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मध्य प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर में चले लात-जूते, दिग्विजय सिंह को गाली: कमलनाथ और दिग्गी राजा के समर्थकों में मारपीट, वीडियो वायरल

                                                                                             साभार : X_narendrasaluja
कांग्रेस युवराज राहुल गाँधी जो सियासत की आड़ में मौहब्बत की दुकान खोलकर न्याय यात्रा पर भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की उनकी अपनी ही पार्टी में नफरत और अन्याय की भरमार है। एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के अस्तित्व को बचाने गठबंधन करते फिर रहे हैं, परन्तु अब गठबंधन में सम्मिलित पार्टियां भी अलग होनी शुरू होनी हो चुकी हैं। वास्तव यह गठबंधन मोदी को हराने नहीं बल्कि कांग्रेस अपने वजूद को बनाये रखने के लिए सारी कवायत कर रही है, क्योकि कांग्रेस का भविष्य अति अंधकारमय होने जा रहा है, उसका मूल कारण कोई और नहीं बल्कि परिवार और परिवार भक्ति है। 

मध्य प्रदेश के भोपाल में कांग्रेस कार्यालय में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। एक गुट दिग्विजय सिंह का समर्थन करता है, जबकि दूसरा गुट कमलनाथ का समर्थन करता है। दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। झड़प के दौरान दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे को धक्का-मुक्की की और गालियाँ दीं। कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ भी फेंक दीं। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

घटना के अनुसार, राज्य कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के नेता एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने लगे। झगड़े के दौरान एक नेता ने दूसरे नेता पर कुर्सियाँ फेंकी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार (29 जनवरी, 2024) को हुई। भोपाल के कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान और अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के बीच झड़प हो गई। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गलियाँ बकी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

इस दौरान मौके पर मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों नेताओं को अलग किया। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसूचित जाति विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को कमलनाथ समर्थक बताया जाता है वहीं कांग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान को दिग्विजय समर्थक माना जाता है। दोनों के बीच दिग्विजय सिंह को गाली देने को लेकर हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुँच गया।

बीजेपी नेता नरेंद्र सलूजा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कमलनाथ समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर PCC में जमकर चले लात-ठूँसे कुर्सियाँ चली, जमकर एक दूसरे को गालियाँ बकी गईं। बीच-बचाव करने आए कमलनाथ समर्थक एक नेता को भी लात-घूसे पड़े।”

ये घटना मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इस घटना के बाद कांग्रेस को अपने नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अगर कांग्रेस इस घटना को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इससे पार्टी को चुनावों में नुकसान हो सकता है।

मध्य प्रदेश : कमल नाथ और दिग्विजय सिंह का कांग्रेसियों ने ही फूँका पुतला; पूर्व मुख्यमंत्री के बँगले के सामने ही कार्यकर्ताओं ने कराया मुंडन

                                                                                                            साभार- दैनिक जागरण और NBT
कांग्रेस में टिकट वितरण से दुखी कई नेताओं ने शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को भोपाल में प्रदेश 
कांग्रेस कार्यालय और कमल नाथ के बंगले के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के बंगले के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं बोंडगाँव में कमलनाथ का पुतला दहन भी किया गया।

दरअसल, जब से कांग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में 88 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है, उसके बाद से ही कांग्रेसी भड़के हुए हैं। उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में बैरसिया से उम्मीदवार बनाई गईं जयश्री हरिकरण के विरोध में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले के सामने मुंडन कराकर विरोध जताया। साथ ही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का पुतला भी फूँका।

मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों की सूचि से कांग्रेस नेता ही खुश नजर नहीं आ रहे। विधानसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची आने के बाद भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय के बाहर भड़का विरोध अब कमल नाथ के बंगले तक पहुँच गया है। बैरसिया से आए कार्यकर्ताओं ने बंगले के गेट पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बैरसिया के प्रत्याशी का टिकट बदलने की माँग की। वहीं पीसीसी के सामने दिग्विजय सिंह का पुतला भी जलाया गया।

मौके पर विरोध प्रदर्शन को इकट्ठे कांग्रेस कार्यकर्ता बंगले में घुसना चाह रहे थे, लेकिन वहाँ मौजूद गार्डों ने उन्हें रोक दिया। हालाँकि, प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह के समर्थक बताए जा रहे हैं। और यह आरोप लगाया जा रहा है कि टिकट वितरण में कमल नाथ ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवा दिया। इसी बात से कार्यकर्ता नाराज हैं। वहीं, दतिया जिले की सेवड़ा विधानसभा से आए नेताओं ने भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का पुतला फूँका। 

