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महाराष्ट्र सरकार का अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला ;अघोषित आपातकालीन

शिवसेना-रिपब्लिक टीवी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातकाल की याद करवा दी है। इस दौरान प्रेस सेंसरशिप के साथ गायक किशोर कुमार द्वारा संजय गाँधी के एक कार्यक्रम में जाने से मना करने की वजह से किशोर के रेडियो और फिल्मों में गायन पर पाबन्दी के साथ संजीव कुमार और सुचित्रा सेन अभिनीत फिल्म "आंधी" पर प्रतिबन्ध केवल इसलिए लगाया कि नायिका इंदिरा गाँधी की छवि प्रस्तुत कर रही थी, अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म "रोटी कपडा और मकान" एक गीत "हाय महंगाई मार गयी...." को फिल्म से निकलवाने के साथ-साथ रेडियो प्रसारण पर भी पाबन्दी इसलिए लगाई कि यह चर्चित हो रहा था। इस गीत के रेडियो प्रसारण पर भी पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। फिल्म "किस्सा कुर्सी का" को सेंसर से पास नहीं होने दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के विरुद्ध बोलने वाले नेताओं को जेलों में डाल दिया था। यानि जिस तरह कांग्रेस ने आपातकाल में व्यक्ति की अभिव्यक्ति पर पूर्णरूप से पाबन्दी लगा दी थी, उसी राह पर कांग्रेस के सहयोग से चल रही शिव सेना सरकार चल पड़ी है। 
पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने सितम्बर 10, 2020 को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी है।
बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की हैं।
शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ उठाया गया यह कदम बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिपब्लिक टीवी द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग के बीच आई है। इसके अलावा, हाल ही में अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में द्वारा BMC द्वारा किए गए विवादास्पद नुकसान को लेकर भी महाराष्ट्र कि शिवसेना घिरती हुई नजर आ रही है और रिपब्लिक टीवी ने इसे भी प्रमुखता से अपने समाचार चैनल पर जगह दी है।
                शिव सेना द्वारा महाराष्ट्र के केबल ऑपरेटर्स
को लिखा गया पत्र
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।
इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला 
शिवसेना द्वारा रिपब्लिक टीवी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के प्रयासों के बाद, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि शिवसेना केबल, जो कि शिवसेना विंग का हिस्सा है, ने ‘संजय राउत के मार्गदर्शन’ के तहत एक आदेश जारी किया। रिपब्लिक टीवी ने कहा कि यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में केबल ऑपरेटरों के लिए एक खुला खतरा है।


रिपब्लिक टीवी ने इस पर बयान देते हुए कहा, “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।”
मीडिया नेटवर्क ने अपने बयान में कहा, “वे हर घर में दर्शकों तक पहुँचने के अपने रिपोर्ट के अधिकार और बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। मीडिया नेटवर्क ने कहा कि वे रिपब्लिक के सवालों को बंद करना चाहते हैं और रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग को रोकना चाहते हैं। हालाँकि, वे रिपब्लिक टीवी को ब्लॉक नहीं कर सकते क्योंकि भारत के लोग हमारे साथ हैं।”
महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के कवरेज के बाद से ही रिपब्लिक टीवी चैनल महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ कि कवरेज के दौरान भी मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक चैनल के पत्रकारों से धक्का-मुक्की की और उन्हें गिरफ्तार भी किया।

#DemolishPriyankaHimachalHome यूजर्स की मांग ‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’

हिमाचल में प्रियंका का बंगला 
अंग्रेजी में एक कहावत है "You show me the man, I will show you the rule", यह बात पता नहीं कितनी चरितार्थ हो चुकी है और हो भी रही है। कानून का डंडा चलता है आम नागरिकों पर, लेकिन सियासतखोरों के पास कानून फटकता तक नहीं। कार्यवाही केवल राजनीतिक बदले में ही होती है, अन्यथा कानून इन्हें छू भी नहीं पाता। उदाहरणार्थ गाँधी परिवार और मायावती आदि पर कितने घोटालों के आरोप हैं, यदि यही आरोप किसी आम नागरिक पर होते, क्या वह इस तरह खुला घूम रहा होता? इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशांत की हत्या का मुख्य कारण उजागर हो या न हो, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में बॉलीवुड में चल रहे कांडों से पूर्णरूप से पर्दा हटेगा, इस बात पर भी शक है।
   
