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मोहम्मद मेहताब ने अपनी ही बीवी का बेडरूम सेक्स वीडियो किया वायरल, ससुर-साले को भी भेजा शारीरिक संबंध वाला क्लिप

                                                                             प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
मध्य प्रदेश के खंडवा में एक व्यक्ति ने अपनी ही बीवी का अश्लील वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। आरोपित की पहचान मोहम्मद मेहताब के रूप में हुई। बीवी का अश्लील वीडियो बनाने के लिए उसने बेडरूम में CCTV कैमरे लगवाए। इसके बाद वीडियो अपने ससुर, साले समेत महिला के अन्य परिजनों को भेज दिया। जो वीडियो उसने वायरल किया है, उसमें वो अपनी बीवी से शारीरिक संबंध बनाते हुए दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला खंडवा जिले के मांधाता थाना क्षेत्र के इनपुन गाँव का है। यहाँ एक महिला ने अपने शौहर मोहम्मद मेहताब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि उसके शौहर ने उसके अश्लील वीडियो बनाकर उसके परिजनों को भेजे हैं। कहा जा रहा है कि महिला और शौहर के बीच विवाद हुआ था। उसने शौहर के खिलाफ दहेज एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया था।

इसके बाद वह शौहर से अलग रह रही थी। लेकिन, फिर दोनों में समझौता हो गया और वह शौहर के साथ वापस आकर रहने लगी। इस बीच मोहम्मद मेहताब ने अपने घर में सीसीटीवी भी लगा लिया। इसमें उसका बेडरूम भी शामिल था। जब बीवी उसके साथ रह रही थी तब उसने उसके अश्लील वीडियो बना लिए। लेकिन फिर दोनों के बीच विवाद हो गया। इससे बीवी अपने मायके जाकर रहने लगी। बीवी से गुस्साए मोहम्मद मेहताब ने 9 अगस्त को अश्लील वीडियो महिला के पिता और भाई सहित परिवार के अन्य लोगों को भेज दिए। 

इस मामले में खंडवा एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल का कहना है कि शौहर और बीवी के बीच स्थितियाँ सामान्य थीं तब उसने वीडियो बनाए थे। इसके शौहर-बीवी के बीच विवाद हुआ। इसके चलते शौहर ने बीवी के कुछ वीडियो मायके पक्ष के लोगों को भेज दिए। यह महिला की निजता के हनन का मामला है। शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। आगे की जाँच कर कार्रवाई की जा रही है।

एक और परिवार लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब से उजड़ गया : पहले 3 और 9 साल के बेटों को पिलाया जहर, फिर फंदे से झूल गए पति-पत्नी

लोन में डूबे शख्स ने बच्चों को जहर देकर किया सुसाइड
मध्य प्रदेश के भोपाल में ऑनलाइन लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब के जाल में फँसे दंपति ने तंग आकर अपने दोनों बेटों को सल्फास देकर मार डाला और खुद फाँसी के फंदे पर लटक गए। पुलिस को मौके से जो 4 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ उसमें शिव विहार कॉलोनी के भूपेंद्र विश्वकर्मा ने सारी कहानी बयां की।

भूपेंद्र ने बताया कि वो एक कोलंबिया बेस्ड कंपनी में काम करते थे। उनके ऊपर काम और लोन का प्रेशर पहले ही था। बाद में उन्हें पता चला कि कंपनी ने उनका लैपटॉप हैक करके उसमें मिले कॉन्टेक्ट पर एडिटेड अश्लील वीडियो डाल दिए थे। अंत में भूपेंद्र ने अपनी पत्नी रितू विश्वकर्मा के साथ मिल पहले बेटे ऋतुरात (3) और ऋषिराज (9) को जहर दिया और उसके बाद सुसाइड कर ली।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े भाई नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि भूपेंद्र ने दोनों बच्चों के साथ मरने से पहले सेल्फी कैप्चर की थी। बाद में कोल्ड ड्रिंक में सल्फास डालकर दोनों बच्चों को पिला दिया। इसके बाद काफी देर वो लोग बच्चों के पास बैठे रहे, जब बच्चों की मौत हो गई तो दोनों ने खुद भी दुपट्टे से फंदा बनाया और फाँसी लगाकर जान दे दी। नरेंद्र के मुताबिक भूपेंद्र के घर से सल्फास के 6 पैकेट मिले।

बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने से पहले भूपेंद्र ने अपनी भतीजी रिंकी विश्वकर्मा को वॉट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा था। बाद में पत्नी और दोनों बच्चों की फोटो भी भेजी। नीचे लिखा था- यह हमारी आखिरी फोटो है, अब हम कभी नहीं दिखेंगे। जब रिंकी ने इस फोटो को 6 बजे देखा तो उसने परिजनों को सूचित किया। घर जाने पर वाकई पूरा परिवार खत्म हो चुका था।

चचरे भाई पंकज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके भैया भूपेंद्र के साथ साइबर क्राइम हुआ था। उन्हें जो मोबाइल और लैपटॉप दिया गया था उसे हैक करके अश्लील वीडियोज कॉन्टैक्ट पर भेजे गए। भैया ने कहा भी था कि ये मैसेज वो नहीं भेज रहे। 2-3 दिन पहले जब बात हुई तो वो काफी परेशान थे। उन्हें ब्लैकमेल करके 17 लाख रुपए माँगे जा रहे थे। लोन ऐप के चक्कर में उनसे पहले ही तीन अकॉउंट खाली हो चुके थे। पूरा पैसा निकाल लिया गया था।

मामले की जाँच 5 सदस्यीय एसआईटी कर रही है। इनमें एडिशनल डीसीपी जोन-1, एसीपी टीटी नगर, टीआई रातीबढ़, टीआई टीटीनगर और सायबर क्राइम टीम के दो पुलिस अफसरों को शामिल किया गया है। DCP जोन 1 साइ कृष्णा थोटा ने इस केस के बारे में बात करते हुए बताया, अभी तक की जाँच में सामने आया है कि परिवार कर्ज में था। इन्होंने ऑनलाइन वर्क के लिए ऑनलाइन ऐप्स डाउनलोड किए। जब आप ऐप डाउनलोड करते हैं, तो परमिशन में आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो शेयर हो जाती हैं। इन्हीं फोटो और कॉन्टैक्ट लिस्ट को यूज करते हुए इनको ब्लैकमेल किया गया। इस कारण ऐसा कदम उठाया।

गौरतलब है कि भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने सुसाइड नोट में बताया है कि कैसे वो ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ऑनलाइन लोन ऐप के चक्कर में पड़ गए, उसी ऐप के जरिए उनके साथ फ्रॉड हुआ और उनका लैपटॉफ-फोन कॉन्टैक्ट को अश्लील वीडियो के मैसेज भेजे जाने लगे। उन्होंने नोट के आखिर में लिखा कि वो अपने बच्चों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं। भूपेंद्र द्वारा लिखे गया आखिरी नोट में पढ़ सकते हैं।

मध्य प्रदेश : कांग्रेस नेता की हत्या कर घर से 20 तोला सोना-5 किलो चाँदी समेत लाखों रुपए लूटे

सारंगपुर में कांग्रेस नेता की हत्या (तस्वीर साभार: नई दुनिया)
मध्य प्रदेश के सारंगपुर पुलिस थाना काचरिया से थोड़ी दूर स्थित पुरोहित गाँव में डकैतों ने देर रात घर में घुसकर कांग्रेस के बुजुर्ग नेता व पूर्व सरपंच रहे बने सिंह को मौत के घाट उतार दिया। वहीं उनकी पत्नी लाडकुंवर बाई को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस के लोकल नेता प्रारंभिक उपचार के बाद बॉम्बे अस्पताल इंदौर में रेफर कर दिया गया है। थाना प्रभारी आशुतोष उपाध्याय, राजगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार सिंह समेत कई आला अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँच वहाँ की छानबीन कर रहे हैं। पुलिस टीम के अलावा डॉग स्क्वॉयड, फॉरेंसिक टीम, क्राइम ब्रांच की स्पेशल टास्कफोर्स भी मौके पर पहुँच जाँच कर रही है।

नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजगढ़ जिला एसपी ने बताया कि घटना वाली रात के 2-3 बजे घर में लुटुरे पीछे की तरफ से घुसे और दंपति पर भारी डंडे से वार किया। माना जा रहा है कि डकैतों के घुसने के समय घर का गेट खुला था क्योंकि तोड़फोड़ का कोई सबूत नहीं मिला है।

वहीं कांग्रेस नेता के बेटे ने बताया है कि डकैतों ने उनके घर से करीबन 20 तोला सोना, 5 किलो चाँदी, 2 राइफल व लाखों रुपए अपने साथ ले गए। अब पुलिस ने डकैतों की पकड़ के लिए अलग-अलग टीम बनाई है। शुरुआत में पुलिस को ये किसी बाहरी गैंग का काम लग रहा है। मगर पुलिस उन्हें जल्द पकड़ लेगी।

ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण का बदला तरीका, अब नाम हिंदू ही रहता है और घरों से भगवान की मूर्ति हटाकर जीसस की प्रेयर कर बना रहे ईसाई

भारत में बढ़ती अशांति के लिए धर्मांतरण सबसे अधिक जिम्मेदार है। सनातन विरोधी हिन्दुओं को जातियों में विभाजित कर जो विष फैला रहे हैं, लेकिन इन धर्मों में कितनी अधिक कट्टरता है कि एक जाति दूसरी जाति के चर्च, मस्जिद मे नहीं जा सकता, एक-दूसरे के कब्रिस्तान में अपना मुर्दे को दफ़न नहीं कर सकते, जिसको उजागर करने हिन्दू संगठनों को सक्रिय होना पड़ेगा। जब तक हिन्दू संगठन ईसाई और मुस्लिम में जातिवाद पर शोर नहीं मचाएंगे, धर्म परिवर्तन और हिन्दू विभाजन करने का खेल नहीं रुकेगा। गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और राष्ट्रीय एकता आदि जैसे नारों की बजाए इन धर्मों में सदियों से चल रहे जातिवाद को उजागर करना होगा। इन मजहबों के जातिवाद से वर्तमान पीढ़ी अज्ञान है। 
देश के सिर्फ पांच राज्यों में ही धर्म परिवर्तन कराना कानूनन अपराध होने के कारण इसकी विष-बेल लगातार फल-फूल रही ही है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई राज्यों में जबरन या डरा-धमकाकर, प्रलोभन या लालच देकर धर्मांतरण का खेल मिशनियां और मुस्लिम बेखौफ चला रहे है। ईसाई मिशनरियों की बदमाशी दरअसल गैर भाजपाई राज्यों में ज्यादा चल रही है। इन राज्यों में सरकार द्वारा धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के बजाए इस ओर के आंखे मूंदकर इन्हें समर्थन ही दिया जा रहा है। दूसरी ओर नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण कराने का नया तरीका ही सामने आया है। ईसाई मिशनरियां पोल खुलने के डर से यहां दलित और गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण तो कर रही हैं, लेकिन उनके नाम नहीं बदल रही हैं। ताकि पुलिस को कार्रवाई करने में मुश्किल आए। यहां लोगों के घरों के उनके इष्टदेव भगवान की मूर्तियों को हटा दी गईं हैं। इसके स्थान पर जन्म से हिंदुओं से भी जीसस की प्रेयर कराई जा रही है। मिशनरियों ने धर्मांतरण का ये नया तरीका निकाला है।

सनातन धर्म के प्रति नफरत के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी मिशनरी
सनातन धर्म से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किस कदर नफरत करती है यह कोई अनजानी बात नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने देश पर 70 सालों तक शासन के दौरान सनातन धर्म को हर स्तर से नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वहीं आम आदमी के पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने तो 10 हजार लोगों को एक साथ हिंदू धर्म के खिलाफ शपथ दिलवाकर रिकार्ड ही बना डाला। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार हो या राजस्थान की गहलोत सरकार, पंजाब में भगवंत मान सरकार हो या दूसरे कुछ राज्यों की सरकारों द्वारा पूरी तरह आंखें पूरी तरह से बंद कर लिए जाने के कारण धर्मांतरण का खेल ईसाई मिशनरियां खुलेआम खेल रही हैं। मिशनरियों की मंडलियां भोले-भाले आदिवासियों को कई तरह के प्रलोभन देकर, तो कभी बीमारी ठीक करने और शराब छुड़ाने के नाम पर धर्म परिवर्तन करा रही हैं। धर्मांतरण की करतूतों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने का ही दुष्परिणाम है कि मिशनरियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में तो ईसाई मिशनरी और आदिवासियों के बीच नौबत टकराव तक जा पहुंची है। सनातन धर्म के प्रति नफरत के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मिशनरी जुटी हुई हैं और कांग्रेस व आप सरकार इनकी मदद कर रही हैं। यही वजह है कि कांग्रेस शासित राजस्थान में धर्मांतरण की कई घटनाएं हो चुकी हैं।

देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे
अब ईसाई मिशनरियों ने अपने धर्मांतरण के मिशन का तरीका बदल लिया है। इनकी मंडलियों गरीब हिंदुओं को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराती हैं। पहले धर्म परिवर्तन के समय हिंदू व्यक्ति का नाम परिवर्तित कर क्रिश्चियन नाम दिया जाता था, लेकिन इससे धर्मांतरण की पोल खुलने और पकड़े जाने के डर से मिशनरियों ने पैटर्न बदल लिया है। वे धर्मांतरण तो उसी तरह कराती हैं। हिंदुओं के दिलों में उनके देवी-देवताओं के प्रति अनादर का भाव उत्पन्न करती हैं। यीशू की प्रार्थनाओं पर जोर देती हैं, लेकिन कुछ जगह धर्मांतरण के बाद उनके नाम नहीं बदलती हैं। नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जन्म से हिंदुओं के घरों से भगवान की मूर्तियां हटा दी गईं। देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे हैं। इनका ऐसा ब्रेनवाश किया है कि ये लोग दावा करते हैं कि यीशू की प्रेयर करने से ही इनकी शराब-सिगरेट की लत छूट गई है और रोजगार मिल रहा है।

हिंदू के घर में ही बनाया चर्च, इसमें 300 लोगों के प्रेयर करने की जगह
नेपाल बॉर्डर से सटे लखीमपुर जिले के निघासन कस्बे में धर्मांतरण के इस नए पैटर्न का खुलासा दैनिक भास्कर की पड़ताल में हुआ है। नेपाल से सटे यूपी के कई जिलों में धर्मांतरण और क्रिश्चियन-मुस्लिम आबादी बढ़ने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। इस दौरान पता चला था कि लखीमपुर के 30 गांवों में ईसाई मिशनरी एक्टिव हैं। ये गांव थारू जनजाति के हैं और चंदन चौकी से गौरीफंटा बॉर्डर के करीब बसे हैं। ये एरिया पलिया तहसील में आता है। यहां की 15 ग्राम पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा थारू आबादी रहती है। यहां पास के नझौटा गांव में एक चर्च है, जो दूर से दिखता है। यह चर्च घर में ही है और रमाकांत कश्यप इसका पादरी भी हैं। यहां आसपास के 300 से 400 लोग प्रेयर के लिए आते हैं। पिछले साल ही लखीमपुर के तिकुनिया बॉर्डर से 25 किमी दूर निघासन में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

