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मध्य प्रदेश : कोई टीचर-कोई इंजीनियर, जंगल में ट्रेनिंग-ड्रोन से रेकी… पकड़े गए 11 जिहादीः 50 देशों में फैला है हिज्ब-उत-तहरीर, 16 देशों में लग चुका है बैन

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                                                             मध्य प्रदेश एटीएस (साभार: आजतक
आज देश बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। तिल का ताड़ बनाकर होकर प्रदर्शन और इन प्रदर्शनों/धरनों को समर्थन दे रहे राजनीतिक दलों से भी देश को सतर्क रहने की जरुरत है। देश भर में बढ़ता इस्लामी कट्टरवाद सरकार के लिए चुनौती साबित हो रही है। इससे मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं है। कभी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकी तो पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कट्टरपंथी तो कभी आतंकियों के स्लीपर सेल पर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई होती रहती है। अब मध्य प्रदेश पुलिस की आतंकी निरोधी दस्ता (ATS) ने हिज्ब उत् तहरीर (HuT) नाम के इस्लामी कट्टरपंथी संगठन के खिलाफ बड़़ी कार्रवाई की है।

हिज्ब उत् तहरीर नाम का संगठन तहरीक-ए-खिलाफत के नाम से भी जाना जाता है। ATS ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार (10 मई 2023) को भोपाल के शाहजहाँनाबाद, ऐशबाग, लालघाटी और पिपलानी में रेड मारकर इसके 10 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं छिंदवाड़ा से 1 और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए कट्टरपंथियों के पास से तकनीकी उपकरण, देश विरोधी दस्तावेज, कट्टरपंथी साहित्य एवं अन्य सामग्री बरामद की गई हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने आरोपितों पर UAPA सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। ATS उनसे आगे की पूछताछ कर रही है।

कट्टरपंथियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से टीचर तक शामिल

HuT के कट्टरपंथी अपने कामों को अंजाम देने के लिए आधुनिक उपकरणों को उपयोग करते थे। वे रेकी करने के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार किए आरोपितों में कंप्यूटर इंजीनियर, टेक्नीशियन, टीचर, व्यवासायी, जिम ट्रेनर, कोचिंग सेंटर संचालक, ऑटो ड्राइवर, दर्जी आदि शामिल हैं। ये सभी आम लोगों के बीच रहते हुए और अपना काम करते हुए कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
भोपाल के शाहजहाँनाबाद से गिरफ्तार किया गया 29 साल का यासिर खान जिम ट्रेनर है। शहीद नगर से गिरफ्तार 32 साल का सैयद सामी रिजवी कोचिंग में टीचर है। जवाहर कॉलोनी ऐशबाग से गिरफ्तार शाहरूख दर्जी है, जबकि उसी इलाके से गिरफ्तार 29 साल का मिस्बाहुल हक मजदूरी करता है। ऐशबाग का ही शाहिद ऑटो चलाता है।
भोपाल के ही ऐशबाग का रहने वाला सैयद दानिश अली सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि ऐशबाग का ही 25 वर्षीय मेहराज अली कंप्यूटर टेक्नीशियन है। भोपाल के लालघाटी का रहने वाला 40 साल का खालिद हुसैन टीचर और व्यवसायी है। इसके अलावा, भोपाल से ही ATS ने वसीम खान और 35 साल के मोहम्मद आलम को गिरफ्तार किया है। वहीं, छिंदवाड़ा से गिरफ्तार करीम प्राइवेट नौकरी करता था।

ऐसे करते थे काम

ATS की प्रेस नोट के मुताबिक, ये सभी आरोपित गोपनीय रूप से जंगलों में जाकर क्लोज कॉम्बैट ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर निशानेबाजी का अभ्यास करते थे। इसमें हैदराबाद से आए हुए कट्टरपंथी इन लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते थे। ये ट्रेनर अपने काम में माहिर हैं। ट्रेनिंग के अलावा, आरोपितों द्वारा गोपनीय रूप से दर्श (दीनी सभा) का आयोजन करके भड़काऊ तकरीरें दी जाती थीं। इस दौरान लोगों के बीच कट्टरपंथी और जेहादी साहित्य भी बाँटे जाते थे।
ATS का कहना है कि आरोपित ऐसे युवकों की पहचान करके अपने साथ शामिल करते थे, जो उग्र स्वभाव के हों और अपनी जान देने से भी ना हिचकें। सभी आरोपित आपस में बातचीत करने के लिए डार्क वेब के विभिन्न चैनलों का इस्तेमाल करते थे। इनमें ‘रॉकेट चैट’, ‘थ्रीमा’ जैसे ऐप शामिल हैं। इस तरह के कम्युनिकेशन का उपयोग अधिकतर ISIS जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जाता है।  
ये अधिक से अधिक युवकों को जोड़कर हिंदुओं के खिलाफ जिहाद की योजना बना रहे थे। ये बड़े शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धमाके करके लोगों में अपना भय कायम करना चाहते थे। इसके लिए वे कई शहरों को चिह्नित भी कर चुके थे। इसके लिए उन्होंने ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किया था। रेकी के बाद इलाके का नक्शा बनाकर घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। संगठन में जो भी सदस्य शामिल किए जाते थे, उनसे चंदा जुटाने के साथ-साथ अन्य संसाधन बटोरने के लिए कहा जाता था।