सुशांत मामले में मुखर अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर सोशल मीडिया पर लोग शिमला में प्रियंका गांधी की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग कर रहे हैं। बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली व्यक्ति राज्य में घर नहीं खरीद सकता, इसलिए प्रियंका का शिमला के छराबड़ा स्थित घर अवैध है। इसे हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है।
आज प्रियंका की संपत्ति पर जो भी लोग ऊँगली उठा रहे हैं, अब से पहले कहां थे? क्यों नहीं पहले आवाज़ उठी? अब इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदला ही कहा जाएगा। प्रियंका ने हिमाचल में क्या आज संपत्ति बनाई है, जो उस पर ऊँगली उठाई जा रही है? यानि प्रियंका ने जो भी संपत्ति बनाई राजनीतिक संरक्षण में बनाई और राजनीतिक संरक्षण मिलता भी रहेगा, जनता चाहे जितना सिर पटक ले। 


मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।
कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।




जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।
एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”
प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।
यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ
#DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।
लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

‘बेशर्म(कंगना रनौत), तू इस्लाम की बात करती है?’ 'बदतमीज महिला' : सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी

अबू आजमी, कंगना रनौत
80 के दशक में प्रदर्शित जीतेन्द्र और सुलक्षणा पंडित अभिनीत फिल्म "अपनापन" का एक गीत "आदमी मुसाफिर है आता और जाता है ...." सुशांत राजपूत केस में चरितार्थ हो रहा है, सुशांत दुनियां में आया और गया, लेकिन अपनी हत्या से बॉलीवुड के घिनौने चेहरे को उजागर कर गया। ड्रग्स के बहाने अभी तो परदे को मात्र हाथ लगाया है, परदे के पीछे और परदे के पीछे और बिछी चादर उठनी बाकी है और जब पूरा पर्दा हटेगा, तब क्या हालत होगी, बॉलीवुड से लेकर सियासत तक जो खलबली मच रही है, स्पष्ट संकेत दिखने शुरू हो गए हैं। इस चकाचौंध दुनियां कितनी गंदगी से भरी पड़ी है। अगर गंभीरता से जाँच हुई, पता नहीं कितने धुरंदर नपेंगे, जो छद्दम सेकुलरिज्म का चोला ओढ़े सत्ता के गलियारों में बैठ जनता के धन पर मालपुए खाने के साथ-साथ अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। आगे देखो होता क्या है? 
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी कंगना रनौत से खासे खफा हैं और इसी क्रम में उन्होंने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत का अनुसरण करते हुए कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। कंगना को अबू आजमी ने बेशर्म करार दिया। अबू आजमी ने दावा किया कि कंगना रनौत ने कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में इस्लामी वर्चस्व ख़त्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूछा, ‘ बेशर्म! इस्लाम के बारे में बात करती है तू?’
अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ये बातें कही। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए भी कंगना पर अलग-अलग टिप्पणी की है। इससे पहले उन्होंने कहा कि अगर कंगना रनौत को मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वो अपने राज्य हिमाचल प्रदेश में रहे और वहीं काम करे। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस कभी नाकामयाब नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वो पहले से ही ड्रग्स को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों की प्रक्रियाएं 


