Showing posts with label # bjp. Show all posts
Showing posts with label # bjp. Show all posts

‘ब्लैक में टिकट बेचने वाले AAP नेता संजय सिंह ने काटी मुख्यमंत्री योगी की Video’

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री को राजपूत जाति का नेता दिखाने के लिए एक इंटरव्यू की छोटी क्लिप काटकर शेयर की है। इस वीडियो में सीएम योगी बताते नजर आ रहे हैं कि जब कोई उन्हें राजपूतों की पॉलिटिक्स करने वाला कहता है तो उन्हें कोई दुख नहीं होता। इस क्लिप के साथ संजय सिंह ने लिखा, “ये देखिए आदित्यनाथ जी ने साफ़ कर दिया की कोई भी इनको कहे कि ‘ये सिर्फ़ क्षत्रियों के नेता हैं तो इनको बुरा नही लगता’ आपको तो 24 करोड़ लोगों का नेता होना चाहिए आदित्यनाथ जी। क्या सबका साथ सबका विकास का नारा दिखावा मात्र है?”

अब जिस क्लिप पर संजय सिंह ने योगी आदित्यनाथ से सवाल किया है कि क्या ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा दिखावा मात्र है उसी इंटरव्यू के उसी स्लॉट की थोड़ी लंबी वीडियो शेयर करते हुए भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया कि कैसे संजय सिंह झूठ फैला रहे हैं। अपने ट्वीट में बग्गा ने लिखा , “संजय माना तू सिनेमा के बाहर टिकट काटता था लेकिन वीडियो क्यों काट दिया।”

इस वीडियो में योगी आदित्यनाथ को साफ कहते सुना जा सकता है कि जब लोग उन्हें राजपूतों की पॉलिटिक्स करने वाला कहते हैं तो उन्हें कोई दुख नहीं होता। वह आगे बोलते हैं, “क्षत्रिय जाति में पैदा होना कोई पाप थोड़े ही है। इस देश की ऐसी जाति है जिसमें भगवान ने जन्म लिया है। बार-बार जन्म लिया है। अपनी जाति पर स्वाभिमान तो हर जाति के लोगों को होना चाहिए।”

अपनी बात आगे जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “मैंने प्रदेश के अंदर बिना भेदभाव के बिना चेहरा देखे हर जाति, हर मत, हर मजहब के लोगों के हितों के लिए हमारी सरकार ने काम किया है। मैं मानता हूँ कि जाति-जाति की बात वे लोग करते हैं जो जब अवसर मिलता है तो सिर्फ अपने परिवार की बातें करते हैं। वे लोग जाति के लिए भी कार्य नहीं करते। हमने अगर 43 लाख लोगों के लिए आवास बनाए तो इसमें क्षत्रिए तो 1 फीसद भी नहीं हैं। ये किसी गरीब, दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़े के ही बने हैं। 2 करोड़ 61 लाख शौचालय भी इन्हीं लोगों के बने हैं। 15 करोड़ों को खाद्यान्न मिले हैं वो किसी का चेहरा जाति देखकर नहीं दिया गया। सरकार ने सबका साथ सबका विकास के भाव के साथ कार्य किया है, उसी के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।”

संजय सिंह के झूठ से पर्दा उठने के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग आम आदमी पार्टी को भला-बुरा बोल रहे हैं। कोई उन्हें झूठ का सबसे बड़ा सिपाही बता रहा है और जो लोग संजय सिंह के फैलाए झूठ में आ रहे हैं उन्हें पूरी वीडियो और रिप्लाई देखने का सुझाव दे रहे हैं। एक यूजर संजय सिंह को टिकट ब्लैकर कहते हुए भारतीयों को दिखाता है कि कैसे खुलेआम एक वीडियो को एडिट करते शेयर किया जा रहा है ताकि भारत जाति में बँटे। वहीं एक यूजर इस हरकत को आपिया संजय सिंह औकात बताते हुए लिखते हैं टिकट ब्लैक से वीडियो क्रॉप तक।

महाराष्ट्र : नगर पंचायतों में BJP सबसे आगे, शिवसेना चौथे नंबर की पार्टी बनी

महाराष्ट्र के नगर पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के कुल 384 उम्मीदवार जीते हैं। दूसरे नंबर पर एनसीपी है, जिसके 344 उम्मीदवार जीते हैं। कॉन्ग्रेस के 316 उम्मीदवारों को जीत मिली है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का नेतृत्व कर रही शिवसेना चौथे नंबर पर है। उसे 284 सीट मिली है। 206 निर्दलीय भी जीतने में कामयाब रहे हैं।

नगर पंचायत की 1649 सीटों के लिए मंगलवार (18 जनवरी 2022) को मतदान हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह चुनाव ओबीसी आरक्षण के बगैर हुआ था। पंचायत चुनावों में मिली सफलता के बाद भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सत्ताधारी पार्टी ने इन चुनावों में पैसे, पावर और प्रशासन का गलत इस्तेमाल किया, इसके बाद भी महाराष्ट्र के लोग दृढ़ता के साथ भाजपा के साथ खड़े रहे। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “बीजेपी फिर एक बार महाराष्ट्र में नम्बर 1। जब प्रदेश में हमारी सरकार थी तब से भी 65 सीट, इस बार अधिक आई है। महाराष्ट्र की जनता ने फिर एक बार हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताया है। मैं महाराष्ट्र की जनता का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।”

