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कमलनाथ के साथ ही मनीष तिवारी भी? कॉन्ग्रेस की डूबती नाव से उतर रहे महारथी, पंजाब में बीजेपी को मिलेगी मजबूती

एक तरफ राहुल गाँधी 'न्याय यात्रा' पर है, दूसरी ओर पार्टी में हो रहे अन्याय के विरुद्ध पार्टी में भगदड़ मची हुई है। कई बार शंका व्यक्त की जा चुकी है कि क्या राहुल कांग्रेस के बहादुर शाह ज़फर सिद्ध होंगे?, वह शंका चरितार्थ हो रही है। कई बार पार्टी में ही कांग्रेस हित में परिवार के विरुद्ध आवाज़ उठी, लेकिन परिवार भक्तों ने उन्हें भाजपा-संघ का दलाल बता अपमानित करते रहे, और परिवार भक्ति से पार्टी के हो रहे पतन को देखा जा सकता है। वह दिन अब अधिक दूर नहीं, जब पार्टी में केवल परिवार भक्त ही रहेंगे, बाकी सब पार्टी को छोड़ चुके होंगे।   
कांग्रेस पार्टी को झटके पर झटके लग रहे हैं। इंडी गठबंधन में तो साथी दल लगातार साथ छोड़ ही रहे हैं, पार्टी के भी हैवीवेट नेता लगातार कांग्रेस का साथ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंंत्री कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और राज्यसभा चले गए, तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके कमलनाथ के भी कांग्रेस से दूर जाने के बीच पंजाब से भी पार्टी के लिए बुरी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी कांग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। वो अभी कांग्रेस के ही टिकट पर लोकसभा सांसद हैं, लेकिन अगला चुनाव उनके बीजेपी के टिकट पर लड़ने की बातें सामने आ रही हैं।

मनीष तिवारी अभी पंजाब के आनंदपुर साहिब से लोकसभा सांसद हैं। वो लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए बीजेपी से बातचीत चल रही है। आजतक ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीजेपी के पास लुधियाना लोकसभा सीट के लिए सक्षम उम्मीदवार है। ऐसे में वो मनीष तिवारी को लुधियाना से नहीं लड़ाना चाहती। हालाँकि दोनों तरफ से इस बात लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। वो कभी भी कॉन्ग्रेस छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं।

दिल्ली में कमलनाथ-नकुलनाथ

सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ भी कांग्रेस छोड़ सकते हैं। दोनों ही इन दिनों दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि वो बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। जल्द ही इस बात की घोषणा की जा सकती है। नकुलनाथ अभी छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं। ये सीट कमलनाथ की पारंपरिक सीट मानी जाती है। वो दशकों तक इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं, उनके बाद उनके बेटे नकुलनाथ ने विरासत को थाम रखा है।
ऐसे में कमलनाथ, नकुलनाथ और अब मनीष तिवारी का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही मुंबई कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण राज्यसभा पहुँच चुके हैं, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली देवरा एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। वहीं, बाबा सिद्दीकी जैसे कॉग्रेस के बड़े नेता भी पार्टी छोड़ चुके हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कई विधायक भी छोड़ सकते हैं पार्टी

कमलनाथ-नकुलनाथ एपिसोड के साथ ही एक बार फिर से मध्य प्रदेश कांग्रेस में टूट हो सकती है। कांग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के साथ ही पार्टी बदल सकते हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट की मानें, तो कमलनाथ के साथ ही सुनील उईके (जुन्नारदेव), सोहन वाल्मीकि (परासिया), विजय चौरे (सौंसर), निलेश उईके (पांढुर्णा), सुजीत चौधरी (चौरई), कमलेश शाह (अमरवाड़ा), दिनेश गुर्जर (मुरैना), संजय उईके (बैहर), मधु भगत (परसवाड़ा) और विवेक पटेल (वारासिवनी) जैसे विधायक कांग्रेस छोड़ सकते हैं। वहीं, कमलनाथ समर्थक मुरैना और छिंदवाड़ा के महापौर भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं।

कमलनाथ के समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, पटवारी खेमे में खामोशी