क्या है कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत् तहरीर

हिज्ब उत् तहरीर उर्फ तहरीक-ए-खिलाफत इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है, जो गैर-इस्लामी इलाकों में शरिया शासन कायम करने की सोच रखता है। इस संगठन के तार 50 से भी अधिक देशों में फैला हुआ है। इस संगठन की हिंसक गतिविधियों एवं सोच को देखते हुए 16 देश प्रतिबंध लगा चुके हैं।
भारत में शरिया शासन स्थापित करने के लिए इस कट्टरपंथी संगठन ने मध्य प्रदेश में अपना आधार तैयार किया था। इसके जरिए वे अपने कैडरों की भर्ती कर रहे थे। संगठन से जुड़े सदस्यों का उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को भारत की वर्तमान शासन प्रणाली को इस्लाम विरोधी बताकर संगठन से जोड़ते थे। इसके बाद वे खिलाफ की बात करते थे।
बताते चलें कि इससे पहले PFI के भी 22 सक्रिय सदस्यों को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, मार्च 2022 में जमात-ए-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के मॉड्यूल का भी मध्य प्रदेश की पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। इस दौरान 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था।

परमादरणीय श्री जाकिर नाइक साहब! जन्नत में मर्दों को तो हूरें मिल जाती हैं, औरतों को क्या मिलता है?


                                    जन्नत में मर्दों को तो हूरें मिल जाती हैं, औरतों को क्या मिलता है?
परमादरणीय जनाब-ए-आला स्कॉलर श्री जाकिर नाइक साहब,

इस्लाम और दुनिया के तमाम धर्मों के बारे में आपके ज्ञान को देखकर चकित हूँ, लेकिन एक हजार मुद्दों पर जानकारी लेने में मेरी दिलचस्पी कम है। मैं तो बस जन्नत की हूरों के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहती हूँ। आशा है कि जैसे आप भारत से भाग गए हैं, वैसे मेरे इन चंद सवालों से नही भागेंगे।