सपा नेता ने ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की अभिनेत्री को ‘बदतमीज महिला’ बताते हुए कहा कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा बोल रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना जो भी कर रही है, वो ठीक कर रही है। अबू आजमी वैसे तो शिवसेना के खिलाफ बोलते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी का पक्ष ले रहे हैं। अबू आजमी की टिप्पणियों के बाद लोगों ने उनका विरोध किया।
कुछ ही महीनों पहले सपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी की थी। बाद में उलटा महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारी का ही ट्रांसफर कर दिया था। आजमी ने शर्मा के सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था, “ये औरत कहती है कि आप पुलिस पे इल्जाम लगाते हो, मैं बात नहीं करूँगी। तेरे बाप के बाप के बाप को बात करनी पड़ेगी।” शर्मा के तबादले को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सौमैया ने उद्धव सरकार को घेरा था।
फराह खान-रिया चक्रवर्ती
फराह खान उतरी रिया के समर्थन में, कभी जिसका शौहर भी जो चूका है ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने भारतीय फिल्म उद्योग की कई सच्चाइयों को उजागर किया है। अभिनेता ऋतिक रोशन से संबंधित होने के लिए पहचाने जाने वाली ऐसी ही एक तथाकथित बॉलीवुड ’सेलिब्रिटी’ फराह खान ने अभिनेत्री रिया खान के साथ सहानुभूति जताने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है।
ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल के लिए रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद, फराह खान ने रिया को ‘कठिन समय में मजबूत रहने’ के लिए कहा है। फराह खान ने कहा कि ‘जब तक आपका विवेक साफ है, तब तक आप मजबूत रहेंगे।’
फराह खान ने रिया को नसीहत दी कि ‘ईश्वर में विश्वास रखें और हर दिन प्रार्थना करें’, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ‘अगर ईश्वर ने आपको यहाँ पहुँचाया है तो सिर्फ यह ध्यान रखें कि वही आपको इससे बाहर भी निकालेगा।”
फराह खान ने खुद ही स्वीकारा है कि हालाँकि, वह रिया चक्रवर्ती से कभी नहीं मिली हैं, ना ही उन्हें, ना ही उनके परिवार को जानती हैं, फिर भी फराह खान ने रिया को मजबूत रहने की सलाह दी है।
रिया की गिरफ्तारी को लेकर फराह खान की भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि उसने ‘टाइम्स नाउ’ की पत्रकार नविका कुमार के खिलाफ भी अपशब्द कहे। दरअसल, नाविका कुमार ने ही रिया की गिरफ्तारी की खबर शेयर करते हुए कहा था कि पहली बार ड्रग्स की कहानी उनके द्वारा ही सामने रखी गई थी।
फराह खान ने वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार को यह कहकर लताड़ लगाई, “एक दिन आप दूसरी तरफ होंगे और फिर वहाँ ऐसे लोग भी होंगे जो आपके लिए उतने ही निर्दयी होंगे जितने कि आप हैं। मेरी बात याद रखना।”
आश्चर्य की बात यह है कि अगर फराह खान कभी रिया से नहीं मिली, उन्हें जानती तक नहीं तो फिर वह रिया चक्रवर्ती के समर्थन में कूदने वाली पहली महिला क्यों थी? संभवतः वह रिया के दर्द को महसूस कर रही होंगी। इन्हे शायद यह भी डर सता रहा होगा कि ड्रग्स मामले में उनके शौहर या फिर उनका नाम भी न आ जाए। 
फराह खान के पति डीजे अकील 2007 में दुबई में ड्रग्स रखने के आरोप में पकड़े गए थे। हालाँकि, डीजे अकील को कुछ दिनों के बाद रिहा कर दिया गया था, जब अधिकारी उस पर किए गए परीक्षणों में ड्रग्स के सबूत खोजने में विफल रहे।
फराह खान के बारे में बहुत लोग कुछ भी नहीं जानते, लेकिन लोग बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन को जानते हैं। यह कम सुनाई देने वाली ’सेलिब्रिटी’ ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुज़ैन खान की बहन और संजय खान की बेटी है। वही संजय खान, जो 1990 के दशक की शुरुआत में एक लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखला में टीपू सुल्तान की भूमिका के लिए जाने जाते थे।
वह उन इस्लाम समर्थकों में से एक थीं, जो अभिनेता तुषार कपूर के पीछे सिर्फ इस कारण पड़ गई थी क्योंकि उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को फ़ेक फेक न्यूज़ फ़ैलाने से बचने की अपील की थी। उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर भी दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।
फरहा पाकिस्तान आर्मी का भी समर्थन कर चुकी है 
रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सामने आने वाली फराह खान ने एक बार पाकिस्तान के लिए भी अपना समर्थन जताया था। धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु दिखने की अपनी कोशिश में, उसने पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता द्वारा एक फर्जी प्रोपेगेंडा ट्वीट को री-ट्वीट किया था, जिसमें कश्मीर को ‘इंडिया ऑक्युपाइड जम्मू कश्मीर’ कहा गया था।
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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बॉलीवुड में सरेआम इस्तेमाल और सप्लाई किए जा रहे ड्रग्स का एंगल सामने आया है.....
जब उसे इस मूर्खता का आभास कराया गया तो उसने और भी मूर्खता के साथ जवाब देते हुए कहा कि उसने आसिफ गफूर के प्रोपेगेंडा ट्वीट को सिर्फ इस कारण समर्थन के योग्य माना क्योंकि उसके ट्विटर हैंडल में लिखा गया था- ‘पीस फॉर चेंज।’