इन चुनावों में लगभग 81 प्रतिशत मतदाता ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि पार्टी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। लगभग 26 महीनों तक सत्ता से बाहर रहने के बावजूद, भाजपा सफल रही है और इससे पता चलता है कि हम सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के बावजूद अच्छे परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी 24 नगर पंचायतों का नेतृत्व हासिल कर सकती है।

बात अगर अलग-अलग क्षेत्रों की करें तो मराठवाड़ा में कुल 22 नगर पंचायत हैं। इसमें बीजेपी के खाते में 6 गई हैं। शिवसेना को चार, कॉन्ग्रेस को तीन और एनसीपी को 2 जगहों पर सफलता मिल पाई। वहीं विदर्भ की बात करें तो वहाँ की 28 पंचायतों में से बीजेपी और कॉन्ग्रेस को 5-5 और एनसीपी को दो मिली है। शिवसेना का यहाँ खाता भी नहीं खुला है। कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में बीजेपी ने पाँच नगर पंचायत जीती है। शिवसेना को यहाँ चार,  NCP को 8 और कॉन्ग्रेस को केवल एक नगर पंचायत में सफलता मिली है।

नगर पंचायत चुनावों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण से इनकार किए जाने के बाद सभी सीटे अनारक्षित कर दी गई थी। जानकारों का मानना है कि चुनावों में इसका असर नहीं दिखा। महाराष्ट्र सरकार ने वैसे यह फैसला वापस लेने के लिए दिसंबर में शीर्ष अदालत के सामने एक अनुरोध भी दायर किया था।

वोट जिहाद: मुसलमानों के वोटिंग पैटर्न को बहुत बारीक़ी के साथ समझिए…!

बाबा इज़रायली, उगता भारत  

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ भारत के एक हिंदू संगठन का ही अनुषांगिक प्रकल्प है। यह प्रकल्प राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को भाजपा से जोड़ने के प्रयासों का क्रियान्वयन करने के लिए जाना जाता है। हिंदुओं का एक बड़ा हिस्सा यह मानता है कि इस प्रकल्प के मुसलमान सदस्य ‘राष्ट्रवादी’ होते हैं और वे इस्लामी कट्टरता और जिहाद जैसे आतंकवादी कुकृत्यों में संलिप्त न रहकर भारतीय जनता पार्टी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नामक ध्येय में अपना विश्वास रखते हैं और भाजपा को वोट देते हैं।

हमको विभिन्न समाचार-पत्रों से यह ज्ञात हुआ है कि इस राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में देश के मुस्लिम समुदाय से भाजपा को वोट देने की अपील की है। इस अपील को सुनकर भारतीय हिंदुओं का एक बड़ा हिस्सा यह सोचने लगा है कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की इस अपील पर भारत के मुस्लिम मतदाता भाजपा-विरोधी सांप्रदायिक ताक़तों के हाथ की कठपुतली नहीं बनेंगे और भाजपा के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नामक ध्येय में अपना विश्वास रखते हुए भाजपा को अपना वोट प्रदान करेंगे।

प्यारे हिंदुओं! इस अपील को सुनकर यदि आपके हृदय में यह विचार आ रहा है कि राष्ट्रीय मुस्लिम राष्ट्रीय मंच जैसे विभिन्न इस्लामी प्रकल्प भाजपा के पक्ष में प्रचार-कार्य कर रहे हैं तो आपको अपनी याददाश्त पर थोड़ा-सा ज़ोर डालने की आवश्यकता है। यदि आप पूर्व में हुए चुनावों में इन इस्लामी प्रकल्पों की कथनी और करनी का अन्वेषण करेंगे तो आपको इनकी असलियत पता चल जाएगी।

उदाहरण के लिए वर्ष 2021 में हुए असम विधानसभा चुनावों को ही ले लेते हैं जिनमें कि लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज़ होने वाली भाजपा को 126 में से 60 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बावजूद भाजपा ने असम में अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को भंग कर दिया था। भाजपा द्वारा अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को भंग करने के पीछे की मुख्य वजह यह थी कि असम विधानसभा चुनावों में उसके अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदर्शन बेहद निम्न स्तर का रहा था। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा का यह प्रदर्शन इतना ख़राब था कि भाजपा को अपने अल्पसंख्यक मोर्चा के पंजीकृत सदस्यों तक के वोट प्राप्त नहीं हुए थे! इसका मतलब यह है कि भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अंदर जो पंजीकृत मुस्लिम कार्यकर्ता थे, उन्होंने तक भाजपा को अपना वोट प्रदान नहीं किया था!

इसके बाद अल्पसंख्यक मोर्चा के द्वारा दी गई ग़द्दारी का पता चलते ही असम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने प्रदेश में पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे को ही भंग कर दिया था। दास ने कहा था कि पार्टी को उन क्षेत्रों में बहुत कम वोट मिले, जिनकी हमें उम्मीद थी। चुनाव परिणामों का अन्वेषण करने के उपरांत पता चला था कि भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा की बूथ कमेटियों के पंजीकृत सदस्यों ने भी भाजपा को वोट नहीं दिया था। उन विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी कम से कम सात प्रवासी मुस्लिम-बहुमत वाली सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही थी। इसके लिए उसने मतदाताओं को लुभाने के लिए बूथ स्तर की जनसभाओं सहित एक मतदाता-केंद्रित रणनीति भी अपनाई थी लेकिन अपने मुस्लिम कार्यकर्ताओं के द्वारा धोखा देने के बाद असम भाजपा को अपने अल्पसंख्यक मोर्चा की स्टेट कमेटी, डिस्ट्रिक्ट कमेटी और मंडल कमेटी को भंग करना पड़ गया था।

