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स्पेन : कट्टरपंथ फैला रहे 14 पाकिस्तानियों को पुलिस ने पकड़ा, जिहादी नेटवर्क का खुलासा; धर्म परिवर्तन का रैकेट

                                                                                                                           प्रतीकात्मक: NYT
स्पेन पुलिस ने आतंक पर कार्रवाई करते हुए 14 पाकिस्तानियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी को हमास के हमले से बढ़ाई गई सतर्कता के बाद गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह सभी स्पेन में एक बड़ा जिहादी नेटवर्क चला रहे थे।

जानकारी के अनुसार, यह सभी पाकिस्तानी आतंकी तहरीक-ए-लब्बैक से जुड़े हुए हैं। यह पार्टी पाकिस्तान में पूर्णतः शरिया लागू करने की माँग करती रहती है। इस पार्टी ने बीते कुछ समय में कई बड़े हिंसक प्रदर्शन भी किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये सारे पाकिस्तानी स्पेन के राज्य कैटालूनिया, वालेंसिया, लोग्रोनो और विटोरिया जैसे राज्यों में रह रहे थे। यह जानकारी सामने आई है कि इन सभी आतंकियों ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जिससे कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार किया जाता था। यह लोग ऐसा मैटेरियल प्रसारित करते थे जिससे अन्य लोगों को कट्टरपंथी बनाया जा सके।

अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा, अभी इनसे पूछताछ चल रही है। हमास के हमले के बाद स्पेन समेत तमाम यूरोपियन देशों में आतंकी खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है और जिहादियों पर कार्रवाई हो रही है। स्पेन के सबसे बड़े अखबार यूरो वीकली ने बताया है कि यह पाकिस्तानी धर्म परिवर्तन का रैकेट भी चला रहे थे।

पिछले महीने स्पेन की पुलिस ने कार्रवाई करके 4 संदिग्धों को पकड़ा था। इसमें से एक ऐसा शख्स सामने आया था जो कई ऐसे ही नेटवर्क को चला रहा था। इस आतंकी ने अपना नाम खलीफा रखा हुआ था। गिरफ्तार किए लोगों में एक दम्पति भी था जो कि इसी माध्यम से मिले थे।

एक जानकारी के अनुसार, स्पेन में लगभग 1 लाख पाकिस्तानी रहते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा कैतालूनिया राज्य में रहते हैं। इनमें से अधिकतर वो लोग हैं जो रोजगार की तलाश में पाकिस्तान पहुँचे हैं। इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तानियों की भी है जो अवैध रूप से यूरोप पहुँचे है। बीते कुछ वर्षों में स्पेन में पाकिस्तानियों के प्रति लोगों में संदेह की भावना बढ़ी है।

जिस देश में कुरान जलाए जाएँगे, उन पर हमला कर मुस्लिम खुद दें सजा: मुहर्रम के मातम पर हिजबुल्ला सरगना नसरल्लाह का आतंकी पैगाम

                               कुरान जलाने पर भड़का हिजबुल्ला सरगना नसरल्लाह (फोटो साभार: CNN)
स्वीडन और डेनमार्क में कुरान जलाए जाने की घटना की कई इस्लामिक देशों ने निंदा की थी। शायद वो कम था लेकिन। अब लेबनान के इस्लामी आतंकवादी संगठन हिजबुल्ला के सरगना हसन नसरल्लाह ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाने वाला बयान दिया है। नसरल्लाह ने कहा है कि यदि इस्लामी देशों की सरकारें कुरान का अपमान करने की अनुमति देने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती हैं, तो मुस्लिमों को उन पर हमला कर उन्हें सजा देनी चाहिए।

दरअसल, लेबनान की राजधानी बेरूत में हजारों की तादात में मुस्लिम इकट्ठा होकर मुहर्रम का मातम मना रहे थे। इसी दौरान एक टीवी कार्यक्रम में हसन नसरल्लाह ने कहा, “स्वीडन और डेनमार्क को यह जानना होगा कि हमारा देश कुरान और पवित्र चीजों का अपमान बर्दाश्त नहीं करता है। कुरान के अपमान को लेकर हम इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के सख्त रुख का इंतजार कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह संगठन हमारे मजहब की रक्षा करने के लायक नहीं रहेगा।”

नसरल्लाह ने आगे कहा है कि इस्लामिक देशों और उनके विदेश मंत्रियों को स्वीडन और डेनमार्क में इस्लाम पर बार-बार होने वाले हमलों के खिलाफ कदम उठाना चाहिए। साथ ही निर्णायक और स्पष्ट संदेश भेजना चाहिए कि यदि इस्लाम पर एक और बार हमला होगा तो उसका जवाब कूटनीतिक तरीके से आर्थिक बहिष्कार कर दिया जाएगा।

हिजबुल्ला के आतंकी नसरल्लाह ने यह भी कहा है, “यदि इस्लामिक देश ऐसा नहीं करते हैं, तो दुनिया के बहादुर और युवा मुस्लिम जिम्मेदारी से काम करने तथा अपने मजहब की रक्षा करने के लिए कुरान का अपमान करने और जलाने वालों को दंडित करने के लिए तैयार रहें। अगर सरकारें इस्लाम पर हो रहे इन हमलों को नहीं रोकतीं तो दुनिया के सभी मुस्लिम बदनाम हो जाएँगें।”

यूरोपीय देश स्वीडन और डेनमार्क में आए दिन कुरान जलाए जाने की घटना सामने आ रही हैं। इसका कई इस्लामिक देश विरोध करते हुए दोनों देशों की सरकारों से रोक लगाने व कार्रवाई करने की माँग कर चुके हैं। हालाँकि स्वीडन और डेनमार्क दोनों ही देशों का कहना है कि वह देश के कानून के चलते कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं।

दरअसल, स्वीडन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर मजबूत कानून है। इसके तहत ही लोग वहाँ कुरान जला रहे हैं। यही हाल डेनमार्क का भी है। दोनों देश कुरान जलाए जाने की घटना की निंदा तो कर सकते हैं लेकिन कुरान जलाने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर सकते।

OIC ने बुलाई बैठक

स्वीडन और डेनमार्क में कुरान जलाए जाने की घटनाओं पर चर्चा के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने सोमवार (31 जुलाई, 2023) को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में शामिल होने के लिए इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों को बुलावा भेजा गया है। नसरल्लाह हसन ने अपने बयान में इसी बैठक का जिक्र किया है।