मुसलमान अब अकेला है, कांग्रेस और कमलनाथ से हमारा कोई ताल्लुक नहीं रहा: जामिया निजामिया


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन ने एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथियों के चेहरे का नकाब हटा दिया है तो दूसरी ओर कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ा दी है। कांग्रेस नेताओं का राम राम करना न इस्लामिक संगठनों को न भाया है और न पार्टी के सहयोगी दलों को। यहॉं तक कि पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आ चुके हैं। दूसरे अर्थों में कहा जाए तो कांग्रेस अपने ही बुने तुष्टिकरण जाल में फंस गयी है, और यही स्थिति अब अन्य गैर-भाजपाइयों की होने वाली है।  
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमिपूजन के मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ और दीपोत्सव किया। इसके कारण पार्टी से जुड़े कई मुस्लिम समूह के लोग नाराज हो गए और खुलकर इस पर अपनी आपत्ति जताई।
जामिया निजामिया, कॉन्ग्रेसक्या हिन्दू अपनी पूजा-पद्धति के लिए इनसे पूछेंगे? क्या हिन्दुओं को अपने आराध्य भगवान की स्तुति करने का अधिकार नहीं? है किसी में इनसे यह पूछने का साहस? ये कट्टरपंथियों के संगठन हर उस अमनपरस्त मुसलमान की रहनुमाई नहीं करते, सिर्फ संस्थाओं को मिलने वाली जकात और तुष्टिकरण करती पार्टियों से मिल रहे गुप्त दानों पर ही बोलते हैं। 
इस हो रहे विरोध से कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपाई पार्टियों को विरोध की गहराई में जाकर मंथन करने का समय आ गया है। जब तक ये समस्त गैर-भाजपाई इन मुग़ल-परास्त मुस्लिम संगठनों की गुलामी करते रहेंगी, स्वयं तो धर्म-संकट में पड़ेंगी देश को डाल देंगीं। समय आ गया है, कि इनसे मस्जिदों और दरगाहों से होने वाली आय का हिसाब देने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। देश में कितनी मस्जिदें और दरगाहें हैं, जो सरकार को अपनी आय बताती हैं। जिस तरह बड़े मंदिरों में कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में ट्रस्ट बनाए, उसी भांति बड़ी-बड़ी मस्जिदों और दरगाहों में ट्रस्ट का गठन किया जाए। इनके गरीब और मजलूम ड्रामे को दरकिनार कर मस्जिदों और दरगाहों की आय का हिसाब माँगा जाए। हर मुसलमान तुम्हारे खिलाफ नहीं होगा, ये सिर्फ मुठ्ठी भर हैं, #intolerence, #not in my name, #mob lynching और #award vapasi आदि गैंस्टरों के समर्थन से अराजकता फ़ैलाने का डर दिखाकर ब्लैकमेल करते रहे हैं। हर शांतिप्रिय मुसलमान आपके साथ खड़ा होगा, इनके पीछे नहीं। किसी उपद्रव की स्थिति में केंद्र सरकार का कठोर से कठोर कार्यवाही करने में साथ दें, न की हिन्दू-मुसलमान की घिनौनी सियासत करें। ये अवार्ड वापसी गैंग की बदमाशी देखी, सिर्फ अवार्ड वापस किए,  किसी  ने अवार्ड के साथ मिले माल को नहीं। क्यों? ये मगरमच्छी आंसू बहाना छोड़ो। 
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने जिस एम जे अकबर के दबाव में आकर आरिफ मोहम्मद खान की बात न मान शाहबानो के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को समाप्त कर दिया था, हिन्दुओं द्वारा विरोध करने पर अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के ताले खुलवा दिए। लेकिन वक़्त पलटा, मोदी सरकार में तीन तलाक को ख़त्म करने पर कुछ हुआ क्या, जबकि आज वही एम.जे अकबर आज भाजपा में है? जरुरत है इच्छाशक्ति की, जिसकी कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपाइयों में कमी है। 
अब जामिया निजामिया ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा है कि मुसलमानों ने जो कांग्रेस और कमलनाथ पर भरोसा किया था, वह बेकार गया। अब मुसलमानों को इस बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदायों को शुरुआती समय से ही उन पर यकीन नहीं था। लेकिन फिर भी जब उन्होंने यह आश्वासन दिया कि वह हिन्दुओं से निपट लेंगे तो मुस्लिम कौम ने उन पर भरोसा कर लिया।