कमलनाथ के समर्थक पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने एक्स पर जय श्री राम पोस्ट किया। कमलनाथ-नकुलनाथ की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के समय ये पोस्ट बहुत कुछ कह रही है।
उन्होंने न्यूज18 से बातचीत में खुलेआम इस बात का ऐलान कर दिया था कि जहाँ भी कमलनाथ होंगे, वहाँ वो खड़े मिलेंगे।

I.N.D.I. गठबंधन ने किया बहिष्कार, कमल नाथ ने किया सत्कार: कमलनाथ के साथ नविका कुमार को देख भड़का विपक्षी गिरोह

इंडी गठबंधन की बहिष्कृत पत्रकार नविका कुमार के साथ कमलनाथ 
लोकसभा चुनाव-2024 से पहले भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार को हराने के लिए विपक्षी दलों का इंडी गठबंधन (INDI Alliance ) उससे पहले ही टूटता दिख रहा है। आए दिन गठबंधन के दल एक दूसरे के खिलाफ तीखे बयान-बाजी कर रहे हैं।

दल में देश की विपक्षी पार्टियों को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एकजुट करने का झंडा बुलंद करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी से गठबंधन के बाकी दल खार खाए बैठे हैं। इस कड़ी में अब मध्य प्रदेश समाजवादी पार्टी की यूनिट ने कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ के इंडी गठबंधन के बहिष्कृत पत्रकारों में शामिल नविका कुमार के साथ घूमने पर आड़े हाथों लिया।

समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश यूनिट ने अपने एक्स हैंडल पर कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा के हैंडल पर पत्रकार नविका कुमार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की फोटो के साथ ही इंडी गठबंधन के बहिष्कृत पत्रकारों की लिस्ट के साथ लिखा गया, “इंडिया अलायन्स की मीटिंग में सर्वसम्मति से तय हुआ था कि कुछ पत्रकार जो भाजपा के एजेंडे पर डिबेट्स करते हैं उनके किसी कार्यक्रम में अलायन्स में शामिल दलों के प्रतिनिधि नहीं जाएँगे और ना ही उन्हें बुलाएँगे। अब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता। पूर्व मुख्यमंत्री तथा मध्य प्रदेश कांग्रेस के सर्वेसर्वा कमलनाथ जी इंडिया अलायन्स द्वारा बहिष्कृत पत्रकार को लेकर अपने साथ चुनाव प्रचार में घूम रहे। कांग्रेस पार्टी खुद इंडिया अलायन्स के साथी दलों के साथ ईमानदार नहीं है और कांग्रेस खुद भाजपा के एजेंडे पर काम कर रही।”

I.N.D.I. अलायंस ने गुरुवार, (14 सितंबर, 2023 ) को खुलेआम 14 समाचार एंकरों की एक सूची जारी कर उनके ‘बहिष्कार’ का फैसला लिया था। इनकी लिस्ट इसी दिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई थी। 

अब उसी कांग्रेस के नेता कमलनाथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले लिस्ट में 9वें नबंर पर शामिल पत्रकार नविका कुमार के साथ चुनाव प्रचार अभियान पर जाते हैं और उनसे बात करते हैं। इससे इंडी गठबंधन के दलों की छाती पर साँप लोटना स्वाभाविक था।

इससे पहले भी चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में सीटों को लेकर नाराज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस पार्टी की छिछालेदार कर चुके हैं। उन्हें यहाँ कांग्रेस ने पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए वादे के मुताबिक 6 सीटें तो छोड़िए, एक भी सीट नहीं दी।

इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा कि अगर उन्हें पता होता कि राज्यों के स्तर पर गठबंधन नहीं है, तो वो कभी इंडी गठबंधन की किसी बैठक में जाते ही नहीं। इसके बाद उनकी पार्टी ने यहाँ अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

यहाँ के प्रदेश प्रभारी व्याजी गोंड ने कहा समाजवादी पार्टी सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की कोशिश कर रही है। अभी तक 31 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया गया है। उधर दूसरी तरफ सभी विपक्षी दलों को बटोर कर लाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