पाकिस्तान : मंच पर से कोई नेता नारा-ए-तकबीर, अल्ला-हू-अकबर चिल्लाया हो गया धमाका

                                           पाकिस्तान में भीषण बम धमाका (फोटो साभार: DC)
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भीषण बम ब्लास्ट हुआ है। इस हादसे में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कुछ लोगों की हालत गंभीर है। ऐसे में मौत का आँकड़ा बढ़ सकता है। यह धमाका रविवार (30 जुलाई, 2023) को जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल (JUI-F) की रैली में हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बम ब्लास्ट ख़ैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले की खार तहसील में हुआ। इस घटना पर खैबर पख्तूनख्वा के कार्यवाहक सूचना मंत्री फिरोज शाह जमाल ने कहा है कि आसपास के इलाकों के हॉस्पिटल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से पेशावर व अन्य हॉस्पिटल में ले जाने की कोशिश की जा रही है। ब्लास्ट के बाद पुलिस और सुरक्षाबल मौके पर पहुँच गए हैं। राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा के आईजीपी अख्तर हयात ने कहा है कि शुरुआती जाँच में सामने आया है कि यह एक आत्मघाती हमला था। फिलहाल आगे की जाँच कर सबूत जुटाए जा रहे हैं।

जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रवक्ता अब्दुल जलील खान ने पाकिस्तानी मीडिया जियो न्यूज से कहा है कि धमाका शाम करीब 4 बजे हुआ। उस समय मौलाना लईक रैली को संबोधित कर रहे थे। रैली में हुए इस धमाके में JUI-F के प्रमुख नेता मौलाना जियाउल्लाह जान की भी मौत हो गई।

इस बम ब्लास्ट का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो के आखिरी सेकंडों में धमाका होते देखा जा सकता है। मंच पर से कोई नेता नारा-ए-तकबीर, अल्ला-हू-अकबर चिल्ला रहा था। इसके तुरंत बाद बम फटा और राजनीतिक रैली मातम में बदल गई। वहीं, ब्लास्ट के बाद के वीडियो में एंबुलेंस की आवाज के बीच अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। हर तरफ बिखरी हुई लाशें और खून नजर आ रहा है।

पाकिस्तानी अखबार DAWN ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से कहा है कि रैली में 500 से अधिक लोग शामिल हुए थे। लोग भाषण सुन रहे थे। तभी एक भीषण विस्फोट हुआ, जिससे वह बेहोश हो गया। जब उसे होश आया तो हर तरफ खून ही खून था। लोग चिल्ला रहे थे। यहाँ गोलियाँ भी चली हैं।

मध्य प्रदेश : कोई टीचर-कोई इंजीनियर, जंगल में ट्रेनिंग-ड्रोन से रेकी… पकड़े गए 11 जिहादीः 50 देशों में फैला है हिज्ब-उत-तहरीर, 16 देशों में लग चुका है बैन

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                                                             मध्य प्रदेश एटीएस (साभार: आजतक
आज देश बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। तिल का ताड़ बनाकर होकर प्रदर्शन और इन प्रदर्शनों/धरनों को समर्थन दे रहे राजनीतिक दलों से भी देश को सतर्क रहने की जरुरत है। देश भर में बढ़ता इस्लामी कट्टरवाद सरकार के लिए चुनौती साबित हो रही है। इससे मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं है। कभी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकी तो पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कट्टरपंथी तो कभी आतंकियों के स्लीपर सेल पर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई होती रहती है। अब मध्य प्रदेश पुलिस की आतंकी निरोधी दस्ता (ATS) ने हिज्ब उत् तहरीर (HuT) नाम के इस्लामी कट्टरपंथी संगठन के खिलाफ बड़़ी कार्रवाई की है।

हिज्ब उत् तहरीर नाम का संगठन तहरीक-ए-खिलाफत के नाम से भी जाना जाता है। ATS ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार (10 मई 2023) को भोपाल के शाहजहाँनाबाद, ऐशबाग, लालघाटी और पिपलानी में रेड मारकर इसके 10 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं छिंदवाड़ा से 1 और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए कट्टरपंथियों के पास से तकनीकी उपकरण, देश विरोधी दस्तावेज, कट्टरपंथी साहित्य एवं अन्य सामग्री बरामद की गई हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने आरोपितों पर UAPA सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। ATS उनसे आगे की पूछताछ कर रही है।

कट्टरपंथियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से टीचर तक शामिल

HuT के कट्टरपंथी अपने कामों को अंजाम देने के लिए आधुनिक उपकरणों को उपयोग करते थे। वे रेकी करने के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार किए आरोपितों में कंप्यूटर इंजीनियर, टेक्नीशियन, टीचर, व्यवासायी, जिम ट्रेनर, कोचिंग सेंटर संचालक, ऑटो ड्राइवर, दर्जी आदि शामिल हैं। ये सभी आम लोगों के बीच रहते हुए और अपना काम करते हुए कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
भोपाल के शाहजहाँनाबाद से गिरफ्तार किया गया 29 साल का यासिर खान जिम ट्रेनर है। शहीद नगर से गिरफ्तार 32 साल का सैयद सामी रिजवी कोचिंग में टीचर है। जवाहर कॉलोनी ऐशबाग से गिरफ्तार शाहरूख दर्जी है, जबकि उसी इलाके से गिरफ्तार 29 साल का मिस्बाहुल हक मजदूरी करता है। ऐशबाग का ही शाहिद ऑटो चलाता है।
भोपाल के ही ऐशबाग का रहने वाला सैयद दानिश अली सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि ऐशबाग का ही 25 वर्षीय मेहराज अली कंप्यूटर टेक्नीशियन है। भोपाल के लालघाटी का रहने वाला 40 साल का खालिद हुसैन टीचर और व्यवसायी है। इसके अलावा, भोपाल से ही ATS ने वसीम खान और 35 साल के मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया है। वहीं, छिंदवाड़ा से गिरफ्तार करीम प्राइवेट नौकरी करता था।