  1. मैंने सुना है कि मजहबी पुरुष जब जन्नत पहुँचते हैं, तो उन्हें 72 हूरें मिलती हैं, लेकिन जब मजहबी महिलाएँ जन्नत पहुँचती हैं, तो उन्हें कौन मिलता है और जो भी मिलते हैं, उनकी संख्या कितनी होती है?
  2. कहीं ऐसा तो नहीं कि जैसे धरती पर महिलाओं से भेदभाव किया जाता है, वैसे ही जन्नत में भी उनकी अनदेखी की जाती है? वहाँ पुरुष तो हूरों के साथ मगन रहते होंगे, पर महिलाएँ अपना वक्त कैसे काटती हैं?
  3. जन्नत पहुँचे सच्चे मुसलमानों से मिलने के लिए हूरें बुरके में आती हैं या बिकनी में? दुपट्टे सलवार में आती हैं या हॉट पैंट में? 
  4. कृपया हूरों के नैन-नक्श, पहनावे-ओढाबे, खान-पान, रहन-सहन इत्यादि के बारे में विस्तार से बताएँ।
  5. हूरें कौन-सी भाषा बोलती हैं? क्या उन्हें धरती पर बोली जाने वाली भाषाओं की शिक्षा देने के लिए जन्नत में कोई यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है? जब धरती से अलग-अलग भाषाएँ और बोलियाँ बोलने वाले लोग जन्नत पहुँचते होंगे, तो क्या उन्हें उन्हीं की भाषा और बोलियों में बात करने वाली हूरें सप्लाई की जाती हैं?
  6. या फिर वे सभी हूरें कोई एक ही भाषा बोलती हैं और धरती से पहुँचने वाले लोगों के लिए ही वहाँ एक मदरसा स्थापित कर दिया गया है, जहाँ हूरों से मिलाने से पहले उन्हें उस भाषा की मुकम्मल तालीम दी जाती है?
  7. यहाँ से जन्नत जाने वाले लोगों को फौरन हूरें मुहैया करा दी जाती हैं या फिर वहाँ भी उन्हें पहले आयतों रवायतों इत्यादि की किसी जाँच से गुजरना पड़ता है?
  8. हूरों के मामले में जन्नत के रूल्स और रेगुलेशन्स क्या हैं? क्या वे सिर्फ इस्लाम मानने वालों को ही सप्लाई की जाती हैं या फिर अन्य धर्मों के अनुयायियों को भी मुहैया कराई जाती हैं?
  9. कहीं ऐसा तो नहीं कि जैसे धरती पर सभी धर्मों के लोगों के रहने की व्यवस्था है, जन्नत में वैसी व्यवस्था नहीं है और वहाँ सिर्फ इस्लाम मानने वालों की ही एंट्री हो पाती है? इसलिए हूरों का लाभ भी एक्सक्लूसिवली इस्लाम के अनुयायियों को ही मिल पाता है?
  10. अगर हाँ, तो क्या हूरों वाले जन्नत की स्थापना कितने साल पहले हुई मानी जा सकती है? और क्या यह माना जा सकता है कि सभी धर्मों के देवी-देवताओं ने अलग-अलग जन्नतें बसा रखी हैं, जहाँ उनके अनुयायियों को अलग-अलग तरह की सुविधाएँ मुहैया कराई जाती हैं? या फिर सिर्फ़ इस्लाम वाला जन्नत ही सच्चा है और बाकी धर्मों में जन्नत के झूठे दावे किए गए हैं?
  11. धरती के मजहबी पुरुषों के लिए हूरों वाला यह जन्नत कहाँ स्थापित है? कृपया इसकी सही-सही लोकेशन बताएँ और यह भी बताएँ कि वहाँ से आप लोगों का कनेक्शन किस प्रकार जुड़ा है? इधर हाल-फिलहाल आपने वहाँ से कोई संवाद कायम किया है या फिर बिना संवाद और कनेक्शन के ही डींगें हाँकते रहते हैं?
  12. क्या धरती पर बढ़ती आबादी के हिसाब से जन्नत में हूरों की सप्लाई भी बढ़ती जाती है? पुरानी हूरों और नई हूरों को मिलाकर उनकी आबादी का एक मुकम्मल आँकड़ा पेश करें। यह भी बताएँ कि इन हूरों का लाभ अभी कुल कितने मजहबी पुरुषों को मिल रहा है? और आने वाले दस-बीस-तीस सालों में वहाँ और कितने सच्चे मुसलमानों की जगहें खाली है?
  13. हूरों की इतनी बड़ी आबादी के साथ पुरुषों को रखने के लिए जन्नत में क्या इंतजाम किए गए हैं? कोठियाँ बनी हैं, मल्टीस्टोरीज़ बिल्डिंगें बनी हैं या रेड लाइट एरिया जैसे इंतज़ाम किए गए हैं, जहाँ हूरों को छोटे-छोटे कमरों में रखा जाता है और धरती के सारे प्यासे मजहबी पुरुष बारी-बारी से वहाँ पहुँचते रहते हैं?
  14. अक्सर युद्ध और दंगे इत्यादि में जब एक साथ हजारों या लाखों लोग शहीद हो जाते हैं, तब जन्नत के दरवाज़े पर भगदड़ तो नहीं मच जाती होगी न? इतने लोगों की एक साथ जन्नत में एंट्री और सबको समय से हूरों की सप्लाई के क्या इंतजामात हैं?