वहीं विधानसभा क्षेत्र हरदा-खिरकिया क्रमांक 135 में कांग्रेस द्वारा डॅा. रामकिशोर दोगने को प्रत्याशी घोषित करने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस मामले में कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने शुक्रवार(20 अक्टूबर, 2023) को अपने गृह ग्राम बोंडगाँव में कमल नाथ और हरदा प्रत्याशी डॅा. दोगने का पुतला दहन किया।

कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने राजपूत समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हरदा विधानसभा क्षेत्र का घोषित प्रत्याशी बदलने की माँग की है। बता दें कि कांग्रेस नेता मंजीत सिंह बघेल ने हरदा विधानसभा क्षेत्र से राजपूत समाज के व्यक्ति को टिकट देने की माँग की थी।

इस पूरे मामले में राजपूत समाज के कई नेताओं ने कहा कि राजपूत समाज के नेता को टिकट देने की माँग वाली फेसबुक पोस्ट मंजीत सिंह की व्यक्तिगत सोच है, समाज का उस पोस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ तक कि राजपूत समाज का राजनीतिक पार्टियों से कोई लेना-देना नहीं है।

मध्य प्रदेश : कमलनाथ-पायलट ने जिस सुरेश राजे का किया था प्रचार, उस विधायक का अश्लील वीडियो वायरल

                     कांग्रेस MLA सुरेश राजे और वीडियो का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार: जी मीडिया)
मध्य प्रदेश के डबरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक सुरेश राजे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। 6 मिनट 37 सेकेंड के इस वीडियो में सुरेश राजे किसी होटल में एक युवक के साथ आपत्तिजनक हालत में दिख रहे हैं। हालाँकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो कब का है। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने 
कांग्रेस से जवाब माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो की शुरुआत में युवक विधायक राजे से कहता है कि ‘आप कभी मौका दीजिए। आप मुझे अपना बना लो। हम आपको खुश कर देंगे’। इसके बाद वीडियो में पोर्न ऑडियो सुनाई देने लगता है। उनका वीडियो वायरल होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे प्रतिक्रिया पूछी, तो उन्होंने कहा कि ये वीडियो एडिटेड है।

यह वीडियो होटल में बनाया जाता दिख रहा है। युवक जब बाथरूम जा रहा होता है, उस दौरान भी वीडियो शूट किया जाता रहा है। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि विधायक को वीडियो बनने की जानकारी है, लेकिन वे इसका विरोध नहीं करते हैं।

2020 में मंत्री इमरती देवी को हराकर चर्चा में आए थे सुरेश राजे

सुरेश राजे 2020 के उपचुनाव में मंत्री इमरती देवी को हराकर विधायक बने थे। इमरती देवी सिंधिया कैंप की मानी जाती थीं। इन्होंने इस्तीफा देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा था। उनके इस्तीफा देने से यहाँ उपचुनाव हुए थे। हालाँकि, उपचुनाव में उन्हें सुरेश राजे ने हरा दिया था। चुनाव से पहले ही राजे कांग्रेस में शामिल हुए थे।

कमलनाथ और सचिन पायलट ने किया था चुनाव प्रचार

जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश राजे पहले भी चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन तीन चुनावी हार के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दिया और कांग्रेस की टिकट पर अपनी किस्मत को आजमाया था। उनके लिए चुनाव प्रचार में कमलनाथ और सचिन पायलट जैसे दिग्गज पहुँचे थे।
उस चुनाव में सुरेश राजे ने इमरती देवी को हरा दिया था। चूँकि इमरती देवी मंत्री थी, ऐसे में उनकी जीत को बड़ा माना गया। हालाँकि, आगामी चुनाव से पहले उनका वीडियो वायरल होना उनके लिए मुसीबत लेकर आ सकता है।

सुरेश राजे ने बताया साजिश

कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ये वीडियो एडिटेड है। उनसे लोगों ने 50 लाख की वसूली करने की कोशिश की थी और कहा था कि पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। अब वो पुलिस को पूरी जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस वीडियो के बारे में उड़ती-उड़ती खबर पहले से मिल रही थी, लेकिन अफवाहों के आधार पर उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। अब वो पुलिस के सामने सबूत रखेंगे और जिन्होंने ऐसा काम किया है, उनके खिलाफ स्टैंड लेंगे।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने इस वीडियो को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, “कांग्रेस के एक विधायक का अश्लील वीडियो वायरल हो रहा है। कांग्रेस नेताओं को जवाब देना होगा कि क्या यही उनकी पार्टी के संस्कार हैं? इनके कई और बड़े नेताओं के इसी प्रकार के कुकर्मों की चर्चा बाजार में जोरों पर है।”