प्यारे हिंदुओं, आप बाबा इज़रायली की इस बात को हमेशा याद रखना कि मुसलमान कभी भी भाजपा को वोट नहीं दे सकता है। यहां पर यदि आप यह समझ रहे हैं कि मुसलमान सपा-बसपा एवं कांग्रेस जैसी सेकुलर पार्टियों को वोट देता है तो भी आप एकदम ग़लत हैं। दरअसल मुसलमान कभी भी सपा-बसपा अथवा कांग्रेस जैसी तथाकथित सेकुलर पार्टियों को भी कभी वोट नहीं देता है। मुसलमान ‘पार्टी’ की जगह हमेशा ‘सीट’ पर वोट करता है। हर सीट पर भाजपा के विरुद्ध जो भी उम्मीदवार मुक़ाबले में होता है, मुसलमान केवल उसी को वोट देता है। यह बात अलग है कि ऐसा करने से उसका वोट सपा-बसपा अथवा कांग्रेस आदि पार्टियों को मिल जाया करता है और ये मूर्ख पार्टियां इस ग़फ़लत को पालने लग जाती हैं कि मुसलमान मतदाता उनको वोट दे रहा है।

उदाहरण के लिए पिछले कुछ समय में जैसे-जैसे इस्लामी कट्टरपंथी मोहम्मद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी भूमि तलाशना शुरू की है, वैसे-वैसे मुसलमानों के लिए सपा-बसपा और कांग्रेस जैसी तथाकथित सेकुलर पार्टियों की अहमियत कम होती चली गई है। इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण वर्ष 2020 में बिहार के सीमांचल क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों पर हुए चुनावों में देखने में आया जब मुसलमानों ने वहां के भाजपा-विरोधी ‘महा-गठबंधन’ की सेकुलर पार्टियों को लात मारकर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम पार्टी को अपना एकमुश्त वोट दिया और अपने पांच मुस्लिम विधायकों को चुनने में कामयाबी हासिल की।

इसके अलावा एक बात और कि ‘विकास’ एवं ‘सेकुलरिज़्म’ नामक भस्मासुरी सिद्धांतों का कीड़ा केवल हिंदुओं को ही काटता है। मुसलमान इन मुद्दों पर कभी भी वोट नहीं देता है। मुसलमान केवल और केवल उन्हीं उम्मीदवारों को अपना वोट देता है जो उसके ‘इस्लामी हितों’ को सुरक्षित बनाए रहने की 100% गारंटी देते हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनावों के बीच में जब एक मुस्लिम से यह पूछा गया कि भाजपा की नीति तो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की है तो फिर आप क्यों उसका विरोध करते हैं? इस सवाल के जबाब में उस मुस्लिम का कहना था कि जब हमारी मज़हबी आज़ादी (असलियत में इस्लामी गुंडागर्दी) ही सुरक्षित नहीं है तो क्या हम विकास को लेकर चाटेंगे? काश! भारत के पढ़े-लिखे हिंदू भी अनपढ़-ज़ाहिल कहे जाने वाले इस मुस्लिम मतदाता की राजनितिक क़ाबलियत से कुछ सबक़ सीख पाते!

हिंदुओं, आपको मुसलमान के वोट देने का पैटर्न जितनी जल्दी समझ में आ जाएगा, उतना आपके भविष्य के लिए बेहतर रहेगा! उम्मीद है कि आप भी मुसलमानों के वोटिंग पैटर्न को समझ कर उसके विरुद्ध वैसे ही ‘हिंदू वोटिंग पैटर्न’ पर कार्य करेंगे और प्रत्येक स्थिति में केवल और केवल भाजपा को ही अपना वोट प्रदान करेंगे। यदि आपने ऐसा न किया तो आने वाले समय में जैसे-जैसे आपकी जनसंख्या कम होती चली जाएगी वैसे-वैसे आपके वोट की अहमियत भी कम हो जाएगी। उसके बाद एक बार जैसे ही मुसलमानों के एकजुट वोट के दम पर इस्लामी पार्टियां सत्ता में आएंगी, आपकी सेकुलरिज़्म का भारत के अंदर भी ठीक उसी तरह से ‘इलाज’ किया जाएगा जिस तरह से पूर्व में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी मुल्कों में किया गया था।

और हां, यह तो रही हिंदू मतदाताओं की बात लेकिन उनका वोट लेने वाली पार्टी भाजपा को भी अपनी कार्यविधियों पर चिंतन और मनन करने की अत्यंत ही आवश्यकता है। उसे भी राष्ट्रवादी हिंदू पक्ष का वोट लेकर राष्ट्रद्रोही आतंकवादी पक्ष का विकास नहीं करना होगा। उसके द्वारा ऐसा करना, अपने हिंदू-मतदाताओं के साथ विश्वासघात करना होगा। पूरी तरह से हिंदू वोटों के द्वारा चुनकर आने वाली भाजपा को केवल और केवल हिंदू-हितों के लिए ही कार्य करने हेतु चुना जाता है। यदि उसे इस्लामी और हिंदूद्रोही तबके का भी विकास करना है तो फिर हिंदुओं के लिए उसमें और अन्य पार्टियों के बीच में फ़र्क़ करने का आधार ही क्या बचा रह जाएगा? 