धर्म तो दंगे और अपराध करवाता है, हम तो यीशू को फॉलो करते हैं
यहां के अंबेडकरनगर में बने चर्च में रमाकांत कश्यप प्रेयर कर रहे हैं। उम्र 35 से 37 साल के बीच होगी। जन्म से हिंदू हैं, पर अब यीशू को मानने लगे हैं। रमाकांत की पत्नी भी यीशू को मानती हैं। वे कहते हैं कुछ साल पहले एक मलयाली पास्टर गिरीश सही रास्ते पर लेकर आए। मेरी हर गलत आदत खत्म हो गई। इसके बाद से ही यीशू को फॉलो करने लगा हूं। रमाकांत से कहा कि उसका नाम तो हिंदुओं की तरह है। जाहिर है आपने धर्म बदला है, लेकिन कैसे और क्यों? जवाब में रमाकांत ने अजब तर्क गढ़ा, ‘मैंने धर्म नहीं बदला। यीशू धर्म बदलने को नहीं कहते हैं। धर्म तो दंगा करवाता है, अपराध करवाता है। हम यीशू को फॉलो करता हूं।’ रमाकांत की शादी 2016 में हुई थी। रमाकांत की पत्नी लीना रायबरेली की हैं और यीशू को फॉलो करती हैं। वो बताती है पिता की तबीयत खराब रहती थी। तभी एक पास्टर के संपर्क में आई। उनकी चंगाई सभा में जाने लगी, इसके बाद पिता की तबीयत सुधरने लगी। उनके ठीक होते ही यीशू को फॉलो करने लगी।’

यीशू को फॉलो करने वालों में दलित ज्यादा, चंगाई सभा सक्रिय
चर्च में फास्ट प्रेयर करने आए जयराम निघासन के ही रहने वाले हैं। वे दलित समुदाय से हैं। मजदूरी करते हैं। 2017 में उनकी तबीयत खराब हुई, फिर बिस्तर नहीं छोड़ पाए। जयराम बताते हैं, ‘मुझे कुष्ठ रोग भी हो गया। मेरी बुआ को किसी ने निघासन में चल रहे इस चर्च के बारे में बताया था। वे मुझे यहां लाईं। इसके बाद मैं भी चर्च में आकर प्रार्थना करने लगा।’ यहीं हमारी मुलाकात शांति से हुई। शांति भी दलित हैं। वे बताती हैं कि परिवार में बहुत कलह होती थी। आए दिन पति से झगड़ा होता था। मेरी आंख में कोई दिक्कत थी। कई डॉक्टरों को दिखाया। सभी ने आंख निकालने की बात कही थी। इसी बीच मेरे पति की तबीयत भी खराब हो गई। वे भी ठीक नहीं हो रहे थे।’ ‘किसी के बताने पर मैं 2018 में यहां आई। चंगाई सभा में आने पर फायदा होने लगा। इसके बाद मैंने दवाइयां वगैरह छोड़ दीं। यहीं प्रार्थना करती रही। हमारी तबीयत में सुधार होता रहा।’

दो मंजिला मकान में चल रहा बगैर रजिस्ट्रेशन का चर्च, पुलिस को पता नहीं
रमाकांत ने दावा किया कि ‘यहां आने वाले अनुयायी जो दान-दक्षिणा चढ़ाते हैं, उसी से घर चल रहा है।’ लेकिन उनका घर देखकर ऐसा नहीं लगता। उसका दो मंजिला मकान बना हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर परिवार रहता है। अंदर बरामदा है, जिसमें सीढ़ियां बनी हैं। बरामदे से अंदर जाने के लिए गैलरी थी। गैलरी के दोनों तरफ कमरे थे। अंदर एक लॉबी है, जिसमें एक तरफ CCTV फुटेज देखने के लिए मॉनिटर लगा है। बीच में कालीन के ऊपर सोफा रखा है। कालीन के नीचे बेसमेंट है, रमाकांत ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया। रमाकांत भले घर को चर्च बताएं, लेकिन चर्च का रजिस्ट्रेशन उनके पास नहीं है। यूपी सरकार ने नवंबर, 2020 को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाया था। रमाकांत से पूछा कि धर्मांतरण कानून आने के बाद क्या आप लोगों को रोका नहीं गया। उन्होंने तर्क दिया कि हम धर्मांतरण नहीं कराते। देखिए सारे नाम हिंदू ही हैं। जो लोग यीशू में विश्वास करते हैं, हम बस उन्हें यीशू को याद करने का तरीका बताते हैं। इसलिए पुलिस हमें परेशान नहीं करती।

संदिग्ध गांवों में कमेटियां बनाईं, ऑपरेशन कवच से क्राइम रोक रहे
बॉर्डर किनारे बसे थारू जनजाति के लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। रमाकांत ने बताया, ‘हम निघासन में हैं। ये नेपाल बॉर्डर से थोड़ा दूर है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ निघासन थाना क्षेत्र के बम्हनपुर में 18 सितंबर 2022 को 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन पर पैसे और नौकरी का लालच देकर 18 दलितों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप था। विश्व हिंदू परिषद के सह संयोजक सुमित जायसवाल और संयोजक आशीष की शिकायत पर पुलिस पहुंची थी। मौके से सुशील कुमार और राजकुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभी जमानत पर हैं। सीओ राजेश कुमार के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद नेपाल बॉर्डर पर ऑपरेशन कवच के तहत निगरानी की जा रही है। निघासन से सटे बॉर्डर पर हम लोग ऑपरेशन कवच चला रहे हैं। इसके तहत जिस गांव को हम संदिग्ध मानते हैं, वहां 10 लोगों की कमेटी बनाई हुई है। ये लोग हमें गांव में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

जयपुर में नाबालिग को किडनैप करके जबरन धर्म परिवर्तन कराया
एक ओर नेपाल बॉर्डर पर खुलेआम धर्मांतरण का खेल चल रहा है, दूसरी ओर राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। दलित हिंदुओं को ईसाई बनाने का मामला यहां सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला राजधानी जयपुर का ही है, जहां एक नाबालिग हिंदू लड़की को किडनैप करके धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। किसी तरह अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर वापस आई नाबालिग पागलों जैसी हरकत करने लगी। अपना बदला हुआ नाम बताकर खुद को मुस्लिम बताने लगी। मानसरोवर थाने में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मानसरोवर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी 15 साल की बेटी पिंकी (बदला हुआ नाम) को किडनैप कर धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश की जा रही है।

जबरन या लालच देकर धर्मांतरण को रोकने के लिए किस राज्य में क्या है कानून?
1.ओडिशाः पहला राज्य है जहां जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून आया था। यहां 1967 से इसे लेकर कानून है. जबरन धर्मांतरण पर एक साल की कैद और 5 हजार रुपये की सजा हो सकती है। वहीं, एससी-एसटी के मामले में 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
2.मध्य प्रदेशः यहां 1968 में कानून लाया गया था. 2021 में इसमें संशोधन किया गया। इसके बाद लालच देकर, धमकाकर, धोखे से या जबरन धर्मांतरण कराया जाता है तो 1 से 10 साल तक की कैद और 1 लाख तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
3.अरुणाचल प्रदेशः ओडिशा और एमपी की तर्ज पर यहां 1978 में कानून लाया गया था कानून के तहत जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
4.छत्तीसगढ़ः 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद यहां 1968 वाला कानून लागू हुआ. बाद में इसमें संशोधन किया गया। जबरन धर्मांतरण कराने पर 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जबकि नाबालिग या एससी-एसटी के मामले में 4 साल की कैद और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
5.गुजरातः यहां 2003 से कानून है। 2021 में इसमें संशोधन किया गया था. बहला-फुसलाकर या धमकाकर जबरन धर्मांतरण कराने पर 5 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना, जबकि एससी-एसटी और नाबालिग के मामले में 7 साल की कैद और 3 लाख रुपये के जुर्माने की सजा है।

याचिकाकर्ता की कोर्ट से अपील, धर्म परिवर्तन रोकने के लिए अलग से बने कानून
अब बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट में धर्मांतरण को रोकने के लिए दायर याचिका की। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने 23 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और हिमा कोहली की बेंच ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ याचिका की सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी में इसे गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने कहा कि जबरन धर्मांतरण न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकता है। याचिका में धर्म परिवर्तनों के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाए जाने की मांग की गई है। या फिर इस अपराध को भारतीय दंड संहिता (IPC) में शामिल करने की अपील की गई है। 

याचिकाकर्ता ने केंद्र के साथ-साथ तमाम राज्यों को भी प्रतिवादी बनाया
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर केंद्र और तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया है। तामिलनाडु में 17 साल की लड़की की मौत के मामले में छानबीन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 के तहत धोखाधड़ी, धमकी या डराकर धर्म परिवर्तन कराया जाना अपराध घोषित किया जाए। याचिका में नैशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA), सीबीआई (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को 17 साल की लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि दबाव बनाकर कराए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को संविधान के तहत अपराध घोषित किया जाए।

धर्म परिवर्तन गंभीर विषय है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं और जबरन धर्म परिवर्तन के जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो सही हैं और उनमें सच्चाई है तो फिर यह गंभीर विषय है और इससे आखिरकार देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे देश की जनता के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में स्टैंड क्लियर करना चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार हलफनामा देकर बताए कि वह कथित जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाए हैं। उन्होने यह भी कहा कि कई उदाहरण हैं जहां चावल और गेंहू देकर धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं। तब बेंच ने कहा कि आप बताएं कि आप क्या कदम उठा रहे है?