ऐसे करते थे काम

ATS की प्रेस नोट के मुताबिक, ये सभी आरोपित गोपनीय रूप से जंगलों में जाकर क्लोज कॉम्बैट ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर निशानेबाजी का अभ्यास करते थे। इसमें हैदराबाद से आए हुए कट्टरपंथी इन लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते थे। ये ट्रेनर अपने काम में माहिर हैं। ट्रेनिंग के अलावा, आरोपितों द्वारा गोपनीय रूप से दर्श (दीनी सभा) का आयोजन करके भड़काऊ तकरीरें दी जाती थीं। इस दौरान लोगों के बीच कट्टरपंथी और जेहादी साहित्य भी बाँटे जाते थे।
ATS का कहना है कि आरोपित ऐसे युवकों की पहचान करके अपने साथ शामिल करते थे, जो उग्र स्वभाव के हों और अपनी जान देने से भी ना हिचकें। सभी आरोपित आपस में बातचीत करने के लिए डार्क वेब के विभिन्न चैनलों का इस्तेमाल करते थे। इनमें ‘रॉकेट चैट’, ‘थ्रीमा’ जैसे ऐप शामिल हैं। इस तरह के कम्युनिकेशन का उपयोग अधिकतर ISIS जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जाता है।  
ये अधिक से अधिक युवकों को जोड़कर हिंदुओं के खिलाफ जिहाद की योजना बना रहे थे। ये बड़े शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके करके लोगों में अपना भय कायम करना चाहते थे। इसके लिए वे कई शहरों को चिह्नित भी कर चुके थे। इसके लिए उन्होंने ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किया था। रेकी के बाद इलाके का नक्शा बनाकर घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। संगठन में जो भी सदस्य शामिल किए जाते थे, उनसे चंदा जुटाने के साथ-साथ अन्य संसाधन बटोरने के लिए कहा जाता था।

क्या है कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत् तहरीर

हिज्ब उत् तहरीर उर्फ तहरीक-ए-खिलाफत इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है, जो गैर-इस्लामी इलाकों में शरिया शासन कायम करने की सोच रखता है। इस संगठन के तार 50 से भी अधिक देशों में फैला हुआ है। इस संगठन की हिंसक गतिविधियों एवं सोच को देखते हुए 16 देश प्रतिबंध लगा चुके हैं।
भारत में शरिया शासन स्थापित करने के लिए इस कट्टरपंथी संगठन ने मध्य प्रदेश में अपना आधार तैयार किया था। इसके जरिए वे अपने कैडरों की भर्ती कर रहे थे। संगठन से जुड़े सदस्यों का उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को भारत की वर्तमान शासन प्रणाली को इस्लाम विरोधी बताकर संगठन से जोड़ते थे। इसके बाद वे खिलाफ की बात करते थे।
बताते चलें कि इससे पहले PFI के भी 22 सक्रिय सदस्यों को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, मार्च 2022 में जमात-ए-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के मॉड्यूल का भी मध्य प्रदेश की पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। इस दौरान 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था।

‘हिंदुओं को भगाएँ मुस्लिम मुल्क, भारत और भारतीय उत्पादों का करें बहिष्कार’: अलकायदा के ‘वन उम्माह’ में टारगेट पर PM मोदी और नूपुर शर्मा

                       अल-कायदा की पत्रिका 'वन उम्माह' में पैर की मोहर के साथ पीएम मोदी की छपी तस्वीर
आतंकी संगठन अलकायदा (Al Qaeda) ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद से संबंधित की गई टिप्पणी को लेकर एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। ‘वन उम्माह (One Ummah)’ नाम की पत्रिका के पाँचवें अंक में आतंकी संगठन ने सभी मुस्लिम देशों से भारत और भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की है। इसके साथ ही आतंकी संगठन ने अरब देशों में काम करने वाले सभी हिंदुओं को देश से बाहर निकालने की आह्वान किया है।

आतंकी संगठन की आधिकारिक मीडिया शाखा या मुखपत्र ‘अस-सहाब’ ने त्रैमासिक पत्रिका ‘वन उम्माह’ का पाँचवा संस्करण जारी किया है। पत्रिका के एक भाग में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा गया है। साथ ही पत्रिका ने नूपुर शर्मा के बयान के बहाने मुस्लिमों को भारत के खिलाफ एकजुट होने के लिए कहा गया है। लेख में पीएम मोदी की तस्वीर को अपमानजनक तरीके से पैर की मोहर के साथ छापा गया है।

अलकायदा के लेख में कहा गया है, “भारत की हिंदू सरकार मुस्लिम दुनिया की चुप्पी से उत्साहित थी और इस बार हद पार कर पैगंबर का अपमान कर दिया।” इसके साथ ही आतंकी संगठन ने कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों को अंजाम देने में मुस्लिम देशों की मदद भी माँगी है।

                             आतंकवादी संगठन द्वारा प्रकाशित भारत सरकार पर निशाना साधते हुए लेख

पत्रिका में आगे कहा गया है, “हम अपनी नेक उम्माह को इस हिंदू सरकार के खिलाफ एकजुट होने और भारत में हमारे भाइयों और बहनों की मदद करने के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि अल्लाह के दुश्मन हमारे पैगंबर के खिलाफ इस तरह के अपमानजनक अपराध को दोहराने की हिम्मत न कर सकें।”

पत्रिका के अनुसार, “हम सभी मुस्लिमों, विशेष रूप से व्यापारियों को भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने, हिंदू कर्मचारियों को मुस्लिम देशों से बाहर निकालने का आह्वान करते हैं।” पत्रिका में हिंदुओं की तुलना यहूदियों से की गई है और देश में कथित तौर पर मुस्लिमों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।

बकौल ‘वन उम्माह‘, भारतीय शासक वर्ग में हमेशा इस्लाम के प्रति अनादर और घृणा व्यक्त करने की प्रवृत्ति रही है। भारतीय शासक का मुस्लिमों के जबरन विस्थापन, उन्हें सालाखों के पीछे धकेलने, जेलों में यातना देने और मुस्लिम समुदाय को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करने का आपराधिक रिकॉर्ड है। पत्रिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस तरह से यहूदियों ने फिलीस्तीनियों के साथ आपराधिक व्यवहार किया है, उससे भारत अलग नहीं हैं।