#DemolishPriyankaHimachalHome यूजर्स की मांग ‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’

हिमाचल में प्रियंका का बंगला 
अंग्रेजी में एक कहावत है "You show me the man, I will show you the rule", यह बात पता नहीं कितनी चरितार्थ हो चुकी है और हो भी रही है। कानून का डंडा चलता है आम नागरिकों पर, लेकिन सियासतखोरों के पास कानून फटकता तक नहीं। कार्यवाही केवल राजनीतिक बदले में ही होती है, अन्यथा कानून इन्हें छू भी नहीं पाता। उदाहरणार्थ गाँधी परिवार और मायावती आदि पर कितने घोटालों के आरोप हैं, यदि यही आरोप किसी आम नागरिक पर होते, क्या वह इस तरह खुला घूम रहा होता? इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशांत की हत्या का मुख्य कारण उजागर हो या न हो, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में बॉलीवुड में चल रहे कांडों से पूर्णरूप से पर्दा हटेगा, इस बात पर भी शक है।
   
सुशांत मामले में मुखर अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर सोशल मीडिया पर लोग शिमला में प्रियंका गांधी की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग कर रहे हैं। बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली व्यक्ति राज्य में घर नहीं खरीद सकता, इसलिए प्रियंका का शिमला के छराबड़ा स्थित घर अवैध है। इसे हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है।
आज प्रियंका की संपत्ति पर जो भी लोग ऊँगली उठा रहे हैं, अब से पहले कहां थे? क्यों नहीं पहले आवाज़ उठी? अब इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदला ही कहा जाएगा। प्रियंका ने हिमाचल में क्या आज संपत्ति बनाई है, जो उस पर ऊँगली उठाई जा रही है? यानि प्रियंका ने जो भी संपत्ति बनाई राजनीतिक संरक्षण में बनाई और राजनीतिक संरक्षण मिलता भी रहेगा, जनता चाहे जितना सिर पटक ले। 


मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।
कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।




जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।
एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”
प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।
यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ
#DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।
लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

दिल्ली : आप ने उत्तराखंड की इष्ट देवी नंदा देवी की तुलना कूड़े के ढेर से

अरविन्द केजरीवाल की पार्टी ने उत्तराखंड की
इष्ट देवी का किया अपमान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आम आदमी पार्टी कितनी हिन्दू विरोधी हो सकती है, दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के अलावा इसके गरीब, मजलूम शांतिदूतों द्वारा राजौरी गार्डन, विकासपुरी और लाल कुआँ में हुए हिन्दुओं पर हमलों पर ख़ामोशी साध दंगाइयों को संरक्षण दिया जाता रहा है। 
अरविन्द केजरीवाल माफ़ी मांगो 
अरविन्द केजरीवाल जो चुनावों में हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, लेकिन यह नहीं जानते की हनुमान राक्षसों और धर्म का अपमान करने वालों के घोर विरोधी थे। लेकिन चुनाव उपरांत उनकी हरकतों से उनके हिन्दू होने पर ही संदेह होने लगता है।
जिस तरह आप के अधिकारित ट्वीट से गाज़ीपुर के कूड़े के ढेर की भारत के सबसे ऊँचे पहाड़ों से करने पर भी बेशर्मों की तरह चुप्पी साधे होने का क्या अर्थ निकाला जाए। क्या केजरीवाल सहित पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं उन सबको राष्ट्र से माफ़ी मांगनी चाहिए। क्या इन आपी हिन्दुओं को नहीं मालूम की हमारे हिन्दुओं के अधिकतर तीर्थ जैसे : वैष्णो देवी, भैरों, शिव खोडी, अमरनाथ, माँ नन्दा देवी आदि पहाड़ों पर ही हैं। क्या गाज़ीपुर कूड़े का ढेर इन पहाड़ों से ऊँचा है? यदि नहीं, फिर किस आधार पर अधिकृत ट्विटर पर इसे भारत का सबसे ऊँचा पहाड़ बताया? क्या लोकप्रियता या चर्चा में रहने का कोई और अन्य तरीका नहीं था, जो हिन्दू तीर्थों का अपमान कर किया जा रहा है? अगर अरविन्द केजरीवाल में लेशमात्र भी शर्म है, तो तुरंत माफ़ी मांगे। 
मोदी विरोध करने में कांग्रेस और वामपंथी तो बेनकाब हो गयी है, अगला नंबर केजरीवाल पार्टी का है, जो आगामी नगर निगम चुनाव के कारण हिन्दू विरोधी प्रचार कर मुस्लिम वोट बैंक को खुश कर रहे हैं। 
दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र भी ‘पॉल्यूशन कैपिटल’ के रूप में देखता है लेकिन अरविन्द केजरीवाल की सरकार इस छवि को बदलने की बजाए आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई है, भले ही इससे देश की बदनामी ही क्यों न हो। ईस्ट दिल्ली के गाजीपुर में भारत का सबसे बड़ा कूड़ा-करकट का पहाड़ है, देश का सबसे बड़ा कचरे का ढेर। केजरीवाल की पार्टी ने इसकी तुलना उन पवित्र पर्वतों से की है, जिसकी लोग पूजा करते हैं। इसी क्रम में AAP ने गाजीपुर के कचरे के ढेर की तुलना उत्तराखंड की नंदा देवी से कर दी, जो राज्य की इष्ट देवी भी हैं।
आगे बढ़ने से पहले उस कचरे के पहाड़ के बारे में बता दें कि वो 40 फुटबॉल पिच से भी अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है। आवारा कुत्ते और गाय वहाँ घुमते रहते हैं। जानवर बीमार पड़ते हैं। 1 साल पहले ही इसकी ऊँचाई 213 फ़ीट थी। ऊँचाई में ये इस्लामी आक्रांताओं द्वारा बनाए गए ताजमहल और कुतुब मीनार को टक्कर दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट तो यहाँ तक कह चुका है कि कुछ दिनों बाद वहाँ से गुजरने वाले हवाई जहाजों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ेगा।
आते हैं आम आदमी पार्टी (AAP) की करतूत पर, जिसने गाजीपुर के उस कुड़े के पहाड़ की तुलना तीन पवित्र पर्वतों से की। उसने लिखा कि सिक्किम में कंचनजंघा सबसे बड़ा पर्वत है। इसके बाद उसने तस्वीरें डालते हुए लिखा कि इसी तरह उत्तराखंड में नंदा देवी और कामेट पर्वत शहर सबसे ऊँचा है। लेकिन इन तीनों के साथ ही उसने गाजीपुर के कचरे के पहाड़ की तस्वीर भी डाल दी और लिखा कि इसे भाजपा के एमसीडी ने बनाया है।
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ऐसा किया। इसके बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर शुरू हो गया। बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने जिन पर्वतों का जिक्र किया, वो न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए पवित्र हैं बल्कि पूरा देश उन पर गर्व करता है और उन्हें पूजता है। भारत में हिमालय को भी देवता माना गया है, जिसके घर माँ पार्वती का जन्म हुआ था। ऐसे में AAP का ये मजाक लोगों को नागवार गुजरा। उत्तराखंड में तो नंदा देवी का विशेष महत्व है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी नेहा जोशी ने कहा कि AAP और अरविन्द केजरीवाल ने हमेशा उत्तराखंड और यहाँ के निवासियों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि नंदा देवी उत्तराखंड की इष्ट देवी हैं और उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केजरीवाल से इस मामले में माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सीएम केजरीवाल ने बाटला हाउस एनकाउंटर में बलिदान हुए मोहन चंद्र शर्मा के शौर्य पर सवाल उठाया था।
नेहा जोशी ने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए केजरीवाल और उनकी पार्टी ने जो दुस्साहस किया है, उन्हें उस हर एक व्यक्ति से माफ़ी माँगनी चाहिए, जो माँ नंदा की उपासना करते हैं। वहीं उत्तराखंड के एक अन्य ट्विटर हैंडल ‘सनातन टाइम्स’ ने पूछा कि जिन माँ नंदा देवी की हम पूजा करते हैं, उनका अपमान करना कहाँ तक उचित है? उसने AAP को सलाह दी कि वो देवभूमि को अपनी गन्दी राजनीति से दूर रखे।