कोर्ट ने याचिका की दलीलों से जताई सहमति, सरकार जल्द उठाए कदम
सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका में दी गई दलीलों से सहमत होकर जबरन धर्मपरिवर्तन को गंभीर विषय माना और केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यह सच है तो वह इसे रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को चेतावनी भी दी कि यह एक कठिन स्थिति है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और नागरिकों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पर एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्द कदम उठाना होगा, ताकि इसे रोका जा सके। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कठिन समय आ जाएगा। 

आप की दिल्ली: मदर टेरेसा और ईसाई मिशनरी के रास्ते पर चल रहे शिष्य केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टेरेसा के शिष्य रहे हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो किस विचारधारा से प्रेरित है। आम तौर पर माना जाता है कि शिष्य पर गुरु के उपदेशों का असर होता है। केजरीवाल पर भी उनके गुरु के उपदेश का असर दिखाई दे रहा हैे। वो उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। जिस तरह मदर टेरेसा ने गरीबों की मुफ्त सेवा के बहाने दलितों और आदिवासियो के बीच पैठ बनाई। उसके बाद ईसाई मिशनरियों ने चमत्कारिक मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा और पैसे का लालच देकर और ऊंच-नीच, जात-पात का एहसास दिलाकर गरीब दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया। उसी तरह केजरीवाल भी मुफ्त रेवड़ी कल्चर के जरिए गरीब दलितों, आदिवासियों, सिखों में पैठ बनाकर उनके बौद्ध और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश: जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वालों के तार पाकिस्तानी आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ रहे हैं। ये गिरोह पैसे का लालच देकर मूक-बधिर और मामूली दिव्यांग लोगों को अपना पहला टारगेट बनाता था। इस गिरोह के सदस्य प्रतिबंधित संगठन सिमी (Student’s Islamic movement of India) से तो पहले से ही जुड़े हुए थे। अब यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े अवैध धर्मांतरण में संलिप्त आरोपियों के पास के ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिससे इनका कनेक्शन अलकायदा से भी जुड़ रहा है।यूपी में एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दावा किया है कि इस मामले में पूर्व में महाराष्ट्र से गिरफ्तार एडम और कौसर आलम के पास से जो साक्ष्य मिले हैं, उससे पता चला है कि दोनों जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित हैं।

राजस्थान:  जानकारी के बावजूद चुप्पी साधकर बैठे रहे अधिकारी
प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर हिंदू जागरण मंच आक्रोशित है। मंच का आरोप है कि मिशनरी के संपर्क में आकर ईसाई धर्म के प्रचारक बने पास्टर धर्मपाल बैरवा व उनकी टीम ने क्षेत्र में धर्म के प्रचार के लिए वर्किंग कर रही है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में जयपुर के सांगानेर में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा आयोजन था। धार्मिक सभा के आयोजन के नाम पर इसके पोस्टर पर भी लगाए गए थे। धर्म जागरण मंच के संजय सिंह शेखावत ने जांच स्थानीय नेता अमित शर्मा से कराई। मामला खुलता चला गया। फिर हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। सांगानेर सदर के थानेदार बृजमोहन कविया खोखली दलील देते हैं कि आयोजकों ने कार्यक्रम की इजाजत ली थी। कार्यक्रम से दो-तीन दिन पहले आकर उन्होंने बताया कि अब कार्यक्रम नहीं कराना है। ईसाई धर्म के प्रचार के नाम पर ये लोग एससी या गरीब व्यक्ति को आर्थिक मदद या काम-धंधे का लालच देते हैं। 

अलवर: ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब, हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स फाड़े
कांग्रेस सरकार जब राजधानी में ही धर्मांतरण को नहीं रोक पा रही है, तो जिलों में ऐसे मामलों में उससे कार्रवाई की क्या ही उम्मीद करें। जयपुर और बारां की तरह अलवर में भी धर्मांतरण का मामला पिछले माह ही आ चुका है। राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने पिछले माह 19 अक्टूबर को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं। 

बारां: बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं
राजधानी से पहले राजस्थान के बारां जिले में धर्म परिवर्तन का एक बड़ा मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाँव में मां दुर्गा आरती का आयोजन कराने वाले दलित युवकों से मारपीट की गई। पूरे घटनाक्रम से गुस्साए दलितों ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया। बताया जा रहा है कि 250 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाने से सनसनी फैल गई। वहीं, पुलिस अधिकारी पूजा नागर ने बताया कि बारां जिले के बापचा थाना क्षेत्र के भुलोन गांव बौद्ध धर्म ग्रहण किया गया है। हालाँकि पुलिस ने धर्म परिवर्तन करने वालों की संख्या काफी कम बताई है। गाँव में दलितों ने जुलूस निकालते हुए धर्मांतरण की शपथ ली और गांव की बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं।

चुनावी हिन्दू पूजा के दौरान आसनों पर बैठ गए कमलनाथ-प्रियंका : भगवान से पहले खुद ही लेने लगी थीं आरती

     माँ नर्मदा की पूजा के दौरान प्रियंका गाँधी ने की बड़ी गलतियाँ (फोटो साभार: @NarendraSaluja,@BJP4MP)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और कमलनाथ समेत कांग्रेस नेताओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, कांग्रेस नेता मध्य प्रदेश के जबलपुर में माँ नर्मदा की पूजा करने पहुँचे थे। इससे पहले ही ये वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, बाद में लोगों के समझाने के बाद प्रियंका गाँधी समेत अन्य नेताओं ने आसन छोड़ दिया।

आज तक गाँधी परिवार से किसी ने प्रश्न नहीं किया कि मुसलमान दादा(फ़िरोज़ जहांगीर) की संतानें कब हिन्दू बन गयीं? क्या किसी मुस्लिम नेता को चुनावों में मंदिर जाते और आरती करते देखा, फिर चुनावों में गाँधी परिवार मंदिर जाकर कब तक हिन्दुओं को मूर्ख बनाता रहेगा? दूसरे, कन्हैया के मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा क़त्ल करने पर राहुल द्वारा उन्हें बेगुनाह करार कर दिया जाता है,(देखिए वीडियो) आखिर इस नौटंकी का कब अंत होगा? 