Instagram पर जिसे कमलनाथ (कांग्रेसी और पूर्व CM) फॉलो करते हैं, उसे आप घर-परिवार के बीच नहीं देख सकते

                          कमलनाथ (दाएँ) और बाएँ सबसे कम गंदे फोटो का कोलाज
जन प्रतिनिधियों का सोशल मीडिया पर सक्रिय होना जितना स्वाभाविक होता है, उतना ही ज़रूरी भी। लिहाज़ा हर राजनीतिक दल के नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं लेकिन जब एक वरिष्ठ नेता ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाएँ तब? तब हादसा होता है, जो कमलनाथ के साथ हुआ है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी कई सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय हैं। उन तमाम सोशल मीडिया मंचों में एक है इन्स्टाग्राम (instagram)। आभासी दुनिया (virtual world) का ‘फोटो/वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म’। 

                                              कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट
इन्स्टाग्राम पर दो विकल्प होते हैं – पहला किसी को फॉलो (follow) करना और दूसरा फॉलो किया जाना। इन्स्टाग्राम पर कमलनाथ के लगभग 2.10 लाख फॉलोवर हैं। बदले में वो सिर्फ 17 लोगों को फॉलो करते हैं।

इन 17 लोगों में सिर्फ कुछ ही ऐसे एकाउंट हैं, जिनकी प्रोफाइल पर ‘ब्लू टिक’ नहीं है लेकिन हैरानी की बात ये नहीं है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता की ‘फॉलो लिस्ट’ में तीसरी प्रोफाइल ऐसी है, जो उतनी सामान्य नहीं नज़र आती है। 

                                                 कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट

उस प्रोफाइल/पेज का नाम है- करोना वायरल ऑफिशियल (karona viral official)। नाम से ही स्पष्ट है कि इसका न तो कांग्रेस से लेना देना है और न ही राजनीति या समाज से सरोकार है।

लगभग 25000 फॉलोवर वाले इस पेज पर ऐसे मिजाज़ का ‘कंटेंट’ साझा किया गया है, जो सार्वजनिक मंच पर दिखाया तक नहीं जा सकता है। ऐसी तस्वीरें, ऐसे वीडियो और ऐसे पोस्ट हैं, जो यहाँ दिखाने लायक कतई नहीं हैं। न जाने क्या लाचारी रही होगी ‘माननीय’ कमलनाथ जी की इस पेज को फॉलो करने की!

मज़े की बात ये है कि इस एकाउंट का नाम ‘करोना वायरल ऑफिशियल’ है। कोई भी आम नागरिक इस भ्रम में पड़ सकता है कि इस पर महामारी से संबंधित कोई अहम जानकारी होगी या जनहित से जुड़ी बातें मौजूद होंगी।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने फॉलो किया है तो कुछ ‘सामाजिक-राजनीतिक चेतना’ से लब्ध बात होगी लेकिन जनता का दुर्भाग्य! पेज खोलते ही ऐसे गंदे-गंदे पोस्ट नज़र आते हैं, जिन्हें लेकर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा तक नहीं की जा सकती है। चर्चा तो दूर यहाँ शेयर तक नहीं किया जा सकता है।

खैर कमलनाथ जी दिग्गज नेता हैं, होगा कोई निजी कारण जो जनता की समझ से बाहर है। 

ऐसे ही 2020 के मार्च महीने में कमलनाथ को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा छिड़ी हुई थी। दरअसल मार्च के अंतिम हफ्ते में आइफा (iifa) होना था, शहर तय किया गया था इंदौर! इसके पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम हो चुका था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।

इस तस्वीर में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और जैक्लीन फर्नांडीस भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों का प्रभाव कुछ इस कदर पड़ा कि ट्विटर पर ‘कमरनाथ’ ट्रेंड करना लगा। जिसकी वजह इस तस्वीर में साफ़ देखी जा सकती है। 

इसके अलावा आइफा के आयोजन की काफी आलोचना हुई थी। पहला देश में कोरोना महामारी दस्तक दे चुकी थी और दूसरा इस आयोजन की लिए तय किया गया 700 करोड़ का खर्च। फ़िलहाल बड़ी बात ये है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक ऐसा पेज फॉलो करते हैं, जिसका नाम भले ‘करोना वायरल’ है लेकिन कोरोना से शायद ही कोई लेना देना नज़र आए। 