नंदा देवी का अर्थ है वो देवी, जो आनंद प्रदान करती हैं। 1983 में ही नंदा देवी और इसके चारों तरफ की पहाड़ियों को पर्वतारोहण के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि स्थानीय लोगों के लिए इसका बड़ा ही धार्मिक महत्व है। नंदा देवी नेशनल पार्क तो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में आता है। इसे उत्तराखंड में सुनंदा देवी के नाम से भी पुकारते हैं। पूरे उत्तराखंड के लोग नंदा देवी को अपना इष्ट मानते हैं।

भाजपा नेता बग्गा का अरविन्द केजरीवाल पर गरीबों का अनाज चोरी का आरोप

CM केजरीवाल बग्गा
भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली में AAP सरकार के खिलाफ अनाज घोटाले का आरोप लगाया है। बग्गा ने कहा है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के हरि नगर विधायक राजकुमारी ढिल्लों इस घोटाले में शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधायक के इस्तीफे की माँग की है।
भाजपा नेता के अनुसार, आप सरकार ने दिल्ली के हरिनगर इलाके के मायापुरी रोड पर स्थित प्रतिभा विकास विद्यालय की कक्षाओं में हजारों टन अनाज रखा है। उन्होंने कहा कि ये सारे खाद्यान्न लॉकडाउन के दौरान लोगों के बीच बाँटा जाना था, लेकिन इसे बाँटा नहीं गया और इसे स्कूल बिल्डिंग में बंद करके रखा गया है।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने स्कूल के अंदर रखे अनाज के बोरों को दिखाते हुए वीडियो साझा किया हैं। बता दें इस वीडियो को कक्षाओं की खिड़कियों के माध्यम से शूट किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में हजारों टन अनाज सड़ रहा है। कक्षाओं के कमरे बंद हैं और जब स्कूल को कमरे खोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि फ़ूड इंस्पेक्टर की अनुमति के बिना कमरों नहीं खोला जा सकता है। बग्गा ने बताया कि अधिकारी मीडिया को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।  
तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने स्कूल में खाद्यान्न भंडार के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल का दौरा किया और सबूत इक्कठा करने के लिए वहाँ संग्रहीत खाद्यान्नों का वीडियो बनाया। कोरोना वायरस की वजह से चल रहे लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद है। जिसका उपयोग राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्न रखने के लिए एक गोदाम के रूप में किया गया है।
जब स्कूल प्रशासन ने भाजपा कार्यकर्ताओं को कक्षाओं में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी तो वे स्कूल के सामने AAP सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने “केजरीवाल चोर है” कहते हुए नारे भी लगाए और सीएम और स्थानीय विधायक से इस्तीफे की माँग की। बग्गा ने कहा कि राजकुमारी ढिल्लों ने गरीबों का भोजन चुराया है, उन्हें एक मिनट भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने माँग की कि विधायक को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर हुसैन की दिल्ली नगर निगम ने निरस्त की सदस्यता; पेंशन भी समाप्त होनी चाहिए