कर्नाटक, हिमाचल और अब मध्य प्रदेश में हिन्दू कार्ड खेलने वाले केरल चुनावों में न रुद्राक्ष माला धारण करते हैं और न ही हाथ में कलावा, क्या यह ढोंग नहीं? हिन्दू कब इन ढोंगी हिन्दुओं को धूल चटवाएगी? मुसलमान अपने मजहब में हिन्दुओं से कहीं अधिक भेदभाव होने पर के बावजूद इस्लाम के नाम पर एकतरफा वोट कर सकता है, फिर हिन्दू इन ढोंगी चुनावी हिन्दुओं के विरुद्ध कब एकजुट होंगे?  
                हर चुनाव में इन चुनावी हिन्दुओं के ढोंग के जाल में हिन्दू फंस जाता है 

दरअसल, मध्य प्रदेश में 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी सोमवार (12 जून, 2023) को प्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर पहुँची थी। प्रियंका गाँधी के इस दौरे के कार्यक्रम में माँ नर्मदा की आरती भी शामिल थी। ऐसे में वह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं समेत जबलपुर के गौरी घाट पहुँची थीं। 


इस दौरान माँ नर्मदा के पूजन से पहले प्रियंका गाँधी समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेता वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद जब वहाँ मौजूद लोगों ने प्रियंका गाँधी व अन्य नेताओं को आरती से पहले आसन में न बैठने की समझाइश दी। इसके बाद सभी नेता ने आसन छोड़कर जमीन पर बैठ गए।

यह वीडियो मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनावी हिंदू करार दिया। सलूजा ने लिखा, “यह है कॉन्ग्रेस के नेताओं की स्थिति। जबलपुर में ग्वारी घाट पर माँ रेवा के पूजन के लिये पहुँचे तो आसनों पर सुशोभित हो गए। तभी किसी ने धार्मिक संस्कार व रीति-रिवाज बताए तो फिर जमीन पर आए। चुनावी हिंदू।” बता दें कि माँ नर्मदा का दूसरा नाम रेवा है।

इससे पहले प्रियंका गाँधी का एक और वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर भी भाजपा ने उन पर निशाना साधते हुए चुनावी हिंदू बताया। मध्य प्रदेश भाजपा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “ढोंग और आस्था में यही फर्क है। प्रियंका गाँधी को इतना नहीं पता कि आरती पहले भगवान को दी जाती है फिर इंसान लेते हैं। इसलिए ही इन्हें चुनावी हिंदू कहा जाता है।”

वीडियो में प्रियंका गाँधी को माँ नर्मदा जी की आरती करते देखा जा सकता है। आरती करने के बाद उन्होंने विवेक तन्खा को पकड़ा दिया। साथ ही हाथों से आरती लेते हुए नजर आईं। सनातन धर्म संस्कृति के नियम के अनुसार, आरती पूरी होने के बाद पहले भगवान को दी जाती है। इसके बाद अन्य लोग उसे ले सकते हैं। लेकिन प्रियंका गाँधी यही गलती कर गईं और बीजेपी को उन पर निशाना साधने का मौका मिल गया

ऑपइंडिया की ‘राष्ट्रीय संस्थान का मदरसे सा हाल’ वाली रिपोर्ट का असर : NIMHR ने डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक को निकाला

हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतिमा भौमिक ने संस्थान का दौरा किया था। इनसेट: एनआईएमएचआर का बर्खास्त डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक
मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) के डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक को नौकरी से निकाल दिया गया है। उसके अवैध तरीके से कक्षाएँ लेने, हिंदू चरित्रों की गलत व्याख्या करने और मनमाने तरीके से संस्थान को चलाने के तौर-तरीकों को लेकर जनवरी 2023 में ऑपइंडिया ने विस्तार से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट के बाद उसके खिलाफ जाँच शुरू हुई थी। साथ ही उससे ग्वालियर में निर्माणाधीन डिसेबल स्पोर्ट सेंटर के उपनिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी छीन लिया गया था।

ऑपइंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद मोहम्मद अशफाक की बर्खास्तगी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी आंदोलनरत था। सीहोर के विधायक सुदेश राय ने भी केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की थी। NIMHR इसी केंद्रीय मंत्रालय के अधीन आता है। जाँच के दौरान संस्थान में आर्थिक अनियमितता भी सामने आई थी। 22 मई 2023 को NIMHR के डायरेक्टर ने मोहम्मद अशफाक की बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर मोहम्मद अशफाक की नियुक्ति दो साल के प्रोबेशन पर 30 मई 2022 को की गई थी। अब उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया गया है।

मोहम्मद अशफाक के खिलाफ PMO को पत्र

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) के छात्रों ने 16 दिसंबर 2022 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को तीन पन्नों का एक पत्र भेजा था। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक को भी इस पत्र की कॉपी भेजी गई थी। पत्र में NIMHR के डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक पर संस्थान को मनमाने तरीके से संचालित करने, कक्षा लेने, ऐतिहासिक हिंदू चरित्रों की विकलांगता के संदर्भ में गलत व्याख्या करने, छात्रों को करियर बर्बाद करने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए थे।
पत्र में कहा गया था कि मोहम्मद अशफाक आसपास के इलाकों के अपने समुदाय के लोगों को संस्थान के नाम पर अनुचित लाभ दिलाने का वादा करते ​हैं। कथित इस्लामी तौर-तरीकों से संस्थान का माहौल किसी ‘पागलखाने’ जैसा कर दिया है। पत्र में इसके कारण छात्रों के भारी ‘मानसिक दबाव’ में होने की बात कही गई थी। पत्र में कहा गया था, “तत्काल संस्थान पर ध्यान दीजिए वरना यह पूरी तरह जेहादी अड्डा बन जाएगा। वह (मोहम्मद अशफाक) हमारा भविष्य खराब करने की धमकी देता है, इसलिए यह पत्र आपको बिना साइन के भेज रहे हैं। आप इस राष्ट्रीय संपत्ति को जेहादी से बचा लीजिए।”

ऑपइंडिया की रिपोर्ट

छात्रों की शिकायत के बाद इस मामले पर लंबी खामोशी रही। मीडिया में इस घटना की रिपोर्टिंग तक नहीं हुई। ऑपइंडिया ने 23 जनवरी 2023 को पहली बार इस संस्थान की दुर्दशा पर रिपोर्ट प्रकाशित की। हमसे बातचीत में मोहम्मद अशफाक ने क्लास लेने की बात तो कबूली थी, लेकिन अन्य आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना था कि कम अटेंडेंस के कारण कुछ छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया है, उन्होंने ही शिकायत की होगी। लेकिन जब हमने संस्थान के कुछ छात्रों और कुछ पूर्व तथा वर्तमान कर्मचारियों से बात की तो जो तथ्य सामने आए वे इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि इस संस्थान को नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। यह बात भी सामने आई थी कि मोहम्मद अशफाक की नियुक्ति से पहले संस्थान में ऐसा माहौल नहीं था।

फिर मेनस्ट्रीम मीडिया की टूटी नींद

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद दिल्ली से पीएमओ की जाँच टीम सीहोर गई। मोहम्मद अशफाक से पूछताछ हुई। विजिलेंस की टीम ने उसके खिलाफ आर्थिक गबन के आरोपों की जाँच शुरू की। उससे ग्वालियर के सेंटर का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया। इसके बाद मेनस्ट्रीम मीडिया और स्थानीय अखबारों ने इस मामले की रिपोर्टिंग शुरू की। एबीवीपी जैसे छात्र संगठन और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी आगे आए।

क्या है NIMHR

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) अपनी तरह का देश का इकलौता संस्थान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि की उपज है। मध्य प्रदेश के सीहोर में 2019 में इसकी शुरुआत हुई। फिलहाल पुराने जिला पंचायत भवन से इसका संचालन हो रहा है। भोपाल-इंदौर हाइवे पर सीहोर जिले के सैकड़ाखेड़ा गाँव में करीब 25 एकड़ जमीन पर करीब 180 करोड़ रुपए की लागत से संस्थान का कैंपस तैयार हो रहा है। देश के इस पहले राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान में 9 विभाग होंगे। 12 पाठ्यक्रमों का संचालन होना है। फिलहाल 3 पाठ्यक्रम चल रहे हैं। ये हैं;
  • डिप्लोमा इन वोकेशनल रिहैबिलिटेशन इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी (DVR-ID)
  • डिप्लोमा इन कम्युनिटी बेस्ड रिहैबिलिटेशन (DCBR)
  • सर्टिफिकेट कोर्स इन केयर गिविंग (CCCG)
DVR-ID एक साल, DCBR दो साल और CCCG दस महीने का पाठ्यक्रम है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 30-30 सीटें हैं। फिलहाल संस्थान में 100 से ज्यादा छात्र हैं। इनमें करीब 60 फीसदी छात्राएँ बताई जाती हैं।

संस्थानों की आवाज बनिए

मोहम्मद अशफाक पर मजहबी जूनून में एक राष्ट्रीय स्तर के संस्थान का मदरसे सा हाल करने का आरोप था। पर हम जानते हैं कि हमारे संस्थानों में मजहबी घुसपैठ का यह इकलौता उदाहरण नहीं है। मध्य प्रदेश के ही इंदौर के एक सरकारी लॉ कॉलेज में पढ़ाई की आड़ में लव जिहाद और मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देने, देश और सेना के खिलाफ दुष्प्रचार किए जाने का मामला सामने आ चुका है। जरूरत है अपने हरेक संस्थानों को ऐसे मोहम्मद अशफाकों से बचाने की। इसलिए आवश्यक है कि अपने आसपास के संस्थानों की गतिविधियों पर नजर रखिए। कुछ भी संदिग्ध दिखे तो आवाज उठाइए। आवाज उठाना जरूरी है। ऑपइंडिया ने भी आवाज ही उठाई थी। आज परिणाम सामने है!