मुसलमान अब अकेला है, कांग्रेस और कमलनाथ से हमारा कोई ताल्लुक नहीं रहा: जामिया निजामिया


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन ने एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथियों के चेहरे का नकाब हटा दिया है तो दूसरी ओर कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ा दी है। कांग्रेस नेताओं का राम राम करना न इस्लामिक संगठनों को न भाया है और न पार्टी के सहयोगी दलों को। यहॉं तक कि पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आ चुके हैं। दूसरे अर्थों में कहा जाए तो कांग्रेस अपने ही बुने तुष्टिकरण जाल में फंस गयी है, और यही स्थिति अब अन्य गैर-भाजपाइयों की होने वाली है।  
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमिपूजन के मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ और दीपोत्सव किया। इसके कारण पार्टी से जुड़े कई मुस्लिम समूह के लोग नाराज हो गए और खुलकर इस पर अपनी आपत्ति जताई।
जामिया निजामिया, कॉन्ग्रेसक्या हिन्दू अपनी पूजा-पद्धति के लिए इनसे पूछेंगे? क्या हिन्दुओं को अपने आराध्य भगवान की स्तुति करने का अधिकार नहीं? है किसी में इनसे यह पूछने का साहस? ये कट्टरपंथियों के संगठन हर उस अमनपरस्त मुसलमान की रहनुमाई नहीं करते, सिर्फ संस्थाओं को मिलने वाली जकात और तुष्टिकरण करती पार्टियों से मिल रहे गुप्त दानों पर ही बोलते हैं। 
इस हो रहे विरोध से कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपाई पार्टियों को विरोध की गहराई में जाकर मंथन करने का समय आ गया है। जब तक ये समस्त गैर-भाजपाई इन मुग़ल-परास्त मुस्लिम संगठनों की गुलामी करते रहेंगी, स्वयं तो धर्म-संकट में पड़ेंगी देश को डाल देंगीं। समय आ गया है, कि इनसे मस्जिदों और दरगाहों से होने वाली आय का हिसाब देने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। देश में कितनी मस्जिदें और दरगाहें हैं, जो सरकार को अपनी आय बताती हैं। जिस तरह बड़े मंदिरों में कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में ट्रस्ट बनाए, उसी भांति बड़ी-बड़ी मस्जिदों और दरगाहों में ट्रस्ट का गठन किया जाए। इनके गरीब और मजलूम ड्रामे को दरकिनार कर मस्जिदों और दरगाहों की आय का हिसाब माँगा जाए। हर मुसलमान तुम्हारे खिलाफ नहीं होगा, ये सिर्फ मुठ्ठी भर हैं, #intolerence, #not in my name, #mob lynching और #award vapasi आदि गैंस्टरों के समर्थन से अराजकता फ़ैलाने का डर दिखाकर ब्लैकमेल करते रहे हैं। हर शांतिप्रिय मुसलमान आपके साथ खड़ा होगा, इनके पीछे नहीं। किसी उपद्रव की स्थिति में केंद्र सरकार का कठोर से कठोर कार्यवाही करने में साथ दें, न की हिन्दू-मुसलमान की घिनौनी सियासत करें। ये अवार्ड वापसी गैंग की बदमाशी देखी, सिर्फ अवार्ड वापस किए,  किसी  ने अवार्ड के साथ मिले माल को नहीं। क्यों? ये मगरमच्छी आंसू बहाना छोड़ो। 
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने जिस एम जे अकबर के दबाव में आकर आरिफ मोहम्मद खान की बात न मान शाहबानो के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को समाप्त कर दिया था, हिन्दुओं द्वारा विरोध करने पर अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के ताले खुलवा दिए। लेकिन वक़्त पलटा, मोदी सरकार में तीन तलाक को ख़त्म करने पर कुछ हुआ क्या, जबकि आज वही एम.जे अकबर आज भाजपा में है? जरुरत है इच्छाशक्ति की, जिसकी कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपाइयों में कमी है। 
अब जामिया निजामिया ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा है कि मुसलमानों ने जो कांग्रेस और कमलनाथ पर भरोसा किया था, वह बेकार गया। अब मुसलमानों को इस बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदायों को शुरुआती समय से ही उन पर यकीन नहीं था। लेकिन फिर भी जब उन्होंने यह आश्वासन दिया कि वह हिन्दुओं से निपट लेंगे तो मुस्लिम कौम ने उन पर भरोसा कर लिया।