ताहिर हुसैन पार्षद सदस्यता रद्द
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन के मामले में बड़ी ख़बर आई है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) ने ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए मामले की जानकारी दी। नगर निगम के बयान के अनुसार 26 अगस्त को यह निर्णय लिया गया था। 
वार्ड संख्या 59-ई के पार्षद की सदस्यता निरस्त की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। आदेश के मुताबिक़ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 33 की उपधारा 2 में यह प्रावधान है। यदि कोई सदस्य लगातार सदन की 3 बैठकों में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उक्त पार्षद की सदस्यता समाप्त करके वार्ड के प्रतिनिधि पद को रिक्त घोषित कर सकता है। 
इसके बाद आदेश में यह भी लिखा है कि यह पार्षद का कर्तव्य है वह लंबी अवधि की अनुपस्थिति हेतु पूर्व सूचना माननीय महापौर अथवा निगम सचिव कार्यालय को दे। ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59 ई का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वो जनवरी 2020, फरवरी 2020 (मार्च 2020, अप्रैल 2020 और मई 2020 में कोविड 19 के चलते बैठक हुई नहीं), जून 2020 तथा जुलाई 2020 की बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित था। 
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश – 
वार्ड 59 के 
पार्षद की सदस्यता
समाप्ति का घोषणा – संख्या 5
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश
क्या बीजेपी गुप्तरुप से ताहिर का समर्थन कर रही है?
लेकिन सदन से उसकी सदस्यता खत्म करने की पूरी प्रक्रिया में दिल्ली हिंसा का कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है। ताहिर हुसैन की सदस्यता खत्म करने की सूचना उपराज्यपाल अनिल बैजल को भेज दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या करने, हत्या की साजिश रचने, हिंसा के लिए लोगों को उकसाने और हिंसा के लिए अवैध तरीके से धन एकत्रित करने का आरोप लगाया है। 
भाजपा शासित नगर निगम ने क्यों सदस्यता समाप्त करने में उसके दंगों में शामिल होने का कोई जिक्र तक नहीं किया? क्या भाजपा भी गुप्त रूप से उसकी सहायता कर रही। हिन्दू विरोधी दंगे करवाने के आरोपी ताहिर की सदस्यता समाप्त होने के साथ-साथ उसको मिलने वाली पेंशन भी समाप्त होनी चाहिए। जिसका सदन की शपथ लेते ही किसी भी सदन का सदस्य अधिकारी हो जाता है। अगर पेंशन समाप्त नहीं होती का सीधा-सा स्पष्ट प्रमाण होगा कि बीजेपी गुप्त रूप से ताहिर को समर्थन दे रही है। 
लेकिन वे इनमें से एक में भी उपस्थित नहीं हुए। नगर निगम एक्ट के नियम 33(2) के मुताबिक निगम की लगातार तीन बैठकों में बिना सूचना के अनुपस्थित होने सदस्यता खत्म करने का आधार होता है। इसी नियम के तहत उनकी सदस्यता खत्म की गई है।
इन सदस्यों ने उठाया मुद्दा 
भाजपा दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर और कृष्णा नगर से निगम पार्षद संदीप कपूर ने ताहिर हुसैन की सदस्यता को खत्म करने के लिए सबसे पहले आवाज उठाई थी। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन दिल्ली हिंसा के मुख्य आरोपी हैं। नेताओं ने आरोप लगाया है कि ताहिर हुसैन के कारण पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के थे, जिनके कारण 53 निर्दोष लोगों की जान चली गई।
आम आदमी पार्टी ने किया ताहिर का बचाव 
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने यह कहते हुए दिल्ली हिंसा के आरोपी ताहिर हुसैन का बचाव किया था कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है और वे हिंसा में शामिल नहीं थे। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि दिल्ली हिंसा की जांच के दौरान पुलिस एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बना रही है। दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने भी दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
इस मामले में 11 अगस्त को भी ख़बर प्रकाशित हुई थी कि पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता ख़तरे में पड़ सकती है। जिसमें पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने कहा था ताहिर हुसैन ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली थी। ताहिर हुसैन और पूर्व पार्षद इशरत जहां के खिलाफ़ सदन में निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ था। अब कानूनी प्रक्रिया समझी जा रही है कि किस तरह ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द हो सकती है? महापौर ने यह भी बताया था कि दिल्ली पुलिस की तरफ से नगर निगम को कोई जानकारी नहीं मिली थी। मगर ताहिर हुसैन ने लगातार कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था।
 