मध्य प्रदेश : हिंदुओं के मंदिर, हिंदुओं का ही कंट्रोल : शिवराज सरकार का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के हिन्दू मंदिरों को लेकर किए गए अपने वादे को निभाया है। अप्रैल 2023 में उन्होंने ऐलान किया था कि मंदिरों की गतिविधियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। मंदिर की जमीनों को नीलाम कलेक्टर नहीं बल्कि पुजारी कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने निजी मंदिरों के पुजारियों को भी सम्मानजनक मानदेय देने की बात कही थी। लगभग एक महीने बाद उनकी सरकार ने इन फैसलों पर मुहर लगा दी है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए बुधवार (17 मई, 2023) को बताया कि ऐसे मंदिर जिनके प्रबंधन का कार्य सरकार देख रही है, वहाँ 10 एकड़ तक की कृषि क्षेत्र वाली जमीन से होने वाली आय पुजारियों की होगी। बाक़ी जमीनों को खेती के लिए नीलम किया जाएगा और उनसे आने वाले रुपए को मंदिर के बैंक खाते में डाला जाएगा। मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए भी अभियान शुरू होगा।

हिन्दू मंदिरों के लिए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार काम कर रही है। पिछले साल पुजारियों को बढ़ा हुआ मानदेय देने के आदेश जारी किए गए थे। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है, उन्हें 5000 रुपए का मासिक भत्ता दिया जा रहा है। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास 5 एकड़ कृषि भूमि है, उन्हें भी ढाई हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। गरीब पुजारियों के जीवन-यापन के लिए राज्य सरकार ने ये निर्णय लिया है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने और भी बड़े फैसले लिए हैं। ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना’ के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए दिए जाने के लिए बजट का आवंटन भी कर दिया गया है। सीएम चौहान ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना’ के तहत युवक-युवती काम सीखेंगे और साथ में ₹8 हजार से ₹10 हजार तक प्रतिमाह कमाएँगे भी। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता की जगह स्किल डेवलपमेंट करने और उसके बदले पैसे देने पर जोर दिया।

मध्य प्रदेश : कोई टीचर-कोई इंजीनियर, जंगल में ट्रेनिंग-ड्रोन से रेकी… पकड़े गए 11 जिहादीः 50 देशों में फैला है हिज्ब-उत-तहरीर, 16 देशों में लग चुका है बैन

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                                                             मध्य प्रदेश एटीएस (साभार: आजतक
आज देश बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। तिल का ताड़ बनाकर होकर प्रदर्शन और इन प्रदर्शनों/धरनों को समर्थन दे रहे राजनीतिक दलों से भी देश को सतर्क रहने की जरुरत है। देश भर में बढ़ता इस्लामी कट्टरवाद सरकार के लिए चुनौती साबित हो रही है। इससे मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं है। कभी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकी तो पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कट्टरपंथी तो कभी आतंकियों के स्लीपर सेल पर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई होती रहती है। अब मध्य प्रदेश पुलिस की आतंकी निरोधी दस्ता (ATS) ने हिज्ब उत् तहरीर (HuT) नाम के इस्लामी कट्टरपंथी संगठन के खिलाफ बड़़ी कार्रवाई की है।

हिज्ब उत् तहरीर नाम का संगठन तहरीक-ए-खिलाफत के नाम से भी जाना जाता है। ATS ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार (10 मई 2023) को भोपाल के शाहजहाँनाबाद, ऐशबाग, लालघाटी और पिपलानी में रेड मारकर इसके 10 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं छिंदवाड़ा से 1 और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए कट्टरपंथियों के पास से तकनीकी उपकरण, देश विरोधी दस्तावेज, कट्टरपंथी साहित्य एवं अन्य सामग्री बरामद की गई हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने आरोपितों पर UAPA सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। ATS उनसे आगे की पूछताछ कर रही है।

कट्टरपंथियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से टीचर तक शामिल

HuT के कट्टरपंथी अपने कामों को अंजाम देने के लिए आधुनिक उपकरणों को उपयोग करते थे। वे रेकी करने के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार किए आरोपितों में कंप्यूटर इंजीनियर, टेक्नीशियन, टीचर, व्यवासायी, जिम ट्रेनर, कोचिंग सेंटर संचालक, ऑटो ड्राइवर, दर्जी आदि शामिल हैं। ये सभी आम लोगों के बीच रहते हुए और अपना काम करते हुए कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
भोपाल के शाहजहाँनाबाद से गिरफ्तार किया गया 29 साल का यासिर खान जिम ट्रेनर है। शहीद नगर से गिरफ्तार 32 साल का सैयद सामी रिजवी कोचिंग में टीचर है। जवाहर कॉलोनी ऐशबाग से गिरफ्तार शाहरूख दर्जी है, जबकि उसी इलाके से गिरफ्तार 29 साल का मिस्बाहुल हक मजदूरी करता है। ऐशबाग का ही शाहिद ऑटो चलाता है।
भोपाल के ही ऐशबाग का रहने वाला सैयद दानिश अली सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि ऐशबाग का ही 25 वर्षीय मेहराज अली कंप्यूटर टेक्नीशियन है। भोपाल के लालघाटी का रहने वाला 40 साल का खालिद हुसैन टीचर और व्यवसायी है। इसके अलावा, भोपाल से ही ATS ने वसीम खान और 35 साल के मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया है। वहीं, छिंदवाड़ा से गिरफ्तार करीम प्राइवेट नौकरी करता था।

ऐसे करते थे काम

ATS की प्रेस नोट के मुताबिक, ये सभी आरोपित गोपनीय रूप से जंगलों में जाकर क्लोज कॉम्बैट ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर निशानेबाजी का अभ्यास करते थे। इसमें हैदराबाद से आए हुए कट्टरपंथी इन लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते थे। ये ट्रेनर अपने काम में माहिर हैं। ट्रेनिंग के अलावा, आरोपितों द्वारा गोपनीय रूप से दर्श (दीनी सभा) का आयोजन करके भड़काऊ तकरीरें दी जाती थीं। इस दौरान लोगों के बीच कट्टरपंथी और जेहादी साहित्य भी बाँटे जाते थे।
ATS का कहना है कि आरोपित ऐसे युवकों की पहचान करके अपने साथ शामिल करते थे, जो उग्र स्वभाव के हों और अपनी जान देने से भी ना हिचकें। सभी आरोपित आपस में बातचीत करने के लिए डार्क वेब के विभिन्न चैनलों का इस्तेमाल करते थे। इनमें ‘रॉकेट चैट’, ‘थ्रीमा’ जैसे ऐप शामिल हैं। इस तरह के कम्युनिकेशन का उपयोग अधिकतर ISIS जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जाता है।  
ये अधिक से अधिक युवकों को जोड़कर हिंदुओं के खिलाफ जिहाद की योजना बना रहे थे। ये बड़े शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके करके लोगों में अपना भय कायम करना चाहते थे। इसके लिए वे कई शहरों को चिह्नित भी कर चुके थे। इसके लिए उन्होंने ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किया था। रेकी के बाद इलाके का नक्शा बनाकर घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। संगठन में जो भी सदस्य शामिल किए जाते थे, उनसे चंदा जुटाने के साथ-साथ अन्य संसाधन बटोरने के लिए कहा जाता था।