इस बीच, अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया है कि वो इंडी गठबंधन को परे रखकर उत्तर प्रदेश की 80 में से 65 लोकसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। उन्हें किसी दल के संग-साथ की जरूरत नहीं है।

वहीं जम्मू-कश्मीर से भी इंडी गठबंधन में शामिल दल जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) के भी इसे लेकर बगावती तेवर दिखने लगे हैं। जेकेएनसी के वाइस प्रेजिडेंट उमर अब्दुल्ला भी कांग्रेस नेता कमलनाथ के संग पत्रकार नाविका कुमार को देख अपनी त्यौरियाँ चढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपने एक्स हैंडल से तंज करते हुए पोस्ट किया, “एंकरों का बहिष्कार करने वाली एक मूर्खतापूर्ण सूची के लिए इतना ही। मुझे खुशी है कि यह अपनी ही मौत मर गया INDIA गठबंधन।”

खुद को सभी को साथ लेकर चलने वाला नेता बताते हुए बिहारी बाबू नीतीश कुमार ने गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को सीपीआई और वामदलों की पटना में हुई एक रैली के मंच से कांग्रेस पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि अभी कांग्रेस पार्टी गठबंधन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उसका तवज्जो महज 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है।

नीतीश कुमार का ये बयान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसा ही है। कांग्रेस पर हमलावर होते हुए नीतीश कुमार ने इंडी गठबंधन से बाहर जाने की बात साफ तो नहीं की, लेकिन ये कहा कि वो सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसलिए ही सभी को एकजुट कर रहे हैं।

उन्होंने खुद को सोशलिस्ट का तमगा देते हुए कहा कि सीपीआई से पुराना रिश्ता है। कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट को एक होकर आगे चलना है। अब एक बार पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो जाए, उसके बाद इस गठबंधन के भविष्य पर चर्चा होगी।

भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने में सीएम नीतीश कुमार अहम रोल में रहे। उन्होंने भाजपा के खिलाफ सभी दलों को इकट्टा करने में एड़ी चोटी का जोर लगाया था। इसी वजह से पटना की बैठक के बाद मुंबई और फिर बेंगलुरु में बैंठके हुईं।

इस बैठक में ही राहुल गाँधी ने उनसे पूछे बगैर ही गठबंधन का नामकरण I.N.D.I. Alliance कर डाला था। इससे सुशासन बाबू खासे नाराज हुए थे और गठबंधन की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए थे। हालाँकि बाद में साझा बयान जारी कर इस घटना पर लीपापोती करने की कोशिश की गई थी।

यही नहीं एजेंडा के तौर पर शामिल की गई जातीय जनगणना की माँग पर सभी दलों की रजामंदी नहीं थी। इसके बाद इस मुद्दे को भी राहुल गाँधी ने हाईजैक करने की कोशिश की है और वो लगातार इस मुद्दे पर खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं।

वहीं दक्षिण में इंडी गठबंधन का हिस्से डीएमके पार्टी ने सनातन पर उल्टी-सीधी बयानबाजी की। इस पर गठबंधन चुप्पी साधे बैठे रहा। हालाँकि उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए बयान के बाद इंडी गठबंधन की भोपाल की रैली चुनावों की वजह से कॉन्ग्रेस के दबाव में रद्द कर दी गई।

उधर दूसरी तरफ आरजेडी के नेताओं की सनातन और हिंदू विरोधी बयानों पर गठबंधन के सभी दल होठ सिले बैठे रहे। इसी तरह पंजाब से लेकर दिल्ली तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की तनातनी जगजाहिर है। उधर सीएम ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ काम करने में एतराज हैं।

मध्य प्रदेश : कमल नाथ और दिग्विजय सिंह का कांग्रेसियों ने ही फूँका पुतला; पूर्व मुख्यमंत्री के बँगले के सामने ही कार्यकर्ताओं ने कराया मुंडन

                                                                                                            साभार- दैनिक जागरण और NBT
कांग्रेस में टिकट वितरण से दुखी कई नेताओं ने शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को भोपाल में प्रदेश 
कांग्रेस कार्यालय और कमल नाथ के बंगले के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के बंगले के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं बोंडगाँव में कमलनाथ का पुतला दहन भी किया गया।

