ती का ‘प्रायोजित साक्षात्कार’ करने को लेकर राजदीप सरदेसाई विवादों में हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया मुख्य आरोपित हैं। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब राजदीप ने अपने पाखंड से आरोपित का इमेज गढ़ने की कोशिश की है।
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए भी वे सालों पहले ऐसी ही दरियादिली दिखा चुके हैं। यह वाकया 1993 का है, जब मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 1,400 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की शह पर दाऊद ने इसे अंजाम दिया था। लेकिन उस वक्त टाइम्स ऑफ इंडिया में काम करने वाले राजदीप ने एक लेख लिखकर उसे ऐसे पेश किया जैसे वह ही पीड़ित हो। ठीक वैसे ही जैसा अभी उन्होंने रिया चकवर्ती के मामले में करने की कोशिश की है।
riya chakravarthi now with sushant singh rajput
क्या रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट के
मकरकाल में फंस गए थे सुशांत सिंह ? 
रिया के साथ साक्षात्कार में राजदीप ने सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया। इसे ऐसे पेश किया मानो मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है, जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था।
सुशांत पर मानसिक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है। इतना ही नहीं इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने रिया को अपनी कहानी सुनाने का भरपूर मौका देते हुए उन सवालों का जिक्र तक नहीं किया जिनके कारण रिया कठघरे में हैं।
ये कोई पहला मामला नहीं है जहाँ राजदीप सरदेसाई अपराधियों का सहयोग कर रहा हो, इस से पहले इसने कुख्यात आतंकवादी दावूद इब्राहीम को देशभक्त भी बताया था।  
India First - "MUSLIMS AND THE BLASTS Must They Wear A... | Facebookइसी तरह 1993 के बम धमाकों के बाद राजदीप ने अपने लेख में लिखा था। जिस पर पूर्व पत्रकार एसजी मूर्ति ने इस मुद्दे को चार साल पहले उठाया था और बताया था साल 1993 में राजदीप ने कैसे अपने लेख में दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताकर उसे बचाने का प्रयास किया था। लेकिन राजदीप ने तब प्रतिक्रिया के रूप में एक वीडियो बना दी और कई कुतर्क करते हुए दोबारा अपने उस दावे को सही ठहराने की कोशिश की, जहाँ उन्होंने दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताया था। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि जिस दोषपूर्ण मानदंडों पर उन्होंने उसे राष्ट्रवादी कहा, उसकी पैरोकारी शिवसेना अध्यक्ष बाला साहब ठाकरे भी किया करते थे।
हालाँकि, यदि राजदीप के उस आर्टिकल पर नजर डाली जाए तो ये मालूम चलता है कि वाकई राजदीप ने दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा था। बल्कि वो आर्टिकल तो पूर्णत: इस बात पर था कि चूँकि भारत में मुस्लिमों को दबाया जाता है, इसलिए दाऊद ने मुस्लिम होने के नाते यह ब्लास्ट करवाए।
इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि भले ही राजदीप ने तब दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा, लेकिन अपने कुतर्कों से उसे पीड़ित दिखाने की कोशिश जरूर की और उसको साल दर साल जस्टिफाई करते रहे। साल 2015 में उन्होंने हिंदुस्तान के एक लेख में फिर अपने पुराने प्रश्न का जिक्र किया कि आखिर साल 1992 में भारत-पाक मैच में तिरंगा लहराते हुए, भारतीय टीम को तोहफे देने वाला दुबई का स्मगलर 6 महीने में कराची का आतंकी कैसे बन गया? क्या उसके लिए बाबरी मस्जिद एक टर्निंग प्वाइंट था?