इसमें यह भी कहा गया है कि ‘भारत की हिंदू सरकार मुस्लिम देशों की चुप्पी से प्रोत्साहित हुई और पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया’। पत्रिका में मुस्लिम राष्ट्रों को नूपुर शर्मा की कथित टिप्पणी की केवल निंदा करने और भारत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए भी फटकार लगाई गई है।

पत्रिका के अनुसार, “इन रीढ़़विहीन सरकारों ने अपमान और अपराध का जवाब केवल खोखली निंदा से दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। दूसरी ओर इन देशों ने भारत की हिंदू नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देना जारी रखा हुआ है और उनके साथ व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध बनाए भी बनाए हुए हैं।” पत्रिका ने इसके साथ 9/11 में जान गँवाने वाले आतंकवादियों की तस्वीर छापी है और मुस्लिमों से कहा है कि वे इन ‘नायकों’ को कभी न भूलें।

असम : टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 2 मदरसे सील: आतंकी संगठन अल कायदा ने ‘गो टू असम’ का दिया नारा

चित्र साभार- ANI
'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या' इस्लामिक स्कॉलर्स जब भी टीवी पर मदरसों में हो रही तालीम पर बात होने पर कहते हैं कि कोई एक मदरसा दिखाओं, लेकिन असम पुलिस उन्हें दिखा ही नहीं, मदरसे भी सील कर रही है। और अब तक सैंकड़ों मदरसे बंद किए जा चुके हैं। जुलाई 28 को एक चैनल पर चर्चा के दौरान एडवोकेट अश्विनी कुमार ने बताया कि भारत में 3 लाख से अधिक मदरसे हैं, इतने किसी भी मुस्लिम देश में नहीं। पता नहीं मीडिया भी अपनी TRP के चक्कर में इन समाचारों को बॉयकॉट कर रहा है और यदि स्थिति विपरीत होती देखो हर चैनल बढ़चढ़ कर उस समाचार को दिखाता।  
असम पुलिस (Assam Police) ने आतंकी गठजोड़ का खुलासा करते हुए अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के 12 सदस्यों को अब तक गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियाँ मोरगाँव, गुवाहाटी, बारपेटा और गोलपारा जिलों से की गई हैं। वहीं, एक को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।

एक दिन पहले असम पुलिस ने मोरीगाँव जिले के मोरियाबारी के एक मदरसा के टीचर मुफ्ती मुस्तफा को गिरफ्तार था। नेटवर्क से जुड़े बाकी फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

बारपेटा से गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम 25 वर्षीय जुबेर खान, 27 वर्षीय रफीकुल इस्लाम, 20 वर्षीय दीवान हमीदुल इस्लाम, 42 वर्षीय मोइनुल हक, 37 वर्षीय कज़ीबुर हुसैन, 50 वर्षीय मुजीबुर रहमान, 34 साल के शाहजहाँ अली और शहनूर आलम हैं। जुबेर खान को छोड़ कर बाकी सभी स्थानीय बरपेटा थानाक्षेत्र के ही रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक इन आरोपितों पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-कायदा के वर्तमान मुखिया अल जवाहिरी ने ‘गो टू असम’ का एलान किया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ और अधिक सतर्क हो गई हैं। मोरीगाँव में जमीउल हुडा मदरसा चलाने वाले मुफ़्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद 39 साल के अफसरूद्दीन भुयान को भी मोरीगाँव में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक अन्य गिरफ्तारी अब्बास अली की हुई है। इन सभी पर एक फरार आतंकी महबूब उर रहमान को शरण देने का आरोप है।

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

मोरीगाँव की SP अपर्णा के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों से उनके बाकी नेटवर्क और फंडिंग आदि के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक पुलिस द्वारा 2 मदरसों को सील किया जा चुका है। उसमें पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल में शिफ्ट किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं।

‘मदरसों में सिखाते हैं ईशनिंदा पर गला काटना’: आरिफ मोहम्मद खान की दो टूक, कहा- हम गंभीर बीमारी को नजरअंदाज कर रहे

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Kerala Governor Arif Mohammad Khan) ने उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या को लेकर मदरसों पर सवाल उठाया है। उन्होंने बुधवार (29 जून 2022) को कहा कि मदरसों में कट्टरपंथी तालीम दी जाती है और वहाँ पढ़ने वाले बच्चों को ईशनिंदा पर सिर काटना सीखाया जाता है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “लक्षण दिखाई देने पर हम घबरा जाते हैं, लेकिन गंभीर बीमारी को नजरअंदाज कर देते हैं। मदरसों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि ईशनिंदा की सजा सिर काटना है। इसे अल्लाह के कानून के रूप में पढ़ाया जा रहा है। वहाँ जो पढ़ाया जा रहा है, उसकी जाँच होनी चाहिए।”

केरल के राज्यपाल खान ने कहा कि यह इस्लामी कानून कुरान से नहीं आया है। यह कानून शहंशाहों के जमाने में कुछ लोगों ने बनाए है। अब यही कानून बच्चों को सिखाया जा रहा है। इसे ही अब मदरसों में पढ़ाया जा रहा है और बच्चों को कच्ची उम्र में कट्टरता की शिक्षा दी जा रही है।

राज्यपाल खान इससे पहले भी कट्टरपंथी मुस्लिमों की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने इस साल फरवरी में कर्नाटक में बुर्का विवाद को लेकर कहा कि जिसे यूनिफॉर्म पसंद नहीं है तो उसे संस्थान छोड़ देना चाहिए। अनुशासन का पालन सभी को करना चाहिए। अनुशासन को तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अनुशासन संस्थानों की नींव है। 

उन्होंने आगे कहा था, “मेरा मानना है कि कौन क्या पहनता है, ये कभी भी विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। यह हर व्यक्ति का अपना अधिकार है। शर्त सिर्फ इतनी है कि शालीनता होनी चाहिए, सभ्यता होनी चाहिए, संस्कृति होनी चाहिए। जो आर्मी में है वो ये नहीं कह सकता कि मैं जो चाहूँगा वह पहन लूँगा। पुलिसवाला यह नहीं कह सकता कि जो मैं चाहूँगा वह पहन लूँगा।”

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि कई चीजें जबरन मजहब से जोड़ी गई हैं। तीन तलाक को भी मजहब से जोड़ा गया। इसके साथ ही उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए कहा था कि हिजाब शब्द का इस्तेमाल पर्दे के लिए किया गया है, पहनावे के लिए नहीं। पहनावे के लिए स्कार्फ होता है। हिजाब का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। यह किसी मजहब की पहचान नहीं है।

राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार (28 जून 2022) को टेलर कन्हैया लाल की नृशंस हत्या कर दी गई थी। दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद आए। नाप देने का बहाना बनाकर वे दुकान में गए। इससे पहले कन्हैया लाल कुछ समझ पाते, दोनों इस्लामी हत्यारों ने उनकी गर्दन काट दी।

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कमलेश तिवारी होते हुए कन्हैया लाल तक पहुँचा हकीकत राय से शुरू हुआ सिलसिला, कातिल ‘मासूम भटके हु

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कमलेश तिवारी होते हुए कन्हैया लाल तक पहुँचा हकीकत राय से शुरू हुआ सिलसिला, कातिल ‘मासूम भटके हु

यही नहीं इस्लामवादी हत्यारों ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में वह कह रहा था, “मैं मोहम्मद रियाज राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो मैं जुमे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ कि रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”


‘95% आतंकी संगठन इस्लाम से’: डेटा सुन कर नाराज़ हुआ NDTV का एंकर, कहा – दुनिया में अरबों मुस्लिम, सभी शांतिपूर्ण

पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर NDTV (नई दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड) पर एक डिबेट के दौरान चैनल के पत्रकार विष्णु सोम ने विवाद खड़ा कर दिया है। सोम ने दावा किया कि इस्लामी आतंकवाद पर बात करने से आम मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।

दरअसल, वामपंथी चैनल पर डिबेट के दौरान वकील और पैनलिस्ट के तौर पर उपस्थित देश रतन निगम ने संयुक्त राष्ट्र के डाटा का हवाला देते हुए तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “घोषित आतंकवादियों में से 95% इस्लाम से हैं। और 95% आतंकवादी संगठन इस्लामिक हैं।” इस पर इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करते हुए विष्णु सोम ने कहा, “तो क्या हम हर उस व्यक्ति को टाइपकास्ट करते हैं जो मुस्लिम हैं (उनमें से अरबों दुनिया भर में मौजूद हैं)?” इसका जबाव देते हुए निगम तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी ये तथ्य पैदा नहीं कर रही है।”

रतन निगम द्वारा प्रस्तुत संयुक्त राष्ट्र के डाटा की भारत सरकार या जाँच/गुप्तचर एजेंसियां पुष्टि कर सकती है। 

देश रतन निगम ने नूपुर शर्मा मामले का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा, ”मामला कोर्ट में जा चुका है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है।” अब अदालतें तथ्यों के साथ न्याय करेंगी और ये तय करेंगी कि उनका बयान उकसावे के जवाब में था या नहीं। अब इस ट्वीट को देखिए, क्या भड़काऊ नहीं?

नूपुर शर्मा के बयान की अलग से जाँच की जा सकती है

निगम के तीखे जबाव से असहज विष्णु सोम डिफेंसिव मोड में आते हुए कहा, “आप मुझे उकसा सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जो चाहूँ कह सकता हूँ।” न्यूज एंकर ने कहा कि लोगों को अपने भाषण में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने ये भी माना कि दूसरों को भी उकसाना नहीं चाहिए। खास बात ये है कि इन लोगों को इस्लामिक पैनलिस्ट द्वारा नूपुर शर्मा और हिन्दुओं को उकसाना स्वीकार्य है, लेकिन जब शर्मा ने इस पर रिएक्ट कर दिया तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिमिट का उल्लंघन माना जाता है।
डिबेट के दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने उन परिस्थितियों को अनदेखा कर दिया, जिस कारण से टाइम्स नऊ पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा को इस्लामिक धर्म की पेचीदगियों पर चर्चा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस मामले में ऑपइंडिया ने इसके लेकर रिपोर्टिंग की थी कि किस तरह से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को इस्लामवादी फव्वारा बता रहे हैं। वो शिवलिंग वाली जगह को वर्षों से ‘वुजुखाना’ के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। डिबेट के दौरान हिन्दू प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। इसी कारण से मजबूरन नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की।

विष्णु सोम आतंकवाद से ज्यादा ‘टाइपकास्टिंग’ की चिंता

डिबेट के दौरान अधिकतर समय विष्णु सोम मुस्लिमों का बचाव करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कार्यों के कारण पूरे समुदाय को बदनाम नहीं करना चाहिए। हालाँकि, देश रतन निगम ने जोर देकर कहा कि 95% आतंकी संगठन इस्लामिक हैं।
इस पर सोम ने माफी माँगने के अंदाज में कहा, “जिस वक्त आप कहते हैं कि दुनिया भर के 95% आतंकवादी मुस्लिम हैं या इस्लामी आस्था से हैं – मैं आँकड़े नहीं जानता, लेकिन भले ही वे सही हों। लेकिन, क्या वो नहीं कर रहे हैं, जिसके लिए हम आपको मना कर रहे हैं?” न्यूज एंकर ने आगे कहा, “आप पूरे इस्लाम को टाइपकास्ट कर रहे हैं। दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं। वे लगभग सभी शांतिपूर्ण लोग हैं … अगर आपका इरादा पूरे आस्था को टाइपकास्ट करने का नहीं है, तो ऐसा बयान क्यों दें? यह इतना गलत नंबर है सर।” हालाँकि, निगम ने संयुक्त राष्ट्र का हावाला देते हुए बार-बार ये दावा किया कि उनका तथ्य सही है।
एनडीटीवी पत्रकार ने मजबूरन स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि आँकड़े सही हैं, ऐसा क्यों कहते हैं? क्योंकि जिस वक्त हम ये कहते हैं ये ट्विटर पर वायरल हो जाता है”। विष्णु सोम के कुतर्कों पर फटकार लगाते हुए निगम ने कहा, “तो आप तथ्यों से भाग रहे हैं।”
बचाव की मुद्रा में एनडीटीवी पत्रकार ने कहा, “मैं डिबेट के संदर्भ में केवल इतना कह रहा हूँ कि इंटरनेट पर बहुत नफरत फैली हुई है। एक सम्मानित व्यक्ति के तौर पर जैसे ही आप ये बातें कहते हैं तो यह एक पूरे समुदाय को टाइपकास्ट करता है। क्या ऐसा नहीं है, जिससे हम भारतीय बचना चाहते हैं?”
निगम ने कहा, “तथ्यों को सामने रखना हमारा कर्तव्य है और वकील हर रोज अदालतों में ईशनिंदा करते हैं।”
इतना सुनने के बाद निगम को अनसुना कर सोम दूसरे पैनलिस्ट की तरफ सरक लिए। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि 95% आतंकवादी (या कम से कम अधिकांश आतंकवादी) इस्लामी आस्था से संबंधित हैं। लेकिन वो उदारवादी छवि दिखाने के चक्कर में सच को स्वीकार करने से बच रहे थे।