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर मुस्लिम हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।
पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन, जो इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हुए भीषण हिंदू-विरोधी दंगों के प्रमुख अभियुक्त है, से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की थी। टाइम्स नाउ द्वारा प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन से दिल्ली हिंसा की फंडिंग को लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही, निजामुद्दीन मरकज और दिल्ली दंगों के बीच सम्बन्ध की भी अब जाँच की जा रही है। हुसैन ने दिसंबर, 2019 से फरवरी, 2020 तक दंगा करने वालों और दंगाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को 1.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई थीं।
दंगों कि साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा “मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”

चुनाव से पहले राहुल गांधी ने फेसबुक के लिए की थी कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ सेटिंग

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। राहुल गांधी गलत आरोप लगाकर  देशवासियों को दिगभ्रमित करने से बाज नहीं आ रहे हैं। राहुल गांधी ने एक और झूठ परोसते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करते हैं। वे इसके माध्यम से फर्जी खबरें और नफरत फैलाते हैं और इसका इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया फेसबुक के बारे में सच्चाई के साथ सामने आया है।
राहुल गांधी के इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट करते हुए कहा, “अपनी खुद की पार्टी में भी लोगों को प्रभावित नहीं कर सकने वाले हार चुके लोग इस बात का हवाला देते रहते हैं कि पूरी दुनिया बीजेपी और आरएसएस द्वारा नियंत्रित है। चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका और फेसबुक के साथ आपके गठजोड़ को रंगे हाथों पकड़ा गया था और अब हमसे सवाल पूछने की गुस्ताखी?”



राहुल गांधी भले ही भाजपा और आएसएस पर झूठे आरोप लगा रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि 2019 लोकसभा चुनाव के पहले राहुल गांधी ने फेकबुस के लिए कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ सेटिंग की। मार्च 2018 में कैंब्रिज एनालिटिका के डेटा स्कैंडल के व्हिस्लब्लोअर क्रिहस्टफर विली ने तब इसका खुलासा किया था।
चुनाव से पहले राहुल गांधी ने की थी कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ सेटिंग
हकीकत,राहुल गांधी के आरोप के बिल्कुल उलट है। 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने फेसबुक के लिए कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ सेटिंग की थी। मार्च 2018 में कैंब्रिज एनालिटिका के डेटा स्कैंडल के व्हिस्लब्लोअर क्रिहस्टफर विली ने यूके की पार्लियामेंट्री कमिटी को बताया कि कांग्रेस पार्टी ने इस डेटा कंसल्टंसी फर्म को हायर किया था।
विली ने पार्लियामेंट्री कमिटी को बताया था कि कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ काम करने वाली पार्टियों में भारत की कांग्रेस पार्टी भी थी। विली के अनुसार उसे पूरा यकीन है कि कैंब्रिज एनालिटिका की एक क्लाइंट कांग्रेस भी थी। कंपनी ने कांग्रेस पार्टी के लिए हर तरह के प्रोजेक्ट पर काम किया। विली के अनुसार उसे याद नहीं कि कोई राष्ट्रीय प्रोजेक्ट हो लेकिन कई सारे क्षेत्रीय प्रोजेक्ट थे। इस पूरे मुद्दे पर तब कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई थी।

कैम्ब्रि‍ज एनालिटिका के CEO के ऑफिस में कांग्रेस पार्टी का पोस्टर
कैम्ब्रि‍ज एनालिटिका से कांग्रेस के संबंध का तब और खुलासा हुआ था जब निलंबित सीईओ एलेक्सजेंडर निक्स के लंदन स्थित दफ्तर में कांग्रेस का पोस्टर दीवार पर चिपका दिखाई दिया था और इससे साफ हो गया था कि कांग्रेस का एलेक्सजेंडर निक्स के साथ रिश्ता था और पार्टी कथित रूप से कैम्ब्रिज एनालिटिका की क्लाइंट थी।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
अंखी दास जब चोर शोर मचाए समझ जाना चाहिए कि अब तक जिस सोशल मीडिया पर जहर फ़ैलाने को ईंट का जवाब पत्थर मिलने से घबरा रहा ...
दरअसल, पत्रकार और टेक ब्लॉगर जेमी बार्लेट ने बीबीसी के लिए ‘सीक्रेट्स ऑफ सिलिकन वैली’ नाम से दो भागों में डॉक्युमेंट्री का निर्माण किया था। डॉक्युमेंट्री के दूसरे हिस्से ‘द पर्सूएशन मशीन’ में बार्लेट निक्स के कमरे में घुसते हैं। निक्स खड़ा होकर बार्लेट का स्वागत करते हैं। निक्स के पीछे दीवार पर ‘हाथ’ निशान वाला पोस्टर लगा है। हाथ निशान के नीचे बड़े अक्षरों में कांग्रेस लिखा हुआ है। पोस्टर पर ‘सभी के लिए विकास’ (डिवेलपमेंट फॉर ऑल) स्लोगन लिखा था।

AAP की आरती ने ‘नाजी सैल्यूट’ से की ‘वन्दे मातरम्’ की तुलना

वन्दे मातरम्, अरविन्द केजरीवाल
आरती चड्ढा ने की पुष्टि- केजीरवाल ने 'वन्दे मातरम' पर नहीं उठाया हाथ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला पर ध्वजारोहण किया और उसके बाद देश को सम्बोधित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी वहाँ उपस्थित थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब पीएम मोदी ने जब ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष किया तो, केजरीवाल ने न इसे दोहराया और न हाथ उठाया।
लेकिन ट्विटर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी यह ट्वीट खूब चल रहा है: 