राजदीप सरदेसाई के लिए पत्रकारिता का मतलब प्रोपेगेंडा शुरुआत से ही रहा है। उनके लिए गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीनचिट मायने नहीं रखती, लेकिन दूसरी ओर चिदंबरम से माफ़ी माँगते उन्हें देर नहीं लगती। याद दिला दें कि सीएनएन आईबीएन में रहते राजदीप पर कैश फॉर वोट की स्टिंग की सीडी भी डकारने के आरोप लगे थे। इसके अलावा राडिया केस में भी राजदीप का नाम उछल चुका है।

उत्तराखंड भाजपा मीडिया रिलेशन : बैन की जाए लव जिहाद को प्रमोट करती फिल्म केदारनाथ

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
7 दिसंबर को रिलीज होनी वाली फिल्म केदारनाथ विवादों में फंस गई है। ताजा मामला उत्तराखंड की बीजेपी मीडिया रिलेशन टीम से जुड़ा है। राज्य में भाजपा की मीडिया रिलेशंस टीम से जुड़े अजेंद्र अजय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को नवम्बर 10 को लिखा कि सबसे खराब मानवीय आपदाओं में से एक की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म हिन्दुओं की भावनाओं का मजाक बनाती है। एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अजय ने कहा कि सबसे दुर्भाग्य पूर्ण मानव त्रासदी के बैकड्रॉप में डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने लव स्टोरी बनाकर हिन्दू भावनाओं का मजाक उड़ाया है।
लव जिहाद बढ़ाती है फिल्म : अजय ने कहा कि फिल्म के जरिए न सिर्फ आस्था अाहत हो रही है बल्कि लव जिहाद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। अजय ने बोर्ड से फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने फिल्म के रिलीज होने की कंडीशन में बड़े पैमाने पर विरोध करने की चेतावनी दी है। 
पहले पुजारियों ने किया विरोध : फिल्म टीजर लॉन्च के बाद केदारनाथ तीर्थ के पुरोहितों ने इस फिल्म को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। पंडितों का कहना है कि यह फिल्म हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है इसलिए इस पर बैन लगाया जाना चाहिए।
शूटिंग के वक्त भी हुआ था विरोध : हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ में पुजारियों के संगठन केदार सभा के चेयरमैन विनोद शुक्ला का कहना है- अगर फिल्म को बैन नहीं किया गया तो हम आंदोलन करेंगे। हमें पता चला है कि यह फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है और इससे हिन्दू भावनाएं आहत हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्ला ने कहा कि पुजारियों ने उस वक्त भी कड़ा विरोध किया था, जब केदारनाथ के पास इस फिल्म के अश्लील गाने की शूटिंग की गई थी।
विवादों में ‘केदारनाथ’ पर प्रतिबंध की मांग, Love Jihad को बढ़ावा देने का फिल्म पर आरोप
बैकग्राउंड में बोल्ड सीन पर आपत्ति : रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में केदारनाथ फिल्म का विरोध किया था। वैसे फिल्म का विरोध तो तभी से शुरू हो गया था, जब फिल्म के पोस्टर रिलीज हुए थे। स्थानीय नेता अजेंद्र अजय ने अपने एक ट्वीट में सीबीएफसी (सेंसर बोर्ड) के चेयरमैन प्रसून जोशी से इस फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। अजय ने ट्वीट में लिखा- फिल्म में कपल को बाढ़ के उस बैकग्राउंड में बोल्ड सीन करते दिखाया गया है, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। फिल्म के टीजर में मुख्य कलाकार सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान के बीच एक चुंबन दृश्य दिखाया गया है और इसके पोस्टरों में टैगलाइन है ‘लव इज ए पिलग्रिमेज’ 
Image result for फिल्म केदारनाथ
अजय ने फिल्म के पोस्टर्स पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें एक मुस्लिम लड़के को हिंदू लड़की को पीठ पर ले जाते दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि यह टेक्निकली गलत है क्योंकि केदारनाथ के रास्ते पर आप किसी भी मुस्लिम शख्स को ढुलाई करते नहीं देखेंगे।
टैगलाइन को लेकर भी हो रहा विरोध : फिल्म की टैगलाइन 'Love is Pilgrimage' पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। अजय ने कहा कि सारा अली खान इस पोस्टर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते वक्त एक कदम और आगे निकल गईं जब उन्होंने लिखा- "No Tragedy, No Wrath of Nature, No Act of God Can Defeat the Power of Love.’।
'केदारनाथ' 2013 में आई केदारनाथ आपदा पर बेस्ड एक लव स्टोरी है। अभिषेक कपूर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान लीड रोल में हैं।