क्या है कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत् तहरीर

हिज्ब उत् तहरीर उर्फ तहरीक-ए-खिलाफत इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है, जो गैर-इस्लामी इलाकों में शरिया शासन कायम करने की सोच रखता है। इस संगठन के तार 50 से भी अधिक देशों में फैला हुआ है। इस संगठन की हिंसक गतिविधियों एवं सोच को देखते हुए 16 देश प्रतिबंध लगा चुके हैं।
भारत में शरिया शासन स्थापित करने के लिए इस कट्टरपंथी संगठन ने मध्य प्रदेश में अपना आधार तैयार किया था। इसके जरिए वे अपने कैडरों की भर्ती कर रहे थे। संगठन से जुड़े सदस्यों का उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को भारत की वर्तमान शासन प्रणाली को इस्लाम विरोधी बताकर संगठन से जोड़ते थे। इसके बाद वे खिलाफ की बात करते थे।
बताते चलें कि इससे पहले PFI के भी 22 सक्रिय सदस्यों को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, मार्च 2022 में जमात-ए-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के मॉड्यूल का भी मध्य प्रदेश की पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। इस दौरान 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था।

‘वोट देना गुनाह, मुस्लिम न दें’ : जामिया मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज के अफगानिस्तान के ISIS से संपर्क

                                      महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के ISIS नेटवर्क पर NIA का छापा
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 5 अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की है। यह छापेमारी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह ISIS से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है। बताया जा रहा है कि NIA को मौलाना अब्दुल अज़ीज़ सलाफी और उसकी गैंग की तलाश है जो यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो से युवाओं को कट्टरपंथ सिखा रहा है। शनिवार (11 मार्च 2023) को हुई इस छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिस से मौलाना की गैंग के भारत विरोधी होने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 40 वर्षीय मौलाना अब्दुल सलाफी और उसके गुर्गे अफगानिस्तान में सक्रिय ISIS के खुरासान नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। सलाफी मध्य प्रदेश के शिवनी जिले की जामिया मस्जिद का इमाम है। वहीं इस नेटवर्क के दूसरे बड़े नाम के तौर पर 26 वर्षीय शोएब का नाम आ रहा है। शोएब की ऑटो पार्ट्स दुकान है। इन दोनों पर आरोप है कि ये भारत के लोकतंत्र से नफरत करते हैं और बाकी लोगों को भी मतदान में हिस्सा न लेने के लिए भड़काते हैं।

बताया जा रहा है कि मौलाना सलाफी और शोएब मुस्लिम युवाओं को यूट्यूब के भड़काऊ वीडियो दिखाते हैं। ये दोनों आरोपित मतदान में मुस्लिमों के हिस्सा लेने को गुनाह मानते हैं। NIA ने शुरुआती जाँच में पाया है कि मौलाना सलाफी का नेटवर्क अफगानिस्तान में चल रही ISIS की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखता है। इसी के साथ यह गैंग अन्य मुस्लिम युवकों में भी ज्यादा से ज्यादा अपनी मानसिकता डालने की फिराक में है। NIA की तलाशी में इस बावत कुछ दस्तावेज और अन्य सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।

इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए पुणे के तल्हा खान और सिवनी में अकरम खान के ठिकानों की तलाशी हुई है। इसके अलावा मौलाना अब्दुल अजीज सलाफी व शोएब खान के घर और दुकानों को भी खँगाला गया है। दावा किया जा रहा है कि NIA ने मौलाना अब्दुल अजीज सलाफ़ी और शोएब को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की। यह पूछताछ जबलपुर में हुई थी जहाँ से उन्हें छोड़ दिया गया। उसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर बेंगलुरु बुलाया गया।

जाँच एजेंसी को इस नेटवर्क की जानकारी दिल्ली पुलिस द्वारा ओखला से पकड़े गए कश्मीरी दम्पति जेब शामी और हिना बशीर से हुई पूछताछ के बाद हुई। इस कश्मीरी दम्पति का इस्लामिक स्टेट से कनेक्शन पाया गया था। इस गैंग से जुड़े एक अन्य आरोपित अब्दुल्ला बासिथ का भी नाम सामने आया है। अब्दुल्ला पहले से ही एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।

जन्म से ही देख नहीं सकने वाली राबिया खान ने ब्रेल लिपि में लिख कुरान बना दिया रिकॉर्ड

इंदौर के छावनी इलाके में रहने वाली राबिया खान  जन्म से लेकर ही आंखो की रोशनी से महरूम है। लेकिन उन्होंने अपनी इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर वो काम कर दिखाया है, जिसे सामान्य व्यक्ति भी कर पाने में सक्षम नहीं है। यही कारण है की राबिया खान को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया है।

मध्य प्रदेश के इंदौर की राबिया खान के पास जन्म से ही आंखो की रोशनी नहीं थी लेकिन उन्होंने अपनी इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाया और ब्रेल लिपि में पहला मुस्लिम ग्रंथ कुरान लिख दिखाया। राबिया खान ने बताया की कुरान शरीफ जो इस्लामिक मजहब की धार्मिक पुस्तक है वह केवल अरबी भाषा में ही होती है। जिसे अलीगढ़ जाकर पढ़ना सीखा और सीखने के बाद फिर इस तालीम (शिक्षा) को बढ़ावा देने के लिए अपने जैसे बच्चों को भी ब्रेल लिपि में कुरान पढ़ाने के लिए उन्होंने एक मदरसे (पाठशाला) का संचालन शुरू किया। जिसमें कुछ बच्चे कुरान पूरा पढ़कर मुंह जबानी याद भी कर चुके हैं

उन्होंने बताया कि वह अपने जन्म से ही दृष्टिहीन (दिव्यांग) हैं, जिन्हें सभी नेत्रहीन बच्चों की तरह पढ़ाई करने में कठिनाई आई क्योंकि सामान्य पढ़ाई की तुलना में ब्रेल लिपि काफी कठिन होती है। राबिया बताती हैं कि हिंदुस्तान में ब्रेल लिपि में कुरान शरीफ मौजूद नहीं था। जिसके लिए मैनें उसे बनाने की कवायद 2009 से शुरू की थी। सबसे पहले सॉफ्ट कॉपी बनाई, उसे कंप्यूटराइज्ड कर उसे प्रिंट किया फिर इंडिया में लॉन्च किया जो पूरे हिंदुस्तान का पहला ब्रेल लिपि वाला कुरान शरीफ बना।

राबिया खान ने यह भी बताया कि 2014 में नेत्रहीनों के लिए काम करने के लिए इस फील्ड में ऐज ए रोल मॉडल की तर्ज पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि- अपनी विल पावर मजबूत रखो। किसी के निराश करने से निराश नहीं होना, जो अपनी कमजोरी है उसको अपनी ताकत समझो और आगे बढ़ो, कामयाबी जरूर मिलेगी। बता दें कि राबिया खान के परिवार में माता पिता सहित उनके दो भाई और एक बहन भी है। जिसमें वह सबसे छोटी बहन हैं।

मध्य प्रदेश : महाशिवरात्रि पर रोकी शिव बारात, कट्टर मुस्लिमों ने दी भक्ति गाने पर माँ-बहन की गालियाँ; हिन्दुओं के संयम की परीक्षा कब तक?