मगर, पिछले दिनों जो चेहरा कमलनाथ का देखने को मिला उससे कई चीजें स्पष्ट हो गई। जामिया निजामिया ने कमलनाथ ने अपनी हिन्दू परस्ती के बहुत नमूने दिए। कभी हनुमान की पूजा की और कभी राम मंदिर बनने का स्वागत किया। इन सबसे कौम को बहुत तकलीफ हुई और ये पता चला कि उन्हें मुसलमानों से कभी कोई हमदर्दी नहीं थी। मुसलमान उनके लिए सियासत करने के लिए प्यादे थे।
जामिया निजामी ने समुदाय के लोगों को कमलनाथ पर यकीन न करने की सलाह दी है। साथ ही कहा कि आपका साथ देने वाले प्रतिनिधि को सोच-समझकर वोट दें। बयान में कहा गया है, “इस देश का मुसलमान अब अकेला है। इसलिए इस दौर में हमें अपने लिए सोच समझकर नेता का चयन करना होगा।”
इस बयान में जामिया निजामिया की ओर से कहा गया, “हमें विश्वास है कि अकाबिरों की बताए हुए रास्ते से हटना बड़ा नुकसान का कारण बन सकता है।” इसके बाद इसमे यह भी स्पष्ट किया गया कि अब उनका कमलनाथ और कांग्रेस से कोई ताल्लुक नहीं है। वह दीन पर बयान और फिक्र को लेकर हमेशा अपनी आवाज को बुलंद रखेंगे, क्योंकि उस्मत का नेतृत्व करना वह अपना दीनी कर्तव्य समझते हैं।
ठाकरे-केजरीवाल
आज ‘भक्त’ बने कांग्रेस-केजरी-ठाकरे-लिबरल जमात ने कैसे उड़ाया था मजाक
अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के सम्पन होने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और दिल्ली में उन्हीं के समकक्ष अरविंद केजरीवाल ने 4 अगस्त, 2020 को राम मंदिर भूमिपूजन का अनिच्छा से स्वागत किया है।
हालाँकि, ऐसा करने वालों की लिस्ट बेहद लम्बी है, और इसमें कई इस्लामी विचारधारा के समर्थक और कांग्रेसी नेता भी मौजूद हैं, जिन्होंने कानूनी अड़चनों के कारण विलम्ब होने पर अतीत में राम मंदिर निर्माण का मखौल उड़ाया था, और अब हिन्दुओं के बीच अपनी छवि सुधारने के प्रयास में राम मंदिर निर्माण की बधाई देते देखे जा रहे हैं।
वर्ष 2015 में, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक रैली को संबोधित करते हुए राम मंदिर के निर्माण में देरी पर कटाक्ष किया था। लगभग 30 सेकंड के वीडियो में कोई भी ठाकरे को यह कहते हुए सुन सकता है कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।’





इसी तरह, 2019 के आम चुनावों के दौरान, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी राम मंदिर के निर्माण का मजाक उड़ाया था।




कांग्रेसी नेताओं ने भी समय-समय पर इस कटाक्ष के रूप में इस्तेमाल किया है।

दिलचस्प बात यह है कि नई-नई रामभक्त प्रियंका गाँधी वाड्रा को भी श्रीराम मंदिर भूमिपूजन पर सॉफ्ट हिन्दुत्व वाले कारनामों के लिए लोगों द्वारा निशाना बनाया गया।
JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद भी इस जुमले को कई बार इस्तेमाल कर चुकी हैं।

स्वघोषित फैक्ट चेकर और इस्लामिक प्रोपेगेंडाबाज मोहम्मद जुबैर भी ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, तारीख नहीं बताएँगे’ को ट्विटर पर कटाक्ष की तरह लिखते देखा गया है।