मगर, पिछले दिनों जो चेहरा कमलनाथ का देखने को मिला उससे कई चीजें स्पष्ट हो गई। जामिया निजामिया ने कमलनाथ ने अपनी हिन्दू परस्ती के बहुत नमूने दिए। कभी हनुमान की पूजा की और कभी राम मंदिर बनने का स्वागत किया। इन सबसे कौम को बहुत तकलीफ हुई और ये पता चला कि उन्हें मुसलमानों से कभी कोई हमदर्दी नहीं थी। मुसलमान उनके लिए सियासत करने के लिए प्यादे थे।
जामिया निजामी ने समुदाय के लोगों को कमलनाथ पर यकीन न करने की सलाह दी है। साथ ही कहा कि आपका साथ देने वाले प्रतिनिधि को सोच-समझकर वोट दें। बयान में कहा गया है, “इस देश का मुसलमान अब अकेला है। इसलिए इस दौर में हमें अपने लिए सोच समझकर नेता का चयन करना होगा।”
इस बयान में जामिया निजामिया की ओर से कहा गया, “हमें विश्वास है कि अकाबिरों की बताए हुए रास्ते से हटना बड़ा नुकसान का कारण बन सकता है।” इसके बाद इसमे यह भी स्पष्ट किया गया कि अब उनका कमलनाथ और कांग्रेस से कोई ताल्लुक नहीं है। वह दीन पर बयान और फिक्र को लेकर हमेशा अपनी आवाज को बुलंद रखेंगे, क्योंकि उस्मत का नेतृत्व करना वह अपना दीनी कर्तव्य समझते हैं।
ठाकरे-केजरीवाल
आज ‘भक्त’ बने कांग्रेस-केजरी-ठाकरे-लिबरल जमात ने कैसे उड़ाया था मजाक
अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के सम्पन होने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और दिल्ली में उन्हीं के समकक्ष अरविंद केजरीवाल ने 4 अगस्त, 2020 को राम मंदिर भूमिपूजन का अनिच्छा से स्वागत किया है।
हालाँकि, ऐसा करने वालों की लिस्ट बेहद लम्बी है, और इसमें कई इस्लामी विचारधारा के समर्थक और कांग्रेसी नेता भी मौजूद हैं, जिन्होंने कानूनी अड़चनों के कारण विलम्ब होने पर अतीत में राम मंदिर निर्माण का मखौल उड़ाया था, और अब हिन्दुओं के बीच अपनी छवि सुधारने के प्रयास में राम मंदिर निर्माण की बधाई देते देखे जा रहे हैं।
वर्ष 2015 में, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक रैली को संबोधित करते हुए राम मंदिर के निर्माण में देरी पर कटाक्ष किया था। लगभग 30 सेकंड के वीडियो में कोई भी ठाकरे को यह कहते हुए सुन सकता है कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।’





इसी तरह, 2019 के आम चुनावों के दौरान, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी राम मंदिर के निर्माण का मजाक उड़ाया था।




कांग्रेसी नेताओं ने भी समय-समय पर इस कटाक्ष के रूप में इस्तेमाल किया है।

दिलचस्प बात यह है कि नई-नई रामभक्त प्रियंका गाँधी वाड्रा को भी श्रीराम मंदिर भूमिपूजन पर सॉफ्ट हिन्दुत्व वाले कारनामों के लिए लोगों द्वारा निशाना बनाया गया।
JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद भी इस जुमले को कई बार इस्तेमाल कर चुकी हैं।

स्वघोषित फैक्ट चेकर और इस्लामिक प्रोपेगेंडाबाज मोहम्मद जुबैर भी ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, तारीख नहीं बताएँगे’ को ट्विटर पर कटाक्ष की तरह लिखते देखा गया है।

स्वाति चतुर्वेदी का भी यह पसंदीदा वाक्यांश रहा है।

स्वाति चतुर्वेदी की सहयोगी और ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह भी कई मौकों पर श्रीराम मंदिर निर्माण का मजाक बना चुकी हैं।


दागी पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट, जो इन्टरनेट लिब्रल्स के बीच बेहद पसंदीदा थे, ने भी श्रीराम मंदिर का मजाक उड़ाया था।

आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया हेड अंकित लाल भी श्रीराम मंदिर निर्माण का मज़ाक बना चुके हैं।

तमाम इन्टरनेट लिबरल और प्रोपेगेंडाबाजों के दावों के विपरीत अगस्त 05, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया। भाजपा ने 2019 के आम चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा शामिल किया था और मंदिर निर्माण को लेकर संकल्प जाहिर किया था।

मध्य प्रदेश : क्या कांग्रेस पार्टी सिंधिया जी के साथ?