  15. क्या कभी ऐसा भी होता होगा कि हूरों की सप्लाई कम होने की दशा में कुछ पुरुषों को 72 से कम हूरों के साथ ही संतोष करना पड़ता हो? ऐसी दशा में अपने हक से महरूम सच्चे मुसलमान क्या वहाँ फिर से कोई जेहाद छेड़ते होंगे?
  16. जन्नत में पुरुषों की सप्लाई तो धरती से होती है, पर हूरों की सप्लाई किस ग्रह, किस लोक, किस दुनिया से होती है?
  17. धरती पर तो कभी किसी चीज की कमी हो जाती है तो कभी किसी चीज की अधिकता हो जाती है। पर जन्नत में वे कौन-से मैन्यूफैक्चरर और सप्लायर हैं, जो हर पुरुष के लिए 72 हूरों की सप्लाई मेनटेन रख पाते हैं? कृपया जन्नत में हूरों के मैन्यूफैक्चरर और सप्लायर के बारे में विस्तार से बताएँ।
  18. मेरा ख्याल है कि जन्नत पहुँचे लोगों को 72 हूरें तो निःशुल्क ही मुहैया करा दी जाती होंगी, लेकिन अगर इन 72 के अलावा किसी 73वीं-74वीं पर उनका दिल ललचा जाए, तो वो क्या करें? क्या कुछ अतिरिक्त शुल्क इत्यादि के भुगतान से वे हूरें उन्हें दे दी जाएँगी या नहीं दी जाएँगी?
  19. अपनी-अपनी पसंद की हूरें हासिल करने के लिए जन्नत में भी जंग तो नहीं छिड़ जाती होंगी न?
  20. क्या जन्नत में हर व्यक्ति को समान संख्या में हूरें मुहैया कराई जाती हैं? पूछने का मतलब यह है जब आप जैसे बड़े ‘स्कॉलर’ वहाँ पहुँचेंगे, तो आपको भी 72 हूरें, और आपके मामूली फॉलोअर्स को भी 72 ही हूरें? यह कुछ नाइंसाफी नहीं हो जाएगी? इसी तरह, ओसामा बिन लादेन जैसे बड़े जेहादी को भी 72 हूरें और उसकी आर्मी में काम करने वाले एक छोटे जेहादी को भी 72 ही हूरें?
  21. क्या जन्नत पहुँचकर धरती के मजहबी पुरुष हूरों से संतान भी उत्पन्न करते हैं या फिर खाली टाइम पास की ही इजाजत है?
  22. जन्नत पहुँचने वाले मजहबी पुरुषों के लिए कोई कोड ऑफ कंडक्ट भी है क्या? जैसे एक बार आपने बताया था कि मजहबी पुरुष अगर अपनी बीवियों को पीटें, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। उसी तरह जन्नत पहुँचकर वे अगर हूरों की भी पिटाई कर दें, तो कोई दिक्कत तो नहीं न?
  23. धरती की बीवियों एवं जन्नत की हूरों में क्या अंतर है? जैसे बीवी से तीन बार तलाक तलाक बोलकर छुटकारा पा सकते हैं, वैसे ही अगर कोई हूर पसंद नहीं आए, या उससे मन भर जाए, तो क्या उससे भी कोई शब्द बोलकर अलग हुआ जा सकता है? अगर हाँ, तो उस शब्द के बारे में कृपया विस्तार से बताएँ।
  24. धरती के पुरुषों को तो जेहाद और काफिरों के कत्ल इत्यादि विभिन्न मजहबी कार्यों से कमाए ‘पुण्य’ के तौर पर 72 हूरें मिलती हैं, लेकिन उन 72 हूरों को किन पापों की सजा के तौर पर एक ही पुरुष को शेयर करने का अभिशाप मिलता है? क्या अपने पिछले जन्म में उन्होंने आयतों और रवायतों का सही ढंग से पालन नहीं किया होता है?
  25. क्या जन्नत पहुँचकर धरती के मजहबी पुरुष हूरों के साथ फुल टाइम मौज-मस्तियाँ ही किया करते हैं या फिर वहाँ भी किसी तरह के मजहबी और जेहादी कार्यों में हिस्सा लेते हैं?
  26. क्या मजहबी पुरुषों की तमाम गतिविधियों का अंतिम उद्देश्य अधिक से अधिक संख्या में हूरों अर्थात् खूबसूरत स्त्रियों को भोगना ही होता है?
  27. अंतिम सवाल। क्या संक्षेप में हूरों को मजहबी पुरुषों की ‘अनंतकालीन सेक्स स्लेव’ कहा जा सकता है?

स्कॉलर श्री परम आदरणीय जाकिर साहब, जैसा कि आप भी मानेंगे कि आज दुनिया के नौजवानों के मन में सबसे ज़्यादा सवाल, जिज्ञासाएँ और ख्वाहिशें हूरों को लेकर ही हैं, इसलिए आशा है कि आप मेरे इन सवालों के यथोचित जवाब देंगे। 

सादर शुक्रिया।

डिस्क्लेमर- यह पत्र किसी धर्म का मखौल उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि मजहब के नाम पर मासूम लोगों को गुमराह कर रहे कट्टरपंथियों की पोल खोलने के लिए लिखा गया है।(साभार)