स्वाति चतुर्वेदी का भी यह पसंदीदा वाक्यांश रहा है।

स्वाति चतुर्वेदी की सहयोगी और ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह भी कई मौकों पर श्रीराम मंदिर निर्माण का मजाक बना चुकी हैं।


दागी पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट, जो इन्टरनेट लिब्रल्स के बीच बेहद पसंदीदा थे, ने भी श्रीराम मंदिर का मजाक उड़ाया था।

आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया हेड अंकित लाल भी श्रीराम मंदिर निर्माण का मज़ाक बना चुके हैं।

तमाम इन्टरनेट लिबरल और प्रोपेगेंडाबाजों के दावों के विपरीत अगस्त 05, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया। भाजपा ने 2019 के आम चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा शामिल किया था और मंदिर निर्माण को लेकर संकल्प जाहिर किया था।

हिन्दू हितों की बात करने वाली सुनयना को उद्धव सरकार ने किस अपराध में किया गिरफ्तार?

खरबूजे को खरबूजा रंग बदलते महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। बाबा साहेब ठाकरे के जीवन में शिव सेना हिन्दू हितों की बात करने वाली पार्टी आज कांग्रेस और एनसीपी के रंग में रंग हिन्दू हितों की बात करने वालों से गिलानी होने लगी है। कहाँ गयी बाबा साहेब की नीतियां? 
सत्ता में बने रहने की चाह में शिवसेना अब मुस्लिमों की पार्टी बन चुकी है। सरकार को बचाए रखने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे अब हिन्दू विरोध की राजनीति कर रहे हैं। उद्धव सरकार की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र पुलिस ने हिन्दू हितों की बात करने वाली एक ट्विटर यूजर सुनयना होले को गिरफ्तार किया है। सुनयना होले को शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना के एक नेता रोहन चौहान की शिकायत के बाद दिरफ्तार किया गया है। रोहन चौहान ने अपनी शिकायत में सुनयना के खिलाफ ट्विटर पर उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखने का आरोप लगाया है।
सुनयना होले की गिरफ्तारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर #IStandWithSunaina ट्रेंड कर रहा है। लोग सुनयना के पक्ष में आवाज उठाते हुए गिरफ्तारी की आलोचना कर रहे हैं। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने तो सुनयना को मदद की पेशकश भी की है।


उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना ने इसके पहले भी फ्रीडम ऑफ स्पीच पर लगाम लगाने की कोशिश करते हुए सुनयना के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की थी।
महाराष्ट्र में चल रही है शिवसेना सरकार की गुंडागर्दी
महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनने के बाद से राज्य में लोगों का जीना दूभर हो गया है। राज्य के लोग कोरोना संकट के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी से भी परेशान हैं। शिवसैनिकों की तानाशाही इतनी बढ़ गई है कि वे अपने नेताओं के बारे में कुछ भी आलोचना सुनना नहीं चाहते। शिवसेना के नेता या सरकार के बारे में कुछ भी कहने पर इनकी गुंडागर्दी का कहर सहना पड़ता है। 26 मई, 2020 को शिवसेना के गुंडों ने यवतमाल के वानी इलाके में दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की है।


राज्य में कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर यवतमाल के दो दुकानदारों ने सोशल मीडिया पर सीएम उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की। इसमें इन्होंने लिखा कि राज्य सरकार कोरोना संकट पर काबू पाने में विफल रही है। इनका सोशल मीडिया पर इतना लिखना भर था कि शिव सेना ने गुंडो ने पहले तो इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई फिर पुलिस की मौजूदगी में दुकान में जमकर तोड़फोड़ की। शिवसैनिकों के उत्पात से स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है।
शिवसैनिकों ने मंगलवार, 26 मई को यवतमाल के दो दुकानों में तोड़फोड़ की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि किस तरह से पुलिस के सामने दुकान में तोड़-फोड़ और उत्पात मचा रहे हैं।