दरअसल, जब से कांग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में 88 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है, उसके बाद से ही कांग्रेसी भड़के हुए हैं। उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में बैरसिया से उम्मीदवार बनाई गईं जयश्री हरिकरण के विरोध में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले के सामने मुंडन कराकर विरोध जताया। साथ ही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का पुतला भी फूँका।

मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों की सूचि से कांग्रेस नेता ही खुश नजर नहीं आ रहे। विधानसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची आने के बाद भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय के बाहर भड़का विरोध अब कमल नाथ के बंगले तक पहुँच गया है। बैरसिया से आए कार्यकर्ताओं ने बंगले के गेट पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बैरसिया के प्रत्याशी का टिकट बदलने की माँग की। वहीं पीसीसी के सामने दिग्विजय सिंह का पुतला भी जलाया गया।

मौके पर विरोध प्रदर्शन को इकट्ठे कांग्रेस कार्यकर्ता बंगले में घुसना चाह रहे थे, लेकिन वहाँ मौजूद गार्डों ने उन्हें रोक दिया। हालाँकि, प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह के समर्थक बताए जा रहे हैं। और यह आरोप लगाया जा रहा है कि टिकट वितरण में कमल नाथ ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवा दिया। इसी बात से कार्यकर्ता नाराज हैं। वहीं, दतिया जिले की सेवड़ा विधानसभा से आए नेताओं ने भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का पुतला फूँका। 

वहीं विधानसभा क्षेत्र हरदा-खिरकिया क्रमांक 135 में कांग्रेस द्वारा डॅा. रामकिशोर दोगने को प्रत्याशी घोषित करने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस मामले में कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने शुक्रवार(20 अक्टूबर, 2023) को अपने गृह ग्राम बोंडगाँव में कमल नाथ और हरदा प्रत्याशी डॅा. दोगने का पुतला दहन किया।

कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने राजपूत समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हरदा विधानसभा क्षेत्र का घोषित प्रत्याशी बदलने की माँग की है। बता दें कि कांग्रेस नेता मंजीत सिंह बघेल ने हरदा विधानसभा क्षेत्र से राजपूत समाज के व्यक्ति को टिकट देने की माँग की थी।

इस पूरे मामले में राजपूत समाज के कई नेताओं ने कहा कि राजपूत समाज के नेता को टिकट देने की माँग वाली फेसबुक पोस्ट मंजीत सिंह की व्यक्तिगत सोच है, समाज का उस पोस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ तक कि राजपूत समाज का राजनीतिक पार्टियों से कोई लेना-देना नहीं है।

सनातन विरोधी बयानों से विपक्षी गठबंधन की हालत पस्त, भोपाल में होने वाली कांग्रेस की रैली रद्द: कमलनाथ बोले – ये देश सनातन धर्म का है

सनातन विरोधी बयानबाज़ी से लाख मुस्लिम आकाओं को खुश करने का प्रयास किया गया हो, लेकिन गठबंधन के विरुद्ध हिन्दुओं में हो रहे विरोध ने गठबंधन को बहुत पीछे धकेल दिया, जिसके भोपाल में कांग्रेस की होने वाली रैली के रद्द होने से स्पष्ट संकेत मिल गए हैं। कांग्रेस की भी मजबूरी यह है कि अपने मुस्लिम आकाओं के नाराज न होने के कारण चुनावी हिन्दू बनने का ड्रामा तो किया जा सकता है, लेकिन सनातन के पक्ष में बोलना मंजूर नहीं। 

सनातन विरोधी बयानों के कारण बैकफुट पर आए I.N.D.I. गठबंधन ने आगामी दिनों में होने वाली भोपाल रैली को रद्द कर दिया है। इस बात का ऐलान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया है। इससे पहले I.N.D.I. गठबंधन की बैठक से यह बात सामने आई थी कि चुनावी राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा सरकार के विरुद्ध रैली का आयोजन किया जाएगा जिसमें विपक्षी के कई बड़े नेता शामिल होंगे।