आदेश गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, तजिंदर बग्गा, कपिल मिश्रा, मनोज तिवारी और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जैसे नेताओं ने इस आरोप को आगे बढ़ाया और भाजपा के दिल्ली व बिहार के आधिकारिक ट्विटर हैंडलों से इसे ट्वीट किया गया। अब खुद आम आदमी पार्टी (AAP) ही इसकी पुष्टि कर रही है कि दिल्ली सीएम ने उस समय बाकियों से अलग रुख अपनाया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ को न तो दोहराया और न ही हाथ उठाया।
आम आदमी पार्टी की नेशनल सोशल मीडिया टीम का हिस्सा आरती चड्ढा ने ट्विटर पर भारत के राष्ट्रगीत के उद्घोष की तुलना जर्मनी में नाजी युग के सैल्यूट यानी हैल हिटलर (Heil Hitler) के साथ की। उन्होंने दो तस्वीरें साझा की जिसमें एक जर्मनी का है और जहाँ सारे लोग ‘हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान देते हुए नज़र आते हैं, वहीं एक व्यक्ति है जो भीड़ में खड़ा है, कोई मूवमेंट नहीं कर रहा। इसकी तुलना आरती ने कल के केजरीवाल के वायरल फोटो के साथ की।



आरती का कहना है कि जिस तरह नाजी जर्मनी में ‘ हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान नहीं दिया, ठीक वैसा ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वन्दे मातरम्’ के साथ किया। साथ ही आरती ने ये भी लिखा कि एक ऐसा व्यक्ति को बाकियों से अलग खड़ा होने की हिम्मत रखता है। आरती ने अरविन्द केजरीवाल को जन्मदिन विश करते हुए ऐसा कहा।
अब पूरा माजरा समझते हैं। सबसे पहले भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री की आलोचना की। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब पीएम मोदी ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष करते हैं तो वहाँ उपस्थित सभी लोग अपने दोनों हाथ उठा कर इसे दोहराते हैं, लेकिन अरविन्द केजरीवाल चुपचाप मास्क लगा कर बैठे हुए हैं और उन्होंने कोई मूवमेंट नहीं की।
भाजपा नेता ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो से पूछा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के आतंकवादियो के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना से सबूत माँगने के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, तो आज आपको कौन सी बीमारी हो गई कि आपने ‘वन्दे मातरम्’ पर आपने हाथ खड़े करने से मना कर दिया?
तजिंदर बग्गा ने केजरीवाल से यह भी पूछा कि क्या ‘वन्दे मातरम्’ का सम्मान करने से उनका वोट-बैंक नाराज़ हो जाएगा? सोशल मीडिया पर इस ट्वीट की रिप्लाई में कई लोग भी दिल्ली सीएम से नाराज़ दिखे और लोगों इसका कारण पूछा कि आखिर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गीत से लिए गए उद्घोष का सम्मान नहीं किया? जबकि उनके आसपास बैठे बाकी सभी लोगों ने इस उद्घोष को पूरे जोश में दोहराया।
वहीं पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि 0.01% ऐसे रह जाते हैं, जो डिटॉल से भी नहीं जाते। वहीं अरविन्द केजरीवाल ने जब खुद झंडा फहराया तो उन्होंने अपने मंच से ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के साथ-साथ ‘वन्दे मातरम्’ का नारा भी लगवाया। इस पर भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि जब पीएम मोदी ने ये उद्घोष किया तो केजरीवाल शांत बैठे रहे और जब उन्होंने खुद ये नारा लगाया तो उनके पार्टी के नेताओं ने इसे नहीं दोहराया।
वहीं सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा कि ‘सड़ जी’ के वंदे मातरम कहने पर उनके पार्टी के मंत्री-कार्यकर्ता चुप्पी लगा गए। साथ ही उन्होंने ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए’ वाली कहावत का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे लोग हैं ये? उन्होंने कहा कि जब यही नारा पीएम मोदी ने लगवाया तो केजरीवाल के मुँह से कुछ नहीं फूटा। वहीं बिहार भाजपा ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “पहले लगा था कि केजरीवाल बिहार से दिल्ली जाने वाले श्रमिकों के खिलाफ हैं, लेकिन ये तो ‘वंदे मातरम’ बोलने के भी खिलाफ हैं जी!
नोट करने वाली बात है कि जब दिल्ली का मुख्यमंत्री नारा लगाता है, दूसरी तरफ से वह जवाब नहीं मिलता, जो राष्ट्रीय पर्व पर मिलना चाहिए


दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत माँ का जयघोष करवाया, लेकिन पता नही इस एक शख़्स को भारत माता की जय से क्या तकलीफ है? इसके बाद उन्होंने पूछा कि कहीं ये आप तो नहीं अरविन्द केजरीवाल जी? वहीं दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता भी नाराज़ नज़र आए।
आदेश गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ‘वन्दे मातरम्’ ना बोलकर कौन सी धर्मनिरपेक्ष होने की राजनीति कर रहें हैं, ऐसा करके किसे खुश करना चाहते हैं? हर एक दिल्लीवासी आपकी इस राजनीति को देखकर दुखी होगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश ‘वन्दे मातरम्’ के नारे से गूँज रहा है तो केजरीवाल खामोश क्यों हैं? कई लोग भी इससे नाराज़ नज़र आए।
इस पर जनता की ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं


इस पर पार्टी का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। लेकिन, अब आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती ने ही इसकी पुष्टि कर दी है।