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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच चल रही खींचतान अब मुखर होकर सामने आ गई है। शनिवार (फरवरी 15, 2020) को दिल्ली में वैसे तो सरकार और संगठन के बीच आपसी समन्वय को मजबूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस ने बैठक रखी थी, लेकिन इसमें तल्खी इस कदर दिखी कि सिंधिया बैठक को बीच में छोड़कर चले गए। वहीं कमलनाथ भी सिंधिया को लेकर सख्त दिखे। बैठक खत्म होने के बाद जब उनसे सिंधिया के सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने के ऐलान को लेकर सवाल किया गया, तो नाराजगी भरे अंदाज में उन्होंने इसका जबाब दिया और कहा, “तो उतर जाएँ।”
पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच तल्खी बढ़ने की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। साथ ही पूरे मामले से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भी अवगत कराया गया है। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, “पूरी कांग्रेस पार्टी सिंधिया जी के साथ है। हम सबने घोषणा पत्र में मिलकर वादे किए थे। पाँच सालों में कमलनाथ जी सभी वादों को पूरा करेंगे। ज्यादातर वादों पर काम तेजी से चल रहा है।”
Congress leader Digvijaya Singh: Promise letter is for 5 years. We have fulfilled many promises and fulfillment of other promises is underway. Scindia Ji is not against anybody, Congress party is together under leadership of Kamal Nath Ji. https://t.co/qSqjm68pev pic.twitter.com/lrqNLwFHLE
— ANI (@ANI) February 15, 2020
वहीं, मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने बताया कि बैठक में पार्टी नेताओं की बयानबाजी और अनुशासनहीनता को लेकर चर्चा हुई है, लेकिन बैठक में सिंधिया के बयानों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इस बीच उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के बैठक छोड़कर जाने के सवाल पर उनका बचाव किया और कहा, “उनकी पहले से ही कोई बैठक तय थी, इसलिए वह जल्दी चले गए। उन्होंने शुक्रवार(फरवरी 14) को मुझे बताया था कि उनकी शनिवार को 12 बजे दूसरी बैठक है, इसलिए वह मीटिंग से जल्दी चले गए।”
कमलनाथ के घर पर हुई इस बैठक में सिंधिया के साथ कई मुद्दों पर नोंकझोंक हुई। इस बैठक में कमलनाथ और सिंधिया के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया, जीतू पटवारी, अरूण यादव आदि मौजूद थे। इस बीच पार्टी समन्वय समिति की अगली बैठक में भोपाल में करने को लेकर भी सहमति बनी है।
इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार घोषणा पत्र को पूरी तरह लागू नहीं करती है तो वह सड़क पर उतरेंगे। एक सभा के दौरान उन्होंने कहा था, “घोषणा पत्र का एक-एक अंश पूरा होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सड़क पर उतरेगा।” इसके बाद इस पर कमलनाथ की भी तल्ख टिप्पणी आई, फिर सिंधिया बीच बैठक से निकल गए और फिर भी कांग्रेस कह रही है, “सब ठीक है।” 

मध्य प्रदेश : ये कैसी सरकार, अपने भी लाचार

कमलनाथ-मुन्नालाल गोयलमध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल ने शनिवार (जनवरी 18, 2019) को अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पार्टी पर घोषणा-पत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह विधानसभा पहुँचे मुन्नालाल गोयल पहले परिसर के अंदर घुसने के लिए बैरिकेडिंग से कूदते हुए नजर आए। इसके बाद विधानसभा में लगी गाँधी प्रतिमा पर पहुँचकर उन्होंने माल्यार्पण करने के बाद परिसर के गेट पर ही दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।
मुन्नालाल गोयल ने कहा कि कमलनाथ सरकार में विधायकों की भी अनदेखी हो रही है। सरकार की बेरुखी से नाराज और सीएम को वादा याद दिलाने के लिए गोयल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। मुन्नालाल गोयल ने कहा, “यह हमारे चुनाव घोषणा-पत्र में किए गए वादों की याद दिलाने के लिए है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें उनसे वादों को पूरा करने के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही वजह है कि आज मैं यहाँ धरने पर बैठा हूँ।” वैसे यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ सरकार का विरोध पार्टी विधायक की कर रहे हैं।
मुन्नालाल गोयल का आरोप है कि कांग्रेस जिस घोषणा-पत्र के सहारे सत्ता पर काबिज हुई है, उन पर अब अमल नहीं कर रही। विधायक ने कांग्रेस के घोषणा-पत्र में शामिल झुग्गी वासियों को पट्टे देने के वचन को पूरा नहीं करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के 112 झुग्गी वासियों को कांग्रेस के घोषणा पत्र पर अमल का इंतजार है। उनकी सरकार से माँग है कि झुग्गी वासियों को जल्द से जल्द पट्टा दिया जाना चाहिए।