यह रैली अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जानी थी, जिसकी तैयारियाँ चालू हो गई थीं लेकिन अब कमलनाथ ने इसके निरस्त होने की घोषणा की है। कमलनाथ ने कहा, “रैली कैंसल हो गई है।” इस रैली के निरस्त होने के पीछे सबसे बड़ा कारण I.N.D.I. गठबंधन के घटक दलों डीएमके और राजद के नेताओं द्वारा सनातन पर दिए गए बयान माने जा रहे हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि कमलनाथ ने सनातन को डेंगू-मलेरिया जैसा बताने वाले बयानों से होने वाले नुकसान को भी भाँप लिया है, इसलिए वह अब इन बयानों से किनारा भी कर रहे हैं। कमलनाथ में हाल ही में अंग्रेजी समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बयान देते हुए कहा, “ये सब जानते हैं कि अपना देश सनातन धर्म का है, सनातन धर्म कहता है कि सबको जोड़कर रखो, कोई कुछ कहे या डीएमके वाला कुछ भी कहता रहे। इस पर राय की कोई आवश्यकता नहीं हैं।”

लोकसभा चुनावों से पहले देश के तीन बड़े राज्यों – मध्य प्रदेश राजस्थान और छतीसगढ़ में चुनाव होने वाले हैं जो कि I.N.D.I. गठबंधन के लिए पहला टेस्ट होंगे। इसको ध्यान में रखते हुए ही पहली रैली के लिए भोपाल को चुना गया था लेकिन इस बीच सनातन पर बयानबाजी के कारण विपक्षी दलों को इस नीति में बदलाव करना पड़ गया है।

वहीं इस रैली के रद्द होने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, “इन्होंने जो सनातन धर्म का अपमान किया है, उससे देश व मध्य प्रदेश की जनता के मन में रोष है, इनको डर था कि वह रोष कहीं प्रकट न हो जाए, इसलिए गठबंधन की एमपी में रैली ही निरस्त कर दी।”

अवलोकन करें:-

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‘सनातन खत्म होना ही चाहिए’: अब शरद पवार की पार्टी के नेता ने खोला हिन्दू विरोधी घृणा का पिटारा, प

भोपाल में रद्द होने के बाद अब इस रैली के नागपुर में आयोजन की संभावनाएँ हैं। हालाँकि, इस विषय में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि अब अगली रैली के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे के साथ बैठक करके निर्णय लिया जाएगा।

‘हिंदू-सिख विभाजन के लिए कांग्रेस ने खालिस्तान मुद्दे को दिया जन्म, भिंडरांवाले को बढ़ाया’: 1 अकबर रोड की बैठक का पूर्व रॉ अधिकारी ने किया खुलासा

पूर्व रॉ अधिकारी GBS सिद्धू ने बताया कैसे पैदा हुआ भिंडरांवाले (फोटो साभार: ANI)
बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होए यानि कांग्रेस ने जिस बबूल को पेड़ यानि खालिस्तान को जन्म दिया, उसी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की जान ले ली, जिसे कांग्रेस बलिदान करार कर हर चुनाव में भुनाने की कोशिश करती है। भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी RA&W के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी GBS सिद्धू ने खालिस्तान के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन भिंडरांवाले’ की शुरुआत और इसका प्रबंधन 1, अकबर रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास में बैठे कुछ नेता कर रहे थे, जिनमें ज्ञानी जैल सिंह, संजय गाँधी, कमलनाथ और इंदिरा गाँधी शामिल थीं। उन्होंने जानकारी दी कि ये सब 1978 के मध्य में शुरू हुआ, जब ज्ञानी जेल सिंह और संजय गाँधी ने अकाली दल और जनता पार्टी के बीच तनाव पैदा करने की साजिश रची। दूसरे, अर्थों में कहा जाए कि कांग्रेस ने किसी न किसी बहाने देश में एकता बनाने रखने की बजाए विभाजन का काम करती रही, जिसे जनमानस उस अपवाद को कांग्रेस की बजाए कांग्रेस समर्थक उपद्रवियों को कसूरवार मानती रही। 