 

कर्नाटक बुर्का विवाद के नाम पर वायर की पत्रकार ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाया

                              वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की कथित पत्रकार नाओमी बार्टन
कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब/बुर्का विवाद (Hijab/Burqa Controversy) प्रतिबंधित होने के बावजूद यह राज्य में टकराव का मुद्दा बन गया और पूरे देश में विवाद का विषय बन गया। इस विवाद को कुछ इस्लामवादी और वामपंथी कथित बुद्धिजीवी इसे बहुत चालाकी से हिंदू-मुस्लिम विवाद बना रहे हैं। वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर में खुद को ऑडियंस एडिटर बताने वाली नाओमी बार्टन ने मंगलवार (15 फरवरी) को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए इस मुद्दे को खुले तौर पर इस्तेमाल किया।

वायर की पत्रकार बार्टन ने ट्वीट किया, “यदि मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति एक हिंदू महिला से दुपट्टा लेने के लिए एकजुट हुए होते तो सड़कों पर खून बह गया होता। यह एक क्रूर अपमान है कि मुस्लिमों को असहाय होकर मुस्लिम महिलाओं के अपमान को प्रतिशोध के डर से देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

बार्टन ने यह बेबुनियाद दावा करते हुए मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ हथियार उठाने के लिए उकसाने का प्रयास किया है। जाहिर है कि उसके पास हिंदुओं के प्रति नफरत के अलावा अपने हास्यास्पद दावों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत या आधार नहीं है।

बार्टन उन तथाकथित उदारवादियों में से एक हैं, जो अपने हिंदू विरोधी एजेंडे को फैलाने के लिए पिछले महीने कर्नाटक में शुरू हुए हिजाब विवाद का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि बॉलीवुड के जरिए मनोरंजन करने वाली स्वरा भास्कर ने कैसे हिजाब मुद्दे की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण से की थी।

तब कई चरमपंथी मुस्लिमों ने स्वरा भास्कर की इस बकवास टिप्पणी का समर्थन करते हुए दावा किया था कि भारतीय दर्शक की तरह हिजाब विवाद का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने महाभारत से द्रौपदी वस्त्र हरण प्रकरण की कल्पना करके हिंदू संस्कृति का भी अपमान किया था। स्वरा भास्कर ने अक्सर इस्लामिक आतंकवादी की भाषा बोलती हैं और हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए ‘गौ मुत्र’ का मजाक बनती हैं।

नाओमी बार्टन भी अतीत में खुले तौर पर हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को प्रदर्शित करने में शामिल रही हैं। उन्होंने कहा था कि हर हिंदू हनुमान चालीसा नहीं जानता। एक संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा था कि कुछ ‘जय श्रीराम’ कहकर और भी घृणा फैलाएँगे।

बार्टन की हिंदू विरोधी नफरत इतनी गहरी है कि एक बार वह एक प्यारे पिल्ला के एक हानिरहित वीडियो में ‘ब्राह्मणवाद’ को घुसेड़ दी थीं।

दरअसल, एक सोशल मीडिया यूजर ने अपने पालतू कुत्ते गोल्डन रिट्रीवर को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार घर में स्वागत करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो पर जवाब देते हुए कथित पत्रकार ने कहा था कि वीडियो प्यारा और हानिरहित लग रहा है, लेकिन वास्तव में यह दिखाता है कि ब्राह्मणवाद का निर्माण कैसे हुआ।

यहाँ तक कि उन्होंने गोल्डन रिट्रीवर प्रजाति के कुत्ते को ऊँची जाति का घोषित कर दिया। जाहिर है कि वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट से जुड़ी इस पत्रकार के लिए अपनी इच्छा के अनुसार पिल्लों का स्वागत करना ‘ब्राह्मणवाद’ है और इसकी जड़ें जातिवाद में हैं।

26 जनवरी को मोदी और तिरंगा को ब्लॉक करें; ‘कश्मीर छोड़ो-दिल्ली पहुँचो’: आतंकियों से गुरुपतवंत सिंह पन्नू, सिख फॉर जस्टिस

खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ के प्रमुख गुरुपतवंत सिंह पन्नू (Gurupwant Singh Pannu) ने 20 जनवरी 2022 को एक वीडियो जारी किया। इसमें उसने कथित ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों’ से गणतंत्र दिवस के मौके पर घाटी छोड़कर दिल्ली पहुँचने की अपील की। वीडियो में पन्नू ने देश को तोड़ने की कोशिश करने वाले अलगाववादियों और आतंकियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ करार दिया है। उसका यह बयान खालिस्तान के लिए ‘अभी या कभी नहीं’ की तर्ज पर था।

यदि इस वर्ष भी पिछली 26 जनवरी 2021 की तरह की हरकत को अंजाम दिया जाए, उससे पूर्व ही सिख समुदाय और समस्त किसान संगठनों को राकेश टिकैत और आन्दोलनजीवियों और खालिस्तानियों के विरुद्ध खड़े होकर विरोध करना चाहिए। क्योकि इन्हीं लोगों के संरक्षण में खालिस्तानी अपना जाल बिछाने में सफल हुए थे। दोबारा गणतंत्र दिवस को कलंकित करने वालों के विरुद्ध अभी से संघर्ष का बिगुल बजाने के साथ-साथ कठोरतम कार्यवाही की मांग करनी चाहिए। क्या देश अपना तीसरा प्रधानमंत्री आतंकवाद की भेंट चढ़ाना चाहेगा?