                            छिंदवाड़ा में मुस्लिमों द्वारा महाशिवरात्रि का जुलूस रोके जाने से तनाव 
महाशिवरात्रि के अवसर पर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा (Chhindwara, Madhya Pradesh) में साम्प्रदायिक तनाव हो गया। शिव बारात में बज रहे DJ को मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने जबरन बंद करवा दिया। इस दौरान दोनों पक्षों में गाली-गलौच और झड़प भी हुई।

शिव बारात निकालने के दौरान किए गए हंगामे से नाराज हिंदूवादी संगठनों ने थाने के आगे धरना दिया। उन्होंने आरोपितों के कड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी अविलंब गिरफ्तारी की माँग की। घटना शनिवार (18 फरवरी 2023) की है। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है।

हनुमान जयंती से निरंतर आज तक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू त्योहारों पर दंगा करने से हिन्दुओं में भी अब बदले की भावना घर करने लगी है। जो इन कट्टरपंथियों के कारण समस्त मुस्लिम समाज के लिए दुःखदायी होगी। फिर जितने भी तुष्टिकरण कर जनता को गुमराह करने वाला गिरोह संविधान का रोना रोते, गंगा-जमुनी तहजीब बर्बाद हो गयी जैसे ठोंगी नारे और भारत में मुसलमानों पर अत्याचार आदि आदि भड़काऊ बयानों से माहौल ख़राब करेंगे, लेकिन हिन्दू त्योहारों में किए जा रहे दंगे दरकिनार कर देंगे। केंद्र, राज्य सरकारों और दंगाइयों के आकाओं को हिन्दुओं की इस पीड़ा को समझना होगा। आखिर संयम की भी सीमा होती है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला छिंदवाड़ा के थाना क्षेत्र चाँद का है। यहाँ स्थित लालगाँव क्षेत्र को मिश्रित आबादी वाला है। बताया जा रहा है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवभक्तों ने एक बड़ी रैली निकाली थी, जो छिंदवाड़ा के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजर रही थी।

जुलूस में आगे चल रहे DJ पर धार्मिक गाने बज रहे थे। आरोप है कि लालगाँव में कुछ मुस्लिम युवकों ने जुलूस को रोक लिया और DJ वाले व्यक्ति से गाली-गलौज करने लगे। जब जुलूस में शामिल अन्य श्रद्धालुओं ने इस हरकत का विरोध किया तब उनके साथ भी अभद्रता की गई।

इस हरकत से माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों में झड़प हो गई। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग उस वाहन वाले को गंदी-गंदी गालियाँ देते देखे जा सकते हैं, जिस पर DJ और जेनरेटर बँधा हुआ है।

वीडियो में एक आरोपित ने नीली टी-शर्ट पहन रखी है। वहीं, दूसरा आरोपित सफेद शर्ट में दिखाई दे रहा। ये सभी श्रद्धालुओं को फ़ौरन वहाँ निकल जाने के लिए कह रहे हैं। पुलिस इन दोनों की पहचान करने की कोशिश कर रही है

इसी घटना से संबंधित एक अन्य वीडियो भी सामने आया है। इसमें कई लोगों की भीड़ को पुलिस स्टेशन के आगे देखा जा सकता है। भीड़ में शामिल हिन्दू संगठन आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इसके अलावा, एक और वीडियो में हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों द्वारा रविवार (19 फरवरी 2023) को दोपहर 12 बजे शिव की अधूरी यात्रा उसी लालगाँव से पूरी करने का आह्वान किया जा रहा है। इस आह्वान में हर गाँव और कस्बे के लोगों को अपने-अपने साधनों से शामिल होने के लिए कहा गया है।

मौके पर भारी पुलिस बल लगा दिया गया है। छिंदवाड़ा में ही आज रविवार (19 फरवरी 2023) को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) के आने का भी कार्यक्रम है।

केजरीवाल समर्थक ने रामकथा करने पर कुमार विश्वास को दी हत्या की धमकी, भगवान राम को गंदी-गंदी गालियाँ

आम आदमी पार्टी के अब तक के इतिहास को ऐसा आभास होता है कि यह पार्टी सफेदपोश गुंडों का जमावड़ा है? कवि कुमार विश्वास को धमकी मिलना कोई नई बात नहीं। 

सेवानिर्वित होने के बाद एक हिंदी पाक्षिक को सम्पादित करते एक रपट शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से जन्मी आप" प्रकाशित करने पर मुझे भी धमकी मिली, परिणाम अगले ही अंक के प्रथम पृष्ठ पर फ़ोन नंबर(जिस नंबर से धमकी आयी थी) प्रकाशित करने के साथ-साथ कांग्रेस और आप का DNA शीर्षक "कांग्रेस और आप का Positive DNA" प्रकाशित कर धमकी का जवाब दे दिया। (देखिए संलग्न पृष्ठ) जिसे कोई तथाकथित खोजी पत्रकार भी नहीं बताता। सबको अपनी TRP और विज्ञापन की चिंता रहती है। कांग्रेस और इसके समर्थक पार्टियों की बांसुरी से निकली आवाज़ आप को भाजपा की बी टीम बताते रहते हैं। 

केजरीवाल, सिसोदिया, योगेंद्र यादव आदि सब सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति के सदस्य हैं। इतने वर्षों तक किसी ने खंडन नहीं किया। कांग्रेस द्वारा हिन्दू विरोधी Anti-Communal Violence Bill को बनाने में कहते हैं कि इसी ग्रुप की भी भूमिका थी। 

भगवान राम पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कवि कुमार विश्वास को जान से मारने की धमकी देने वाले व्यक्ति को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की पहचान लोकेश शुक्ला के रूप में हुई है। वह आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल का समर्थक है।

दरअसल, कुमार विश्वास के मैनेजर प्रवीण पाण्डेय ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि बीते कुछ दिनों से कवि को जान से मरने की धमकी दी जा रही है। उन्हें यह धमकी ईमेल के माध्यम से दी जा रही थी।

मैनेजर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि धमकी देने वाला व्यक्ति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को बेहद अपमानजनक गंदी एवं अश्लील गालियाँ देते हुए कहा था कि कुमार भगवान राम का महिमामंडन न करें। यही नहीं, आरोपित ने धमकी भरे ईमेल में अरविंद केजरीवाल की भी तारीफ की थी। साथ ही, उसने कहा था, “मैं शहीद ऊधम सिंह की शपथ लेता हूँ कि मैं तुझे मारूँगा।”

पुलिस को दिए शिकायत पत्र के साथ कुमार विश्वास ने ट्वीट कर इस बारे में पूरी जानकारी दी थी। कुमार विश्वास ने ट्वीट कर कहा था, “अब उन्हें और उनके चिंटुओं को मेरे द्वारा मेरे राघवेंद्र सरकार राम का महिमामंडन करना पसंद नहीं। कह रहे हैं कि मार देंगे, ये सब ठीक है पर अपने चिंटुओं को बोलो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को गाली न बकें। अपना काम करो, नहीं तो याद रखो रावण तक का वंश नहीं बचा, तुम ऐसे कौन लवणासुर हो?”

इंदौर से गिरफ्तार हुआ आरोपी 

पुलिस अधीक्षक द्वितीय ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि भगवान राम को गाली और कुमार विश्वास को धमकी देने वाले व्यक्ति को इंदौर के सुदामा नगर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की पहचान लोकेश शुक्ला के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने बताया है कि वह अरविंद केजरीवाल से प्रभावित है। इसलिए, कुमार विश्वास द्वारा भगवान राम पर कविता सुनाने या केजरीवाल को लेकर कोई भी बात कहने से वह नाराज होता था।
इस मामले में, इंदिरापुरम थाना प्रभारी देवपाल सिंह पुंडीर ने कहा है कि गिरफ्तार आरोपित लोकेश शुक्ला ने कुमार विश्वास को धमकी भरा पहला मेल 23 अक्टूबर को भेजा था। इसके बाद उसने अगले चार-पाँच दिनों तक कुमार विश्वास को धमकी भरे मेल किए। इन मेल में भगवान राम को गाली दी गई थी। साथ ही, उसने शहीद उधम सिंह की कसम खाते हुए जान से मारने की भी धमकी दी थी। लगातार धमकी भरे मेल मिलने के बाद कुमार विश्वास के कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेता हुए गृह मंत्रालय को इसकी सूचना दी थी।