उन्होंने इसके लिए ‘एक हाईप्रोफाइल’ संत को अपनी तरफ से भेजने की बात कही। उनकी साजिश थी कि वो कथित संत अकाली दल की नरम नीतियों पर कुछ बोलेगा, जवाब में जनता पार्टी की तरफ से भी प्रतिक्रिया आएगी और अंततः दोनों एक-दूसरे से रिश्ता तोड़ लेंगे। यानी, कांग्रेस ने हिन्दुओं को डराने के लिए भिंडरांवाले को पैदा किया और खालिस्तान जैसे मुद्दे को जन्म दिया, जिससे देश की एक बड़ी जनसंख्या ये सोचने लगे कि देश की अखंडता को खतरा है।

उन्होंने बताया कि कमलनाथ ने उस समय कट्टर सिख संतों की भर्ती करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रशासन से लेकर सभी लोग भिंडरांवाले को ‘सर/जनाब’ कहते थे। उसे एक बड़ा आदमी बनाया गया। उन्होंने बताया कि इंदिरा गाँधी ये कहती थीं कि उनकी हत्या हो सकती है, लेकिन उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। ANI की संपादक स्मिता प्रकाश से बात करते हुए पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा कि तब गृह मंत्री रहे ज्ञानी जैल सिंह ने मीडिया में भिंडरांवाले की छवि बनाई थी।

GBS सिद्धू ने बताया कि उस दौर में उन्हें कनाडा में भी भेजा गया था, उस दौरान उन्हें पता चला कि वहाँ सिर्फ दो ही लोग थे जो खालिस्तान की बातें करते थे। 1979 में भारत लौटने के बाद जब उन्हें रॉ में भेजा गया, तब इसकी अलग से कोई इमारत तक नहीं थी। उन्होंने बताया कि इसी दौरान सिख कट्टरवाद और ISI के संबंधों की जाँच के लिए रॉ का एक नया विभाग दिसंबर 1980 में बनाया गया, जबकि उस समय ऐसा कोई मामला आया ही नहीं था।

इसके बाद संजय गाँधी और जेल सिंह जैसों ने खालिस्तान को मुद्दा बनाने की ठानी। इस दौरान सिद्धू को रॉ के नए ब्रांचों के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया, अमेरिका-यूरोप में उन जगहों पर जहाँ सिखों की जनसंख्या ज्यादा थी। जबकि कनाडा में जब वो थे तो उन्हें 2 लोगों के अलावा खालिस्तान का कोई नामोंनिशान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि उनका इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि भिंडरांवाले को गिरफ्तार करने के लिए भी पूरी साजिश रची गई थी।

उन्होंने बताया, “कांग्रेस ने अकाली दल से बातचीत की योजना बनाई, ताकि उन्हें ऐसा लगे कि समस्या का समाधान किया जा रहा है। 26 दौर की बातचीत चली, जिनमें से कुछ में इंदिरा गाँधी भी शामिल हुई। संजय गाँधी ने 1985 से पहले का चुनाव भिंडरांवाले-खालिस्तान मुद्दे पर जीतने की योजना बनाई। 1982 के मध्य के बाद हमें सूचना मिली कि इंदिरा गाँधी की जान खतरे में है। भिंडरांवाले स्वर्ण मंदिर में शिफ्ट हो गया था। उसे गिरफ्तार करने की साजिश भी ऐसे रची गई, जैसे वो बहुत बड़ा व्यक्ति था और उसे पकड़ना आसान नहीं था।”

हिन्दू प्रतीकों से नफरत करते हैं कांग्रेसी, कमलनाथ के बेटे ने मुस्लिम मोहल्ले में जाने से पहले माथे से मिटाया तिलक

सेकुलरिज्म का ढोल पीटने वाली कांग्रेस को शायद सेकुलरिज्म का अर्थ भी नहीं मालूम। अगर मालूम होता तो कभी का तुष्टिकरण को त्याग चुकी होती। इनकी हालत 'गंगा गए गंगा दस और जमुना गए जमुना दास' जैसी है।  
राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को लेकर शोर मचाने वाले कांग्रेसी हिन्दू प्रतीकोंं से कितना नफरत करते हैं। इसका प्रमाण मध्य प्रदेश के परासिया इलाके में निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान देखने को मिला। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें नकुलनाथ अपने माथे से तिलक पोंछते हुए नज़र आ रहे हैं। जब हिन्दू प्रतीक के अपमान को लेकर मामला गरमाने लगा तो इस वीडियो को नकुलनाथ के फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया।