जब प्रदर्शन में खालिस्तान के शामिल होने पर राकेश टिकैत ही बड़े-बड़े शब्दों में बोलता था कि आंदोलन करते किसानों को खालिस्तानी बताकर कर आंदोलन को बदनाम करने की सरकार द्वारा कोशिश हो रही है। अब धमकियाँ मिलने पर राकेश को खुलकर सामने आकर उनके नाम और ठिकानों का पर्दाफाश करना चाहिए। शायद यही कारण था कि मोदी सरकार ने किसान हितों में बने कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया था। 

प्रोपेगैंडा वीडियो की शुरुआत में बुर्का पहने हुए एक महिला दिखती है। इसमें वो कहती है, “26 जनवरी को हम कश्मीर और खालिस्तान का झंडा उठाकर मोदी और तिरंगे का रास्ता रोक देंगे। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचें। कश्मीर और खालिस्तान को आजाद करें।”

                                                            SFJ के वीडियो का स्क्रीनशॉट

महिला के इस स्पीच के बाद पन्नू नजर आता है। वो कहता है, “यह संदेश इंडियन आर्मी का सामना कर रहे कश्मीरी लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों (इस्लामी आतंकियों) के लिए है। ये संदेश कश्मीर के उन लोगों के लिए है, जिन्हें भारतीय संविधान और इंडियन आर्मी फेक एनकाउंटर के जरिए मार रही है। ये फ्रीडम फाइटर्स का वक्त है। ये वक्त है कश्मीर के लोगों का। आप सब 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचकर मोदी और तिरंगा को ब्लॉक करें। जहाँ सिख समुदाय खालिस्तान के झंडे लहरा रहा है, वहाँ आपको कश्मीर का झंडा उठाना चाहिए।”

अपने प्रोपेगैंडा वीडियो में पन्नू कहता है, “दुनिया में किसी को कोई खबर नहीं है कि आप हर दिन बारामुला, अनंतनाग और शोपियाँ में फर्जी मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं। लेकिन 26 जनवरी को जब आप दिल्ली पहुँचोगे तो दुनिया ये देखेगी कि कश्मीर को आजादी चाहिए। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचना है। सिख आजादी चाहते हैं। अभी नहीं तो कभी नहीं।” उसकी स्पीच के दौरान वीडियो में इस्लामी आतंकियों को भी दिखाया गया है।

SFJ के पन्नू के बयान के बाद बुर्के वाली महिला एक बार फिर से वीडियो में दिखती है। वो कहती है, “मेरे कश्मीरी भाइयों और बहनों। सिख फॉर जस्टिस ने सही कहा है कि 26 जनवरी को कश्मीर और खालिस्तान का झंडा फहराकर हमें मोदी और तिरंगे को रोकना चाहिए। कश्मीर को आजाद कराने के लिए हमने अपना खून दिया है। अब समय आ गया है कि जब हम सिख भाई-बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पंजाब और कश्मीर को आजाद कराने के लिए कश्मीर और खालिस्तान का झंडा उठा लें और तिरंगे को उखाड़ फेंकें। ये संदेश कश्मीर के मेरे भाइयों और बहनों के लिए है। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचें। मुक्त कश्मीर और खालिस्तान। मोदी और तिरंगा को रोको।”

पन्नू ने ये भी कहा कि पहले भारत के संविधान के तहत सिखों की हत्याएँ की जाती थीं, लेकिन उसी संविधान की आड़ लेकर अब कश्मीर के लोगों की हत्या की जा रही है। खास बात ये कि वीडियो में पन्नू के बाईं ओर के फ्रेम में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का पूर्व कमांडर आतंकी बुरहान वानी भी दिखाई देता है। बता दें कि हिजबुल के पोस्टरब्वॉय को 8 जुलाई 2016 को इंडियन आर्मी ने ढेर कर दिया था।

पीएम मोदी और सेना को कोसा

खालिस्तानी आतंकी ने देश में अपराधों के लिए भारतीय सेना, संविधान और पीएम मोदी को कोसा। उसने कहा, “दिन-रात छोटे बच्चों और लड़कियों के साथ रेप किया जा रहा है। इसके लिए इंडियन आर्मी, भारतीय संविधान और मोदी जिम्मेदार हैं। अनुच्छेद 370 हटाकर आपको भारत का हिस्सा बना दिया गया। अभी आपके पास वक्त है, विश्व को संदेश देना चाहते हैं तो बारामूला, अनंतनाग और शोपियाँ में मुठभेड़ों में मत मरो। हथियार उठाकर अपनी जान मत दो। दिल्ली पहुँचो, ताकि दुनिया की हर ताकत, वर्ल्ड मीडिया और वर्ल्ड लीडर ये देखे कि कश्मीर आजादी चाहता है। अभी नहीं तो कभी नहीं। खालिस्तान के झंडे के साथ कश्मीर का झंडा उठाएँ।”

इसके साथ ही एसएफजे ने एक पत्र भी रिलीज किया है, जिसमें उसने आतंकियों और अलगाववादियों से दिल्ली पहुँचने की अपील की है। इसमें बुर्के में नजर आने वाली महिला को पीओके के मुजफ्फराबाद की एक महिला कार्यकर्ता बताया गया है। लेटर में लिखा गया है, “मुजफ्फराबाद स्थित एक महिला कार्यकर्ता के साथ अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने #खालिस्तान2कश्मीर स्वतंत्रता आंदोलन का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए कश्मीर के स्वतंत्रता सेनानियों को भारत के गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को ‘घाटी छोड़ो, दिल्ली पहुँचो’ अभियान के तहत ‘मोदी-तिरंगा को ब्लॉक’ करने का आह्वान किया।”

                                                                      SFJ के द्वारा जारी पत्र

पत्र में एसएफजे के काउंसल जनरल पन्नू ने बुर्के वाली महिला के साथ मिलकर कश्मीर में स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने का आह्वान किया और कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और खालिस्तान जनमत संग्रह में मतदान के साथ #खालिस्तान2कश्मीर आंदोलन ‘अभी या कभी नहीं’ के चरण में प्रवेश कर गया है। इसके लिए उसने 26 जनवरी को इंडिया गेट और लाल किले पर कश्मीर-खालिस्तान के झंडे लगाने का आह्वान किया है।

‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ पाकिस्तान की ISI का खालिस्तान के लिए प्रोपेगैंडा