इससे पहले गोयल ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को मुख्यमंत्री कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर धरने पर बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि सत्ताधारी दल का विधायक बनने के बाद अपने क्षेत्र के भूमिहीन परिवारों के आशियानों पर ठंड में बुल्डोजर चलते देख रहा हूँ। प्रशासन के अधिकारियों से कांग्रेस कार्यकर्ता का अपमान होते देख रहे हूँ। अब वो इसे नहीं देख सकते हैं। विधायक का कहना है कि पिछले 6 महीने में मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित मंत्रियों को वे कई बार पत्र लिख चुके हैं। लेकिन समस्याएँ जस की तस हैं।
इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में 6 महीने पहले भी उठाया था, जिसमें सरकार के मंत्री ने जल्दी ही झुग्गी वासियों को पट्टे देने का ऐलान किया था। हालाँकि 6 महीने बीतने के बाद भी इस पर अमल नहीं होने वे खासे नाराज हैं। मुन्नालाल गोयल ने माँग की है कि कांग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र पर सरकार को तत्काल अमल करना चाहिए।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि वे झुग्गी वासियों को पट्टे दिए जाने की माँग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख चुके लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है। इतना ही नहीं विधानसभा के विशेष सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी आवाज को सुना नहीं गया।


बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “मध्यप्रदेश में गूंगी बहरी सरकार विपक्ष और जनता तो दूर अब अपने ही विधायकों की नहीं सुन रही। विधायक सुनीता पटेल और अब मुन्नालाल गोयल, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को वचन याद दिला रहे है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार से, उसकी कार्यप्रणाली से उसके ही विधायक भी खुश नहीं है।” राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है, “धीरे-धीरे कांग्रेस सरकार की कलई खुलने लगी है। सच्चाई सामने आने लगी है। अब तो इनके अपने ही मोर्चा खोलने पर मजबूर हो गए हैं। सच भी है, आखिर झूठ के पैबंद से कब तक सच्चाई की रोशनी को रोका जा सकेगा?”
एक दिन पहले कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कहा था कि सरकार को आम लोगों की आवाज सुननी होगी। उन्होंने कहा था कि 15 साल बाद जब हमारी सरकार आई तो कार्यकर्ताओं की बात जरूर सुनी जानी चाहिए। जिन मुद्दों के सहारे कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई है, उन मुद्दों पर खरा उतरना सरकार की जिम्मेदारी है।

मध्य प्रदेश के जीवाजी यूनिवर्सिटी ने क्रांतिकारियों को बताया ‘आतंकवादी’

जीवाजी विश्वविद्यालय
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक कहावत है "चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से न जाए", कांग्रेस पर शत-प्रतिशत चरितार्थ होती है। केन्द्र में शासित रहते हुए भी क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहने का दुस्साहस करने के साथ-साथ "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दुओं को अपमानित करती रही। और अब मध्य प्रदेश में 15 वर्ष बाद वापस आने पर फिर क्रांतिकारियों को आतंकवादियों से तुलना करने का दुस्साहस किया है। आखिर किस दबाव में कांग्रेस क्रांतिकारियों की तुलना आतंकवादियों से करती है? अगर क्रन्तिकारी आतंकवादी थे, फिर क्यों स्वतन्त्रता और गणतन्त्र दिवस मनाकर जनता को भ्रमित करती है? कांग्रेसियों को नहीं मालूम की आज महापौर से लेकर राष्ट्रपति भी क्रांतिकारियों की क़ुरबानी के कारण बनते हैं। आज हर भारतवासी इन राष्ट्रीय पर्वों को मनाता है, इन क्रांतिकारियों की क़ुरबानी के कारण। जिन्होंने देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। लगता है कांग्रेस में शर्म नाम की कोई चीज नहीं। 
मध्यप्रदेश के ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी मे परीक्षा के दौरान राजनीति शास्त्र के प्रश्न पत्र में क्रांतिकारियों की तुलना आतंकवादियो से किए जाने का शर्मनाक वाकया सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिसके बाद इसपर प्रदेश के शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने खुद संज्ञान लिया है और विश्वविद्यालय से सवाल पूछा गया है कि इसे पूछे जाने के पीछे आखिर क्या उद्देश्य था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा ये व्यवस्था बेहद गोपनीय होती है। ऐसा सवाल कैसे पूछा गया? इसके पीछे किसी का षडयंत्र था और उनकी क्या व्यवस्था थी। इन सब पर जाँच की जा रही है। साथ ही शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि, क्योंकि ये मामला विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ मामला है, इसलिए इसकी बेहद सतर्कता के साथ जाँच होगी।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पूरे मामले के मद्देनजर प्रमुख सचिव को अपने निवास पर बुलाया। साथ ही मामले को लेकर 3 सदस्यीय जाँच कमेटी भी गठित की गई। अब ये जाँच कमेटी 3 दिन के भीतर पूरे मामले की जाँच रिपोर्ट उन्हें सौंपेगी।
रिपोर्ट आने के बाद मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। जीतू पटवारी के मुताबिक ये मात्र एक चूक नहीं है, बल्कि बहुत बड़ी गलती है। इसलिए जो भी दोषी होगा उसको बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई होगी ताकि आगे विश्वविद्यालयों में इस तरह की चूक ना हो।
यह प्रश्न कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्वाचन क्षेत्र गुना के सरकारी कॉलेज में एमए राजनीति शास्त्र की 20 दिसंबर को हुई परीक्षा के दौरान पूछा गया था। जिसके प्रकाश में आने के बाद न सिर्फ छात्र संगठन बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने शुरु कर दिए।