दरअसल, नकुलनाथ तीन दिन पहले परासिया में कांग्रेस के प्रत्‍याशियों के समर्थन में रोड शो कर रहे थे। रोड शो को फेसबुक अकाउंट से लाइव किया जा रहा था। इसी दौरान उन्‍हें एक जगह पर अपने ललाट पर लगे तिलक को साफ करते देखा गया। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि जिस जगह पर नकुलनाथ ने माथे से तिलक हटाया वो इलाका मुस्लिम बहुल है। नकुलनाथ ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिन्दू प्रतीक को अपने माथे मिटा दिया।

सोशल मीडिया पर ट्विटर यूजर्स का कहना है कि कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ, पहले तिलक लगाकर हिंदू वोटर्स को लुभाया अब मुस्लिम क्षेत्र में पहुंचने पर माथे का तिलक मिटा रहे हैं ताकि मुस्लिम वोट भी मिल जाएं। मतलब कांग्रेसी किसी के नहीं, भाई जानों ये तुम्हें लड़वा कर भी अपना उल्लू ही सीधा करते हैं, कुछ समझे या अभी भी जाहिल बने रहेंगे।

बीजेपी नेताओं ने भी इस वायरल वीडियो को लेकर सवाल उठाया है। बीजेपी का आरोप है कि नकुलनाथ ने एक खास वर्ग के मोहल्ले में प्रवेश से पहले टीका हटाया। बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने ‘उनके’ इलाके में प्रवेश से पहले टीका हटाया।

 कर्मयोगी नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि जो लोग हिन्दू मोहल्ले से बाहर निकलते ही माथे से तिलक मिटा लेते हैं वही लोग सत्ता में आकर हिंदुत्व की पहचान मिटाने का काम भी करते हैं। कांग्रेसी नेता कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने रोड शो के दौरान हिन्दू मोहल्ले से बाहर आते ही माथे पर से तिलक मिटा दिया।

ये आग लगाने का मौका है आग लगा दो… कांग्रेस नेता कमलनाथ

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ कितने विवादित रहे हैं, किसी से नहीं छिपा। देश में लगी इमरजेंसी में संजय गाँधी के करीबी रहने से लेकर अब किस विवादित वीडियो तक देखा जाये तो कमलनाथ विवादों में रहकर चर्चा में रहना चाहते हैं और शायद यही तरीका उनको भाता भी है। 
सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी कमलनाथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं से किसानों के मुद्दे पर आग लगाने की बात कर रहे हैं। 19 सेकेंड के इस वीडियो में कमलनाथ एक वर्चुअल मीटिंग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मीटिंग में कमलनाथ कह रहे हैं कि किसानों के न्याय के लिए लड़ा जाए और यह ‘आग लगाने’ का सही समय है। वीडियो में कमलनाथ को यह कहते सुना जा सकते है, “तुम लोगों को आग लगानी है। मैंने कहा था ये आग लगाने का मौका है। किसानों के साथ न्याय हो और दूसरा काम है आग लगाओ।“

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा है कि कमल नाथ इस देश को वो नेता हैं, जब देश के अंदर देश-विरोधी कुछ भी होता है। तो वो उसका हिस्सा होते हैं, जब देश में इमरजेंसी लगी थी। तो कमल नाथ ने भी इमरजेंसी में महत्वपूर्ण भूमिका संजय गांधी के साथ निभाई थी। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आपदा में वो सेवा तो करने से रहे तो आपदा में तांडव करना चाहते हैं। मैंने आज सुबह भी कहा था कि ये वो ही कमल नाथ हैं, जो 84 के दंगों में देश में आग लगाई। आज जो लीक हुआ है उनका वो इस बात का घोतक है कि वो प्रदेश में भी आग लगाना चाहते हैं। देश को तोड़ना चाहते हैं। मूल स्वभाव उनका उभर कर सामने आया है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर काफी चर्चा हो रही है…

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