गौरतलब है कि पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हाल ही में खुफिया विभाग ने चौकन्ना किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पंजाब में अशांति फैलाकर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना चाहती है। इसके लिए उसने अपने आतंकी संगठनों को सक्रिय कर दिया है। दरअसल, आईएसआई सोचती है कि मौजूदा पंजाब का विधानसभा चुनाव खालिस्तान चरमपंथ के उभार के लिए ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ के जैसा है। ISI ने न केवल पंजाब, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी अपने आतंकी मॉड्यूल के जरिए पंजाब में खालिस्तानी फुटप्रिंट्स को आगे बढ़ा रहा है।

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‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा –
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‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा –

यहीं नहीं, 17 जनवरी 2022 को तो खालिस्तानी आतंकी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराने की कोशिश करने वाले वकीलों को भी परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। टेरर ऑर्गनाइजेशन के धमकी दी थी कि वो गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा नहीं फहराने देगा। इससे पहले पंजाब में पीएम मोदी के काफिले को रोकने की जिम्मेदारी भी एसएफजे ने ही ली थी। इसी तरह से पिछले साल 13 जनवरी 2021 को एसएफजे ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 1.8 करोड़ रुपए का ईनाम देने का ऐलान किया था। इसके बाद 26 जनवरी 2021 को कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने सिखों के पवित्र चिन्ह के साथ दो झंडे फहराए।

15-20 साल के भीतर भारत में मुस्लिम इंकलाब: कुरान को लेकर त्यागी बने रिजवी ने किया अलर्ट

वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी 
इस्लाम मजहब त्यागकर सनातन धर्म स्वीकार करने वाले सैयद वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने कहा कि मदरसे बंद करने के उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया तो और 15-20 सालों में देश में मुस्लिम इंकलाब आएगा और उन्हें एक और जमीन का टुकड़ा देना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज मदरसों में ISIS की विचारधारा पढ़ाई जा रही है और बच्चों को जेहाद के लिए ट्रेंड किया जा रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए साक्षात्कार में त्यागी ने कहा, “मदरसों में पहली पढ़ाई कुरान की होती है। मदरसों में कुरान पढ़ाया नहीं, समझाया जाता है। इसका परिणाम ये हो रहा है कि छोटे-छोटे बच्चे जहनी (दिमागी) तौर पर कट्टर होते जा रहे हैं। वक्त पड़ी तो वे बंदूक भी उठाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मदरसों में जो चीजें बच्चों को पढ़ाई जा रही हैं और इस कारण जो खून-खराबा और जिहाद हो रहा है, ये सब कुरान की देन है। कुरान में अल्लाह का स्पष्ट आदेश है कि जो अल्लाह में यकीन नहीं करता, मोहम्मद को रसूल नहीं मानता, अल्लाह की किताब पर भरोसा नहीं करता, उससे जिहाद करो।”

रिजवी ने कहा, “जो आतंकी किताब है उसे फॉलो करके पूरी दुनिया में आतंक मचा हुआ है और इन लोगों का जेहाद इसी पर कायम है। अल्लाह की तरफ से ये हमारी ड्यूटी है कि जो इस पर विश्वास ना करे, उससे मुस्लिम जिहाद करें। कुरान को हम डिफेम नहीं, इसको लेकर लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।”

रिजवी ने बताया कि यही सोचकर वे कुरान की 26 आयतों को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गए थे, लेकिन वहाँ मामला खारिज कर उन पर जुर्माना लगा दिया गया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को मेरे प्वॉइंट पर नोटिस लेना चाहिए था। उनके आदेश से मैं संतुष्ट नहीं था। पचास हजार पेनाल्टी लगाई, मैंने जमा की। लेकिन ये थोड़े ना है कि मेरा दिल मुतमईन (संतुष्ट) हो गया इस ऑर्डर से। मेरे दिल के ऊपर ऑर्डर थोड़े ना कर सकते हो।”

रिज़वी उर्फ़ त्यागी की बातों पर यकीन करने के लिए निम्न लिंक के अलावा अनवर शेख की पुस्तकों को भी पढ़ना होगा। 

रिजवी ने बताया कि उनके सनातन धर्म अपनाने से पहले ये सवाल उठा था कि वे किस जाति में जाएँगे, तब डासना मंदिर के महंथ यति नरसिंहानंद के पिता ने उन्हें एडॉप्ट करते हुए त्यागी समाज में स्वीकार करने की बात कही थी। रिजवी ने कहा, “सनातनी बनने के लिए तो मैं किसी भी जाति में जाने के लिए तैयार था। अगर लोअर कास्ट भी मुझे एडॉप्ट करता तो मैं उसे स्वीकार कर लेता।”

हर मदरसे में आईएसआईएस की ट्रेनिंग हो रही है

उन्होंने आतंकवाद खत्म करने को अपना राजनीतिक एजेंडा बताया। रिजवी ने कहा, “मेरा पोलिटिकल एजेंडा यही है कि मुस्लिमों की ताकत को हिंदुस्तान में कम करना है, क्योंकि हर मस्जिद में, हर मदरसे में आईएसआईएस की ट्रेनिंग हो रही है। एक बहुत बड़ी साजिश हो रही है, जिसे सेक्युलर नहीं समझ पाएँगे।”

46 साल बाद इस्लाम छोड़ने के सवाल पर रिजवी ने कहा कि अगर राम मंदिर का मामला न आता तो शायद ये भी ना होता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी किताब में उन्होंने किसी की तौहीन नहीं की है। रिजवी ने कहा, “मोहम्मद को प्रोफेट कहकर हमारी सोच की तौहीन की जा रही है।”

साक्षात्कार में रिजवी ने कहा कि अगर राममंदिर का मुद्दा सामने नहीं आता तो वे शायद सनातनी भी नहीं बनते। उन्होंने कहा कि विवाद के बीच उन्होंने कुरान का अध्ययन किया और उसे समझने के बाद इस्लाम त्याग करने का विचार किया।

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Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
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Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts

उन्होंने बताया कि मुस्लिम भी इस बात को मानते थे कि अयोध्या में अगर उनके पक्ष में फैसला आ जाता है, फिर में वहाँ स्थापित रामलला की प्रतिमा को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इससे खून-खराबा हो जाता। रिजवी ने बताया कि बाबरी ढाँचा के मुद्दे को मुस्लिम इसलिए भी नहीं छोड़ना चाहते थे, क्योंकि इससे हिंदू उन मस्जिदों पर भी दावा करने लगते, जो हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाए गए हैं।

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