इस मामले पर मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर गैरजिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घटना को शर्मनाक और दुखदायी बताते हुए कहा, “जिनके बलिदान के कारण हम खुली हवा में साँस ले पा रहे हैं, उन्हें कोई कैसे आंतकवादी कह सकता है। मध्य प्रदेश सरकार से मेरी माँग है कि तुरंत ऐसे गैरजिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।”
वहीं, प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार होने के बाद भी कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष ने इस घटना पर कहा– “प्रदेश के शिक्षा संस्थानों में संघी मानसिकता के लोग घुस गए हैं। इसीलिए इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जीवाजी विश्वविद्यालय में पेपर किसने सेट किया, इसकी जाँच कराएँगे और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”

हनी ट्रैप : महिला ठीक हो तो गुंडा-मवाली पुरुष भी गलती नहीं करता-- इमरती देवी, महिला एवं बाल विकास मंत्री, मध्य प्रदेश

इमरती देवी
अपने विवादित बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने हनी ट्रैप मामले में अजीबोगरीब बयान दिया है। हनीट्रैप मामले में शामिल महिलाओं पर हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक महिला गलती नहीं करती कोई पुरुष गलती नहीं कर सकता। चाहे वह कोई गुंडा या मवाली ही क्यों न हो।
इस तरह का बयान देकर वो एक तरह से पुरुषों का समर्थन करती नज़र आईं। रविवार (अक्टूबर 13, 2019) को इंदौर में इमरती देवी ने कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं की गलती होती है और पुरुषों को दोषी मान लिया जाता है। मैं ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करती। इस मामले में पुरुषों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि महिलाओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अक्सर इन मामलों में महिलाओं की गलती होती है, लेकिन तब भी पुरुषों को ही दोषी माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर पुरुष को गलत तरीके से फँसाया जाए तो हमें ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करनी चाहिए।
मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस मामले की जाँच में एक के बाद एक परतें उघड़ती जा रही हैं और जो तस्वीर उभर रही है, वह और ज्यादा चौंकाने वाली है। इस मामले में पकड़ी गईं महिलाओं के मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित बड़ी संख्या में वीडियो क्लिपिंग मिली हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह ....

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भोपाल हनी ट्रैप रैकेट: (बाएँ से) श्वेता विजय, बरखा और श्वेता स्वप्निल जैन (साभार-मनोरमा) आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार...

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पिछले कुछ सालों से नेताओं पर रेप और यौन शोषण के आरोपों की बाढ़ सी आ गई है. सितम्बर 20 को पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मया...

उल्लेखनीय है कि इमरती देवी इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुकी हैं। अभी कुछ दिन पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा था कि डॉक्टर्स के ट्रांसफर में पैसे लगते हैं इसलिए उनका ट्रांसफर न कराकर सस्पेंड कर देते हैं। इससे पहले शिवपुरी के एक स्कूल में शौचालय के अंदर बच्चों के लिए खाना पकाए जाने के मामले में उन्होंने कहा था कि इसमें समस्या क्या है। शौचालय की सीट और चूल्हे के बीच पार्टिशन है।