सोनिया से सवाल पर अर्नब गोस्वामी पर हमला
पालघर में साधुओं की हत्या पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सवाल करने पर कांग्रेसी गुंडों ने 22-23 अप्रैल की रात करीब 12 से 1 बजे के बीच रिपब्लिक न्यूज चैनल के प्रमुख अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर ऑफिस से घर लौटते वक्त हमला किया। बाइक सवार दो कांग्रेसी गुंडों ने अर्नब गोस्वामी की कार रोक उन पर हमला कर दिया। अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की वीडियो जारी की है।

अर्नब ने आरोप लगाया कि हमला करने वाले गुंडे सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हुए थे इसलिए उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अर्नब ने कहा कि दोनों गुंडे हिंदी में गालियां दे रहे थे। दोनों गुंडे उनका रास्ता रोक तरल पदार्थ फेंक कार का गेट थपथपाने लगे। लेकिन वो अपनी गाड़ी आगे ले जाने में कामयाब रहे। अर्नब ने पीछे देखा तो मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन टीम के शिवाजी होस्मानी और उनके ऑफिस गार्ड ने उन गुंडों के पकड़ लिया था। बाद में घर पहुंचने पर सुरक्षा में तैनात शिवाजी होस्मानी ने उन्हें बताया कि उन पर हमला करने वाले युवा कांग्रेस के थे। इसके बाद डीसीपी ने भी आकर बताया कि हमलावर यूथ कांग्रेस के थे। लेकिन बाद में डीसीपी ने कहना शुरू कर दिया कि ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि वे यूथ कांग्रेस के थे या नहीं। इस हमले में सबसे सनसनीखेज बात ये रही कि हमला होने के कुछ देर बाद ही देर रात कांग्रेस की महिला नेता ने ट्वीट किया- युवा कांग्रेस जिंदाबाद। देर रात कांग्रेस कोई चुनाव नहीं जीत गई जो उन्हें युवा कांग्रेस जिंदाबाद कहना पड़ा।
मुख्यमंत्री उद्धव की आलोचना पर मूंड़ दिया सिर
ये पहली बार नहीं है कि राज्य में सरकार बनने के बाद शिवसैनिकों ने गुंडागर्दी की है। इसके पहले वडाला टीटी के शांतिनगर में रहने वाले एक शख्स हीरामणि तिवारी को फेसबुक पर पोस्ट लिखना महंगा पड़ गया। उनके साथ न केवल मारपीट की गई बल्कि स्थानीय शिवसेना नेताओं ने जबरदस्ती हीरामणि का सिर भी मूंड़ डाला। जी न्यूज के अनुसार हीरामणि तिवारी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की गुंडागर्दी को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की टिप्पणी के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी की थी। इस पर शिव सेना के गुंडों ने हीरामणि के साथ मारपीट, गाली गलौच किया और उनका सिर भी मुंडवा दिया।


ठाकरे की आलोचना करने वाले पर महिला ने उड़ेल दी स्याही
सोशल मीडिया पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर बीड में पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता ने एक शख्स के ऊपर स्याही उड़ेल दी। इसके बाद उसे सरेआम बेइज्जत किया।



कानून-व्यवस्था ध्वस्त: उद्धव सरकार में जारी है साधु-संतों के खिलाफ हिंसा
महाराष्ट्र में उद्धव सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था ध्वस्त है और अपराधियों के हौसले बुलंद है। वे हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ एक मुहिम चला रहे हैं। उन्हें ना तो कानून का डर है ना पुलिस का। नांदेड़ के आश्रम में 23 मई की रात रुद्र पशुपति महाराज और उनके सेवक की हत्या कर दी गई।

पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिग: 16 अप्रैल
पालघर में पुलिस के सामने जूना अखाड़ा के दो साधुओं कल्पवृक्ष गिरि महाराज और सुशील गिरी महाराज को पीट-पीटकर मार दिया गया। जूना अखाड़े के दोनों साधु अपने ड्राइवर के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी गुरुभाई के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। दोनो साधुओं को ही उनका अंतिम संस्कार करना था, लेकिन जब इनकी गाड़ी महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर के पास पालघर इलाके में पहुंची तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके कुछ देर बाद आदिवासी बहुल इस इलाके में एक खास समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडे और इंट-पत्थरों से इनपर हमला कर दिया। हैरानी की बात यह है कि महाराष्ट्र पुलिस मूकदर्शक बन सारा तमाशा देखती रही। साधु पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें भीड़ के हवाले कर दिया।